NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
संस्कृति
समाज
भारत
राजनीति
यौन संबंध के लिए सहमति की उम्र कम करने की मांग उठायेगा बंगाल
पहले देश में यौन संबंध के लिए सहमति देने की न्यूनतम उम्र 16 साल थी, लेकिन पोक्सो कानून, 2012 के जरिये इसे 18 साल कर दिया गया। निर्भया मामले के बाद आइपीसी में भी यह उम्र 18 साल कर दी गयी है। इसके चलते किशोरावस्था के प्रेम संबंधों के मामले में बहुत से नौजवान 'अपराधी' होने के बोझ तले बेवजह पिस रहे हैं। इस महीने के अंत में इस विषय पर एक अंतरराज्यीय चर्चा आयोजित होनी है।
सरोजिनी बिष्ट
19 Feb 2020
यौन संबंध के लिए सहमति

अपने देश में माता-पिता से लेकर पूरा समाज लड़के-लड़कियों के मिलने-जुलने पर पाबंदी लगाते हैं। घर की 'इज्जत' संभालने के नाम पर खास तौर पर लड़कियों की यौनिकता और उनकी मर्जी को नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में, शादी के लिए या फिर अपने प्रेम संबंधों को बचाये रखने के लिए आये दिन कम उम्र के लड़के-लड़कियों के घर से भाग जाने की घटनाएं होती रहती हैं।

अक्सर देखा जाता है कि इस तरह के मामलों में लड़की का परिवार लड़के को सबक सिखाने के लिए कानून के चाबुक का इस्तेमाल करता है। अगर लड़की 18 साल से थोड़ी भी कम हुई, तो उसके इस बयान के बावजूद कि वह अपनी मर्जी से लड़के के साथ गयी थी, लड़की के घरवाले लड़के पर पोक्सो कानून, 2012 (द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेज एक्ट) के तहत मामला दर्ज करा देते हैं। ऐसे में लड़का गंभीर आपराधिक मामले में फंस जाता है।

लड़के और लड़की के यौन संपर्क में अगर लड़की की उम्र 16 या 17 साल की होती है, तो उससे महज एक-दो साल बड़े लड़के के खिलाफ भी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई होती है और उसे 7 से 10 साल कैद की सजा हो जाती है। इस समस्या की जड़ में 14 नवंबर 2012 से लागू पोक्सो कानून की धारा 2 (डी) है जिसमें 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति 'बच्चे' के रूप में परिभाषित किया गया है। यानी, 18 साल से कम उम्र का कोई व्यक्ति यौन संबंध के लिए सहमति देने लायक नहीं माना जाता और उससे बनाया गया संबंध यौन अपराध की श्रेणी में आता है।

किशोरावस्था के यौन संपर्कों को आपराधिक दायरे से बाहर करने या नहीं करने के मुद्दे पर इसी महीने फरवरी के अंतिम सप्ताह में एक अंतरराज्यीय चर्चा होनी है। अन्य राज्यों के रुख का तो मालूम नहीं, लेकिन पश्चिम बंगाल ने यह फैसला कर लिया है कि वह सहमति दे सकने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने का प्रस्ताव रखेगा।

जेंडर न्यूट्रल पोक्सो कानून से पहले, सहमति दे सकने की उम्र 16 साल थी, जो भारतीय दंड विधान (आइपीसी) की धारा 375 के जरिये निर्धारित थी। यानी 16 से कम उम्र की लड़की से सहमति से बनाया गया यौन संबंध भी बलात्कार माना जाता था। सन 1983 से ही 16 साल की उम्र चल रही थी, लेकिन 2012 में संसद से पोक्सो विधेयक पारित कराया गया, जिसमें सहमति की उम्र 16 की जगह 18 कर दी गयी। 10 मार्च को राज्यसभा से इस विधेयक के पारित होने के कुछ दिनों बाद, साढ़े सत्रह साल की एक लड़की के अपहरण व बलात्कार के मामले में आरोपी युवक को बरी करते हुए दिल्ली की चर्चित जज कामिनी लाउ ने सहमति की उम्र में प्रस्तावित बदलाव पर आशंका जतायी थी, ''बचाव के प्रावधान किये बिना, यौन संबंधों के लिए सहमति की उम्र बढ़ाने का कानून समय से पीछे ले जानेवाला और क्रूर साबित होगा, क्योंकि इससे किशोरावस्था में यौन संबंध स्थापित करना अपराध हो जायेगा। ऐसे मामलों में व्यवहार में परिवर्तन की जरूरत है, न कि इसके लिए सजा देने की।''

