NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: बाढ़़ प्रभावित इलाकों में कैसे होगा पंचायत का चुनाव; कैसी हैं चुनाव आयोग की तैयारियां
बिहार में 11 चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाने पर मुहर लग गई है। 24 सितम्बर से शुरू होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आखिरी चरण का मतदान 12 दिसंबर को होगा।
राहुल कुमार गौरव
06 Sep 2021
बिहार: बाढ़़ प्रभावित इलाकों में कैसे होगा पंचायत का चुनाव; कैसी हैं चुनाव आयोग की तैयारियां
बिहार के दरभंगा जिला स्थित कुशेश्वरस्थान के अशरफी मंडल

बिहार के अधिकतर गांवों के लोग मुखिया और सरपंची के चुनाव की तैयारी में लगें हुए हैं। वहीं दरभंगा के पूर्वी प्रखंड में पानी से घिरे गांवों में लोग बोट, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई के भरोसे अपनी जिंदगी को जीने की कश्मकश में लगे हुए हैं।

कुशेश्वरस्थान के विजय यादव जो 68 साल के हैं, उन्होंने न्यूजक्लिक को बताया कि, “कुशेश्वरस्थान क्षेत्र को बाढ़़ के पानी का अघोषित ससुराल कहा जाता है। हालत यह है कि छह से आठ महीने तक ये इलाका बाढ़़ के पानी की चपेट में रहता है। हमें अपने लिए राहत शिविर और सामुदायिक भोजन की लड़ाई लड़ने से फुर्सत नहीं है। चुनाव की बात तो यहां बहुत दूर है।”

वहीं कुशेश्वरस्थान के अशरफी मंडल बताते हैं कि पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के सहारे आयोग चुनाव करवा भी लें तो इस क्षेत्र से बहुत कम की संख्या में वोट गिरेगी। वह आगे कहते हैं, “बाढ़़ के पानी, सरकार की नाकामी के साथ आने-जाने का रास्ता न होने के चलते आमजनों की सक्रियता चुनाव को लेकर कम रहती है और यही कारण रहता है कि यहां चुनाव का दिन भी आम दिनों की तरह ही रहता है।"

बिहार में 11 चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाने पर मुहर लग गई है। 24 सितम्बर से शुरू होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आखिरी चरण का मतदान 12 दिसंबर को होगा।

चुनाव की तिथि के बाद बिहार के गांव के हालात भी जान लेते हैं जहां चुनाव होने हैं

आपदा प्रबंधन विभाग की बाढ़़ रिपोर्ट के मुताबिक़ राज्य में बाढ़़ से अभी 16 जिले प्रभावित हैं। इन 16 जिलों के 88 प्रखंडों के 600 पंचायत बाढ़़ से प्रभावित है। इनमें 1975 गांवों में 29 लाख की आबादी बाढ़़ की समस्या से घिरी हुई है।

इन 29 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार द्वारा सिर्फ 161 कम्युनिटी किचन चल रहे हैं, जिनमें गत 2 सितंबर को दोनों शाम मिला कर कुल 1 लाख 51 हजार 369 लोगों को भोजन कराया गया था। 

इन हालात के बाद आने वाले वक्त में पंचायत चुनाव कितना प्रभावी होगा? इस सवाल का जवाब बिहार बाढ़ पर  सालों काम कर चुके चन्द्रशेखर झा देते हैं कि इस बार बाढ़ के दौरान कटाव के वजह से सिर्फ सुपौल जिला में हजारों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है। बिहार में सैकड़ों गांवों के लोगों को दूसरे गांव में जाकर आशियाना बनाना पड़ा है। क्या इस बार के चुनाव में इन लाखों लोगों के वोट की गिनती होगी।"

मो.इनाम, जो बिहार के नवादा जिले के नरहट गांव के रहने वाले हैं, न्यूज क्लिक को बताते हैं कि हमारे गांव के लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क का साधन धनार्जय नदी पर बना डायवर्ज़न था जो इसबार बाढ़ में डुब गया। वह आगे कहते हैं, “इस वजह से तकरीबन एक दर्जन गांव के हजारों लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने श्रमदान से ही टूटे डायवर्ज़न की भराई की थीं। फिलहाल, लोगों को घूमकर जाना पड़ता हैं। ऐसे में महिलाओं की अधिकतम संख्या वोट देने नहीं जाएगी।"

