NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गोवा में घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम बीडीओ भरोसे
संरक्षण अधिकारी ही वो धुरी है जिसके इर्द-गिर्द पीड़ित महिला की मदद और न्याय का पूरा मामला घूमता है। लेकिन गोवा में वर्ष 2007 से ये अत्यंत महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर बीडीओ संभाल रहे हैं। इससे इस बात का पता चलता है कि सरकारें जेंडर के सवाल पर कितनी संवेदनशील हैं।
राज कुमार
22 Sep 2021
गोवा में घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम बीडीओ भरोसे
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार

21 सितंबर को “गोवा नेटवर्क फॉर जेंडर जस्टिस” के प्रतिनिधिमंडल ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव श्री वाइ.वी.वी.जे. राजशेखर से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।“गोवा नेटवर्क फॉर जेंडर जस्टिस” लंबे अरसे से गोवा में घरेलू हिंसा और महिला अधिकारों पर काम कर रहे विभिन्न संगठनों, कार्यकर्ताओं और संवेदनशील नागरिकों का सांझा मंच है।

नेटवर्क ने ज्ञापन के जरिये घरेलू हिंसा मामलों के निष्पादन में अधिकारियों के रवैये और अन्य संस्थानिक गड़बड़ियों के बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने कुछ सुझाव भी दिये और कुछ मांगें भी रखी।

गोवा में लंबे अरसे से महिलाओं के अधिकारों के लिए काम रहे संगठन बाइलांसो साद की संयोजिका सबिना मार्टिन, अर्ज़ संस्था से अरूण पांडे और मुस्लिम वुमेन एसोसिएसन से राशिदा मुजावर प्रतिनिधमंडल में शामिल रहे।

प्रोटेक्शन आफिसर की बजाय बीडीओ पर अतिरिक्त कार्यभार

नेटवर्क ने प्रमुख चिंता जाहिर की है कि गोवा में संरक्षण अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार बीडीओ को सौंपा गया है। गौरतलब है कि बीडीओ पहले से ही काम के बोझ से दबे रहते हैं। उन पर घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मामलों का अतिरिक्त कार्यभार सौंपना किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसे में घरेलू हिंसा के मामले प्राथमिकता पर नहीं रहते और राम भरोसे चलते हैं। इसके अलावा बीडीओ का संबंध मुख्यतः ग्रामीण विकास एवं प्रशासनिक आदि कार्यों से होता है। जेंडर संबंधी मामलों का उनका न तो कोई प्रशिक्षण होता है और न ही अनुभव। यहां तक कि बहुत बार अधिकारियों को महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005 के विभिन्न प्रावधानों की पूर्ण जानकारी तक नहीं होती है।

घरेलू हिंसा की शिकायत करने की प्रक्रिया और भी पीड़ादायक

नेटवर्क ने बताया कि बीडीओ के दफ़्तर में शिकायत का फार्म मिलना ही बहुत मुश्किल हो जाता है। सिर्फ फार्म लेने के लिए महिलाओं को कई-कई बार दफ़्तर का चक्कर लगाना पड़ता है। चूंकि अधिकारी घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों से परिचित ही नहीं हैं तो महिलाओं से बेवज़ह अनावश्यक डॉक्यूमेंट्स की मांग करते हैं। अधिकारी महिलाओं को फार्म थमा देते हैं और कहते हैं कि खुद भरकर लाओ हमारे पास टाइम नहीं है। अनेक फोटोस्टेट कॉपी मांगी जाती हैं। नेटवर्क ने आरोप लगाया कि बहुत बार अधिकारियों का व्यवहार और भाषा महिला विरोधी होती है। कोर्ट में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है वो न्याय दिलाने के लिए नाकाफी होती है। जब कोर्ट में केस चला जाता है तो महिला को फ्री लीगल एड नहीं दी जाती। स्मरण रहे कि ज्यादातर मामलों में महिला ग़रीब पृष्ठभूमि से होती है। अगर फ्री लीगल एड मिल भी जाए तो वकील महिला से पैसों की मांग करता है। इससे महिला को और सदमा लगता है। वो डर जाती है कि अब क्या करे? क्या वकील बदलने की मांग करे? कहीं बदलाव की मांग से केस को नुकसान हो गया तो? क्या उसे न्याय मिलेगा? ऐसे अनेक सवाल उसे घेर लेते हैं। जबकि घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम में स्पष्ट कहा गया है कि महिला को फ्री लीगल एड मुहैया कराई जाएगी। कुल मिलाकर शिकायत दर्ज़ कराने की प्रक्रिया से लेकर कोर्ट तक की प्रक्रिया महिलाओं को और मानसिक तनाव में डालती है और निरुत्साहित करती है।

गोवा नेटवर्क फॉर जेंडर जस्टिस की प्रमुख मांगें और सुझाव

प्रतिनिधिमंडल ने सचिव को सुझाव दिया है कि प्रोटेक्शन अधिकारियों (बीडीओ), घरेलू हिंसा पर काम कर रही संस्थाओं, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्टेट लीगल अथॉरिटी और विभिन्न हित धारकों की एक बैठक बुलाई जाए और उठाए गए मुद्दों को संबोधित किया जाए। विभिन्न सेवा प्रदाता संस्थाओं जैसे शेल्टर होम, काउंसलिंग सेंटर, वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर, बाल विकास समिति, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला आयोग एवं अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ अलग से इस बारे बैठक की जाए।