ऐसी चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए संसद ने सहमति की उम्र 18 साल रखते हुए ही पोक्सो विधेयक पारित किया, जिसे राष्ट्रपति ने 19 जून 2012 को अपनी सहमति दी और बाल दिवस के मौके पर इसे 14 नवंबर को केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किया गया।

पोक्सो कानून को लागू हुए एक महीना ही बीता था कि 16 दिसंबर की रात दिल्ली में, निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना से पूरे देश में जनाक्रोश फूट पड़ा। तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार पर भारी दबाव पड़ा और वह महिला सुरक्षा के प्रति भरोसा जगाने के लिए, महिलाओं के खिलाफ होनेवाले अपराधों से संबंधित फौजदारी कानूनों में बड़ा बदलाव लेकर आयी।

जस्टिस जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर पहले अध्यादेश आया और फिर 20 मार्च 2013 को संसद से आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक पारित हुआ। इसमें बलात्कार की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया। जबरन पिनिट्रेटिव सेक्स के अलावा दूसरे तरीकों से किये गये गंभीर यौन हमलों को भी 'बलात्कार' में शामिल किया गया। तेजाब हमले में सजा कड़ी की गयी। ताक-झांक और पीछा करने को भी महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों की श्रेणी में शामिल किया गया। इन सभी बदलावों को महिला संगठनों से लेकर आम समाज ने सराहा। लेकिन इन सबके साथ ही आइपीसी की संशोधित धारा 375 में यौन संबंध की सहमति देने के लिए लड़की की उम्र 16 से बढ़ाकर 18 साल कर दी गयी। यानी 18 साल से कम की लड़की से सहमति से बनाये गये यौन संबंधी भी बलात्कार की परिभाषा में आ गये। सरकार ने उन संस्थाओं व संगठनों की भी राय नहीं ली, जो बच्चों के लिए काम कर रहे थे। बाद में, निर्भया मामले के बाद बनी जस्टिस वर्मा समिति ने अपनी सिफारिशों में यह उम्र 16 साल ही रखी, पर केंद्र ने इसे 18 साल तय करते हुए बलात्कार निरोधक अध्यादेश पेश कर दिया, जो बाद में संसद से भी पारित हो गया। दरअसल, इसके पीछे लोकलुभावन राजनीति काम कर रही थी।

इस संबंध में पश्चिम बंगाल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती कहती हैं, ''किशोरावस्था में बहुत से लड़के-लड़कियां प्रेम में पड़ जाते हैं। इस दौरान बने यौन संबंधों को बलात्कार जैसा गंभीर अपराध मानना उचित नहीं है। इसलिए हमारी ओर से अंतरराज्यीय चर्चा में यह मांग की जायेगी कि किशोरावस्था के यौन संबंधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर लाया जाये। इसके लिए पोक्सो में बदलाव की जरूरत है। यौन संबंध के लिए सहमति दे सकने की उम्र घटाकर 16 साल की जाये।''

हालांकि वह इसमें कुछ एहतियात बरते जाने की बात भी करती हैं, ताकि इस ढील का कोई दुरुपयोग न कर सके।

बीते साल 26 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने भी 16 से 18 साल की उम्र के बीच सहमति से बने यौन संबंधों को पोक्सो कानून के दायरे से बाहर लाने का सुझाव दिया था। जस्टिस वी पार्थिबन ने पोक्सो कानून के तहत 10 साल कैद की सजा पाये एक मुजरिम की अपील पर सुनवाई करते हुए यह सुझाव दिया। याचिकाकर्ता को 17 साल की एक लड़की के अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप में निचली अदालत से मुजरिम करार दिया गया था। कानून में संशोधन का सुझाव देते हुए जस्टिस पार्थिबन ने कहा, ''16 साल की उम्र के बाद सहमति से किसी यौन संबंध या संबद्ध कृत्य को पोक्सो कानून के कठोर प्रावधानों से बाहर रखा जा सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई और नरम प्रावधानों के तहत की जा सकती है, जिसे इस कानून में ही शामिल किया जा सकता है।'' उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि- 'ऐसा संशोधन किया जा सकता है कि अगर 16 से अधिक और 18 से कम उम्र की लड़की सहमति से यौन संबंध बनाती है तो उसमें पुरुष की उम्र लड़की के मुकाबले पांच साल से अधिक नहीं हो सकती। ताकि लड़की से उम्र में बहुत अधिक बड़ा और परिपक्व व्यक्ति लड़की की कम उम्र और उसके भोलेपन का गलत फायदा न उठा सके।'

