NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल चुनाव: प्रचार पर रोक के निर्वाचन आयोग के फ़ैसले के ख़िलाफ़ ममता का धरना
ममता बनर्जी ने सोमवार को ही अपने इस फ़ैसले के घोषणा कर दी थी। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘‘निर्वाचन आयोग के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक फैसले के विरोध में मैं कल (मंगलवार) दिन में 12 बजे से गांधी मूर्ति, कोलकाता पर धरने पर बैठूंगी।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
13 Apr 2021
बंगाल चुनाव: प्रचार पर रोक के निर्वाचन आयोग के फ़ैसले के ख़िलाफ़ ममता का धरना

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके चुनाव प्रचार करने पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाने के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ कोलकाता में धरना शुरू कर दिया है।

ममता बनर्जी ने सोमवार को ही अपने इस फ़ैसले के घोषणा कर दी थी। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘‘निर्वाचन आयोग के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक फैसले के विरोध में मैं कल (मंगलवार) दिन में 12 बजे से गांधी मूर्ति, कोलकाता पर धरने पर बैठूंगी।’’

To protest against the undemocratic and unconstitutional decision of the Election Commission of India, I will sit on dharna tomorrow at Gandhi Murti, Kolkata from 12 noon.

— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) April 12, 2021

केंद्रीय बलों के खिलाफ बनर्जी की टिप्पणी और कथित तौर पर धार्मिक लहजे वाले बयान के बाद निर्वाचन आयोग ने आदेश जारी किया था।

निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में कहा है, ‘‘आयोग पूरे राज्य में कानून व्यवस्था की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकने वाले ऐसे बयानों की निंदा करता है और ममता बनर्जी को सख्त चेतावनी देते हुए सलाह देता है कि आदर्श आचार संहिता प्रभावी होने के दौरान सार्वजनिक अभिव्यक्तियों के दौरान ऐसे बयानों का उपयोग करने से बचें।’’

आदेश में कहा गया, ‘‘आयोग 12 अप्रैल रात 8 बजे से 13 अप्रैल रात 8 बजे तक 24 घंटे की अवधि के लिए ममता बनर्जी के प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाता है।’’

निर्वाचन आयोग के आदेश में बनर्जी को 7 और 8 अप्रैल को भेजे गये दो अलग-अलग नोटिसों तथा उन पर बनर्जी के जवाबों का हवाला दिया गया है।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि बनर्जी ने 9 अप्रैल के अपने जवाब में अपने भाषण के चुनिंदा अंश को शामिल किया है और भाषण के प्रमुख हिस्से के संदर्भ पर कोई भी उल्लेख नहीं किया है।

नोटिस के जवाब में तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा था, ‘‘मैंने धार्मिक विभाजन के आधार पर मतदाताओं को वोट डालने के लिए प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया था, बल्कि मैंने आदर्श आचार संहिता और भारत के संविधान की भावना के अनुरूप स्पष्ट रूप से धार्मिक सद्भाव के पक्ष में बात रखी थी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘‘मैंने जो शब्द कहे थे कि ‘‘मैं अपने हिंदू भाइयों और बहनों से भी कहना चाहूंगी कि हिंदू और मुस्लिम के रूप में अपने बीच विभाजन नहीं करें’’, से स्पष्ट है कि मेरा भाषण धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए नहीं बल्कि शांति और सद्भाव बनाकर रखने के लिए था।’’

निर्वाचन आयोग के आदेश में उनके भाषण के ‘प्रमुख भाग’ का उल्लेख किया गया है।

आयोग के आदेश में ममता बनर्जी के भाषण का जो अंश शामिल किया गया है, उसके मुताबिक उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूं कि भाजपा से पैसा लेने वाले शैतान की बात सुनकर अल्पसंख्यक वोटों को बंटने नहीं दें। वह कई सांप्रदायिक बयान देता है और हिंदू तथा मुस्लिमों के बीच झगड़े की आग लगाता है।’’

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के खिलाफ अपने कथित बयान पर ममता बनर्जी ने आयोग से कहा कि उन्होंने केवल मतदाताओं, खासतौर पर महिलाओं का आह्वान किया था कि जब बल समेत कोई भी यदि उनके मताधिकार में अड़चन पैदा करे तो वे ‘घेराव’ करके लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करें।

उन्होंने कहा, ‘‘घेराव सार्वजनिक प्रदर्शन दर्ज करने का एक लोकतांत्रिक तरीका है तथा कोई वजह नहीं है कि घेराव को अवैध माना जाए।’’

केंद्रीय बलों के खिलाफ बयानों पर ममता के जवाब पर आदेश में कहा गया है कि बनर्जी ने ‘‘एक बार फिर बड़ी आसानी से अपने भाषण के प्रमुख हिस्सों को, शायद चुनिंदा तरीके से चीजों को भूलने की आदत के चलते छोड़ दिया।’’

आदेश में उनके भाषण के उस एक हिस्से का जिक्र है जिसे आचार संहिता, जन प्रतिनिधित्व कानून तथा भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला बताया गया है।

