NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बिहार-झारखंड: मज़दूर विरोधी श्रम कोड के ख़िलाफ़ सड़कों पर व्यापक विरोध
26 नवंबर की मजदूर हड़ताल और किसानों के विरोध अभियानों में सत्ताधारी दल पोषित चंद ट्रेड यूनियन और मजदूर संगठन को छोड़ बाकी सारे मजदूर संगठन और यूनियनों के साथ साथ व्यापक मजदूर–कर्मचारियों ने सड़कों पर विरोध के तेवर दिखाये।
अनिल अंशुमन
27 Nov 2020
 मज़दूर विरोधी श्रम कोड के ख़िलाफ़ सड़कों पर व्यापक विरोध

हर ज़ोर–ज़ुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है... प्रख्यात गीतकार शैलेंद्र की लिखी इन पंक्तियों को 26 नवंबर के देशव्यापी मजदूर हड़ताल और किसानों के जुझारू विरोध ने सड़कों पर चरितार्थ कर दिखाया। जो यह भी दर्शा रहा है कि बात-बात में देशहित और उग्र राष्ट्रभक्ति का राग अलापने वाली वर्तमान केंद्र की सरकार द्वारा देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को देशी विदेशी निजी कंपनियों के हवाले किए जाने की तमाम कोशिशों का विरोध किस क़दर बढ़ता जा रहा है।

गोदी मीडिया ने हमेशा की भांति मजदूर–किसानों के इन विरोध कार्यक्रमों से देश को हुई तथाकथित आर्थिक क्षति का आंकड़ा देकर सत्ता के सुर में सुर मिलाते हुए आंदोलनों की खबरें प्रकाशित की। जिनमें ये कहीं से भी नहीं बताया गया कि 26 नवंबर की मजदूर हड़ताल और किसानों के विरोध अभियानों में सत्ताधारी दल पोषित चंद ट्रेड यूनियन और मजदूर संगठन को छोड़ बाकी सारे मजदूर संगठन और यूनियनों के साथ साथ व्यापक मजदूर–कर्मचारियों ने किस तरह से सड़कों विरोध के तेवर दिखाये।

मोदी सरकार द्वारा लाये गए मजदूर विरोधी 4 श्रमकोड और निजीकरण की नीतियों के खिलाफ झारखंड प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैंक–बीमा क्षेत्र के कर्मियों के अलावा अराजपत्रित कर्मचारी, स्कीम वर्कर तथा संगठित क्षेत्र के व्यापक मजदूरों ने हड़ताल को सफल बनाते हुए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किए। आल इंडिया बैंक इंपलाइज एसोसिएशन के आह्वान पर झारखंड प्रदेश बैंक इंपलाइज एसोसिएशन ने भी मोदी सरकार के बैंको के निजीकरण और आम लोगों से कर्ज़ वसूली के लिए बनाए गए कड़े क़ानूनों की वापसी समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल में सक्रिय भागीदारी निभाई। बाद में हड़ताली कर्मियों ने रांची के मेन रोड के प्रधान टावर स्थित BOI क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष भी विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के अनुसार SBI को छोड़कर अन्य सभी बैंकों और पोस्टल विभाग में लगभग 90 % कामकाज प्रभावित रहा।

हड़ताल को समर्थन दे रहे झारखंड के वामपंथी दलों ने भी–भारत नीलाम, मजदूर गुलाम, कोरोना आपदा का मोदी इंतजाम! और मजदूर – किसान से गद्दारी, कॉर्पोरेट से यारी नहीं चलेगी ! ... जैसे नारों के साथ प्रतिवाद मार्च निकाले गए।

राजधानी रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद , कोडरमा , देवघर , गढ़वा और जमशेदपुर समेत कई ज़िला मुख्यालयों में बैंक– पोस्टल और बीमा कर्मियों ने मोदी सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले इन सभी क्षेत्रों के निजीकरण किए जाने पर गहरा रोष प्रदर्शित करते हुए हड़ताल को सफल बनाया।

अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की विभिन्न विभागीय इकाइयों के कर्मचारियों के अलावा बीएसएसआर से जुड़े कर्मियों ने भी हड़ताल में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। झारखंड प्रदेश निर्माण मजदूरों के अलावा आशाकर्मी-रसोइया तथा नया स्कीम वर्कर संगठनों की महिलाओं ने भी हड़ताल को सफल बनाते हुए सड़कों पर अपना विरोध प्रदर्शन किया। सूचना है कि हटिया स्थित एचईसी भारी उद्योग संस्थान के मान्यताप्राप्त ट्रेड यूनियनों के मजदूर हड़ताल सफल बनाने को लेकर कोई विशेष रुचि नहीं दिखाने से वहाँ काम करनेवाले व्यापक मजदूर काफी क्षुब्ध हैं।  

बोकारो स्टील के वामपंथी ट्रेड यूनियनों से जुड़े मजदूरों ने भी सार्वजनिक उद्योगों को निजी हाथों में दिये जाने तथा मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमलों के खिलाफ मजदूर हड़ताल को समर्थन दिया। वहीं, कोल इंडिया द्वारा हड़ताल को अवैध घोषित कर इसमें शामिल होनेवाले कोयला कर्मियों पर दंडात्मक कारवाई किए जाने की धमकियों के बावजूद ईसीएल– बीसीसीएल और सीसीएल के अधिकांश कोलियरी सेक्टरों में हड़ताल को जोशपूर्ण ढंग से सफल बनाया गया। जिससे यहाँ खनन व ढुलाई के आलवे अन्य सभी काम भी व्यापक तौर से बाधित रहने की सूचना है।

