NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: नए पुल की एप्रोच रोड धंसने पर 'सुशासन' की हुई किरकिरी तो ग्रामीणों पर ताबड़तोड़ एफआईआर
एप्रोच सड़क धंसने की घटना के बाद ज़िम्मेदारी लेने के बदले स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों ने अलग-अलग मामलों में ग्रामीणों पर अब तक तीन एफआईआर दर्ज करा दी हैं। इसमें पहली एफआईआर वीडियो के जरिये आगाह करने वाले संजय राय के खिलाफ दर्ज की गई।
साकेत आनंद
18 Jul 2020
बिहार

बिहार के गोपालगंज जिले में सत्तरघाट पुल की एप्रोच सड़क टूटने की घटना से नीतीश कुमार के 'सुशासन' सरकार की इतनी किरकिरी हुई कि अब ग्रामीणों पर ही एक के बाद एक एफआईआर दर्ज किए जा रहे हैं। 15 जुलाई को बिहार के एक टूटे हुए 'पुल' की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। खबर चली कि गंडक नदी पर हाल ही में 263 करोड़ रुपये की लागत से बना सत्तरघाट पुल टूट गया है, लेकिन राज्य सरकार ने इसका खंडन किया। जिस पुल की तस्वीर वायरल हुई, वो सत्तरघाट पुल के पहुंच पथ (एप्रोच रोड) पर बने छोटे पुल के किनारे का हिस्सा है।

बिहार सरकार लगातार दावा कर रही है कि कोई पुल नहीं टूटा है, बल्कि एप्रोच सड़क धंसी है। ये सही है कि पुल की संरचना नहीं गिरी है, लेकिन तस्वीरों में साफ है कि सड़क का जो कटाव हुआ है वो पुल के अंदर तक है। पुल से लगा जो हिस्सा धंसा है, इसको लेकर स्थानीय लोग कई दिनों से प्रशासन को आगाह कर रह रह थे। गंडक नदी में लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण एप्रोच सड़क पर दबाव बढ़ रहा था। जिस दिन यह घटना हुई, उसके एक दिन पहले बैकुंठपुर प्रखंड के फैजुल्लाहपुर पंचायत के मुखियापति संजय राय ने वीडियो बनाकर प्रशासन को इस पर कदम उठाने को कहा था।

Sanjay Rai.JPG

इसे पढ़ें : बिहार में पुल पर बवाल: 264 करोड़ की लागत से बने पुल की संपर्क सड़क टूटी

एप्रोच सड़क धंसने की घटना के बाद जिम्मेदारी लेने के बदले स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों ने अलग-अलग मामलों में ग्रामीणों पर अब तक तीन एफआईआर दर्ज करा दी हैं। इसमें पहली एफआईआर वीडियो के जरिये आगाह करने वाले संजय राय के खिलाफ दर्ज की गई। उनके खिलाफ स्थानीय ठेकेदार ने निर्माण कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज कराया है।

संजय कहते हैं, "इस घटना के दो-तीन दिन पहले से हमलोग पुल बनाने वाली कंपनी के स्टाफ और प्रशासन को जानकारी दे रहे थे कि मरम्मत करवाइए नहीं तो यह टूट जाएगा। कोई नहीं सुना तो मैंने 14 जुलाई को वीडियो बनाकर प्रशासन सहित सभी जगह उसे भेज दिया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे पुल टूट गया।"

बता दें कि सत्तरघाट पुल करीब 1.44 किलोमीटर लंबा है, जो गंडक नदी की मुख्यधारा पर बनाया गया है। साल 2012 में पुल का शिलान्यास होने के बाद इस साल पिछले महीने यह आम जनता के लिए बनकर तैयार हुआ। इस पुल के एप्रोच सड़क पर 18 मीटर लंबे तीन छोटे-छोटे पुल भी बनाए गए हैं, जिनमें से एक पुल का पहुंच पथ यानी संपर्क मार्ग पानी के बहाव में पूरी तरह टूट गया, जो छोटे पुल से बिल्कुल सटा हुआ है। यह करीब 20 मीटर चौड़ाई में कटा है। प्रशासन का दावा है कि कटाव को रोकने के लिए उपाय कर लिए गए हैं।

इस पुल से 30 फीट की दूरी पर ही बांध है। गंडक नदी के बढ़ते पानी से पहले एप्रोच सड़क टूटी जिसके बाद कटाव तेजी से बढ़ने लगा, हालांकि बांध को अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। गोपालगंज में फैजुल्लाहपुर बांध सहित करीब 9 जगहों पर गंडक के तेज बहाव से तटबंध के टूटने का खतरा है। संजय बताते हैं कि एप्रोच सड़क धंसने के बाद ही वहां पर कोई बचाव कार्य शुरू हो पाया।

