NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
होली पर बनारस में मुस्लिम परिवार के हाथ की बनी पगड़ी पहनते हैं बाबा भोलेनाथ
"कोई भी हिन्दू-मुस्लिम नहीं चाहता है, सब लोग दो वक्त की रोज़ी-रोटी चाहते हैं और कुछ नहीं। कुछ राजनीतिक लोग हैं जो अपनी रोटी सेंकना चाहते हैं, वही लोग लड़ाई लगाते हैं।"
रिज़वाना तबस्सुम
09 Mar 2020
मोहम्मद ग्यासुद्दीन

बनारस (वाराणसी) : "हम भोलेनाथ की सेवा करते हैं। हम हिन्दू मुसलमान को अलग नहीं मानते हैं, सब हमारा खूनी रिश्ता है, जो लोग बोलते हैं गंगा-जमुनी, गंगा-जमुनी... लेकिन लोग उसे साबित नहीं कर सकते, हम उसको कुछ इस तरह साबित करते हैं कि, हिन्दू मुसलनाम का खूनी रिश्ता है।"

ये कहना है काशी विश्वनाथ मंदिर के बाबा भोलेनाथ के लिए शाही पगड़ी बनाने वाले 63 साल के मोहम्मद ग्यासुद्दीन का। मोहम्मद ग्यासुद्दीन वाराणसी के लल्लापुर क्षेत्र के उस परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो बाबा भोलेनाथ के लिए हर साल पगड़ी बनाता है। होली के मौके पर रंग एकादशी पर यह पगड़ी बाबा भोलेनाथ को पहनाई जाती है।

ग्यासुद्दीन बताते हैं कि, 'भोलेनाथ को पहली पगड़ी मेरे परदादा के दादा छेदी हाजी ने बनाई थी। आज ये हमारी पाँचवीं पुश्त है, जो बाबा भोलेनाथ के लिए पगड़ी बनाते हैं। इस पगड़ी को शाही पगड़ी या अकबरी पगड़ी भी कहते हैं।'

image t.JPG

कितनी है पगड़ी की लागत

आज के करीब 25 साल पहले जब मैंने पहली बार बाबा भोलेनाथ के लिए पगड़ी बनाई थी तो उस समय मुझे एहसास हुआ कि मैं कितना खुशनसीब हूँ। हालांकि उसके पहले भी काम करता था मैं, लेकिन जब सारा काम खुद पर आया तो वो एहसास बिलकुल अलग था। पगड़ी के दाम के बारे में ग्यासुद्दीन बताते हैं कि, '25 साल पहले बाबा भोलेनाथ को चढ़ाई जाने वाली पगड़ी लगभग पाँच सौ रुपये में बनकर तैयार होती थी। मुझे इस काम को संभालने से पहले कितने में बनती थी ये मुझे नहीं मालूम, क्योंकि तब सबकुछ अब्बू के हाथ में था।

वर्तमान समय में भोलेनाथ को चढ़ाई जाने वाली पगड़ी की लागत के बारे में पूछने पर ग्यासुद्दीन साफ-साफ मना कर देते हैं। हालांकि कई बार पूछने पर ग्यासुद्दीन कहते हैं कि, 'तब से अब तक महंगाई बहुत बढ़ी है, उसी तरह से पगड़ी के लागत में फर्क आया है, करीब दस गुना ज्यादा की लागत से भोलेनाथ की पगड़ी तैयार होती है।’

किन-किन चीजों से बनती है पगड़ी

ग्यासुद्दीन बताते हैं कि, 'पगड़ी बनाने के लिए, रेशम का कपड़ा, स्टोन, मोती, पंख दफ्ती... कई चीजें लगती हैं पगड़ी को बनाने में। क्योंकि हमारे यहाँ हर तरह की पगड़ी बनाई जाती है, शादी में दूल्हे के लिए, मौलाना के लिए टोपी, बच्चों के लिए टोपी तो कई बार अलग-अलग चीजों में कुछ अलग-अलग मेटेरियल भी हो जाता है।'

