NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
नज़रिया
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी की सियासत: मतदान से ठीक पहले पोस्टरों से गायब हुए योगी!, अकेले मुस्कुरा रहे हैं मोदी!!
छठे चरण के मतदान से पहले भाजपा ने कई नये सवालों को जन्म दे दिया है, योगी का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में लगे पोस्टरों से ही उनकी तस्वीर गायब कर दी गई, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी अकेले उन पोस्टरों में मुस्कुराते नज़र आ रहे हैं।
रवि शंकर दुबे
02 Mar 2022
COVER

किसी फिल्म का संवाद है... ‘’उत्तर प्रदेश की राजनीति ने सारे ख़ास ख़तम कर दिए’’। यही संवाद फिलहाल गोरखपुर में चल रही सियासत पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कुछ दिनों पहले गोरखपुर की सड़कें योगी आदित्यनाथ के जिन पोस्टरों से पटी हुई थीं, उन्हीं सड़कों पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले मुस्कुरा रहे हैं। कहने का मतलब ये कि गोरखपुर समेत पूर्वांचल के 9 ज़िलों में होने वाले मतदान से ठीक पहले भाजपा के पोस्टरों से योगी आदित्यनाथ को गायब कर दिया गया है। जिसके बाद तमाम सियासी सवालों ने उत्तर प्रदेश में दौड़ लगा दी है।

सवाल नंबर 1— क्या बीते पांच चरणों की दशा और दिशा का अनुमान लगाने के बाद भाजपा आखिरी दो चरणों को मोदी बनाम अखिलेश बनाना चाहती है?

सवाल नंबर 2— क्या योगी आदित्यनाथ ने ब्राह्मणों को भाजपा से दूर कर दिया है?

सवाल नंबर 3— क्या प्रधानमंत्री, योगी आदित्यनाथ को सुभावती शुक्ला, चंद्रशेखर आज़ाद और चेतना पांडे से कम आंक रहे हैं?

सवाल नंबर 4— क्या भाजपा को एंटी इंनकंबेंसी का डर सताने लगा है?

सवाल नंबर 5— केंद्र के कामों का श्रेय योगी को जाने से भाजपा हाईकमान को डर लगने लगा है?

सवाल नंबर 6— कहीं भाजपा हाईकमान के ज़हन में किसी दूसरे मुख्यमंत्री

का नाम तो नहीं तैर रहा है?

सवाल नंबर 7— कहीं 2022 की इस लड़ाई के पीछे 2024 की चिंता तो नहीं है?

सियासी गलियारों में जन्में कई सवाल

ऐसे ही न जाने कितने सवाल आपके मन में जन्म ले रहे होंगे... क्योंकि गोरखपुर के हर नुक्कड़, चौराहे, गली, मुहल्ले में और मुख्य जगहों पर प्रधानमंत्री के पोस्टर लगे हैं... जिनमें मोटे-मोटे अक्षरों मे लिखा है--- ‘’गुंडाराज-भ्रष्टाचार पर किया प्रहार... यूपी फिर मांगे भाजपा सरकार’’, ग़रीबों के पक्के मकान का सपना साकार... ‘’यूपी फिर मांगे भाजपा सरकार’’….

अब सवाल ये है कि जिस गुंडाराज को खत्म करने का दावा कर-करके योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं, जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद पहले यूपी के लिए ‘योगी—उपयोगी’ की तुक मिला रहे थे, अब एक झटके में इसी संभावना में संशय के बीज बो दिए गए हैं।

जब न्यूज़क्लिक ने इस विषय पर गोरखपुर में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मनोज सिंह से बात की, तो उन्होंने कहा कि— भाजपा योगी के खिलाफ एंटी इंनकंबेंसी से डर गई है, और बीते पांच चरणों में माहौल को भांपकर भाजपा कोई ढील छोड़ना नहीं चाहती, यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ को किनारे कर खुद को मुख्य रूप से मैदान में उतार दिया है।

योगी के चेहरे पर विश्वास नहीं?

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सातवें चरण में 7 मार्च को और योगी के गढ़ गोरखपुर में छठे चरण में 3 मार्च को वोटिंग होनी होनी है। हालांकि चुनावों की घोषणा से पहले ही पीएम और बीजेपी का फोकस पूर्वांचल ही रहा और ताबड़तोड़ लोकार्पण और शिलान्यास किए गए थे। लेकिन अपेक्षित परिणाम न निकलने से अब बीजेपी रणनीतिकारों के माथे पर पसीना है। यानी योगी के शहर में ही सिर्फ मोदी के पोस्टर का मतलब साफ है कि पार्टी रणनीतिकारों को योगी के चेहरे पर भरोसा नहीं है। जिसमें दो बातें निकलकर सामने आती हैं---

·  पहली बात तो यह कि कांटे की टक्कर में यदि विरोधियों से जोड़ तोड़ करना पड़े तो योगी का चेहरा रुकावट पैदा कर सकता है।

·  दूसरा यह कि वोटरों में राशन, आवास, शौचालय और किसान सम्मान निधि के चलते ग्रामीण इलाकों में मोदी के चेहरे पर वोट मांगना ज्यादा मुफीद है।

