NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बंगाल के मज़दूर-किसान 26 नवंबर की हड़ताल के लिए हैं तैयार
हड़ताल के तीन बचे हैं और मज़दूर एवं किसान संगठन सरकार की नीतियों के खिलाफ अपने अभियान के अंतिम पड़ाव में हैं। हड़ताल को कलाकारों का भी समर्थन हासिल है। 
रवीन्द्र नाथ सिन्हा
24 Nov 2020
Translated by महेश कुमार
26 नवंबर की हड़ताल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों, स्वतंत्र फेडेरेशनस ने 26 नवंबर को केंद्र सरकार की जन-विरोधी, किसान विरोधी और मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ होने वाली आम हड़ताल के समर्थन में अपने संयुक्त और स्वतंत्र अभियानों के अंतिम पड़ाव में पहुँच गए हैं। 

हड़ताल में बचे तीन दिनों में सभी संगठन पूर्व निर्धारित अभियान के कार्यक्रम को पूरा करने में व्यस्त हैं, उन्हें पश्चिम बंगाल की डेमोक्रेटिक राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन की तरफ से समर्थन भी मिला है, कलाकारों ने हड़ताल के उन उद्देश्यों और समझ को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिसके कारण 26 नवंबर की देशव्यापी आम हड़ताल की जा रही है।

पश्चिम बंगाल डेमोक्रेटिक राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पबित्रा सरकार और महासचिव रजत बंद्योपाध्याय ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हे इस बात की बड़ी चिंता है कि भारत के लोग इतने बड़े संकट से गुजर रहे हैं; साम्प्रदायिक उन्माद का माहौल तैयार किया जा रहा है और महामारी के बहाने किसानों और मज़दूरों पर पूर्व नियोजित हमले किए जा रहे हैं। ये हालात ज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र को भी दूषित कर रहे है। सरकर और बंद्योपाध्याय ने कहा कि इन वास्तविकताओं को देखते हुए, लेखक, कलाकार और नागरिक समाज के अन्य वर्ग उदासीन नहीं रह सकते हैं और उन्हें आगे आकर एक दिवसीय आम हड़ताल में अपना समर्थन देना चाहिए।

जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार बंद्योपाध्याय ने न्यूज़क्लिक को बताया, “लोकतंत्र खतरे में है। हम इससे अप्रभावित नहीं रह सकते हैं; इसलाइए हमें एक स्टैंड लेना चाहिए”। यह पूछे जाने पर कि क्या हड़ताल के दिन एसोसिएशन के सदस्य सड़कों पर उतरेंगे, उन्होंने कहा कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है। व्यक्तिगत रूप से, सदस्य कविता पाठ कर सकते हैं और इस अवसर पर उपयुक्त गीत प्रस्तुत कर सकते हैं।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के आहवान पर किसान संगठन बंगाल में 26 नवंबर को 'ग्रामीण बंद' आयोजित करेंगे। ग्रामीण बंद ’के लिए समर्थन जुटाने का अभियान भी अंतिम चरण में पहुंच गया हैं और किसान कार्यकर्ता और नेताओं को काफी उम्मीद हैं कि कार्यक्रम काफी सफल रहेगा।

ज़मीनी तैयारी 

पश्चिम बंगाल राज्य कृषक सभा (भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी की किसान इकाई) के सचिव अमल हलदर ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उन्होंने लोगों को मुद्दों के बारे में जागरूक करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक अभियान चलाया है। उन्होंने कहा, “हमने ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित करने के अलावा, हाट और अन्य स्थानों पर जहां लोग इकट्ठा होते हैं, वहां बैठकें की तथा कई ग्रामीण परिवारों का दौरा किया है। हमने उन्हें पर्चे और पोस्टर के माध्यम से मुद्दों के बारे में समझाया है। हम अच्छी प्रतिक्रिया की उम्मीद करते हैं।”

बंगाल के किसानों की दुर्दशा पर रोशनी डालते हुए हलदर ने बताया कि “किसान अपनी फसल  की बिक्री से अपनी लागत को भी कवर करने में असमर्थ हैं। पश्चिम बंगाल में मंडी का बुनियादी ढांचा उतना विकसित नहीं है जितना कि पंजाब और हरियाणा में हुआ है। हमारे किसानों को धान के लिए जो कीमत मिलती है, वह पंजाब और हरियाणा के मुक़ाबले बहुत कम है। इसके अलावा, कई ऐसे उदाहरण हैं जब किसानों को फसल बीमा से उनका मुवावजा नहीं मिलता है”।