सत्तरघाट पुल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जिस एप्रोच सड़क पर यह हादसा हुआ है, उसी से सटा हुआ फैजुल्लाहपुर पंचायत है। इस पंचायत में करीब 1,800 परिवार हैं। संजय के मुताबिक, अगर कटाव से बांध को नुकसान होता तो उनका पूरा पंचायत और आस-पास का गांव डूब जाता।

एफआईआर दर्ज कराने वाले स्थानीय ठेकेदार उदय सिंह ने न्यूज़क्लिक के लिए बात करने पर कहा कि वे टीम के साथ घटनास्थल पर काम कर रहे थे। "उसी रात लगभग 10 बजे संजय यादव ग्रामीणों के साथ पहुंचकर हंगामा करते हुए कहा कि यहां कोई काम नहीं हो रहा है और उन्होंने हमारे साथ मारपीट भी की। जिसके बाद रात से सुबह 11 बजे तक काम बंद कर दिया गया", उन्होंने कहा। कटाव के बाद मरम्मत का काम पुल निगम ने उदय सिंह को ही दिया था।

हालांकि संजय यादव मारपीट की घटना से इंकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वहां पर कटाव बढ़ने के बावजूद ठेकेदार, इंजीनियर और अन्य लोग काम करने के बदले वहां आकर बैठे हुए थे, जिसके कारण उनसे बहस जरूर हुई लेकिन मारपीट की बात सरासर गलत है। ग्रामीणों पर तीन-तीन केस दर्ज किया गया है, ये सब मामले को दबाने और आरोपितों को बचाने के लिए किया जा रहा है।

वे कहते हैं, "रात 11 बजे के बाद काम पूरा किए बिना ठेकेदार और अन्य लोग वहां से चले गए। लगातार कटाव के कारण ग्रामीण भय में थे। इसके बाद उसी रात हम 50-100 ग्रामीण वहां पहुंचे। 3-4 घंटे लगातार बोरी बंधवाकर उस जगह को ठीक किया गया। तब जाकर बांध बच सका।"

वहीं सड़क धंसने के एक दिन बाद सत्तरघाट पुल निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष और जिला परिषद सदस्य रवि रंजन उर्फ विजय बहादुर यादव ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उन्होंने इस घटना के जिम्मेदार इंजीनियरों और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद रविरंजन और 10-15 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ बैकुंठपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) ने लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप पर केस दर्ज करा दिया।

इस पर रविरंजन कहते हैं, "सालों के हमारे संघर्ष के बाद इस पुल और सड़क का निर्माण किया गया। लेकिन ये एक बरसात भी नहीं सह पाया। अब छपरा-मोतिहारी के बीच आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। हमने इसके लिए संघर्ष किया है और अब जब ये भ्रष्टाचार के कारण एक ही बाढ़ में टूट गया है तो इसका विरोध तो करना ही होगा। इसलिए हमने मुख्यमंत्री का पुतला जलाया।"

बैकुंठपुर अंचलाधिकारी पंकज कुमार ने एफआईआर दर्ज कराने को लेकर न्यूज़क्लिक से सिर्फ इतना कहा कि लॉकडाउन में उनलोगों को प्रदर्शन नहीं करना चाहिए था, वे लोग भी अपना पक्ष दर्ज करवाएं।

तीनों एफआईआर बैकुंठपुर थाने में दर्ज की गई है। थाना प्रभारी (एसएचओ) ने बताया कि तीसरा केस पुल निर्माण निगम के द्वारा ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज कराया गया है। उनके मुताबिक, विभाग के अभियंता ने बयान में कहा है कि पुल के दूसरे तरफ सड़क (सड़क धंसने के विपरीत दिशा में) को ग्रामीणों के द्वारा काटा जा रहा था, जहां उनकी टीम मरम्मत करने पहुंची थी।

ग्रामीणों पर हुई एफआईआर के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी राज्य सरकार की आलोचना की है और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्विटर पर संजय यादव का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "264 करोड़ की लागत से बने पुल के ढहने से पहले ग्रामीणों ने आगाह किया था लेकिन भ्रष्टाचारी नीतीश सरकार की कहां आंख खुलने वाली थी? पुल ढहेगा तभी ना भ्रष्टाचार करेंगे? वीडियो देखिए। अब निर्लज्ज भ्रष्ट सरकार ग्रामीणों पर ही केस दर्ज कर रही है कि वो मीडिया को सच क्यों बता रहे हैं?"

