NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बाघमारा कोल साइडिंग में छंटनी का विरोध कर रहे मज़दूरों पर प्रबंधन ने कराया लाठीचार्ज
कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी बीसीसीएल की धनबाद इकाई अंतर्गत बाघमारा के केसरगड़ा कोल साइडिंग में ठेके पर काम करा रही एसएमएसजेवी आउटसोर्सिंग कंपनी ने बिना कारण बताये 129 कामगारों की छंटनी कर काम से निकाल दिया है। पिछले कई वर्षों से इस कंपनी में 159 सेलपीकर ठेका मजदूर कार्यरत हैं।
अनिल अंशुमन
13 Oct 2021
coal mine workers

कोयलांचल की राजधानी कहे जानेवाले धनबाद क्षेत्र से सटे बाघमारा कोल साइडिंग में ठेके पर काम करा रही निजी आउटसोर्सिंग कंपनी की मनमानी के खिलाफ शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहे मजदूरों पर पुलिस लाठी चार्ज की घटना अब पूरे कोयलांचल में तूल पकड़ती जा रही है। साथ ही इस मुद्दे पर कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले किये जाने मामले में कोल इंडिया की कोयला कंपनियों के प्रबंधन के निजी कंपनी परस्त भूमिका को लेकर भी बहस तेज़ हो गयी है। क्योंकि इन सभी सरकारी कोयला कंपनियों के प्रबंधन ने नीतिगत फैसलों के तहत दसियों बरस पहले से ही कोयला क्षेत्र के कई काम काज निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों को पहले से ही सौंप रखा है। इतना ही नहीं जब भी इन निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी और शोषण के खिलाफ इसमें काम कर रहे ठेका व असंगठित मजदूर कोई आवाज़ उठाते हैं तो कोल इंडिया का पूरा प्रबंधन वहां तैनात सीआईएसऍफ़ और स्थानीय पुलिस के बल पर दमन कराने में कोई कसार नहीं छोड़ता है। 

कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी बीसीसीएल की धनबाद इकाई अंतर्गत बाघमारा के केसरगड़ा कोल साइडिंग में ठेके पर काम करा रही एसएमएसजेवी आउटसोर्सिंग कंपनी ने बिना कारण बताये 129 महिला पुरुष कामगारों की छंटनी कर काम से निकाल दिया है। पिछले कई वर्षों से इस कंपनी में 159 सेलपीकर ठेका मजदूर कार्यरत हैं। इन्हें 2018 के पहले से ही हाई पावर कमिटी द्वारा निर्धारित वेतन मिलता था और सबकी पीएफ़ कटौती भी होती थी। लेकिन आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा उसे मजदूरों के पीऍफ़ खाते में नहीं जमा किया जाता था। जिसे लेकर मजदूरों ने लेबर कोर्ट में आवेदन भी दिया तो उसने अपना फैसला मजदूरों के ही पक्ष में दिया। इससे कुपित होकर कंपनी ने मनमानी जारी रखते हुए मजदूरों के वेतन पर ही रोक लगाना शुरू कर दिया। मजदूरों ने जब इसके खिलाफ भी आवाज़ उठायी तो कंपनी ने बिना उचित कारण बताये वहाँ काम कर रहे 129 महिला पुरुष कामगारों की छंटनी का फरमान जारी कर दिया। मजदूरों ने इसके खिलाफ बीसीसीएल प्रबंधन से भी गुहार लगाई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मजबूरन सभी छंटनीग्रस्त ने आन्दोलान करने का फैसला किया। 

राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन एक्टू से जुड़े कोल माइंस वर्कर्स यूनियन के बैनर तले 7 अक्टूबर से साइडिंग के बाहर गेट पर क्रमिक प्रतिवाद धरना शुरू कर दिया। गरीब मजदूरों की गुहार को अब तक अनसुना कर चुप बैठे रहनेवाले बीसीसीएलप्रबंधन ने उक्त कंपनी के पक्ष में त्वरित सक्रियता दिखाते हुए साइडिंग गेट पर चल रहे छंटनीग्रस्त मजदूरों के आन्दोलन को कुचलने पर आमादा हो गया

उसने स्थानीय पुलिस से सांठ गाँठ कर 9 अक्टूबर को अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे मजदूरों का नेतृत्व कर रहे सीएमडब्ल्यू व भाकपा माले नेता समेत 4 आन्दोलनकारी मजदूर नेताओं को बाघमारा थाना में वार्ता के नाम पर बुलाकर गिरफ्तार कर दिया। जिससे मजदूरों समेत कोलियरी के अन्य कोयला मजदूरों तथा स्थानीय जनता में काफी आक्रोश फ़ैल गया। जिसका  नतीजा यह निकला कि मजदूरों के धरना को व्यापक जन स्वीकृति मिलने लगी। जिससे बौखलाए बीसीसीएल प्रबंधन ने 10 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे ही सीडिंग गेट पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे मजदूरों पर बाघमारा थाना पुलिस को भेजकर वहाँ अचानक से लाठी चार्ज करवा दिया। धरने पर बैठे सभी मजदूरों को पुलिस ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा। जिससे कई महिला कामगारों समेत दर्जनों मजदूर घायल हो गए। कुछ महिलाए तो पुलिस की पिटाई से वहीं बेहोश हो गयीं। 

