NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार चुनाव : क्या हैं ताज़ा राजनीतिक समीकरण, किसके पास कितनी सीट ? ब्योरा और विश्लेषण
अब जब बिहार में सभी गठबंधनों ने सीटों का बंटवारा कर लिया है, तो आइए एक नज़र डालते बिहार चुनाव की ताज़ा राजनीतिक तस्वीर पर
मुकुंद झा
10 Oct 2020
बिहार चुनाव

बिहार चुनाव को लेकर जो तस्वीर अभी तक धुंधली नज़र आ रही थी, वो अब लगभग साफ़ हो गई। अब सभी दलों की रणनीति और गठबंधनों की स्थति साफ हो गई है। इन सब में बहुत समय लगा लेकिन अब सत्ताधारी गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए ) भी अपने नए साथी के साथ तैयार है, वहीं मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी अपने सहयोगियों के साथ महागठबंधन बना मैदान में है। इसके आलावा भी कई दल और गठबंधन मैदान में हैं।

दोनों मुख्य गठबंधन के आलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी ) ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के साथ चार अन्य सहयोगी के साथ ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट बनाया है। इसके अलावा पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (जाप) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा ) भी मैदान में हैं। इन सबके अलावा बिहार विधनसभा चुनाव में इसबार एक नए दल प्लूरल्स ने भी एंट्री की और उन्होंने अपने उम्मीदवार सभी 243 सीटों पर उतरने का एलान किया। इनकी नेता पुष्पम प्रिया ने खुद को सीएम उम्मीदवार के तौर पर भी पेश किया है।

इसबार बिहार में औपचारिक तौर पर घोषित सीएम पद के चार उम्मीदवार हैं, एनडीए से नीतीश कुमार, महागठबंधन से तेजस्वी यादव, ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट उपेंद्र कुशवाहा और अपनी प्लूरल्स पार्टी की ओर से खुद का नाम घोषित करने वालीं पुष्पम प्रिया।

वैसे इनके आलावा लोजपा नेता भी दबे स्वर में ही चिराग को बिहार का सीएम बताते हैं और जाप के लोग भी पप्पू यादव को सीएम बनाना चाहते है लेकिन अभी इन दोनों ने अपने अपने सीएम उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

इसबार का चुनावी गठबंधन किसी भी दल के लिए आसान नहीं था, कोई भी गठबंधन अपने साथियो को लेकर निश्चित नहीं था। राजद के नेतृत्व में बने महागठबंधन से पहले आरएलएसपी बाहर हुई और जिस दिन गठबंधन के एलान हुए उस दिन वीआईपी ने उनका हाथ छोड़ दिया। इसी तरह सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख सहयोगी लोजपा ने भी एनडीए का साथ छोड़ अलग रास्ता अपनाया। हालांकि चिराग को मानने की खूब कोशिश हुई परन्तु उन्होंने सीधे तौर पर नीतीश कुमार के नेतृत्व को मैंने से ही इंकार किया।

इसबार का बिहार चुनाव अपने आप में रोमांचक है हालंकि शुरआत में इस चुनाव को लेकर उतना उत्साह न दिख रहा था लेकिन जैसे जैसे मतदान का समय नज़दीक आ रहा है वैसे वैसे चुनावी सरगर्मी परवान चढ़ रही है। अब जब बिहार में सभी गठबंधनों ने अपने सीट शेयरिंग का एलान कर दिया है, तो आइए एक बार नज़र डालते बिहार चुनाव के राजनीतिक तस्वीर पर -

एनडीए का क्या है हाल

एनडीए की बात करें तो यह गठबंधन सत्ता में होने के बाद भी अपने गठबंधन के स्वरूप को लेकर अंत तक अनिश्चित ही था, जबकि कथित तौर पर इनके पास अभी देश के सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी और उसके सर्वमान्य नेता नरेंद्र मोदी, मीडिया द्वारा बनाए गये चुनावी चाणक्य अमित शाह और बिहार में पिछले 15 वर्षों से मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार थे। देरी से ही सही इन्होंने अपने गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ की। जिसमें विधनसभा की कुल 243 में से 122 सीट जदयू को मिली जबकि बीजेपी ने खुद 121 पर दावा किया। हालांकि इसमें दो छोटे दलों जीतनराम मांझी की पार्टी हम और मुकेश साहनी की वीआईपी को भी समायोजित किया गया। हम को जदयू ने अपने कोटे से सात तो वहीं वीआईपी को बीजेपी ने 11 सीट दी।

एनडीए की फाइनल तस्वीर इस प्रकार रही जदयू- 115 सीट, बीजेपी- 111, वीआईपी- 11 और हम- 7 सीटों पर मैदान में है। लेकिन यह गठबंधन अपने प्रमुख सहयोगी लोजपा को अपने साथ नहीं रख सका और उसने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वो “बीजेपी से बैर नहीं-नीतीश तेरी ख़ैर नहीं” के तहत चुनाव लड़ रही है। इसका सीधा नुकसान एनडीए को होता दिख रहा है।