अभी तक कोई सरकारी आंकड़ा तो नहीं हैं। लेकिन सिर्फ सुपौल जिला में 100 से अधिक मामले डायवर्ज़न और रोड टूटने की आ चुकी हैं।

अगस्त से ज्यादा सितंबर में बारिश होगी

बाढ़़ग्रस्त इलाकों के पंचायतों में पानी कम होने से बाढ़़ में क्षतिग्रस्त हो चुके मतदान केंद्रों को अन्यत्र स्थानांतरित करने सहित अन्य कार्य किए जाएंगे। लेकिन मुश्किल यह है कि अभी पूरा सितंबर अभी बाकी है।

पूरे देश की बात की जाए तो अगस्त महीने में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन अब सितम्बर में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताते हैं कि सितम्बर में मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। 

चुनाव आयोग की क्या तैयारी हैं

बिहार में बाढ़ के हालात को देखते हुए पहले उन प्रखंडों में चुनाव कराए जाने की संभावना है जहां बाढ़ का प्रभाव नहीं है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मतदान अंतिम चरणों में होगा।

तो क्या बाढ़ से चुनाव पर फर्क नहीं पड़ेगा? इस सवाल का जवाब राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी बिना नाम बताने की शर्त पर न्यूज़क्लिक से कहा, "पंचायत चुनाव के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों से जल-जमाव वाली पंचायतों की रिपोर्ट मांगी गयी है। इस रिपोर्ट के आधार पर उनके एरिया में चुनाव की तिथि निर्धारित की जायेगी।"

आगे अधिकारी साहब बताते हैं कि वैसे चुनाव तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पंचायतों से पूरी तरह पानी निकलने की संभावना कम है। ये भी एक सच है कि पंचायत के मतदाता भी बाढ़ राहत शिविरों में रहते हैं, ऐसे में उनकी चुनाव में भागीदारी कम होगी।

बाढ़ और चुनाव एक समान

सहरसा से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता विनय कुमार वर्मा ने न्यूज़क्लिक को बताया, "बाढ़ और चुनाव में एक समानता है। दोनों कचरे को बाहर निकलने का रास्ता देती हैं। लेकिन इस बाढ़ के कारण चुनाव सही कचड़े को निकाल नहीं पाएगी।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
Bihar flood
Panchayat election
Bihar government
Nitish Kumar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Western media
    नतालिया मार्क्वेस
    यूक्रेन को लेकर पश्चिमी मीडिया के कवरेज में दिखते नस्लवाद, पाखंड और झूठ के रंग
    05 Mar 2022
    क्या दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध का ढोल पीटकर अंग्रेज़ी भाषा के समाचार घराने बड़े पैमाने पर युद्ध-विरोधी जनमत को बदल सकते हैं ?
  •  Mirzapur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: चुनावी एजेंडे से क्यों गायब हैं मिर्ज़ापुर के पारंपरिक बांस उत्पाद निर्माता
    05 Mar 2022
    बेनवंशी धाकर समुदाय सभी विकास सूचकांकों में सबसे नीचे आते हैं, यहाँ तक कि अनुसूचित जातियों के बीच में भी वे सबसे पिछड़े और उपेक्षित हैं।
  • Ukraine return
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे ठाले:  मौत के मुंह से निकल तो गए लेकिन 'मोदी भगवान' की जय ना बोलकर एंटिनेशनल काम कर गए
    05 Mar 2022
    खैर! मोदी जी ने अपनी जय नहीं बोलने वालों को भी माफ कर दिया, यह मोदी जी का बड़प्पन है। पर मोदी जी का दिल बड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि इन बच्चों का छोटा दिल दिखाना ठीक हो जाएगा। वैसे भी बच्चे-…
  • Banaras
    विजय विनीत
    बनारस का रण: मोदी का ग्रैंड मेगा शो बनाम अखिलेश की विजय यात्रा, भीड़ के मामले में किसने मारी बाज़ी?
    05 Mar 2022
    काशी की आबो-हवा में दंगल की रंगत है, जो बनारसियों को खूब भाता है। यहां जब कभी मेला-ठेला और रेला लगता है तो यह शहर डौल बांधने लगाता है। चार मार्च को कुछ ऐसा ही मिज़ाज दिखा बनारस का। यह समझ पाना…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में क़रीब 6 हज़ार नए मामले, 289 मरीज़ों की मौत
    05 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 5,921 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 29 लाख 57 हज़ार 477 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License