NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: 'ज़हरीली शराब से लगातार होती मौतों पर सरकार नहीं है गंभीर'
पश्चिम चंपारण के रामनगर व लौरिया क्षेत्र में विगत दिनों जहरीली शराब के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत की खबर सुनने के बाद सिकटा विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में भाकपा-माले की एक उच्च स्तरीय जांच टीम ने 16 जुलाई को घटनास्थल का दौरा किया और पाया कि 10से 12 जुलाई के बीच हरदिया गांव में और 13-14 जुलाई को देउरवा बाजार में ये मौतें हुई हैं। प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम जहरीली शराब का उत्पादन जारी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Jul 2021
बिहार: 'ज़हरीली शराब से लगातार होती मौतों पर सरकार नहीं है गंभीर'
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बगहा पुलिस जिला अंतर्गत रामनगर व बेतिया के लौरिया में विगत दिनों जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई। इसको लेकर पुलिस ने प्रथमिकी दर्ज कर ली है। और अभी तक 16 की गिरफ़्तारी भी कर चुकी है। परन्तु विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं उसका सीधा आरोप है की ये गौर कनूनी शराब का धंधा प्रशासन की सर परस्ती में चल रहा है।

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार में जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतें एक सामान्य घटनाक्रम बनती जा रही है। शायद ही कोई ऐसा महीना गुजरता हो, जब इसकी चपेट में लोग नहीं आते हैं, लेकिन बिहार में शराबबंदी का दंभ भरने वाले नीतीश कुमार इसके प्रति पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। हमने बार-बार कहा है कि राजनेता-प्रशासन गठजोड़ के तले ही बिहार में अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। बावजूद सरकार इस गठजोड़ को लगातार संरक्षण दे रही है। लिहाजन, जहरीली शराब के कारण मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है।

पश्चिम चंपारण के रामनगर व लौरिया क्षेत्र में विगत दिनों जहरीली शराब के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत की खबर सुनने के बाद सिकटा विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में भाकपा-माले की एक उच्च स्तरीय जांच टीम ने 16 जुलाई को घटनास्थल का दौरा किया और मामले की जांच की।

विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि 10-12 जुलाई को हरदिया गांव में और 13-14 जुलाई को देउरवा बाजार में ये मौतें हुई हैं। प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम जहरीली शराब का उत्पादन जारी है। उनका दबदबा इतना है कि आम लोग इसका विरोध नहीं कर पाते हैं।

पिछली फरवरी में भी लौरिया थाना क्षेत्र में जहरीली शराब से मौत हुई थी। इस बार की मौत रामनगर व लौरिया थाना क्षेत्र में आने वाले इलाके में हुआ है। प्रशासन इस मामले को लगातार दबाने में लगा हुआ है।

भाकपा-माले ने कहा है कि इस मामले में छोटी मछलियों को गिरफ्तार करके प्रशासन अपने को बचाने का प्रयास कर रहा है। हमारी मांग है कि शराब के बड़े कारोबारियों के साथ-साथ रामनगर व नरकटियांगज डीएसपी तथा रामनगर व लौरिया थानाध्यक्ष पर भी कार्रवाई की जाए, जो पूरे मामले की लीपापोती करने में लगे हुए हैं।

भाकपा-माले ने भोजपुर के गड़हनी प्रखंड के पहारपुर गांव में विगत 3 दिनों के भीतर डायरिया से 6 बच्चों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कई बच्चे अभी भी बीमार हैं। मांझी टोला में घटित इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिलने के बाद माले विधायक मनोज मंजिल के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और फिर गांव में मेडिकल टीम भेजा गया। सभी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। माले कार्यकर्ताओं ने ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया। साथ ही साथ, अन्य दवाओं का वितरण भी किया गया।

इस जांच दल में माले विधायक के अतिरिक्त गड़हनी प्रखंड सचिव रामछपित राम व बड़ौरा सचिव ओमप्रकाश भी शामिल थे।

भाकपा-माले ने मांग की है कि दलित व मांझी टोलों के प्रति सरकार का उदासीन रवैया बेहद चिंताजनक है। हमारी मांग है कि डायरिया का प्रकोप अन्य टोलों में न फैले, इसके लिए राज्य सरकार युद्ध स्तर पर गरीबों के टोले में लोगों की स्वास्थ्य की जांच की व्यवस्था करेे और जरूरी दवाओं का वितरण करे।

Bihar
Nitish Kumar
Nitish Kumar Government
Poisonous liquor
Death by poisonous liquor

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Uttarakhand elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखण्ड चुनाव: दस साल पहले प्रस्तावित सैनिक स्कूल का इंतज़ार जारी
    12 Feb 2022
    शुक्रवार 11 फरवरी को प्रधानमंत्री ने उत्तरखंड के अल्मोड़ा जिले में एक चुनावी रैली की जिसमे उन्होंने राज्य में नए सैनिक स्कूल बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा" हमारे देश में बहुत कम संख्या में सैनिक…
  • pension
    मनजीत सिंह पटेल
    एनपीएस की जगह, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग क्यों कर रहे हैं सरकारी कर्मचारी? 
    12 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों में भी, एनपीएस की चिंता प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक है, समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी…
  • Punjab
    भाषा
    पंजाब चुनाव में 25 फीसदी उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला : रिपोर्ट
    12 Feb 2022
    एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) से संबद्ध पंजाब इलेक्शन वाच (पीईडब्ल्यू) ने 20 फरवरी को होने वाले चुनाव में कुल 1,304 उम्मीदवारों में से 1,276 उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण…
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: न होता यूं तो क्या होता!
    12 Feb 2022
    अपने राज में जो हुआ है, उस पर सवालों के जवाब के देने के लिए, मोदी जी ने जब से यह सवाल उठाने का रास्ता अपनाया है कि विरोधी नहीं होते तो क्या-क्या होता, नहीं होता, तब से विश्व गुरु कुर्सी ने खुद दौड़कर…
  • Protest
    ऋषि राज आनंद
    बार-बार धरने-प्रदर्शन के बावजूद उपेक्षा का शिकार SSC GD के उम्मीदवार
    12 Feb 2022
    एसएससी जीडी के तहत 60,000 की संख्या में रिक्तियों की घोषणा के बावजूद 30% पद ख़ाली हैं। लेकिन सरकार उन्हें भरने के लिए कदम उठाती नज़र नहीं आ रही।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License