NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न जश्न, न ग़म, शांत रही अयोध्या
अयोध्या में रामकोट या रामजन्मभूमि की ओर जाने वाले रास्ते पर रहने और व्यापार करने वालों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुयी है कि उन्हें बंदिशों से मुक्ति मिल जायेगी और अयोध्या में उनका व्यापार बढ़ेगा।
सुमन गुप्ता
10 Nov 2019
ayodhya

अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अयोध्या में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था के चलते जश्न मनाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण लोग फैसले के बाद भी घरों के अंदर ही रहे। अयोध्या विवाद पर शनिवार को आये फैसले ने विवादित स्थल पर राममंदिर के निर्माण का रास्ता खोल दिया है, हालांकि इसके बाद सुरक्षा प्रबन्धों और प्रतिबंधों के चलते अयोध्या में कोई जश्न और उत्सव जैसा माहौल नहीं दिखा।

सड़कें खाली रहीं, कोई जुलूस, नारेबाजी और आतिशबाजी भी जमकर नहीं हुयी, न ही सड़कों पर हुड़दंग दिखा। इक्का-दुक्का लोगों ने जैसे ही पटाखे फोड़े पुलिस ने तुरन्त वहां पहुंचकर उन्हें मना किया। जिसके कारण बातें आगे नहीं बढ़ सकी। जिलाधिकारी ने फैसले के पहले ही मीडिया के साथ मीटिंग करके लोगों को आगाह कर दिया था कि ‘न तो जश्न मनायें और न ग़म का इजहार करें।’ छह दिसम्बर की फोटो भी न दिखायें जिससे लोगों को दुःख पहुंचे।’

जिलाधिकारी अनुज कुमार झा और एसएसपी आशीष तिवारी ने दोपहर बाद इलाके का हवाई सर्वे भी किया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या-फैजाबाद में लोगों ने राहत की सांस ली लोगों को अंदेशा था कि न जाने क्या हो? अयोध्या में जो दुकानें सुबह से बंद थीं फैसले के बाद कुछ दुकाने धीरे-धीरे खुलीं। राजसदन के पास की सारी दूकाने बंद रहीं। जो दुकानें खुली थीं उनके सामानों के खरीददार भी सड़कों पर नहीं दिखे। तुलसी उद्यान के पास परिक्रमा और कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए लगी दुकानें वैसे ही लगी रहीं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपने घरों को वापस जाने के लिए कह दिया गया था इसलिए उनकी खरीददारी करने वाला भी नहीं था।

IMG-20191110-WA0013.jpg

अयोध्या के अस्थाई रामलला मंदिर में दर्शन के लिए या रामकोट क्षेत्र में उन्हीं लोगों को जाने दिया जा रहा था जिनके पास आधार कार्ड था। आधार कार्ड के आधार पर ही दर्शन के लिए भी लोग जा पा रहे थे। बाहरी श्रद्धालु अयोध्या से बाहर कर दिये गये थे। शुक्रवार रात से ही यह सूचना प्रसारित की जा रही थी कि बाहर के लोग अपने घरों को चले जायें।

फैसले के बाद की स्थितियों पर नियंत्रण के लिए अयोध्या में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी है। पुलिस पीएसी और अर्द्धसैनिक सुरक्षाबलों, आरएएफ की तैनाती की गयी है। अयोध्या के अन्दर दो पहिया वाहन मोटरसाइकिल को भी अन्दर नहीं जाने दिया जा रहा है। विवादित और अधिग्रहीत स्थल वाले रामकोट में सुरक्षा का सख्त पहरा है। स्थानीय लोग ही इक्का-दुक्का दर्शन के लिए गये उन्हें आधार कार्ड दिखाकर जाने दिया गया।

फैजाबाद शहर में सिविल पुलिस के साथ ही आरएएफ के जवानों ने चौक, कोठापार्चा, टकसाल, कसाबबाड़ा, ठठरैया व अन्य सघन बस्ती वाले इलाकों में रूटमार्च किया। फैजाबाद में कुछ हिन्दुओं की दूकाने बंद रही वहीं कुछ मुसलमानों की दुकानें खुली रहीं।

अयोध्या में राममंदिर के फैसले की खुशी लोगों के चेहरे पर है। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी के घर के दरवाजे पर प्रतिक्रिया जानने के लिए मीडिया के जत्थे बेताब रहे। इकबाल अंसारी का कहना है कि हमें खुशी है कि इतने दिनों बाद इस मामले का आखिर समाधान हो ही गया। हमारे अब्बू ने टाइटिल सूट फाइल किया था। अब हम आगे कोई भी कदम नहीं उठाएंगे सरकार जो चाहे करे। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय हम पूरी तरह स्वीकार करते हैं।

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किए जाने पर उन्होंने कहा कि हमें इस बात की खुशी है की विराजमान राम का स्थल पर रामलला विराजमान रहेंगे और शीघ्र ही उस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हो जाएगा।

