NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहारः स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल, आइएमए ने भी किया समर्थन
इंटर्न डॉक्टरों ने पीएमसीएच प्रशासन के साथ-साथ सरकार को भी चेतावनी दी है कि अगर उनके स्टाइपेंड को बढ़ाने की तत्काल घोषणा नहीं की गई तो वे ओपीडी और वार्डों में इलाज रोक देंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Oct 2021
bihar protest
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर पीएमसीएच समेत बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। सुबह 10 बजे से पीएमसीएच समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कार्य का बहिष्कार कर दिया। इससे ओपीडी में मरीजों की परेशानी बढ़ गयी। उधर इमरजेंसी वार्ड में भी सीनियर डॉक्टरों पर दवाब बढ़ गया। कई मरीज इलाज नहीं होने के कारण वापस घर लौट रहे हैं। धरने पर बैठे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि आइजीआइएमएस समेत देश भर के अन्य मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों को 30-35 हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है जबकि हमलोगों को केवल 15 हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इंटर्न डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर दिया और धरने पर बैठ गए। मंगलवार को दिन भर ये डॉक्टर काम पर नहीं लौटे जिसके चलते ओपीडी व वार्डों में इलाज प्रभावित हुआ। इन डॉक्टरों ने पीएमसीएच प्रशासन के साथ साथ सरकार को भी चेतावनी दी है कि अगर उनके स्टाइपेंड को बढ़ाने की तत्काल घोषणा नहीं की गई तो वे ओपीडी और वार्डों में इलाज रोक देंगे। धरने पर बैठे इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि स्टाइपेंड के तौर पर उन्हें अभी 15 हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है जो एक राजमिस्त्री की मजदूरी से भी कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले चार वर्षों से स्टाइपेंड की समीक्षा नहीं की है। उनका कहना है कि आइजीआइएमएस में डॉक्टरों की हड़ताल के बाद तत्काल उनके स्टाइपेंड वृद्धि की घोषणा कर दी गई थी।

बिहार के मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी इंटर्न डॉक्टरों ने बंद करवा दी है। इस कारण पीएमसीएच, भागलपुर स्थित मायागंज हॉस्पिटल, मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच, दरभंगा के डीएमसीएच में ओपीडीसेवा बाधित है। पीएमसीएच में रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद होने के चलते मरीजों की भीड़ लगी हुई है। सुबह 10.30 बजे तक करीब 570 रजिस्ट्रेशन हुए। इसके बाद से ओपीडी बंद है।

इन डॉक्टरों का कहना है कि साल 2013 से इंटर्न डॉक्टरों को केवल 15 हजार रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है। कई बार मांग पत्र देने और आंदोलन के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर केवल आश्वासन ही दिया गया है। उनका कहना है कि आठ वर्षों के बाद भी स्टाइपेंड में वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में अब काम करना मुश्किल है। इन डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती हैं लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेंगे। 

ये भी पढ़ें: बिहारः पटना में डेंगू का क़हर, एक रिटायर्ड अधिकारी की मौत

रिपोर्ट के अनुसार हड़ताल करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा। सभी जूनियर डॉक्टर 2016 बैच के हैं। उधर इन डॉक्टरों की मांग को जायज बताते हुए आईएमए ने भी इसका समर्थन कर दिया है और सरकार से अतिशीघ्र मांगों पर विचार कर इंटर्न के स्टाइपेंड को 15000 से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की मांग की है।

ज्ञात हो कि यह पहला मौका नहीं है जब पीएमसीएच में डॉक्टर्स की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल किया जा रहा है।इससे पहले भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की थी। हालांकि इस बार इंटर्न स्टूडेंट अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें वृद्धि को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता है वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।

बता दें कि एमबीबीएस मेडिकल इंटर्न डॉक्टर्स की हड़ताल को लेकर कोई जानकारी नहीं है कि उनका ये हड़ताल कब तक चलेगा। ऐसा बताया जा रहा है कि उनका ये हड़ताल अगर लंबे समय तक चला तो पीएमसीएच समेत बिहार के अन्य अस्पतालों में इलाज बाधित रहेगी जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

करीब 100 इंटर्न डॉक्टरों ने भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल में ओपीडी सेवा बंद करवा दी है। हड़ताल आरंभ होने के करीब एक घंटे बाद अस्पताल सुप्रीटेंडेंट आए और इंटर्न डॉक्टरों को समझाने की कोशिश की लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक खुद ओपीडी में गए और सीनियर डॉक्टरों की मदद से ओपीडी सेवा शुरू की। अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास के मुताबिक वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है अगर ये नहीं माने तो पुलिस की मदद ली जाएगी। 

इन डॉक्टरों का कहना है कि बिहार में इंटर्न डॉक्टरों की संख्या करीब 900 है। नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के इंटर्न डॉक्टर अनुराग सहित अन्य डॉक्टरों का कहना है कि वह 5 वर्षों से स्टाइपेंड वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं। इन मेडिकल कॉलेजों में इलाज के लिए दूरदराज से मरीज आते हैं। पीएमसीएच में ही करीब 2000 मरीज आते हैं।

उधर दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के इंडर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर बुधवार से ओपीडी में ताला लगा दिया है जिससे मरीजों को परेशानी काफी हो रही है। 

डॉक्टर शुभम का कहना है कि साल 2017 में सरकार द्वारा यह कहा गया था कि प्रत्येक तीन वर्षों में इसका पुनरीक्षण होगा। लेकिन सरकार अपने संकल्प से लगातार पीछे हट रही है। शुभम का कहना है कि अपनी मांग को लेकर हम लोगों ने कई बार आंदोलन किया लेकिन हम लोगों को केवल आश्वासन दिया गया लेकिन किसी तरह का लाभ आज तक नहीं मिला है।

शुभम ने आगे कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। इसका दबाव डॉक्टरों पर भी बढ़ रहा है। हम लोगों को तो कई बार लगातार 24-24 घंटे इमरजेंसी डयूटी करनी पड़ती है। जिसके बदले सरकार सिर्फ हमें महज पांच सौ रूपए देती है।

Bihar
PATNA
PMCH
PMCH hospital
Doctors Protest

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Ashok Gehlot and Sachin Pilot
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: क्या एक हो गए हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट?
    22 Nov 2021
    नए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और इसी से उम्मीद की जा रही है कि दोनों के बीच जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है।
  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License