NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या मामला : अदालत से बाहर भी बहुत कुछ घट गया इन 40 दिनों की सुनवाई के भीतर  
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बाहर मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता को धमकी देने से लेकर बाबरी मस्जिद के पक्षकार पर हमले और यूपी में शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच की सिफारिश तक हो गई।
असद रिज़वी
19 Oct 2019
ayodhya case

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई ख़त्म हो चुकी है और 17 नवंबर 2019 से पहले फ़ैसला आने की उम्मीद है। जिस समय अदालत में क़ानूनी दलीलें दी जा रहीं थी, उसी समय अदालत के बाहर भी ऐसा बहुत कुछ घट रहा था, जिसे सामान्य या सही नहीं कहा जा सकता।

बताया जा रहा है कि इस दौरान मुस्लिम पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता को धमकी देने से लेकर बाबरी मस्जिद के पक्षकार पर हमले तक की घटनाए प्रकाश में आईं। सुनवाई ख़त्म होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार की सीबीआई से जाँच की सिफ़ारिश को भी बोर्ड दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इक़बाल अंसारी पर हमला

बाबरी मस्जिद के पक्षकार और दिवंगत हाशिम अंसारी के बेटे इक़बाल अंसारी पर तीन सितम्बर, 2019 को ख़ुद को अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज़ बताने वाली वर्तिका सिंह और एक अन्य व्यक्ति प्रभु दयाल सिंह ने हमला कर दिया था। प्रेस से बात करते हुए इक़बाल अंसारी ने बताया था कि उन पर उनके घर में ही हमला किया गया।

इक़बाल अंसारी के अनुसार हमलावरों ने पहले उनसे कहा कि वह अयोध्या विवाद में अपनी अपील वापस ले लें, वरना वह उनको गोली मार देंगे। बाद में उन पर हमला कर भी दिया, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मियों ने बचा लिया। सूत्र बताते हैं कि यह हमला ऐसे समय में हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष को सुन रहा था।

इक़बाल अंसारी ने निशानेबाज़ वर्तिका सिंह पर हाथापाई का आरोप लगा कर उनके खिलाफ पुलिस में मुक़दमा दर्ज करवाया था। इस मामले में पुलिस ने वर्तिका सिंह को हिरासत लेकर, क़रीब 4 घंटे बाद उन्हें लखनऊ भेज दिया था।

इसके बाद वर्तिका सिंह ने एक याचिका दी और अदालत के आदेश पर अयोध्या के थाना रामजन्म भूमि में, बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ 19 सितंबर, 2019 को धारा 147, 504, 505 (2) और 506 के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया गया।

अयोध्या विवाद पर नज़र रखने वाले मानते हैं कि यह मुस्लिम पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश थी। वरिष्ठ पत्रकार हुसैन अफ़सर जो कई दशक से अयोध्या विवाद पर नज़र रख रहे हैं, कहते हैं कि इक़बाल अंसारी को कम से कम “वाय” श्रेणी की सुरक्षा मिलना चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इक़बाल अंसारी पर हमला और फिर उन पर ही मुक़दमा, इससे स्पष्ट लगता है बाबरी पक्षकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई थी।

वकील को धमकी

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन जो सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के वकील हैं, उनको भी जान से मारने की धमकी मिली थी। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने धमकी मिलने की सूचना सुप्रीम कोर्ट को भी दी थी। राजीव धवन ने अदालत को बताया था कि उन्हें मुस्लिम पक्ष की पैरवी नहीं करने के लिए कहा गया है। और ऐसा न करने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी।

राजीव धवन ने पूर्व सरकारी अधिकारी एन षणमुगम और राजस्थान के निवासी संजय कलाल बजरंगी के खिलाफ शीर्ष अदालत में अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने धमकी देने वाले दो व्यक्तियों को नोटिस जारी किया था।  

अधिवक्ता राजीव धवन ने बताया था कि सोशल मीडिया पर उनको धमकियां दी जा रही हैं। लेकिन उन्होंने सुरक्षा  की जरूरत से इंकार कर दिया था।

क़ानून के जानकर मानते हैं की किसी अधिवक्ता को धमकी देना न्यायपालिका पर हमले करने जैसा है। प्रसिद्ध अधिवक्ता मोहम्मद हैदर कहते हैं कि न्यायपालिका का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ एवं देश की न्यायिक व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने के सबसे महत्वपूर्ण कारक अधिवक्ता को “ऑफ़िसर ऑफ़ कोर्ट” कह कर भी संबोधित किया जाता है।

मोहम्मद हैदर कहते हैं कि अधिवक्ता किसी भी पक्षकार के अधिकारों के प्रहरी होते हैं एवं उनके अधिकारों को न्यायिक प्रक्रिया का पालन करके न्यायिक सिद्धांतों के आधार ओर उनको प्राप्त कराने हेतु प्रयासरत रहते हैं। ऐसे में किसी अधिवक्ता पर निजी टिप्पणी, अभद्रता अथवा हमला स्पष्ट रूप से न्यायपालिका पर हमले के समान होता है।

अधिवक्ता मोहम्मद हैदर मानते हैं कि ऐसे प्रकरणों में न्यायपालिका को आवश्यक रूप से हस्तक्षेप करना चाहिए, जिससे न्यायपालिका की गरिमा पर कोई आंच न आये।

अयोध्या विवाद की सुनवाई के अंतिम दिन 16 अक्टूबर,  2019 को मीडिया के एक हिस्से में अचानक यह ख़बर आने लगी की सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने विवादित जमीन पर दावा छोड़ने का प्रस्ताव रखा है।

