NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : गया ज़िले में 15 लाख से ज़्यादा की महिला आबादी पर केवल 24 महिला डॉक्टर
बिहार में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ़ की भारी कमी है साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर का भी अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत तो बद से बदतर है। नीति आयोग की 2019 के हेल्थ इंडेक्स में 21 राज्यों की सूची में बिहार को 20वां स्थान मिला था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Nov 2021
doctor
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई। अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जब मरीजों की मौत इलाज के अभाव में हो जाती है। यहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर का भी अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत तो बद से बदतर है। नीति आयोग के 2019 के हेल्थ इंडेक्स में 21 राज्यों की सूची में बिहार को 20वां स्थान मिला था। कुछ दिनों पहले ही बिहार के बेगूसराय में एक घायल महिला की मौत इलाज के अभाव में हो गई। यहां तक कि स्ट्रेचर के अभाव में एक युवक उस महिला को कंधे पर लेकर अस्पताल में इधर उधर भटकता रहा। अंत में उस महिला की मौत युवक के कंधे पर ही हो जाती है।

गया जिले में 24 प्रखंड हैं और इनमें महिलाओं की आबादी करीब 15,46,482 है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद यहां जिला से लेकर पीएचसी तक में महिला डॉक्टरों अर्थात गाइनो की संख्या महज 24 है। इस तरह 64,436 महिलाओं पर केवल और केवल एक महिला डॉक्टर। यहां के अस्पतालों में यदि महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं तो वहां उन्हें पुरुष डॉक्टर मिलते हैं जिसके चलते वे अपनी समस्या बताने में काफी हिचकिचाती हैं। अस्पतालों में पुरूष डॉक्टर होने के चलते कई महिलाएं तो बिना इलाज के ही वापस लौट जाती हैं।

प्रभात खबर के अनुसार गया जिले के दो बड़े अस्पताल प्रभावती और जेपीएन अस्पताल को देखा जाए तो प्रभावती में दो व जेपीएन में तीन महिला डॉक्टरों की पोस्टिंग हैं। थोड़ी सी भी गंभीर मरीज पहुंचने पर उसे तुरंत ही बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। शहर में मगध मेडिकल अस्पताल स्थिति है जिससे कुछ मरीजों को थोड़ी राहत मिलती है। जिले के लगभग अस्पतालों से यहां हर दिन दर्जनों गाइनो के मरीजों को मगध मेडिकल रेफर किया जाता है।

स्थानीय स्तर पर सरकारी अस्पतालों में समुचित व्यवस्था न होने के चलते प्राइवेट अस्पतालों में मरीज अधिक संख्या में चले जाते हैं। वहां उनका कई तरह से दोहन किया जाता है। सदर अस्पताल व प्रभावती अस्पताल में भी स्थिति अब तक नहीं सुधरी है। जिले के सदर अस्पताल व प्रभावती अस्पताल में भी महिला डॉक्टरों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण यहां से भी मरीजों को मगध मेडिकल ही रेफर किया जाता है।

बिहार के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ की भी भारी कमी है। इसके लिए संसाधन बहुत बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। वर्षों से बिहार सरकार कुल बजट से स्वास्थ्य के लिए केवल 2.5% से 3.5% ही दे रही है जो कि बहुत कम है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ब्लॉक लेवल पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिहाज से बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल हैं। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।

बीबीसी की रिपोर्ट की माने तो बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2078 पद स्वीकृत हैं मगर 1786 ही कार्यरत हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में कुल छह सौ विशेषज्ञ डॉक्टर चाहिए, जिसमें से केवल 82 डॉक्टर मौजूद हैं। इस तरह देखा जाए तो 518 विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। पीएचसी और सीएचसी में 1738 नर्सिंग स्टॉफ की कमी है।

बता दें कि अगस्त 2017 में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में जवाब दिया था कि 38 ज़िलों में से 18 ज़िला अस्पतालों में आईसीयू नहीं है और उन्हें बनाने की कोशिश की जा रही है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों के मुताबिक़ सभी मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में 10 फीसदी बेड आईसीयू के लिए रखने अनिवार्य हैं।

सरकारी अस्पतालों में सुविधा की कमी के चलते गरीब लोगों को प्राइवेट क्लिनिक का रूख करना पड़ता है ऐसे में वहां उनका शोषण होता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसएसओ) की 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 18.5% लोग ही सरकारी डॉक्टरों से इलाज करवाते हैं। प्राइवेट डॉक्टरों के पास 64.5% मरीज जाते हैं। वहीं सरकारी अस्पताल में 37.8 फीसदी लोग भर्ती होते हैं और प्राइवेट अस्पतालों में 60 फीसदी।

उधर 2016 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार के स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है जिसकी वजह से आधी महिलाओं को घर में ही डिलिवरी करवानी पड़ती है। रिपोर्ट में बताया गया कि 2010-15 के बीच प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते 57,420 बच्चे मरे हुए पैदा हुए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होने चाहिए। केंद्र सरकार की रिपोर्ट नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 के मुताबिक़ बिहार के सरकारी अस्पतालों में 2,792 एलोपेथिक डॉक्टर हैं यानी बिहार में 43,788 लोगों पर एक एलोपेथिक डॉक्टर है। सिर्फ डॉक्टर की ही कमी नहीं बल्कि नीति आयोग की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार 51 फीसदी हेल्थकेयर वर्कर्स के पद भी खाली पड़े हैं।

Bihar
Female Doctor shortage
Healthcare Facilities
Nitish Kumar Government
Paramedical staff

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License