NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार उपचुनाव: नीतीश कुमार के लिए चेतावनी हैं ये परिणाम
बिहार की जिन पांच सीटों पर उपचुनाव हुए थे, उनमें से चार सीटें जदयू के पास थीं, लेकिन वो इनमें से महज़ एक सीट ही बचा पाई।
उमेश कुमार राय
24 Oct 2019
Bye elections
Image courtesy: News18 Hindi

बिहार की पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव का परिणाम कई संदेश लिए हुए है।

बिहार की जिन पांच सीटों पर उपचुनाव हुए थे, उनमें से चार सीटें जदयू के पास थीं, लेकिन वो इनमें से महज एक सीट ही बचा पाई।

अलबत्ता, लोकसभा की एक सीट समस्तीपुर पर लोजपा ने कब्जा बरकरार रखा, लेकिन जीत का अंतर ढाई लाख से घट कर एक लाख पर आ गया।

सीवान की दरौंदा विधानसभा सीट पर जदयू को अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा से निष्कासित किए गए व्यास सिंह के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने यहां निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस सीट के लिए चुनाव प्रचार करने गए भाजपा नेता व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे जदयू उम्मीदवार को जिताने के लिए काम करें। इसके बावजूद जदयू की हार हो गई। दरौंदा सीट पर लगातार दो बार जदयू ने जीत दर्ज की थी। दरौंदा सीट जदयू की कविता सिंह के सांसद बन जाने से खाली हुई थी। जदयू ने यहां से कविता सिंह के पति अजय सिंह को टिकट दिया था। राजद की तरफ से उमेश सिंह किस्मत आजमा रहे थे।

इसी तरह सहरसा की सिमरी बख्तियारपुर सीट पर 2005 से ही जदयू का कब्जा था, लेकिन इस सीट पर भी पार्टी को शिकस्त मिली है। राजद उम्मीदवार जफर आलम ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। यहां ये भी बता दें कि इस सीट पर राजद की सहयोगी पार्टी विकासशील इंसान पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारा था।

बेलहर सीट पर भी 2005 से ही जदयू जीतता आया है, लेकिन इस चुनाव में ये सीट भी जदयू के हाथ से फिसल गई। राजद उम्मीदवार रामदेव यादव ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। जदयू नेता गिरधारी यादव के सांसद बनने के कारण यह सीट खाली हुई थी। जदयू ने इस सीट पर गिरधारी यादव के भाई लालधारी यादव को टिकट दिया था।

भागलपुर की नाथनगर विधानसभा सीट नाथनगर से जदयू के टिकट पर विधायक रहे अजय मंडल के सांसद बन जाने के कारण खाली हुई थी। इस सीट से जदयू ने लक्ष्मीकांत मंडल को टिकट दिया था जबकि राजद ने राबिया खातून को चुनावी मैदान में उतारा था। यहां जदयू बहुत मामूली अंतर से जीत दर्ज कर पाया है।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाला परिणाम सीमांचल की मुस्लिम आबादी बहुल सीट किशनगंज से आया है। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के उम्मीदवार कमरूल हुदा को जीत मिली है। 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 के आम चुनाव में एआईएमआईएम के उम्मीदवार को शानदार वोट मिला था, जिससे साफ हो गया था कि सीमांचल में यह पार्टी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और इस उपचुनाव में ओवैसी की पार्टी ने बिहार विधानसभा में इंट्री कर ली।

किशनगंज सीट सीट पर एनडीए की तरफ से भाजपा की स्वीटी सिंह चुनाव मैदान में थीं जबकि कांग्रेस ने मो. जावेद की मां साइदा बानो को टिकट दिया था। चुनाव में भाजपा दूसरे स्थान पर रही, जिससे साफ है कि यहां वोटों का जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है।

इस चुनाव में जदयू को काफी नुकसान हुआ है क्योंकि उसे अपनी जीती हुई तीन सीटें गंवानी पड़ी है और वह भी तब हुआ है जब भाजपा के अध्यक्ष यह कह चुके थे कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा होंगे।

इस परिणाम से वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू की बारगेनिंग पावर कम होगी, क्योंकि भाजपा को यह कहने का मौका मिल गया है कि उपचुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है। दूसरी तरफ, इस चुनाव से नीतीश कुमार की अपनी छवि की चमक भी कुछ कम हुई है। इस परिणाम से साफ है कि लोगों में नीतीश कुमार को लेकर नाराजगी है और इसकी कई वजहें हैं।

पटना के वरिष्ठ पत्रकार दीपक मिश्रा कहते हैं, “जून-जुलाई में चमकी बुखार से 100 से ज्यादा बच्चों की अकाल मौत और फिर बाढ़ से निबटने में सरकार की लाचारी से लोगों में काफी गुस्सा है। ये परिणाम इसी की तरफ इशारा कर रहा है। इस परिणाम के बाद भाजपा, जदयू पर हावी होने लगेगी और जदयू पहले की तरह आक्रामक होकर सीटों का मोलभाव नहीं कर पाएगा। ये परिणाम नीतीश कुमार के लिए चेतावनी है।”

क्या राजद को खुश होना चाहिए?