गौरतलब है कि दुनियाभर में यौन संबंध के लिए सहमति दे सकने की उम्र को लेकर राय बंटी रही है। यूरोप के अधिकांश देशों में सहमति की उम्र 14 से 16 साल है। भारत में भी सहमति की उम्र 16 साल निर्धारित थी। लेकिन इसके 18 साल हो जाने से बड़ी संख्या में नौजवानों पर अपराधी का दाग लग रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह 'नैतिकता' की पहरेदारी करने की जगह नयी उम्र के लड़के-लड़कियों के साथ हमदर्दी से पेश आये और किशोरावस्था के यौन संपर्कों को आपराधिक दायरे से बाहर करे।

West Bengal
Posco Act
law on sex
age of consent
Nirbhaya gang rape
sexual intercourse age

Related Stories

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

निर्भया कांड के आठ साल : कितनी बदली देश में महिला सुरक्षा की तस्वीर?

निर्भया कांड के दोषियों को अब एक फरवरी को फांसी 

निर्भया कांड के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति ने ख़ारिज की

निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, डेथ वारंट पर 7 जनवरी को सुनवाई

निर्भया कांड: एक और दोषी तिहाड़ लाया गया, एक ने दायर की पुनर्विचार याचिका

पशु चोरी के संदेह में पश्चिम बंगाल में भीड़ ने की दो लोगों की पीट-पीट कर हत्या

भाजपा और तृणमूल के बीच फंसा बंगाल, धर्म और बदले की राजनीति तेज़


बाकी खबरें

  • कोविशील्ड, कोवैक्सीन की एक-एक खुराक से बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है विकसित: अध्ययन
    भाषा
    कोविशील्ड, कोवैक्सीन की एक-एक खुराक से बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है विकसित: अध्ययन
    09 Aug 2021
    यह अध्ययन उत्तर प्रदेश में 98 लोगों पर किया गया, जिनमें से 18 ने अनजाने में टीके की पहली खुराक कोविशील्ड और दूसरी खुराक कोवैक्सीन ले ली थी तथा इन दोनों टीकों की एक-एक खुराक लेने से उनमें बेहतर रोग…
  • टिकैत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    मुज़फ़्फ़रनगर में 5 सितंबर की किसान महापंचायत में आर-पार की रणनीति बनेगी : टिकैत
    09 Aug 2021
    जेवर में सबौता अंडर पास के पास आयोजित किसान महापंचायत में राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को बर्बाद करने के लिए बिना मांगे ये कृषि कानून देश के किसानों पर थोप दिए गए हैं, जिससे किसान पहले कर्ज में…
  • कोरोना
    भाषा
    दिल्ली: पिछले तीन महीने में भेजे गए नमूनों में से 80 फीसदी में वायरस का डेल्टा स्वरूप पाया गया
    09 Aug 2021
    महाराष्ट्र में ‘जीनोम सीक्वेंसिंग’ के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के डेल्टा प्लस स्वरूप के कुल 45 मामले सामने आए हैं।
  • ‘आगे बढ़ने के संदेश’ के साथ टोक्यो ओलंपिक का समापन, अब पेरिस में मिलेंगे
    एपी/भाषा
    ‘आगे बढ़ने के संदेश’ के साथ टोक्यो ओलंपिक का समापन, अब पेरिस में मिलेंगे
    09 Aug 2021
    कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया भारतीय दल के ध्वजवाहक थे और भारत के सबसे बड़े दल ने इतिहास में सबसे ज्यादा पदक हासिल कर खेलों को ‘गुडबॉय’ कहा।
  • नागरिक होने का अधिकार
    रोमिला थापर
    नागरिक होने का अधिकार
    09 Aug 2021
    नागरिकता को लेकर भारत के आम लोगों के बीच चार मशहूर बुद्धिजीवियों ने भारत में नागरिकता का गठन करने वाले उन प्रमुख पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया है, जो हाल ही में सत्ता पर काबिज सरकार के विवादास्पद…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License