बीएमएस को छोड़ सभी केंद्रीय कोयला मजदूर संगठनों ने कोयला क्षेत्र के मजदूरों से हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया किया था। हड़ताल को सफल बनाने के लिए उक्त यूनियनों के प्रतिनिधियों ने मजदूरों को बधाई संदेश भी जारी किए। झारखंड के भाकपा माले विधायक विनोद सिंह भी देशव्यापी मजदूर हड़ताल और किसानों के जन अभियान के समर्थन को समर्थन देते हुए बगोदर में पार्टी द्वारा निकाले गए मार्च का नेतृत्व किया। 26 नवंबर को देश के संविधान दिवस की याद दिलाते हुए एक्टू के झारखंड महासचिव शुभेन्दु सेन ने सभी मजदूर– कर्मचारियों से विशेष आह्वान किया कि हड़ताल में सक्रिय भागीदारी के जरिये ही हम अपने संविधान की रक्षा का संकल्प लेंगे।

धनबाद स्थित क्षेत्रीय रेल मण्डल में ऑल इंडिया रेलवे मेंस यूनियन के आह्वान पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के मजदूरों ने भी हड़ताल को अपना नैतिक समर्थन दिया। बिहार में राजधानी पटना समेत कई जिलों में हड़ताल को सफल बनाते हुए विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम हुए। साथ ही किसान विरोधी तीन कृषि बिल के खिलाफ किसानों के राष्ट्रव्यापी जन अभियान के तहत विभिन्न किसान संगठनों ने राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम किए। इनके समर्थन में बिहार के सभी वामपंथी दलों व उनके छात्र– युवा संगठनों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। इनके द्वारा प्रदेश में कई स्थानों पर रेल पटरियों पर विरोध प्रदर्शित करते हुए ट्रेनें भी रोकी गईं।     बिहार आशा कार्यकर्त्ताओं व अन्य स्कीम वर्कर कर्मियों ने सभी स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिये जाने की मांग के साथ हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन किए।

बिहार विधान सभा परिसर में भाकपा माले विधायकों ने विरोध बैनर–पोस्टरों के साथ देश के आंदोलनकारी मजदूरों और किसानों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही नीतीश सरकार से मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा लाये गए किसान विरोधी कृषि बिल के खिलाफ विधान सभा से प्रस्ताव पारित करे ।

गौर तलब है कि 26 नवंबर को देश के महामाहिम राष्ट्रपति महोदय से लेकर केंद्र सरकार के सभी मंत्री – नेतागण भव्य सरकारी समारोह आयोजित कर ‘ संविधान दिवस ’ पर देश के सभी लोगों को संदेश जारी करते हैं । तो यदि इसी देश के व्यापक मजदूर – कर्मचारी आज देश की केंद्र सरकार से – गुलामी के दस्तावेज़ चारों श्रम क़ानूनों को वापस लो, नए फरमानों के अनुसार 12 घंटे काम करने की साजिश पर रोक लगाओ तथा मजदूरों के अथक संघर्षों से हासिल ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमले बंद करो .... जैसी बुनियादी मांगें करते हैं तो क्या गलत है ....!

November 26 Strike
Nov 26-27 Strike
labor laws
Workers Strike
Nationwide Protest
4 Labor Code
privatization
Bihar
Jharkhand
trade unions
CPI-ML

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Russia Ukraine war
    अजय कुमार
    बेहतर भविष्य का रास्ता युद्ध से होकर नहीं जाता है
    03 Mar 2022
    चाहे जितने भी जायज तर्क हों, लेकिन वह युद्ध को जायज नहीं बता सकते। युद्ध वर्तमान को तो बर्बाद करता ही है, साथ में भूत और भविष्य सबको तबाह कर देता है।
  • up elections
    विजय विनीत
    यूपी का रणः उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबलियों का वर्चस्व, बढ़ गए दागी उम्मीदवार
    03 Mar 2022
    पूर्वांचल के बनारस, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, मऊ, बलिया, भदोही, जौनपुर, सोनभद्र की सियासत तो बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। उत्तर प्रदेश  इलेक्शन  वॉच  एसोसिएशन फ़ॉर रिफॉर्म का ताजातरीन…
  • एम. के. भद्रकुमार
    क्यों रूस का ऑपरेशन डोंबास और काला सागर क्षेत्र पर केंद्रित है?
    03 Mar 2022
    पुतिन को डोंबास और काला सागर क्षेत्र में तैनात नव-नाजीवादी हथियारबंद गिरोहों की तरह बर्ताव करने वाली नागरिक सेना से भी बदला लेना है, जिसने इस क्षेत्र में रूसी समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ बहुत अत्याचार…
  • राज वाल्मीकि
    सीवर और सेप्टिक टैंक मौत के कुएं क्यों हुए?
    03 Mar 2022
    कब तक बना रहेगा प्रशासन इन मौतों का मूक दर्शक?
  • cartoon
    आज का कार्टून
    सरकार का फरमान: सभी छात्र बम और बारूद के बीच चलकर खुद रोमानिया और हंगरी की सीमा पर आ जाएं!
    03 Mar 2022
    खारकीव में मौजूद छात्रों से कहा गया है कि वे शाम छह बजे से पहले निकल जाएं। 15 किमी दूर एक स्थान पर पहुंच जाएं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License