हाँ! भोलेनाथ ईश्वर हैं, और भगवान को चढ़ाई जाने वाली पगड़ी को बनाने के लिए ज्यादा एहतियात बरतना पड़ता है, साफ-सफाई का, जगह का, सामान की क्वालिटी का, बनाने वालों का साफ-पाक होना। हालांकि हम इन चीजों का ख्याल हमेशा ही रखते हैं लेकिन भोलेनाथ के लिए बनाई जाने वाली पगड़ी के लिए ज्यादा रखते हैं। पगड़ी बनाना कैसे सीखा?... ये सवाल पूछने पर ग्यासुद्दीन कहते हैं कि, 'जैसे मछली के बच्चों को कोई तैरना नहीं सिखाता है वैसे ही पगड़ी बनाना नहीं सीखना पड़ता।'

t 3_0.JPG

पूरा परिवार मिलकर करता है मदद

ग्यासुद्दीन के परिवार में कुल ग्यारह लोग हैं, ग्यासुद्दीन और उनकी पत्नी के अलावा छह लड़कियां और तीन बेटे हैं। सभी बच्चे इंटर तक पढ़ाई किए हैं, कुछ लोगों की शादी हो गई है, कुछ की नहीं हुई है। ग्यासुद्दीन की पत्नी अमीना बानों बताती हैं कि, 'हम सब मिलकर पगड़ी बनाते हैं, कुछ लोग कपड़ा काटते हैं, कुछ लोग सिलाई करते हैं, कुछ लोग स्टोन लगाने का काम करते हैं।' अमीना की बेटी पगड़ी बनाने में मदद करने के अलावा छोटे-छोटे थैले भी बनाती हैं।

मुझे गर्व है कि मेरे यहाँ भगवान के लिए पगड़ी बनाई जाती है

अपनी घर में रखी हुई पगड़ियों को देखते हुए ग्यासुद्दीन कहते हैं कि, 'हमें गर्व है कि हमारे यहाँ भोलेनाथ की पगड़ी बनाई जाती है। हमें और हमारे परिवार को इस लायक समझा गया। भोलेनाथ काशी के राजा हैं, काशी के राजा मतलब विश्व के राजा। विश्व के राजा का पगड़ी हमारे यहाँ बन रही है, ये हमारे लिए फख्र की बात है।

कोई लड़ाई नहीं चाहता, सब रोज़ी चाहते हैं

देश में हो रही जगह-जगह हिंसा और हिन्दू मुसलमान के बारे में बात करते हुए ग्यासुद्दीन कहते हैं कि, 'अगर गंगा-जमुनी तहज़ीब नाम पड़ा है तो इसका मतलब कि ये तहज़ीब रही होगी। लेकिन आज जो देश की हालत है बहुत ही खराब है, कौन है जो लड़ाई करना चाह रहा है, कौन है जो आग लगाना चाह रहा है, कौन है जो दंगा करना चाह रहा है, कोई नहीं! कोई भी हिन्दू-मुस्लिम नहीं चाहता है, सब लोग दो वक्त की रोज़ी-रोटी चाहते हैं और कुछ नहीं। कुछ राजनीतिक लोग हैं जो अपनी रोटी सेंकना चाहते हैं, वही लोग लड़ाई लगाते हैं।'

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हो रहे बवाल के बारे में पूछने पर ग्यासुद्दीन कहते हैं कि, 'जो भी हो रहा है गलत हो रहा है, दूसरे के धर्मों को भी इज्जत देना चाहिए।' कुछ अनावश्यक लोग हैं, राजनीतिक लोग, जिनको और कोई काम नहीं है तो वो यही काम कर रहे हैं, लेकिन जो भी कर रहे हैं, गलत कर रहे हैं।

banaras
Holi
BholeNath
hindu-muslim
Religion Politics
Poor People's
Hindu Muslim Unity
Small business

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

बनारस : गंगा में डूबती ज़िंदगियों का गुनहगार कौन, सिस्टम की नाकामी या डबल इंजन की सरकार?

बनारस : गंगा में नाव पलटने से छह लोग डूबे, दो लापता, दो लोगों को बचाया गया

बनारस में ये हैं इंसानियत की भाषा सिखाने वाले मज़हबी मरकज़

बढ़ती नफ़रत के बीच भाईचारे का स्तंभ 'लखनऊ का बड़ा मंगल'

ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे: कोर्ट कमिश्नर बदलने के मामले में मंगलवार को फ़ैसला

ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, वादी राखी सिंह वापस लेने जा रही हैं केस, जानिए क्यों?  

ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे: कमिश्नर बदलने की याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित, अगली सुनवाई 9 को

अब विवाद और तनाव का नया केंद्र ज्ञानवापी: कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में मस्जिद का सर्वे और वीडियोग्राफी शुरू, आरएएफ तैनात

बनारस में हाहाकारः पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में पीने के पानी के लिए सब बेहाल


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License