मीडिया में यह ख़बर आई कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने प्रस्ताव रखा है कि अगर अयोध्या की बाकी मस्जिदों का सरकार द्वारा पुनरुद्धार किया जाये और मस्जिद बनाने के लिए कहीं और जमीन मुहैया कराई जाए तो बोर्ड विवादित ज़मीन से दावा छोड़ सकता है।

जिसके बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील शाहिद रिज़वी ने भी मीडिया से कहा कि मध्यस्थता समिति से पहले अदालत के बाहर, सभी पक्षकारों ने अपने मामले को रखा है और कुछ बात भी बनी जिसको लेकर मैं अभी खुलासा नहीं कर सकता हूं।

जबकि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र फारुकी ने अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना दावा वापस लेने की मीडिया की ख़बरों को निराधार बताया। ज़ुफ़र फारुकी के अनुसार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में किसी भी तरह का हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष ने माना की उन्होंने मध्यस्थता समिति में समझौते का प्रस्ताव जरूर दिया है। जिसका खुलासा मीडिया के सामने करने से ज़ुफ़र फारुकी ने इंकार कर दिया। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मुस्लिम पक्ष के वकील जफ़रयाब जिलानी ने भी साफ कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने दावा वापस नहीं लिया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में बनाई गई मध्यस्थता समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एफएम कलीफुल्ला, श्री श्रीरविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं।

लेकिन ख़बर यह भी है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र फारुकी इनदिनों भारी दबाव में चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में कथित तौर पर फैले भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच करवाने की सिफ़ारिश की है।
IMG-20191019-WA0001_0.jpg
बताया जा रहा है कि यूपी शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड द्वारा कथित तौर पर ग़ैरक़ानूनी तरीके से तमाम वक़्फ़ की जमीनों की खरीद और अवैध क़ब्ज़े कराने की शिकायतें राज्य सरकार को लगातार मिल रही थी। इसके अलावा इस संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा कोतवाली प्रयागराज और राजधानी लखनऊ के हज़रतगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज है।  

हालांकि मुस्लिम समुदाय ही काफ़ी समय से सरकार से दोनो वक़्फ़ बोर्डों की सीबीआई जाँच की माँग कर रहा था। दोनो बोर्ड की जाँच सीबीआई से कराने की बात जून, 2017 से चर्चा में थी। शिया और सुन्नी दोनों बोर्ड को लेकर केंद्रीय वक़्फ़ काउंसिल ने भी अलग-अलग रिपोर्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश सरकार को काफ़ी समय पहले सौंप दी थी। लेकिन सीबीआई जांच की  सिफारिश अयोध्या मामले में अंतिम सुनवाई से महज़ चार दिन पहले 12 अक्टूबर, 2019 को की गई।
 
राजनीति के जानकर भी मानते हैं कि इस समय वक़्फ़ बोर्ड की जांच सीबीआई से करवाने के पीछे दबाव बनाने की मंशा हो सकती है।

हिंदुस्तान अख़बार के पूर्व सम्पादक नवीन जोशी कहते है कि यह प्रश्न ज़रूर उठता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक वक़्फ़ बोर्डों के भ्रष्टाचार का मामला क्यूँ टाल रखा था? नवीन जोशी मानते है कि सीबीआई जांच की सिफ़ारिश के समय से यह संदेह जन्म लेता है कि कहीं इसके पीछे, कोई दबाव बनाने की मंशा तो नहीं है?

Ayodhya Case
Babri Masjid-Ram Mandir
hindu-muslim
Supreme Court
hindutva terorr

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Inflation
    सौम्या शिवकुमार
    महंगाई "वास्तविक" है और इसका समाधान भी वास्तविक होना चाहिए
    01 Mar 2022
    केंद्रीय बैंकों द्वारा महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दर को प्रबंधित किया जाता है, लेकिन यह तरीक़ा अप्रभावी साबित हुआ है। इतना ही नहीं, इस उपकरण का जब इस्तेमाल किया जाता है, तब यह भी ध्यान नहीं रखा…
  • russia ukrain
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस घटनाक्रम: रूस को अलग-थलग करने की रणनीति, युद्ध अपराधों पर जांच करेगा आईसीसी
    01 Mar 2022
    अमेरिका ने जासूसी के आरोप में 12 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की है। रूस की कई समाचार वेबसाइट हैक हो गईं हैं जिनमें से कुछ पर रूस ने खुद रोक लगाई है। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र के दुलर्भ…
  •  Atal Progress Way
    बादल सरोज
    अटल प्रोग्रेस वे से कई किसान होंगे विस्थापित, चम्बल घाटी का भी बदल जाएगा भूगोल : किसान सभा
    01 Mar 2022
    "सरकार अपनी इस योजना और उसके असर को छुपाने की कोशिश में है। ना तो प्रभावित होने वाले किसानों को, ना ही उजड़ने और विस्थापित होने वाले परिवारों को विधिवत व्यक्तिगत नोटिस दिए गए हैं। पुनर्वास की कोई…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर एक लाख से कम हुई 
    01 Mar 2022
    पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना के क़रीब 7 हज़ार नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 92 हज़ार 472 हो गयी है।
  • Imperialism
    प्रभात पटनायक
    साम्राज्यवाद अब भी ज़िंदा है
    01 Mar 2022
    साम्राज्यवादी संबंध व्यवस्था का सार विश्व संसाधनों पर महानगरीय या विकसित ताकतों द्वारा नियंत्रण में निहित है और इसमें भूमि उपयोग पर नियंत्रण भी शामिल है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License