NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट रहे हैं। 
एम.ओबैद
11 Apr 2022
bhagalpur
फ़ोटो साभार: हिंदुस्तान

बीमारी हर तरीके से इंसान को परेशान कर देती है। उसमें भी अगर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो तो पैसों की बर्बादी के साथ साथ जिंदगी का सुकून चला जाता है। इन जैसी बीमारियों में न सिर्फ मरीज बल्कि परिजन भी हर तरीके से टूट जाते हैं और बिखर जाते हैं। खासकर इंसान जिस क्षेत्र में रहता है वहां पर यदि कैसर का इलाज न हो तो और मुश्किल खड़ी हो जाती है। लोगों को अपने मरीज को लेकर उन शहरों के चक्कर काटने होते हैं जहां इसके इलाज के लिए अस्पताल होता है। ऐसे में मामला पूरी तरह टिक जाता है पैसों पर, पैसा नहीं तो इलाज नहीं। बात करते हैं बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 जिलों की जहां के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुजफ्फरपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट रहे हैं। इन शहरों में वही लोग इलाज के लिए जा पाते हैं जिनके पास पैसा है वर्ना गरीब तो इलाज कराने की सोच भी नहीं सकते।

बता दें कि करीब तीन साल पहले बिहार के भागलपुर में कैंसर अस्पताल (टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर) खोले जाने को लेकर राजधानी पटना में चर्चा तेज हुई थी लेकिन वह आज तक नहीं बन सका है। उसकी वजह सिर्फ यही है कि इस अस्पताल का नक्शा अब तक तैयार नहीं हो पाया है। यह नक्शे के पेच में उलझकर अटका पड़ा है। हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय स्तर पर पांच बार नक्शा बनाया गया लेकिन हर बार खारिज कर दिया गया। आलम यह है कि बीते दो साल से पटना भी कैंसर अस्पताल के लिए जरूरी नक्शे को पास नहीं करवा पाया। 

25 करोड़ की लागत से 2500 वर्गफीट पर बनना है सेंटर

भागलपुर स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (जेएलएनएमसीएच) की मुख्य बिल्डिंग के पीछे लगभग 2500 वर्गफीट पर करीब 25 करोड़ की लागत से टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर बनाया जाना है और इस सेंटर को केंद्र सरकार के सहयोग से परमाणु ऊर्जा विभाग व टाटा मेमोरियल द्वारा मिलकर बनाया जाना है। इस सेंटर को बनाये जाने को लेकर पटना में 9 जनवरी 2019 को तत्कालीन संयुक्त सचिव, बिहार व बीएमएसआईसीएल के एमडी और जेएलएनएमसीएच के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर भी किया था।

पांच बार नक्शा हो चुका है खारिज

एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद इस कैंसर अस्पताल को बनाने के लिए जरूरी नक्शा पास कराने का प्रयास शुरू हुआ। जेएलएनएमसीएच प्रशासन ने पांच बार नक्शा बनवाकर एईआरबी (एटमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड) को भेजा लेकिन एक-एक करके ये पांच नक्शे 24फरवरी 2020 तक एईआरबी द्वारा खारिज कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने भी दिया था आश्वासन

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने जब टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर के नक्शों को खारिज करने का मामला पहुंचा तो उन्होंने निजी आर्किटेक्ट द्वारा नक्शा बनवाकर पास कराए जाने का आश्वासन दिया था लेकिन तब से लेकर अबतक करीब दो साल बीत चुके हैं। नक्शा पास होने की बात तो दूर इसे बनवाकर अब तक अस्पताल को नहीं भेजा गया है। 

स्वास्थ्य विभाग को भी लिखा गया पत्र

अस्पताल प्रशासन ने प्रधान सचिव से लेकर बीएमएसआईसीएल तक के आला अधिकारियों के साथ बैठक में इसके बारे में बताया तो तीन बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र भी लिखा गया। फिर भी विभाग की ओर से इस मामले में आगे कोई कदम नहीं उठाया गया है। 

हर माह 30 से 35 कैंसर के मरीज हो रहे चिन्हित

भागलपुर स्थित जेएलएनएमसीएच अस्पताल के स्त्री एवं प्रसव रोग, कान, नाक व गला रोग, सर्जरी, मेडिसिन के ओपीडी में हर माह 30 से 35 की संख्या में मुख, गला, ब्रेस्ट, गर्भाशय, मलद्वार, लीवर, स्किन, ब्लड कैंसर के मरीज चिह्नित हो रहे हैं। सर्जन डॉ. पंकज कुमार अखबार को बताते हैं कि सर्जरी विभाग में तो मलद्वार के कैंसर की सर्जरी की सुविधा भी है, लेकिन ऑपरेशन के बाद इसके मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए पटना-मुंबई जाना ही पड़ेगा। वहीं दूसरे कैंसर के मरीजों को पटना-मुंबई में ही इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।

जेएलएनएमसीएच के अधीक्षक डॉ.असीम कुमार दास कहते हैं, 'टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर को लेकर एक बार फिर पटना को पत्र भेजा जाएगा। प्रधान सचिव के समक्ष नक्शे की समस्या को रखा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द नक्शा पास कराके सेंटर के निर्माण को शुरू कराया जा सके।'

15 जिलों की हो चुकी है स्क्रीनिंग

राज्य में कैंसर रोगियों की पहचान व उनके इलाज के लिए जून 2021 से जनवरी 2022 तक नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पटना, भागलपुर समेत 15 जिलों में कैंसर स्क्रीनिंग की गयी थी। इनमें 1,150 संदिग्ध लोग चिह्नित किए गए थे। लेकिन, अंतिम रूप से नालंदा समेत 15 जिलों में कैंसर के कुल 320 नए रोगी मिले। नालंदा में 15 में से 11 महिला रोगी हैं। इस आंकड़े ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी। 