पश्चिम बंगाल प्रदेश कृषक सभा (जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की किसान इकाई है) ने कहा है कि 'ग्रामीण बंद' को सफल बनाने के लिए ग्रामीण लोगों में चलाए अपने अभियानों में उन्होंने संसद द्वारा सितंबर में किसान की कमाई और आजीविका पर पारित तीन नए कृषि कानूनों के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताया है। संगठन के मुताबिक इन कानूनों की मदद से कॉरपोरेट्स की घुसपैठ बढ़ेगी और माध्यम दर्जे के किसान ‘खेत मज़दूर’ बन जाएंगे और उनकी आमदनी आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों का विरोध किया है, हड़ताल पर उनकी प्रतिक्रिया उनके स्टैंड की प्रतिबद्धता को दर्शाएगी, उक्त बातें संयुक्ता किसान सभा (आर॰एस॰पी॰ की किसान इकाई) के सचिव और पूर्व मंत्री सुभाष नस्कर ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि, "हमने उनसे [सीएम] कहा है कि वे घोषणा करें कि बंगाल उन अधिनियमों को राज्य में लागू नहीं करेगा और उनके विकल्प के रूप में किसान समर्थक कानून बनाएँ जाएंगे। टीएमसी सरकार विरोध के रूप में 'बंद' का विरोध करता है। चूंकि वे भी नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं, यह समय उनकी ईमानदारी की जांच का है।” 

“हमने मुख्यमंत्री से विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों के उदाहरणों का पालन करने का आग्रह किया है, जिन्होंने किसान-समर्थक कानून पारित किए है और घोषित किया है कि केंद्रीय कानूनों को उनके राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान महासभा (सीपीआई मार्क्सवादी-लेनिनवादी से संबद्ध) के उपाध्यक्ष कार्तिक पाल ने कहा कि हमें अभी तक उनका जवाब नहीं मिला है।

पाल ने आगे कहा कि उनका संगठन ग्रामीण इलाकों में आम सभाओं के अलावा, पिछले तीन सप्ताह से 'रास्ता रोको' और राज्य राजमार्ग नाकाबंदी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, ताकि किसानों के संकट के पीछे के कारणों को उजागर किया जा सके और वे नए कृषि कानूनों के बारे में क्या सोचते हैं? कि ये कैसे उनकी तकलीफ को बढ़ाएँगे। 

यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आरएसपी की मज़दूर इकाई) के सचिव अशोक घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके श्रम मंत्री आदतन ट्रेड यूनियनों की उपेक्षा करते हैं और वे महत्वपूर्ण श्रम कानून बदलावों पर आगे बढ़ने से पहले बैठकों और चर्चाओं के लिए यूनियनों के अनुरोधों का जवाब भी नहीं देते हैं। “केंद्र सरकार फंडिंग के स्रोतों की पहचान किए बिना उद्योगपतियों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा करके गर्व महसूस करते हैं। उन्हें इस बात का कोई इल्म नहीं है कि प्रवासी मज़दूर आबादी किस हद तक प्रभावित हुई है। बड़ी संख्या में प्रवासियों को अपने कार्यस्थलों पर लौटना बाकी है जिन्हे वे अपने गावों को वापस लौटने से पहले छोड़ गए थे।”

"हमारा आकलन है कि कई औद्योगिक इकाइयाँ और एमएसएमई (MSMEs) मज़दूरों की कमी के कारण उत्पादन के पहले के स्तर तक नहीं पहुँच पाएंगी। नौकरी छूटना जारी है; घोष ने कहा कि जो लोग पहले जिन इकाइयों में काम कर रहे थे, उन्हें वापस लेने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा रहा हैं। यूटीयूसी सचिव घोष ने कहा, '' भारतीय मज़दूर संघ (बीजेपी की श्रमिक इकाई) से जुड़े लोग भी हमारी मांगों के चार्टर से सहमत हैं, लेकिन राजनीतिक कारण से वे अलग रहने पर मजबूर हैं”, ।