आयोग द्वारा उल्लेखित बनर्जी के भाषण के उस हिस्से के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि वे किसके निर्देश पर मारपीट करते हैं और कैसे पिटाई करते हैं। आपकी जिम्मेदारी लोगों के परिवारों को बचाने की है। यदि हमारी किसी मां-बहन को एक लाठी लगती है तो उन पर कलछी, खुरपी और चाकू से हमला करें। मैं आपको बता रही हूं। यह महिलाओं का हक है। और यदि हमारी किसी मां-बहन को मतदान केंद्र पर घुसने नहीं दिया जाता तो आप सब बाहर निकलो और विद्रोह कर दो।’’

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 27 मार्च से शुरू हुआ और आठ चरणों में हो रहे चुनाव के बाकी चार चरणों का मतदान 17 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच होगा।

चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए टीएमसी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र की हर संस्था से समझौता किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता के बारे में हमेशा संदेह था। लेकिन, आज इसने जो भी दिखावा किया है, वह स्पष्ट है। अब यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग मोदी/शाह के इशारे पर और उनके सीधे आदेश के तहत काम कर रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज लोकतंत्र की हर संस्था से समझौता किया गया है। हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?’’

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के लिए काला दिन है।

उन्होंने कहा, ‘‘ आयोग बिल्कुल कमजोर पड़ चुका है। 12 अप्रैल हमारे लोकतंत्र में काला दिन है। हमें हमेशा मालूम था कि हम बंगाल जीत रहे हैं।’’

उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए एक अन्य पार्टी नेता कुणाल घोष ने आयोग के फैसले पर कहा, ‘‘आयोग भाजपा की शाखा की भांति बर्ताव कर रहा है। यह पाबंदी ज्यादती है एवं इससे अधिनायकवाद की बू आती है। आयोग का एकमात्र लक्ष्य बनर्जी को चुनाव प्रचार से रोकना है क्योंकि भाजपा पहले ही हार भांप चुकी है। यह शर्मनाक है।’’

इसे भी पढ़ें :  बंगाल चुनाव: सितालकुची गोलीबारी घटना को सांप्रदायिक रंग देने की भाजपा की कोशिश पर चुनाव आयोग की चुप्पी  

West Bengal
WB Elections Update
mamta banerjee
BJP
TMC
Narendra modi

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • poonam
    सरोजिनी बिष्ट
    यूपी पुलिस की पिटाई की शिकार ‘आशा’ पूनम पांडे की कहानी
    16 Nov 2021
    आख़िर पूनम ने ऐसा क्या अपराध कर दिया था कि पुलिस ने न केवल उन्हें इतनी बेहरमी से पीटा, बल्कि उनपर मुकदमा भी दर्ज कर दिया।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी : जनता बदलाव का मन बना चुकी, बनावटी भीड़ और मेगा-इवेंट अब उसे बदल नहीं पाएंगे
    16 Nov 2021
    उत्तर-प्रदेश में चुनाव की हलचल तेज होती जा रही है। पिछले 15 दिन के अंदर यूपी में मोदी-शाह के आधे दर्जन कार्यक्रम हो चुके हैं। आज 16 नवम्बर को प्रधानमंत्री पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने…
  • Ramraj government's indifference towards farmers
    ओंकार सिंह
    लड़ाई अंधेरे से, लेकिन उजाला से वास्ता नहीं: रामराज वाली सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता
    16 Nov 2021
    इस रामराज में अंधियारे और उजाले के मायने बहुत साफ हैं। उजाला मतलब हुक्मरानों और रईसों के हिस्से की चीज। अंधेरा मतलब महंगे तेल, राशन-सब्जी और ईंधन के लिए बिलबिलाते आम किसान-मजदूर के हिस्से की चीज।   
  • दित्सा भट्टाचार्य
    एबीवीपी सदस्यों के कथित हमले के ख़िलाफ़ जेएनयू छात्रों ने निकाली विरोध रैली
    16 Nov 2021
    जेएनयूएसयू सदस्यों का कहना है कि एक संगठन द्वारा रीडिंग सत्र आयोजित करने के लिए बुक किए गए यूनियन रूम पर एबीवीपी के सदस्यों ने क़ब्ज़ा कर लिया था। एबीवीपी सदस्यों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कार्यक्रम…
  • Amid rising tide of labor actions, Starbucks workers set to vote on unionizing
    मोनिका क्रूज़
    श्रमिकों के तीव्र होते संघर्ष के बीच स्टारबक्स के कर्मचारी यूनियन बनाने को लेकर मतदान करेंगे
    16 Nov 2021
    न्यूयॉर्क में स्टारबक्स के कामगार इस कंपनी के कॉर्पोरेट-स्वामित्व वाले स्टोर में संभावित रूप से  बनने वाले पहले यूनियन के लिए वोट करेंगे। कामगारों ने न्यूयॉर्क के ऊपर के तीन और स्टोरों में यूनियन का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License