महागठबंधन में किसको क्या मिला

महागठबंधन ने सबसे पहले अपने सीट शेयरिंग का मामला सुलझाया हालांकि उनके लिए भी यह इतना आसन नहीं था। उनके भी कई पुराने सहयोगियों ने उनका साथ छोड़ अलग रास्ता अपनाया। आरएलएसपी ने नया गठबंधन बनाया तो उनकी सहयोगी रही वीआईपी ने पलटी मारते हुए एनडीए का दामन थाम लिया। इसके बाद भी राजद, कांग्रेस ने तीन प्रमुख वाम दलों सीपीआई (भाकपा), सीपीआई-एम (माकपा), सीपीआई-एमएल (भाकपा माले) के साथ तेजस्वी के नेतृत्व में महागठबंधन बनाया।

इस गठबंधन में राजद- 144 , कांग्रेस- 70 ,भाकपा माले- 19, सीपीआई- 6 और सीपीआईएम- 4 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसबार राजद ने लोकसभा की गलती को सुधरते हुए वाम दलों को अपने गठबंधन के लिए तवज्जो दी है।

ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट में कौन-कौन

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण के नामांकन के आखिरी दिन गुरुवार को आरएलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा, एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने छह दलों के नए मोर्चे की घोषणा की। इस मोर्चे से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को बनाया। इस मोर्चे का नाम ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट रखा गया है, जिसमें कुल छह पार्टियां शामिल हैं और इस मोर्चे के संयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव को बनाया है। इन छह दलों में रालोसपा, एआईएमआईएम, बसपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक और जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट शामिल है। इनके बीच अभी सीटों की संख्या को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।

ओवैसी ने ट्वीट में कहा, "हम बिहार चुनाव "ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट" के तहत लड़ेंगे...। उपेंद्र कुशवाहा, देवेंद्र प्रसाद यादव (SJDD), रामजी गौतम (BSP) और संतोष पांडेय (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के साथ इसी सिलसिले में हमने पटना में प्रेस कांफ्रेंस की। हम न सिर्फ भाजपा को हराएंगे... बल्कि बिहार के हर मज़लूम की एक बेबाक आवाज़ बनेंगे...।"

लोजपा की रणनीति

लोजपा ने साफतौर पर नीतीश कुमार के नेतृत्व को मानने से इंकार किया और उनके सुशासन के दावों पर सवाल उठाए। हालंकि उन्होंने कभी भी बीजेपी को लेकर कुछ नहीं कहा। उनके नेता चिराग पासवान को बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व अमित शाह, जेपी नड्डा और नरेंद्र मोदी ने भी मनाने की कोशिश की पर वो नहीं माने और खुद को बिहार एनडीए से बाहर कर लिया हालांकि वो अभी भी दिल्ली में एनडीए का हिस्सा हैं। ये लोजपा ने पहली बार नहीं किया वो इससे पहले भी 2005 में केंद्र में तो यूपीए का हिस्सा थे परन्तु बिहार में अकेला चुनाव लड़ा था। बस फर्क इतना है तब यूपीए थी और अब एनडीए और तब दिवंगत रामविलास पासवान के हाथों में लोजपा थी और अब उनके पुत्र चिराग के हाथों में लोजपा की सारी शक्ति है। हालांकि लोजपा ने पहले 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था लेकिन अब कहा जा रहा है वो बीजेपी के सामने अपने उम्मीदवार नहीं देंगे।

पप्पू यादव का क्या

पप्पू यादव अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी  (जाप) के साथ मैदान में है, कई कोशिश के बाद भी वो किसी गठबंधन में फिट नहीं हुए। पहले उम्मीद की जा रही थी की वो कुशवाह या चिराग के साथ जा सकते है परन्तु अब वे अकेले ही चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने पहले चरण के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है।

पुष्पम प्रिया फैक्टर

पुष्पम प्रिया अचानक ही चुनाव से पहले चर्चा में आईं जब उन्होंने अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से खुद को सीएम उम्मीदवार घोषित किया। उसके बाद से लगतार सोशल मीडिया के माध्यम से और बिहार दौरे के माध्यम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला किया। उन्होंने प्लूरल्स नाम की पार्टी बनाई है। वो लगातार दावा कर रही हैं कि उनके साथ बिहार के नौजवान हैं और वो इसी के दम पर 243 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार को मैदान में उतार रहीं हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि ये इतना आसान नहीं है।

Bihar election 2020
NDA
Nitish Kumar
jdu
BJP
AIMIM
RLSP
Jan Adhikar Party
SJDD
BSP
Pushpam Priya
Bihar Election Update

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License