तिवारी मंदिर के महन्त और भाजपा के नेता गिरीशपति त्रिपाठी का कहना है कि ‘यह सबसे अच्छा फैसला है, देश-दुनिया में सौहार्द बना रहे। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों का ध्यान रखा है।

भाजपा से जुड़े रामवल्लभा कुंज के अधिकारी महंत राजकुमार दास ने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया और साथ ही मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ भूमि भी देने की बात भी कही है।

हनुमानगढ़ी पर प्रसाद बेचने वाले रामप्रसाद ने कहा कि फैसले के बाद अब राममंदिर बन जायेगा। हम खुश हैं, हल्ला मचाकर खुशी का इजहार किया जाये यह जरूरी नहीं। कारसेवकपुरम में विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा का कहना है कि यह अवसर है उन लोगों को याद करने का जो मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। हमारा मंदिर पर जो दृष्टिकोण था अदालत ने उस पर मुहर लगा दी है।

अयोध्या में होटल चलाने वाले बबलू को फैसले से राहत मिली है कि अब अयोध्या में बंदिशे खत्म हो जायेगी। लोग बेधड़क आ जा सकेंगे। जगह-जगह पास और पुलिस चेकिंग से नहीं गुजरना पड़ेगा। अभी तक कोई विदेशी यात्री आ जाता है तो पुलिस में जाकर हमें सूचना देनी पड़ती है। अब कोई भी आसानी से अयोध्या आ सकेगा और रह सकेगा।

अयोध्या में रामकोट या रामजन्मभूमि की ओर जाने वाले रास्ते पर रहने और व्यापार करने वालों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुयी है कि उन्हें बंदिशों से मुक्ति मिल जायेगी और अयोध्या में उनका व्यापार बढ़ेगा।

विवादित परिसर से सटे रंगमहल मंदिर के महन्त रामशरण दास का कहना है कि हम ही नहीं हमारे रामलला भी सुरक्षा की गिरफ्त में रह रहे हैं। हमारा मंदिर सटा हुआ है इसलिए आये दिन हमें अपने ही मंदिर में आने-जाने में परेशानी होती है। किसी संत की तबीयत खराब हो जाये या मंदिर के लिए अनाज, भूसा लाना हो तो इतनी परेशानी होती थी कि हमारे हाथ-पांव ही फूल जाते थे। भाजपा से जुड़े कन्हैयादास ने कहा कि विवाद से अयोध्या का विकास रूका हुआ था अब फैसला आ गया है तो अयोध्या का विकास हो सकेगा और लोगों का व्यापार भी बढ़ेगा।

हनुमानगढ़ी पर माला मोती और विसातबाना की दुकानदारी करने वाले दिनेश पटवा को फैसले से सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि अब उन्हें कदम-कदम पर जांच पड़ताल से नहीं गुजरना पड़ेगा। अब हम अपने दूकान का सामान भी आसानी से ला सकेंगे और आराम से दुकानदारी भी कर सकेंगे।

(सुमन गुप्ता वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Ayodhya Case
Ayodhya Dispute
Supreme Court
Ayodhya people's
Media on Ayodhya
Security in Ayodhya
Ram Janamabhoomi – Babri Masjid

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया
    29 Apr 2022
    प्रशासन का कहना है कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जामिया में इबादत गुजारों के लिए व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद सामूहिक इबादत को रोकने का ये निर्णय लिया गया है।
  • लाल बहादुर सिंह
    किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम
    29 Apr 2022
    गहराता रोज़गार संकट और कठिन होती जीवन-स्थितियां भारत में फ़ासीवाद के राज्यारोहण का सबसे पक्का नुस्खा है। लेकिन तमाम फ़ासीवाद-विरोधी ताकतें एकताबद्ध प्रतिरोध में उतर पड़ें तो यही संकट समाज को रैडिकल…
  • ज़ाहिद खान
    इरफ़ान ख़ान : अदाकारी की इब्तिदा और इंतिहा
    29 Apr 2022
    29 अप्रैल 2020 को हमसे जिस्मानी तौर पर जुदा हुए इरफ़ान ख़ान अपनी लासानी अदाकारी से अपने चाहने वालों के दिलो ज़ेहन में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।
  • एजाज़ अशरफ़
    क्यों धार्मिक जुलूस विदेशी भूमि को फ़तह करने वाले सैनिकों जैसे लगते हैं
    29 Apr 2022
    इस तरह के जुलूस, मुसलमानों पर हिंदुओं का मनोवैज्ञानिक प्रभुत्व स्थापित करने और उन्हें अपने अधीन करने के मक़सद से निकाले जा रहे हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,377 नए मामले, 60 मरीज़ों की मौत
    29 Apr 2022
    दिल्ली में आज फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई, दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,490 नए मामले दर्ज़ किए गए |
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License