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भारत
राजनीति
राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी दलों का बड़ा आरोप- संसद में चर्चा नहीं होने दे रही सरकार 
विपक्ष ने सरकार पर चर्चा कराने की मांग नहीं मानने का आरोप लगाया है और कहा है कि वह पेगासस मामले पर चर्चा करने से भाग रही है।
न्यूज़क्लिक टीम
12 Aug 2021
राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी दलों का बड़ा आरोप- संसद में चर्चा नहीं होने दे रही सरकार 

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश के संविधान पर आक्रमण कर रहे हैं। साथ ही 11 विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार संसद में चर्चा नहीं होने दे रही है और महिला सांसदों के साथ धक्का-मुक्की की गई है. दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों ने उल्टा विपक्ष पर ही संसद में अराजकता का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी ने भाजपा पर संसद में दलितों, किसानों की आवाज न उठाने देने का आरोप लगाया है. उन्होंने पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से आयोजित ‘संसद घेराव’ कार्यक्रम में कहा कि विपक्ष को संसद के भीतर दलितों, किसानों और नौजवानों की आवाज नहीं उठाने दी जा रही है।

यह कार्यक्रम दिल्ली में हुए दुष्कर्म एवं हत्या के मामले की पीड़ित बच्ची के लिए न्याय की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आयोजित हुआ था।

राहुल गांधी ने कहा है ‘‘आजादी से पहले हमारे दलित भाई-बहनों को अंधेरे में रखा जाता था, उन्हें उनका हक नहीं मिलता था। संविधान आने के बाद उनको उनका अधिकार मिला। कांग्रेस और बाबासाहेब ने मिलकर दलित भाई-बहनों को उनका अधिकार दिया।’’

उन्होंने आरोप लगाया,‘‘नरेंद्र मोदी, भाजपा, आरएसएस और उनके चार-पांच उद्योगपति मित्र मिलकर संविधान पर हमला कर रहे हैं। जहां भी देखिए, वहां संविधान पर हमला हो रहा है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ संसद में हम किसानों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के मुद्दे उठाएं तो हमें बात नहीं करने दी जाती। देश के इतिहास में पहली बार संसद के भीतर सांसदों को पीटा गया, धक्का-मुक्की की गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘किसान जब अपने अधिकार मांगते हैं तो नरेंद्र मोदी जी उन्हें देशद्रोही और खालिस्तानी बोलते हैं।’’

वहीं विपक्ष के 11 मुख्य राजनीतिक दलों ने सरकार पर संसद में चर्चा कराने की मांग नहीं मानने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि राज्यसभा में कुछ महिला सदस्यों समेत कई सांसदों से ऐसे लोगों ने धक्कामुक्की की, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं थे।

विपक्षी दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में सरकार के ‘अधिनायकवादी रुख’ और ‘अलोकतांत्रिक कदमों’ की निंदा की और कहा कि राज्यसभा में जो कुछ हुआ है वह हैरान करने वाला है तथा सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान है।

विपक्ष ने सरकार पर चर्चा कराने की मांग नहीं मानने का आरोप लगाया है और कहा है कि वह पेगासस मामले पर चर्चा करने से भाग रही है।

संयुक्त बयान पर राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिाकर्जुन खड़गे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, द्रमुक के टीआर बालू समेत 11 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा में बुधवार को जो हुआ वह हैरान करने वाला, अप्रत्याशित, दुखद और सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान था, इस सरकार ने संसदीय लोकतंत्र के सम्मान को कम किया है।’’

इससे पहले, विपक्षी नेताओं की खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी, पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश एवं आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव, द्रमुक केटीआर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

आपको बता दें कि इस बैठक में भी तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता शामिल नहीं हुए।

वहीं सरकार ने उल्टा विपक्ष पर ही चर्चा न करने देने का आरोप लगाया है. संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामा और अमर्यादित व्यवहार करने का विपक्ष पर आरोप लगाते हुए भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों ने कहा है कि संसद में नियम तोड़ने व इस तरह का बर्ताव करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए कि कोई भी ऐसा करने का साहस नहीं करे।

केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं पर मर्शलों के साथ धक्का- मुक्की करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष का ‘‘मेरे तरीके से नहीं तो किसी भी तरीके से नहीं’’ का रवैया बहुत निंदनीय है और देश भी ऐसे रुख की निंदा करता है।

राज्य सभा के नेता गोयल ने कहा है कि केंद्रीय मंत्रियों ने राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। उनमें संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल और उप नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों के अमर्यादित आचरण एवं मर्शलों के साथ धक्का-मुक्की करने को लेकर उनके (विपक्षी दलों के सांसदों के) खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा में महासचिव की मेज नाचने और विरोध करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान संसद में जो हुआ, उसके लिए विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।

ठाकुर ने कहा कि मानसून सत्र में विपक्ष का एकमात्र एजेंडा सड़क से लेकर संसद तक अराजकता पैदा करना था।

वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘‘ हम मांग करते हैं कि राज्यसभा के सभापति को नियम तोड़ने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद को नहीं चलने देने का पहले ही फैसला कर लिया था।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक करने के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च किया। इस दौरान कई नेताओं ने बैनर और तख्तियां ले रखी थीं। बैनर पर ‘‘हम किसान विरोधी काले कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं’’ लिखा हुआ था।

विपक्षी नेताओं ने ‘‘जासूसी बंद करो’’, ‘‘काले कानून वापस लो’’ और ‘‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’’ के नारे भी लगाए।

संविधान पर आक्रमण कर रहे हैं भाजपा और आरएसएस: राहुल

नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश के संविधान पर आक्रमण कर रहे हैं।

उन्होंने पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से आयोजित ‘संसद घेराव’ कार्यक्रम में यह भी कहा कि विपक्ष को संसद के भीतर दलितों, किसानों और नौजवानों की आवाज नहीं उठाने दी जा रही है।

यह कार्यक्रम दिल्ली में कथित दुष्कर्म एवं हत्या के मामले की पीड़ित बच्ची के लिए न्याय की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आयोजित हुआ था।

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘आजादी से पहले हमारे दलित भाई-बहनों को अंधेरे में रखा जाता था, उन्हें उनका हक नहीं मिलता था। संविधान आने के बाद उनको उनका अधिकार मिला। कांग्रेस और बाबासाहेब ने मिलकर दलित भाई-बहनों को उनका अधिकार दिया।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नरेंद्र मोदी, भाजपा, आरएसएस और उनके चार-पांच उद्योगपति मित्र मिलकर संविधान पर हमला कर रहे हैं। जहां भी देखिए, वहां संविधान पर हमला हो रहा है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ संसद में हम किसानों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के मुद्दे उठाएं तो हमें बात नहीं करने दी जाती। देश के इतिहास में पहली बार संसद के भीतर सांसदों को पीटा गया, धक्का-मुक्की की गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘किसान जब अपने अधिकार मांगते हैं तो नरेंद्र मोदी जी उन्हें देशद्रोही और खालिस्तानी बोलते हैं।’’

राहुल गांधी ने दावा किया, ‘‘छोटे एवं मझोले कारोबारों को नष्ट कर दिया गया। हमने कहा कि जनता को सीधे पैसा दीजिए। लेकिन मोदी जी ने सिर्फ अपने कुछ उद्योगपतियों को पैसे दिए, बाकी लोगों को कुछ नहीं दिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता को सब कुछ समझ में आ रहा है। दलितों, गरीबों, किसानों और मजदूरों में एक आवाज सुनाई दे रही हैं। एक दिन यह आवाज तूफान बन जाएगी और यही तूफान नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के पद से हटाएगा।’’

राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी और बाबासाहेब ने सिर्फ एक बात सिखाई है कि डरना नहीं है। जिस दिन हिंदुस्तान इनसे डरना बंद कर देगा, उस दिन ये भाग जाएंगे।’’

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष नितिन राउत ने कहा, ‘‘दलितों के साथ अत्याचार के खिलाफ राहुल गांधी और कांग्रेस लड़ रहे हैं। दिल्ली की बच्ची को न्याय के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। दलित समाज भाजपा की हकीकत समझ चुका है और इनको सबक सिखाएगा।’’

