NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार चुनावः वामपंथ को नया जीवन
बिहार विधानसभा चुनाव-2020 ने वामपंथ को जो नया जीवन दिया है, उसने देश में लंबे समय से अवरुद्ध वामपंथ के पुनर्जीवन की संभावना का दरवाज़ा खोल दिया है।
अजय सिंह
03 Dec 2020
वामपंथ

जो लोग भारत में वामपंथ का मृत्युलेख अक्सर लिखते रहे हैं, उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव-2020 के नतीज़ों से गहरा सदमा पहुंचा है। इस चुनाव में वामपंथ ने, यानी कम्युनिस्ट पार्टियों ने—ख़ासकर भाकपा-माले (लिबरेशन) ने—जो महत्वपूर्ण क़ामयाबी हासिल की है, उसने ‘विचारधारा का अंत’ और ‘वामपंथ का अंत’ की माला जपने वालों को ख़ामोश कर दिया है।

बिहार विधानसभा चुनाव-2020 ने वामपंथ को जो नया जीवन दिया है, उसने देश में लंबे समय से अवरुद्ध वामपंथ के पुनर्जीवन की संभावना का दरवाज़ा खोल दिया है। इस चुनाव ने कार्ल मार्क्स के इस कथन को फिर सही साबित किया कि जब विचार जनता के बीच पैठ बना लेते हैं, तब वे भौतिक ताक़त में बदल जाते हैं।

बिहार में भाकपा-माले को उल्लेखनीय सफलता मिली है। साथ ही सीपीआई और सीपीआई(एम) को मज़बूती मिली है। वामपंथ की यह जीत दरअसल सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय की ताक़तों की जीत है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ वामपंथ का गठबंधन रंग लाया।

अभी दिल्ली में आंदोलनकारी किसानों का जो जमावड़ा लगा हुआ है और जिसकी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार घिरी हुई दिखायी दे रही है, उसके पीछे वामपंथियों का भी अहम रोल है। देश में इस समय जगह-जगह जो किसान आंदोलन शुरू हो रहे और गति पकड़ते नज़र आ रहे हैं, उनके पीछे वामपंथियों की हस्तक्षेपकारी भूमिका को देखा जा सकता है।

देश में इस समय तीन तरह के आंदोलन दिखायी दे रहे हैं। एकः केंद्र सरकार सारे श्रम क़ानूनों को ख़त्म कर रही है और मज़दूरों व श्रमजीवियों को बंधुआ और ग़ुलाम बना देने पर आमादा है। इसके ख़िलाफ़ मज़दूर वर्ग का आंदोलन चल रहा है। दोः धर्म के आधार पर नागरिकता तय करनेवाले विभाजनकारी नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ आंदोलन, जिसमें महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका क़ाबिलेग़ौर रही है। तीनः खेती-किसानी को बड़े पूंजीपति समूहों को सौंप देने और कृषि व्यवस्था का कॉरपोरेटीकरण करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का आंदोलन। ये आंदोलन शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक ढंग से चल रहे हैं।

इन तीनों आंदोलनों के पीछे वामपंथियों की भूमिका और असर को साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। वामपंथियों और अन्य लोकतांत्रिक ताक़तों की कोशिश है कि इन आंदोलनों को केंद्र की फ़ासिस्ट हिंदुत्ववादी नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की शक़्ल दी जाये, ताकि वह लोकतांत्रिक जन मुहिम का रूप ले सके। बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा-माले और अन्य दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को मिली क़ामयाबी ने इस प्रक्रिया को तेज़ किया है।

बिहार विधानसभा चुनाव-2020 में राष्ट्रीय जनता दल-कांग्रेस-वाम महागठबंधन को बेशक जीत नहीं मिली और वह सरकार नहीं बना पाया। महागठबंधन और भारतीय जनता पार्टी वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच हार-जीत का अंतर बहुत कम—बेहद मामूली—रहा। लेकिन बिहार में लड़ी गयी क़ाबिलेतारीफ़ लड़ाई ने देश को यह मज़बूत संदेश ज़रूर दिया कि नरेंद्र मोदी और भाजपा को कड़ी टक्कर दी जा सकती है और उन्हें धूल चटाया जा सकता है। बिहार ने बता दिया कि विपक्ष है, वह मौजूद है, और उसमें दम-ख़म है। इस काम में वामपंथ ने अपना रोल बख़ूबी निभाया।

(लेखक वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Bihar election 2020
left parties
CPI
CPIM
CPI-ML
Narendra modi
CAA
Congress
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • अरुण कुमार त्रिपाठी
    विचार: योगी की बल्ले बल्ले, लेकिन लोकतंत्र की…
    27 Mar 2022
    अंतरराष्ट्रीय पूंजी ने आधुनिक किस्म के हिंदुत्व के साथ एक तालमेल बिठा लिया है। अब इसे मनुवादी कहना और ब्राह्मणवादी कहना एकदम से सटीक नहीं बैठता। इसमें सत्ता में भागीदारी का पूरा इंतजाम किया गया है।
  • international
    न्यूज़क्लिक टीम
    रूस-यूक्रेन युद्धः क्या चल रहा बाइडन व पुतिन के दिमाग़ में
    26 Mar 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने युक्रेन युद्ध के एक महीने होने के बाद चल रहे दांवों पर न्यूज़ क्लिक के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। इसमें रूस की रणनीति के साथ-साथ…
  • रवि शंकर दुबे
    IPL 2022:  नए नियमों और दो नई टीमों के साथ टूर्नामेंट का शानदार आगाज़
    26 Mar 2022
    आईपीएल 2022 का आगाज़ हो चुका है, इस बार कई नियमों में बदलाव किए गए हैं तो लखनऊ और गुजरात की टीमों ने भी एंट्री मार ली है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के लिए टूर्नामेंट बेहद रोचक होने वाला है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या RSS योगी में देखता है मोदी का उत्तराधिकारी
    26 Mar 2022
    यूपी में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है. भारतीय जनता पार्टी-शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियो में अब उनकी बराबरी कराने वाला कोई नहीं!
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रेलवे में 3 लाख हैं रिक्तियां और भर्तियों पर लगा है ब्रेक
    26 Mar 2022
    एक तरफ बेरोज़गार युवा दर-दर भटक रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों में इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां, वह भी केवल एक विभाग में, चौंकाने वाली है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License