घटना की खबर सुनते ही रात्री 9 बजे भाकपा माले विधायक विनोद सिंह तथा माले झारखण्ड सचिव पीड़ित मजदूरों का हाल जानने वहाँ पहुंचा गए। रात में ही बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनी की मनमानी का विरोध कर रहे मजदूरों पर ढाए गए पुलिसिया ज़ुल्म की तस्वीरें उन्होंने सोशल मिडिया में वायरल कर दी। उसी रात पूरे कोयलांचल में इस काण्ड के खिलाफ प्रतिवाद की घोषणा कर दी गयी।  

इसके तहत 11 अक्टूबर को पुरे धनबाद कोयलांचल के विभिन्न स्थानों पर बाघमारा साइडिंग के असंगठित मजदूरों पर आउटसोर्सिंग कंपनी को संरक्षण दे रहे बीसीसीएल प्रबंधन तथा बाघमारा पुलिस सांठ गाँठ से हुई लाठी चार्ज के खिलाफ व्यापक प्रतिवाद प्रदर्शित हुए। कई वामपंथी कोयला ट्रेड यूनियनों के अलावे वामपंथी दलों के कार्यकत्ताओं ने दमन काण्ड के जिम्मेदार पुलिस और प्रबंधन पर कारवाई करने की मांग को लेकर पुतला जलाया। 

बिहार कोलियरी कामगार यूनियान के नेतृत्व में इलाके के कई कोलियरियों में प्रतिवाद कार्यक्रम करते हुए घोषणा की गयी कि बेनिडीह साईडिंग समेत सभी कोलियरियों में कार्यरत ठेका और आउटसोर्सिंग मजदूरों को उनका वाजिब हक़ नहीं मिल जाता, कोयलांचल के मजदूर लड़ते रहेंगे।

कतरास में मासस केन्द्रीय महासचिव ने मजदूरों पर हुए प्रबंधन के इशारे पर पुलिसिया लाठी चार्ज की तीखी निंदा की। सिजुवा कोलियरी में सीटू नेता ने कहा कि कोल प्रबंधन वर्षों से कार्यरत ठेका मजदूरों को नियमित करने की बजाय उनकी छंटनी कर दमन पर आमादा है तो हम भी इसका जवाब जोरदार मजदूर आन्दोलन से देंगे।  

एक्टू से ही जुड़े झारखण्ड जेनरल मजदूर युनियां के भी नेतृत्व में कई स्थानों पर प्रतिवाद हुए। धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर भाकपा माले कि धनबाद शाखा के बैनर तले प्रतिवाद धरना देकर बीसीसीएल प्रबंधन का पुतला दहन किया गया।

धनबाद के ही महुदा कोलियरी इलाके में झारखण्ड सरकार के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ने भी आन्दोलनकारी मजदूरों के समर्थन में सड़क पर उतकर लाठी चार्ज काण्ड और साइडिंग में उत्पन्न स्थिति के लिए ठेका कंपनी व प्रबंधन को जिम्मेवार ठहराया। 

10 अक्टूबर को बेनिडीह कोल साइडिंग में प्रबंधन के इशारे पर झारखण्ड पुलिस ज्यादती का मुद्दा तब और सरगर्म हो उठा जब इसी दिन बगल के जिला हज़रिबाग़ स्थित बनादाग कोलसाइडिंग में भी स्थानीय कोलियरी प्रबंधन से कई जन मुद्दों को लेकर पिछले कई दिनों से आन्दोलन कर रहे स्थानीय ग्रामीणों का पुलिस से टकराव हो गया। शांतिपूर्ण धरना दे रहे लोगों को हटाने के लिए पुलिस ने अचानक पहुंचकर लाठियां और अश्रुगैस चलाये तो जवाब में ग्रामीणों ने भी पुलिस पर भीषण पत्थरबाजी कर दी। बाद में स्थानीय कांग्रेसी विधायिका की मध्यस्थता से स्थिति नियंत्रित हो सकी।

उक्त दोनों कांडों के लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर भी उंगलियाँ उठने लगी हैं कि क्या उनके शासन काल में भी पुलिस का वही जन विरोधी और दमनकारी रवैया रहेगा जो पिछले भाजपा शासन में था।

कोयलांचल के इलाकों में यह चर्चा भी खूब फैल रही है कि आनेवाले दिनों में मोदी सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र जैसे सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण किये जाने का जिस बड़े पैमाने पर विरोध होगा, उसी पैमाने पर निजी कंपनीयों की लठैत बन रहे कोल इंडिया की सभी सरकारी कंपनियों के मजदूर विरोधी प्रबंधन के खिलाफ भी लड़ाई का होना भी तय है। साथ ही हेमंत सोरेन सरकार को भी इस बात की कत्तई इज़ाज़त नहीं दी जा सकती है कि उनके शासन काल में भी भाजपा सरकार जैसा पुलिसिया ज़ुल्म का तांडव जारी रहे।

Coal workers
Jharkhand government
CITU
AICCTU
CPIML

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License