नेटवर्क ने मांग की है कि प्रदेश में फुलटाइम स्वतंत्र संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिये। जो सिर्फ उन्हीं कार्यों का निष्पादन करें जो घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम के तहत उन्हें दिये गये हैं। उन्हें उचित भवन, दफ़्तर, स्टाफ ओर अन्य संसाधन मुहैया कराए जाएं। घरेलू हिसा से संबंधित जितने विभाग, संस्थाएं, अधिकारी और व्यक्ति आदि हैं उनका घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम पर प्रशिक्षण किया जाना चाहिये। पर्याप्त बजट का प्रावधान किया जाना चाहिये ताकि ये संस्थाएं बेहतर ढंग से अपने कार्यों का निर्वहन कर सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग सचिव की प्रतिक्रिया

प्रतिनिधिमंडल की सदस्य सबिना मार्टिन ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव श्री वाइ.वी.वी.जे. राजशेखर ने ज्ञापन के बारे में विभाग के निदेशक से चर्चा करने का आश्वासन दिया है। सचिव ने कहा कि वो महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से ही किसी को प्रोटेक्शन अधिकारी का कार्यभार सौंपने के बारे में निदेशक से चर्चा करेंगे और सुझाव देंगे। फुलटाइम स्वतंत्र प्रोटेक्शन अधिकारी की नियुक्ति के लिए उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलने का सुझाव दिया।

गोवा सरकार और घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम की बदहाली

वर्ष 2005 में घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम के पीछे महिला आंदोलन का दशकों का संघर्ष है। संरक्षण अधिकारी इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने और पीड़ित को न्याय और मदद मुहैया कराने में सबसे महत्वपूर्ण है। अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि संरक्षण अधिकारी कोई महिला होगी जिसे महिला अधिकारों पर कार्य करने का कम से कम तीन साल का अनुभव हो। संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी।

संरक्षण अधिकारी ही वो धुरी है जिसके इर्द-गिर्द पीड़ित महिला की मदद और न्याय का पूरा मामला घूमता है। लेकिन गोवा में वर्ष 2007 से ये अत्यंत महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर बीडीओ संभाल रहे हैं। इससे इस बात का पता चलता है कि सरकारें जेंडर के सवाल पर कितनी संवेदनशील हैं। चौदह साल से ऐसा चल रहा है और महिला सशक्तिकरण की दुहाई देने वाली सरकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

सरकारों ने एक अनूठे अधिनियम को मिट्टी का ढेर बना दिया। घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 इसलिये अनूठा है कि ये महज़ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक, आर्थिक, शाब्दिक और यौन हिंसा को भी हिंसा मानता है। लेकिन सरकार अब तक संरक्षण अधिकारी तक की नियुक्ति नहीं कर पाई है। घरेलू हिंसा से महिलाओं को राहत देने वाला अधिनियम तो है लेकिन तंत्र चौपट पड़ा है सरकारें सुस्त हैं। जो काम सरकार को खुद करना चाहिये उसके लिए संस्थाओं को नेटवर्क बनाकर ज्ञापन देने पड़ रहे हैं।

गोवा विधानसभा चुनाव और जेंडर के सवाल

महिला संगठन बाइलांसो साद की संयोजिका सबिना मार्टिन ने कहा कि वो सरकार से मांग करती हैं कि चुनाव से पहले महिला अधिकारों और न्याय से संबंधित तमाम सरकारी विभागों, आयोगों और संस्थाओं को सरकार दुरुस्त करे। महिलाओं के अधिकारों और न्याय को सुनिश्चित करने वाले तंत्र को सक्रिय किया जाए और तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

गौरतलब है कि गोवा विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। संगठनों को लगता है कि शायद चुनाव की वजह से सरकार इस तरफ ध्यान दे सकती हैं उन पर दबाव बनाया जा सकता है। संगठनों को लगता है कि वो महिला अधिकार और न्याय के सवाल को एक चुनावी एजेंडा बना सकते हैं। चुनाव से पहले विभिन्न महिला संगठनों और घरेलू हिंसा आदि मुद्दे पर काम कर रही संस्थाओं का एक मंच पर आना एक सकारात्मक कदम है। बस देखना ये होगा कि क्या सचमुच जेंडर के सवाल चुनावी चर्चा का हिस्सा बन पाएंगे? क्या प्रदेश की भाजपा सरकार राज्य में फुलटाइम संरक्षण अधिकारियों कि नियु्क्त करेगी? या सिर्फ महिला सशक्तिकरण का झूठा राग अलापती रहेगी। महिला सशक्तिकरण का इससे बड़ा ढकोसला क्या होगा कि महिलाओं को न्याय देने वाला तंत्र ठप्प पड़ा है और धड़ल्ले से सरकार चल रही है। 

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License