सरकार ने संसद में चर्चा कराने की मांग नहीं मानी, संसदीय लोकतंत्र के सम्मान को कम किया : विपक्ष

नयी दिल्ली : विपक्ष के 11 मुख्य राजनीतिक दलों ने सरकार पर संसद में चर्चा कराने की मांग नहीं मानने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाया और दावा किया कि राज्यसभा में कुछ महिला सदस्यों समेत कई सांसदों से धक्कामुक्की ऐसे लोगों ने की, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं थे।

विपक्षी दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में सरकार के ‘अधिनायकवादी रुख’ और ‘अलोकतांत्रिक कदमों’ की निंदा की और कहा कि राज्यसभा जो कुछ हुआ वह हैरान करने वाला तथा सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान है।

उन्होंने सरकार पर चर्चा कराने की मांग नहीं मानने का आरोप लगाया और कहा कि वह पेगासस मामले पर चर्चा करने से भाग रही है।

संयुक्त बयान पर राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिाकर्जुन खड़गे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, द्रमुक के टीआर बालू समेत 11 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा में बुधवार को जो हुआ वह हैरान करने वाला, अप्रत्याशित, दुखद और सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान था...इस सरकार ने संसदीय लोकतंत्र के सम्मान को कम किया है।’’

विपक्षी नेताओं ने यह दावा किया कुछ महिला सांसदों समेत सदन के कई सदस्यों के साथ ऐसे बाहरी लोगों ने धक्कामुक्की की, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं है।

इससे पहले, विपक्षी नेताओं की खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी, पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश एवं आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव, द्रमुक के टी आर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता बैठक में शामिल नहीं हुए।

संसद में अमर्यादित आचरण पर विपक्ष माफी मांगे,नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई हो:मंत्रियों ने कहा

नयी दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामा और अमर्यादित व्यवहार करने का विपक्ष पर आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि संसद में नियम तोड़ने व इस तरह का बर्ताव करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए कि कोई भी ऐसा करने का साहस नहीं करे।

केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं पर मर्शलों के साथ धक्का- मुक्की करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष का ‘‘मेरे तरीके से नहीं तो किसी भी तरीके से नहीं’’ का रवैया बहुत निंदनीय है और देश भी ऐसे रुख की निंदा करता है।

राज्य सभा के नेता गोयल ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों ने राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। उनमें संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल और उप नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों के अमर्यादित आचरण एवं मर्शलों के साथ धक्का-मुक्की करने को लेकर उनके (विपक्षी दलों के सांसदों के) खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा में महासचिव की मेज नाचने और विरोध करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान संसद में जो हुआ, उसके लिए विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।

ठाकुर ने कहा कि मानसून सत्र में विपक्ष का एकमात्र एजेंडा सड़क से लेकर संसद तक अराजकता पैदा करना था।

संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हम मांग करते हैं कि राज्यसभा के सभापति को नियम तोड़ने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद को नहीं चलने देने का पहले ही फैसला कर लिया था।

जोशी ने कहा, ‘‘ संसद में नियम तोड़ने एवं अमर्यादित व्यवहार करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए कि कोई ऐसा करने का साहस नहीं करे।’’

इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने सरकार पर सदन में मार्शल का इस्तेमाल करने एवं धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक करने के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च किया। इस दौरान कई नेताओं ने बैनर और तख्तियां ले रखी थीं। बैनर पर ‘‘हम किसान विरोधी काले कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं’’ लिखा हुआ था।

विपक्षी नेताओं ने ‘‘जासूसी बंद करो’’, ‘‘काले कानून वापस लो’’ और ‘‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’’ के नारे भी लगाए।

विपक्षी नेताओं की बैठक में खड़गे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी, पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश एवं आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव, द्रमुक के टी आर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्यसभा में कुछ महिला सांसदों के साथ कथित धक्का-मुक्की की घटना को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

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