कांग्रेस की मज़दूर इकाई इंटक की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष क़मरुज्जमन क़मर ने बताया कि क्षेत्रों में भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन के संयुक्त अभियानों के सामान्य तरीकों के अलावा, जहां एक मजबूत उपस्थिति है, वहाँ सदस्यों ने मोटर साइकिल रैली निकाली है। उदाहरण के लिए, शहर के बाहरी इलाके यानि गार्डन रीच में, एक बाइक रैली आयोजित की गई थी। उनके संयुक्त और व्यक्तिगत अभियानों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर, क़मर ने कहा, "इस बार ममता की पार्टी के कार्यकर्ता हड़ताल का विरोध करने के लिए सड़कों पर नहीं उतरेंगे जैसा कि उन्होंने पिछले अवसरों पर किया था। इस बार टीएमसी कार्यकर्ता चुप रहेंगे क्योंकि दीदी ने नए कृषि-कानूनों का विरोध किया है, साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम में व्यापारी समर्थक कॉर्पोरेट परिवर्तन का भी विरोध किया है।”

पश्चिम बंगाल में बिहार और उत्तर प्रदेश के बाद अनुमानित 35 लाख प्रवासी मज़दूरों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। बहुत बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर जो वापस लौट आए हैं और राज्य में रह रहे हैं; वे बिना नौकरी के हैं। "स्थिति बहुत खराब है।" क़मर ने कहा।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Bengal Workers, Farmers Ready for Nov 26 General Strike; Artists’ Outfit Extends Support

November General Strike
farmers protest
Workers Strike
Kisan Protest
Farm Laws
West Bengal
CPIM
CPI
November 26 Strike

Related Stories

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है


बाकी खबरें

  • Afganistan
    शिरीष खरे
    वैश्विक महामारी कोरोना में शिक्षा से जुड़ी इन चर्चित घटनाओं ने खींचा दुनिया का ध्यान
    30 Nov 2021
    कोविड-19 महामारी से यूं तो दुनिया के ज्यादातर देशों में एजुकेशन सिस्टम प्रभावित हुआ है, लेकिन अमेरिका के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अन्य देशों के मुकाबले यह अपेक्षाकृत अधिक ताकतवर और विकसित…
  • muzaffarpur Motiabind Operation
    एम.ओबैद
    बिहारः डॉक्टरों की लापरवाही से 26 लोगों की गई आंखों की रोशनी, आंख निकालने की नौबत
    30 Nov 2021
    मुज़फ़्फ़रपुर आंखों के हॉस्पिटल में 60 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, जिनमें 26 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। संक्रमण इतना बढ़ गया है कि कुछ लोगों की आंख निकालनी पड़ सकती है।
  • UP TET
    भाषा
    टीईटी पेपर लीक मामला: उप्र एसटीएफ ने एक प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को गिरफ़्तार किया
    30 Nov 2021
    एसटीएफ की नोएडा इकाई के एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि जांच में पता चला है कि कोलकाता, नोएडा, दिल्ली में स्थित विभिन्न प्रिंटिंग प्रेस में टीईटी की परीक्षा के प्रश्न पत्र छपवाए गए थे। 
  • Indian team
    भाषा
    दक्षिण अफ्रीका ने टीम इंडिया के लिए सुरक्षित बायो-बबल का वादा किया
    30 Nov 2021
    भारत ए मंगलवार से ब्लोमफोंटेन में दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ दूसरा अनौपचारिक टेस्ट खेलेगा। विराट कोहली और उनकी टीम नौ दिसंबर को यहां पहुंचेगी लेकिन देश में कोविड का ओमीक्रोन प्रारूप मिलने के बाद दौरे…
  • MGNREGA
    रवीन्द्र नाथ सिन्हा
    पश्चिम बंगाल में मनरेगा का क्रियान्वयन खराब, केंद्र के रवैये पर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
    30 Nov 2021
    मनरेगा जॉब कार्ड दिए जाने में पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस समर्थकों को ही प्रायः वरीयता दी जाती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी शिकायत की है कि केंद्र सरकार भी इस योजना के कार्यान्वयन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License