कई मौके पर दिखी आपसी रार

ध्यान देने वाली बात है कि ये पोस्टर यूपी चुनाव के सह प्रभारी अनुराग ठाकुर के दौरे के बाद लगे हैं। पोस्टर से योगी के गायब होने की अंदरूनी कहानी भले ही कुछ हो लेकिन जो पर्दे के सामने दिख रहा है, उससे साफ है कि मोदी-शाह की जोड़ी से योगी के रिश्ते सामान्य तो नहीं ही हैं। शाह और योगी की सियासी केमिस्ट्री को लेकर गोरखपुर में योगी की नामांकन सभा में भी सवाल उठे थे। इन सवालों पर विराम लगाने के लिए ही उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के मंच पर शाह और योगी के हाथ को मीडिया के सामने एक साथ उठवाना पड़ा था। कौन भूल सकता है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के दौरान योगी पैदल चल रहे थे और मोदी कार से... कहने का अर्थ ये हैं कि नरेंद्र मोदी जनता के सामने कितना भी योगी के कंधे पर हाथ रख लें, लेकिन अंदरखाने चल तो कुछ और ही रहा है।

‘’आएंगे तो योगी ही’’ में कोई सच्चाई नहीं?

अब थोड़ा आपके मन में चल रहे सवालों को भी सुलझाने की कोशिश करते हैं---- जैसे शुरुआत से ही एक लाइन तैर रही है कि--- ‘’आएंगे तो योगी ही’’ इस लाइन को खुद मोदी और शाह भी कई बार दोहराते नज़र आए, लेकिन काफी बैटिंग के बाद भी योगी को न अयोध्या की सीट लड़ने को मिली, न मथुरा। उन्हें उनके गृह ज़िले गोरखपुर ही भेज दिया गया। जानकार कहते हैं कि इसके बाद जब हाईकमान को दिखा कि पश्चिम में अखिलेश और जयंत ने मिलकर सारा खेल बिगाड़ दिया है, फिर अवध के क्षेत्रों में जनाधार खिसकता दिख रहा है। तो योगी को साइडलाइन कर पूर्वांचल की कमान खुद के हाथ में ले ली गई और यूपी सरकार के जो थोड़े-बहुत काम हुए उन्हें केंद्र के साथ जोड़ दिया गया।

डर गए हैं योगी आदित्यनाथ?

एक चीज़ और जो भाजपा हाईकमान अच्छे से समझता है, कि गोरखपुर के अलावा पूर्वांचल के करीब 9 ज़िलों में योगी आदित्यनाथ अच्छी पकड़ रखते हैं, लेकिन एक वक्त भाजपा के कद्दावर नेता रहे दिवंगत उपेंद्र शुक्ला की पत्नी सुभावती शुक्ला ने गोरखपुर शहर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जीत का दावा ठोककर पूरे कुनबे की चिंता बढ़ा दी। उन्होंने इस चुनाव को सम्मान से जोड़ दिया। दूसरी ओर कोई बड़ी बात नहीं है, कि ज्यादातर ब्राह्मणों का वोट भी उन्हीं को जाए... इन्हीं तमाम कारण से पूर्वांचल का पूरा चार्ज अब हाईकमान ने अपने हाथों में ले लिया है।

Yogi Adityanath
PM MODI
UP ELections 2022

Related Stories

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने

यूपी चुनाव: प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी

यूपी चुनाव: रुझानों में कौन कितना आगे?

यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?


बाकी खबरें

  • cartoon
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: ...पॉजिटिविटी तो आने दो
    29 May 2021
    जब से कोरोना की दूसरी वाली लहर आयी है, देश में पॉजिटिविटी का बहुत भारी टोटा पड़ गया है।
  • यूपी : कब और कैसे रुकेगा अवैध और ज़हरीली शराब का धंधा
    असद रिज़वी
    यूपी : कब और कैसे रुकेगा अवैध और ज़हरीली शराब का धंधा
    29 May 2021
    अलीगढ़ की घटना प्रदेश में ज़हरीली शराब से होने वाली यह पहली त्रासदी नहीं है। अभी 28 अप्रैल को हाथरस में ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी।
  • फैक्ट चेकः भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के कोरोना की दूसरी लहर के बारे में दावों की सच्चाई
    राज कुमार
    फैक्ट चेकः भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के कोरोना की दूसरी लहर के बारे में दावों की सच्चाई
    29 May 2021
    कैलाश विजयवर्गीय दो दावे कर रहे हैं, पहला, कि भारत के पड़ोसी देशों में कोरोना की दूसरी लहर नहीं है और दूसरा, कि कोरोना की दूसरी लहर चीन का भारत पर वायरल वार है। आइये इन दोनों ही दावों की पड़ताल करते…
  • एक दुर्बल स्वास्थ्य प्रणाली महामारी से नहीं निपट सकती है 
    भरत डोगरा
    एक कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणाली महामारी से नहीं निपट सकती है 
    29 May 2021
    भारत में स्वास्थ्य संकट और मौतों के लिए अकेले महामारी जिम्मेदार नहीं है। स्वास्थ्य पर अपर्याप्त बजट आवंटन ने हमारी स्वास्थ्य प्रणाली को कुचल कर रख दिया है।
  •  सोशल मीडिया
    सोनिया यादव
    नए आईटी कानून: सरकार की नीयत और नीति में फ़र्क़ क्यों लगता है?
    29 May 2021
    नए आईटी नियम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए जवाबदेही के नाम पर दोधारी तलवार हैं और इस तलवार का इस्तेमाल कहां कंपनियों के ख़िलाफ़ किया जायेगा ये कहा नहीं जा सकता। लोकहित के नाम पर लाए जा रहे ये कानून, कब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License