बैकुंठपुर से बीजेपी विधायक मिथिलेश तिवारी ने भी सड़क धंसने की घटना में अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि राज्य सरकार ने इसे प्राकृतिक आपदा बताते हुए प्रेस रिलीज में कहा कि यह अप्रत्याशित पानी के दबाव के कारण हुआ है। इस कटाव से छोटे पुल की संरचना को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इस योजना में कोई अनियमितता का मामला नहीं है। विभाग पूरी तरह मुस्तैद है।

पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने एक वीडियो के जरिये बताया कि दो सालों तक इस पुल की जिम्मेदारी निर्माण करने वाली एजेंसी की है। इसमें जो भी नुकसान होगा, उसकी क्षतिपूर्ति करना एजेंसी की जिम्मेदारी है। इसलिए जब भी पानी कम होगा, उसको तीन-चार दिन में भरकर आवागमन के लिए तैयार कर दिया जाएगा।

वाल्मीकि नगर बैराज से लगातार पानी डिस्चार्ज किए जाने के कारण गंडक नदी चंपारण और गोपालगंज में उफान पर है। राज्य सरकार ने सड़क की गुणवत्ता खराब होने की बात से इंकार कर रही है, लेकिन सड़क धंसने का भी ठीकरा नेपाल पर फोड़ दिया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने एक चैनल पर कहा कि नेपाल ने 14 जुलाई की रात 3.39 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा था, जिसके कारण इलाके में पानी का बहाव बढ़ने से एप्रोच सड़क पर दबाव बढ़ गया था।

बता दें कि नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्तर बिहार के 8 जिलों में करीब तीन लाख लोग अब तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 17 जुलाई तक गोपालगंज के 4 प्रखंड के 16 पंचायत बाढ़ की चपेट में हैं, जिसमें 10,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और करीब 3,900 लोगों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया है।

(साकेत आनंद स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
Gopalganj
Nitish Kumar
Sattarghat bridge
BJP
nitish sarkar
Tejashwi Yadav

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Law
    सुभाष गाताडे
    'जहां कई सारे वकील होते हैं, वहां अब न्याय नहीं मिलता’
    05 Nov 2021
    आगरा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों पर पहले तो देशद्रोह की धारा लगाई गई और बाद में यह संदेश फैलाया गया कि जो कोई भी अभियुक्त का वकील बनेगा उसे  बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
  • COP26
    रेनार्ड लोकी
    सीओपी26: क्या धरती को बचाने की मानवता की यह ‘अंतिम और सर्वश्रेष्ठ कोशिश’ सफल हो सकेगी?
    05 Nov 2021
    एक मौका है जिससे कि हम जलवायु संकट के सबसे बुरे दुष्प्रभाव को रोक सकते हैं, लेकिन इसके लिए विश्व के नेताओं को व्यवसायों को इसके लिए जवाबदेह ठहराना होगा और स्वदेशी समुदायों को सुनना होगा।
  • Zika panic in Kanpur
    विजय विनीत
    कानपुर में ज़ीका की दहशत, अलर्ट मोड पर हेल्थ महकमा
    05 Nov 2021
    बारिश से पहले मच्छरों पर काबू पा लिया गया होता, तो इस वायरस के फैलाव के चलते लोगों में जो डर है, वह नहीं होता। ज़ीका से भले ही किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन प्रभावित इलाकों में ख़ौफ़ और दहशत का…
  • trip waiver
    ऋचा चिंतन
    ट्रिप्स छूट प्रस्ताव: पेटेंट एकाधिकार पर चर्चा से कन्नी काटते बिग फार्मा
    05 Nov 2021
    ऐसा प्रतीत होता है कि इस महीने के अंत में होने जा रहे 12वें विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से पहले ही भारत-दक्षिण अफ्रीका के कोविड टीकों और प्रौद्योगिकी के संबंध में आइपी छूट के साझा…
  • crackers
    वसीम अकरम त्यागी
    पटाख़ों से ज्यादा ज़हर तो दिमाग़ों में है!
    05 Nov 2021
    सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धुएं में उड़ाने वाला #PatakhaTwitter ट्रेंड ने सीधे तौर पर अदालत को चुनौती दे डाली। लेकिन सरकार, प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने में नाकाम रहा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License