इस उपचुनाव में राजद ने दो सीटें अपने नाम कर ली है। ऐसा तब हुआ, तेजस्वी यादव व पार्टी के अन्य नेता बिल्कुल निष्क्रिय थे और महागठबंधन की सहयोगी पार्टियां अलग- अलग राग अलाप रही थीं। महागठबंधन की पार्टियों में इतना मतभेद था कि दो सीटों पर राजद के खिलाफ ही उन्होंने उम्मीदवार उतार दिए थे। अतः कहा जा सकता है कि लोगों का वोट राजद के लिए नहीं था, बल्कि जदयू के खिलाफ था, इसलिए राजद व महागठबंधन को खुश होने की जरूरत नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन कहते हैं,  “इस चुनाव परिणाम से राजद कार्यकर्ताओं का मनोबल जरूर बढ़ेगा, लेकिन इसे अगर राजद नेता 2020 के चुनाव परिणाम के संकेत के तौर पर देख रहे हैं, तो उन्हें सतर्क होने की जरूरत है। क्योंकि उपचुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव की छवि पेश नहीं करते हैं।”

वर्ष 2009 में 13 विधानसभा सीटों के लिए हुआ उपचुनाव इसका जीता-जागता उदाहरण है। वर्ष 2009 में बिहार की 13 सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे। इनमें से एनडीए 9 सीटें हार गई थी, लेकिन इसके एक साल बाद ही बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ, तो एनडीए ने 206 सीटों (जदयू को 115 और भाजपा को 91 सीटें) पर जीत दर्ज कर दोबारा सरकार बनाई थी।

ओवैसी की पार्टी की जीत के मायने

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने किशनगंज सीट से जीत दर्ज कर बिहार में अपना खाता खोला है। यहां भाजपा की उम्मीदवार स्वीटी सिंह दूसरे नंबर पर रहीं जबकि वर्ष 2015 के चुनाव में जीत दर्ज करनेवाली तीसरे नंबर पर चली गई।

इस जीत ने राजद व कांग्रेस दोनों को धक्का पहुंचाया है। यहां करीब 60 फीसदी आबादी मुस्लिम है और इस आबादी ने इन पार्टियों की जगह वहां ओवैसी की पार्टी को चुना है।

एआईएमआईएम के टिकट पर किशनगंज से जीत दर्ज करनेवाले कमरूल हुदा ने न्यूज़क्लिक के साथ बातचीत में कहा, “किशनगंज में हमारी लड़ाई दो ताकतों के साथ थी। एक तरफ साम्प्रदायिक ताकत थी, तो दूसरी तरफ परिवारवाद की ताकत। दोनों ही पार्टियों ने डराने की राजनीति की है। इन दोनों को यहां की जनता ने धूल चटा दिया है।”

दूसरी तरफ, सीमांचल में एनआरसी का मुद्दा भी काफी अहम था। भाजपा के नेता सीमांचल में एनआरसी लागू करने की लगातार मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने किशनगंज में इस मुद्दे को नहीं छुआ, लेकिन एआईएमआईएम ने इसी मुद्दो को केंद्र में रख कर चुनाव प्रचार किया। इसका भी फायदा मिला।

कमरूल हुदा कहते हैं, “एनआरसी को सबसे पहले कांग्रेस ने ही लागू करने का फैसला किया था। ऐसे में अगर पूरे हिन्दुस्तान में या बिहार में एनआरसी लागू होता है, तो इस पर जबाव केवल असदुद्दीन ओवैसी ही दे सकते हैं।” इस परिणाम से उत्साहित एआईएमआईएम अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा।  

किशनगंज के परिणाम महागठबंधन के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं। बिहार के सीमांचलन में एक दर्जन से ज्यादा सीटें हैं।

एआईएमआईएम का सबसे अधिक फोकस सीमांचल की इन सीटों पर होगा। भाजपा भी यहां एनआरसी व दूसरे मुद्दों को उछाल कर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करेगी। ऐसे में सीधा मुकाबला भाजपा और एआईएमआईएम के बीच होगा। इसका नुकसान अंततः महागठबंधन को होगा।    

Bihar bye Elections
Nitish Kumar
jdu
BJP
All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen
Asaduddin Owaisi
Congress
NRC

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • पड़ताल: कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के दावे भ्रामक
    राज कुमार
    पड़ताल: कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के दावे भ्रामक
    15 Aug 2021
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अन्य देशों की तुलना में ज्यादा नागरिकों को बचाया है। ये काफी भ्रामक टिप्पणी है। क्योंकि प्रधानमंत्री कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे कि वो किसे “बचाया हुआ” मान रहे हैं। क्या उन…
  • विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    15 Aug 2021
    सरकार जी खेलों की दुनिया को पैसे की दुनिया से अलग ही रखते थे। वे जानते थे कि खिलाड़ी अपनी नैसर्गिक प्रतिभा से ही आगे बढ़ता है न कि सरकारी सहायता से। इसीलिए उन्होंने खेल में सरकारी मदद को सिर्फ़ खेल…
  • अजय कुमार
    कभी रोज़गार और कमाई के बिंदु से भी आज़ादी के बारे में सोचिए?
    15 Aug 2021
    75 साल पहले ही गुलामी से आजादी मिल गई। लेकिन जिसे असली आजादी कहते हैं क्या उसका एहसास भारत के ज्यादातर लोगों ने किया है?
  • आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    15 Aug 2021
    आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष का सबसे पवित्र अमृत यह किसान आंदोलन ही है जो संघ-भाजपा के विषवमन का सबसे बड़ा एंटीडोट है।
  • 75वीं सालगिरह के मौके पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम। तस्वीर में अजय सिंह (दाएं) अपनी जीवन साथी शोभा सिंह (बाएं) के साथ।
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: मर्द खेत है, औरत हल चला रही है
    15 Aug 2021
    आज आज़ादी की 74वीं सालगिरह है और हमारे कवि और पत्रकार अजय सिंह की 75वीं। 15 अगस्त, 1946 को बिहार के ज़िला बक्सर के चौगाईं गांव में अजय सिंह का जन्म हुआ। आज इतवार भी है, यानी मौका भी है और दस्तूर भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License