ज्ञात हो कि नए मिले कैंसर के मरीजों का मुजफ्फरपुर होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में इलाज किया जा रहा है। बिहार के 15 जिलों में हुई कैंसर स्क्रीनिंग के बाद इसी महीने यानी अप्रैल से शेष राज्य के अन्य 23 जिलों में यह अभियान चलाने की योजना बनायी गयी।

इन जिलों में हुई थी कैंसर स्क्रीनिंग

बिहार के औरंगाबाद, भोजपुर, भागलपुर, दरभंगा, मधुबनी, वैशाली, गया, जहानाबाद, नालंदा, मुजफ्फरपुर, सुपौल, सीवान, बक्सर, समस्तीपुर व पटना जिले में कैंसर स्क्रीनिंग की गई थी।

शुरूआत में पहचान होने पर इलाज संभव

पिछले महीने रैंकिंग की रिपोर्ट आने के बाद कैंसर स्क्रीनिंग ऑफिसर डॉ. सूर्या एस. भारती ने हिंदुस्तान को बताया था कि कैंसर जैसी बीमारियों में स्क्रीनिंग का बहुत अहम रोल है। शुरुआती चरण में ही इसकी पहचान होने पर काफी हद तक इलाज संभव है। पहले यह दर्दरहित रहता है। इस कारण लोग ध्यान नहीं देते हैं। बाद में यह बीमारी जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, दर्द व तकलीफ परवान चढ़ता जाता है। 15 जिलों की स्क्रीनिंग में ओरल (मुख) कैंसर के 500, स्तन कैंसर के ढाई सौ व सर्वाइकल (बच्चेदानी) कैंसर के 400 संदिग्ध मिले थे।

100 से अधिक तरह के हो सकते हैं कैंसर

अमूमन लोग ओरल (मुख), ब्लड, ब्रेस्ट, सर्वाइकल कैंसर को ही जानते हैं लेकिन 100 से अधिक तरह के कैंसर हो सकते हैं। इनमें पेट, अग्नाशय, हड्डी, कोलोन, वृषण, प्रोस्टेट, स्किन (चर्म), लंग(फेंफड़ा), लिंफोमा व अन्य प्रकार के हो सकते हैं। कैंसर के मुख्य लक्षण में अचानक से बिना वजह वजन कम होना, अत्यधिक थकान रहना, त्वचा या शरीर में कहीं भी गांठ, त्वचा में अचानक से बदलाव, तेज दर्द व अन्य प्रकार के लक्षण हैं।

ये भी पढ़ें: बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

Bihar
Bhagalpur
Bhagalpur Cancer Hospital
Nitish Kumar
Bihar Health Care Facilities
Health Sector

Related Stories

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

बिहारः पिछले साल क़हर मचा चुके रोटावायरस के वैक्सीनेशन की रफ़्तार काफ़ी धीमी

कोरोना महामारी अनुभव: प्राइवेट अस्पताल की मुनाफ़ाखोरी पर अंकुश कब?

बिहारः मुज़फ़्फ़रपुर में अब डायरिया से 300 से अधिक बच्चे बीमार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

लोगों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है फ्लोराइड युक्त पानी

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश: सागर से रोज हजारों मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर! 

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन


बाकी खबरें

  • climate change
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: धरती एक दावानल की चपेट में आने जा रही है
    11 Aug 2021
    कुछ साल पहले तक तो जलवायु परिवर्तन को एक सैद्धांतिक बात कहकर टाल दिया जाता था लेकिन अब हक़ीक़त यह है कि जलवायु परिवर्तन का असर हमारे रोज़मर्रा के जीवन में दिखाई देने लगा है।
  • SOCIALISM
    प्रभात पटनायक
    बराबरी और किल्लत: कैसे समाजवाद ने पूंजीवाद को पछाड़ा
    11 Aug 2021
    सामान के लिए उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लगना, समाजवादी उत्पादन व्यवस्था की अकुशलता को नहीं, बल्कि इन समाजवादी समाजों की बहुत ही समतावादी प्रकृति को ही दिखाता था।
  • AIDWA PROTEST
    असद रिज़वी
    अध्ययन: स्मार्ट फ़ोन, इंटरनेट और बढ़ती फ़ीस इस सबने ग़रीब मेहनतकशों के बच्चों को पीछे धकेला
    11 Aug 2021
    अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) ने कोविड-19 के दौरान प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा पर पड़े नकारात्मक प्रभाव पर एक अध्ययन किया है। अध्ययन में सामने आया है कि सुविधाओं की कमी और ख़राब आर्थिक हालत के…
  • पीपल्स डिस्पैच
    थाईलैंडः पुलिस की कार्रवाई के बावजूद "कार" रैली में हज़ारों लोग शामिल हुए
    11 Aug 2021
    प्रयुत चान-ओ-चा की सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के कुप्रबंधन के ख़िलाफ़ गुस्साए हज़ारों लोगों ने 2020 में थम्मासैट विश्वविद्यालय के विरोध के एक साल पूरे होने पर रैली निकाली।
  • सुभाष गाताडे
    जब सार्वजनिक हित के रास्ते में बाधा बनती आस्था!
    11 Aug 2021
    अगर हम अपने ही हालिया इतिहास के पन्नों को पलटें तो हमें देश के अलग-अलग भागों से ऐसी कई मिसालें मिल सकती हैं कि किस तरह लोगों ने आपसी सूझबूझ से आस्था के सवाल को सार्वजनिक हित के मातहत करने में संकोच…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License