NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहारः 204 विद्यालयों के पास नहीं है अपना भवन, ज़मीन पर बैठकर बच्चे करते हैं पढ़ाई
बिहार के वैशाली ज़िले में ऐसे 204 विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। कुछ जगहों पर बच्चों को पेड़ के पास पढ़ाया जा रहा है तो कहीं सामुदायिक भवन में कक्षाएँ चल रही हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Dec 2021
Bihar
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: Firstpost

बिहार में शिक्षा का स्तर कैसा है यह किसी से छिपा नहीं है। यहां शिक्षकों और विद्याल भवनों की भारी कमी है जो चिंता की बात है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है। प्रदेश के वैशाली जिले में करीब 204 ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है जिससे छात्र-छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिला शिक्षा विभाग के उदासीन रवैये के चलते बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 204 ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है और उन्हें दूसरे स्कूल में टैग कर दिया गया है। कुछ विद्यालय रेंट और रेंट फ्री पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे विद्यालय जहां एक भवन में दो विद्यालय चल रहे है वहां समस्याएं अधिक हैं और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। निदेशक प्राथमिक शिक्षा के निर्देश के बावजूद जिला शिक्षा विभाग ऐसे स्कूल जो एक ही भवन में दो-दो संचालित हैं उनकी स्थित विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्षों से निदेशक की ओर से प्राथमिक शिक्षा जिला शिक्षा विभाग को पत्र जारी किया जा रहा है कि वैसे दो या दो से अधिक विद्यालय जो एक ही भवन में संचालित किए जा रहे हैं उनका प्रपत्र में प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें एक विद्यालय में समायोजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को अन्यत्र स्थान्तरित किया जा सके लेकिन इसी सूची नहीं भेजी जा रही है।

संसाधन का अभाव

जिला के आदर्श मध्य विद्यालय में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चकजगदीशपुर स्कूल को टैग किया गया है। इसके प्रधानाध्यापक संजय कुमार अखबार से कहते हैं कि शिक्षा विभाग को टैग करने की बजाए विद्यालय को इसी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जहां एक ही भवन में दो विद्यालय संचालित होते हैं वहां पहले तो उनके पास संसाधन का अभाव होता है। दूसरे एक ही कमरे में पांच वर्ग संचालित करने पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी अधूरी रह जाती है।

छोटे बच्चों के लिए परेशानी

सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार न्यूज़क्लिक से कहते हैं भगवानपुर प्रखंड के पडेढ़ा में नवसृजित विद्यालय और मटियारा विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है। दोनों विद्यालय महादलित बस्ती में है। मटियारा स्थित विद्यालय को सामूदायिक भवन में चलाया जा रहा है। पटेढा में स्थित विद्यालय को ब्रह्म स्थान के पास खुले में चलाया जा रहा है। इस विद्यालय का भी अपना भवन नहीं है। इस संबंध में हमने शिक्षा मंत्री को भी लिखा था लेकिन इस पर अब तक काम नहीं हुआ है। जिला स्तर पर भी अधिकारियों को संबंध में लिखा गया था लेकिन विभाग की ओर से कोई इसका जवाब भी नहीं आया। उन्होंने कहा कि हाल में वैसे विद्यालय जिनका अपना भवन नहीं है उनके बच्चों को पास के विद्यालय में समायोजित करने की बात सामने आई है लेकिन विद्यालय के दूर होने से छोटे बच्चों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी और वे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

ज़िला शिक्षा विभाग से नहीं मिली रिपोर्ट

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2017 में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया था कि जहां एक भवन में दो या दो से अधिक विद्यालय संचालित हैं उन्हें एक विद्यालय में समायोजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए। इस निर्देश के बाद तत्कालीन शिक्षा निदेशक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से ऐसे सभी विद्यालय को लेकर रिपोर्ट मांगा था जहां एक भवन में दो विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पांच बार पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगा लेकिन जिला शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजा गया। इस वर्ष भी निदेशक प्राथमिक शिक्षा अमरेंद्र प्रसाद ने पत्र जारी कर एक सप्ताह का समय दिया था जो पूरा हो गया लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

भवन विहीन विद्यालय की अधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्र में

रिपोर्ट के अनुसार वैशाली जिले के 16 प्रखंड हैं जिनके कुल 204 विद्यालय भवन विहीन हैं। इनमें 183 विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में है जबकि 19 विद्यालय शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। 183 विद्यालय पूर्ण रूप से भवन विहीन हैं। जबकि अन्य विद्यालय अंडर कंस्ट्रक्शन, रेंट और फ्री रेंट पर संचालित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा भवन विहीन विद्यालय राघोपुर प्रखंड में है जहां इसकी संख्या 35 है। दूसरे स्थान पर जंदाहा प्रखंड है जहां 25 विद्यालय भवन विहीन हैं। हाजीपुर में 19 विद्यालय भवन विहीन हैं जबकि भगवानपुर प्रखंड में 11 विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है। वहीं देसरी में 4 जबकि चेहराक्ला में 9 और गोरौल में 15 विद्यालय भवन विहीन हैं। उधर महुआ प्रखंड में 16, महनार में 5, पातेपुर में 14, लालगंज में 13, राजापाकर में 2, जंदाहा में 24, सहदेई बुजुर्ग में 16, बिददुपुर में 11 और वैशाली में 7 विद्यालय भवन विहीन हैं।

ज्ञात हो कि 2020 की एनएसओ की रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्यों में बिहार नीचे से तीसरे स्थान पर है। इसका शिक्षा दर 70.9 प्रतिशत हो जो कि राष्ट्रीय दर 77.7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत कम है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में महिला शिक्षा दर 58.7 प्रतिशत है शहरी क्षेत्र में इसका प्रतिशत 75.9 है। पुरूष शिक्षा दर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों में अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र में यह दर 78.6 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्र में 89.3 प्रतिशत है।

Bihar
Bihar Schools
Poor Schools
education crisis
Nitish Kumar
Nitish Kumar Government

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा

बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक कांड मामले में विपक्षी पार्टियों का हमला तेज़

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

उत्तराखंड: तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़े किराये के कारण छात्र कॉलेज छोड़ने को मजबूर

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License