NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
बिहार विधानसभा:  महामारी की बढ़ती रफ़्तार, सरकार ने सजाया चुनावी बाज़ार
अमित शाह की ‘वर्चुअल रैली’ के बरअक्स राज्य के विभिन्न जिलों में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ‘आभासी रैली नहीं, राशन रोज़गार की गारंटी करो’ इत्यादि नारे लिखे बैनर–पोस्टर लेकर जगह जगह रैली-धरना प्रदर्शन किये और राजद व कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने ग़रीब अधिकार दिवस मनाया।
अनिल अंशुमन
08 Jun 2020
Virtual rally

चंद दिनों पहले की ही तो बात है जब अख़बार–चैनलों और सोशल मीडिया में लॉकडाउन में अमानवीय त्रासदियों से जूझते प्रवासी मज़दूरों की ख़बरें सबलोग खुली आँखों से देख–सुन रहे थे। एनएच की सड़कों व रेल पटरियों के किनारे किनारे चिलचिलाती धूप में भी भूखे–प्यासे और जगह जगह बैरिकेड लगाकर खड़े पुलिस के डंडे खाते हुए उन लाखों प्रवासी मज़दूरों में एक विशाल तादाद बिहारी मज़दूरों की थी। जो अचानक घोषित लॉकडाउन की जानलेवा दुर्दशा में फंसे अपने व परिवार का जीवन बचाने के लिए हर फजीहत झेलकर भी सैकड़ों मील का फासला तय करते हुए गाँव–घर लौट रहे थे। उन प्रवासी बिहारी मज़दूरों की दिल हिला देने वाली किसी भी ख़बर पर किसी सरकार–मंत्री और आला नेताओं की सुनियोजित चुप्पी भी सबने देखी ।

अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट बढ़ने लगी है तो सरकार के मंत्री–नेताओं द्वारा प्रवासी मज़दूरों की दुर्दशा–तमाशा देखने औए अनदेखा करने वालों में शामिल देश के गृहमंत्री जी अचानक से बोल पड़े हैं। प्रवासी बिहारी मज़दूरों को स्वाभिमानी बताते हुए अपनी सरकार द्वारा उनकी भलाई के कार्य गिनाने लगे हैं।

यह अचम्भा हुआ है आसन्न बिहार विधान सभा चुनाव के कारण। जब रोज़ रोज़ बढ़ती महामारी संक्रमण कि रफ़्तार के बीच भी 7 जून को ‘वर्चुअल रैली’ से चुनावी अभियान की शुरुआत की। सूचना के अनुसार 72 हज़ार एलईडी स्क्रीन लगवाकर वीडियो कांफ्रेंसिंग से ‘ बिहार जन संवाद रैली ’ के भव्य आयोजन से बिहार में फिर से अपने गठबंधन की सरकार बनाने का दावा किया गया। शाह जी ने अपने इस अभियान को कोरोना के खिलाफ जंग से करोड़ों लोगों को जोड़ने की पहल बताते हुए कहा कि कुछ वक्रदृष्टा को इसमें भी राजनीति दीख रही है।

wirodh 4.jpg

इसे भूख–बेकारी, नित दिन बढ़ रहे महामारी संक्रमण और लॉकडाउन जनित बढ़ रही मौतों से त्रस्त प्रवासी मज़दूरों और बिहार का अपमान करार देते प्रदेश के सभी वामपंथी दलों ने भी इसी दिन राज्यव्यापी “विश्वासघात / धिक्कार दिवस ”मनाया । जिसके तहत भाकपा माले , सीपीएम व सीपीआई समेत सभी वामपंथी संगठनों ने कोरोना संकट से निपटने में विफल केंद्र – राज्य सरकारों  के खिलाफ सड़कों पर प्रतिवाद किया।

राज्य के विभिन्न जिलों में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ‘ आभासी रैली नहीं राशन रोज़गार की गारंटी करो’ इत्यादि नारे लिखे बैनर–पोस्टर लेकर जगह जगह रैली-धरना प्रदर्शन किये। जिसके माध्यम से प्रदेश के क्वारंटीन सेंटरों की बदहाली से प्रवासी मज़दूरों की लगातर हो रही मौतों पर सरकार – प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए सभी मृतकों तथा भूख– पलायन से अबतक मारे गए अन्य सभी मज़दूरों के परिजनों को 20 लाख मुआवजा देने समेत 7 सूत्री मांगपत्र पेश किया गया।

सात जून को ही राजद व कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी भाजपा–एनडीए चुनावी अभियान के खिलाफ अपने समानांतर विरोध कार्यक्रम करते हुए ग़रीब अधिकार दिवस मनाया। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जगह जगह कर्यकर्ताओं ने थाली पीटो अभियान चलाया। कांग्रेस ने भी विरोध में काले गुब्बारे उड़ाए।

protest - 10.jpg

सात जून को केन्द्रीय गृहमंत्री के नेतृत्व में भाजपा द्वारा शुरू किये गये बिहार विधानसभा के डिजिटल चुनावी अभियान की शुरुआत और इसके माध्यम से बिहार के लोगों के सेहत–रोज़गार पर सरकार के लगातार काम करने का दावा करने पर सोशल मीडिया में भी काफी तीखी डिजिटल प्रतिक्रियाएं वायरल हुई हैं। जिनमें मोदी–शाह व नीतीश कुमार की डबल इंजन की सरकार को कोरोना से निपटने में पूरी तरह से फ्लॉप बताया गया है। बिहार में कोरोना महामारी की अबतक हुई जांचों को सबसे कम बताते हुए सभी प्रवासी मज़दूरों के साथ जानवरों जैसा सुलूक करने इत्यादि का भी सवाल उठाया गया है। कई पोस्टों में तो सीधा पूछा गया कि जब बिहार के लाखों प्रवासी मज़दूर जब हजारों कोस पैदल चल चलकर मर खप रहे थे तब शाह–नीतीश और सुशील मोदी सरीखे सभी मंत्री-नेता कहाँ थे? जब ग़रीब मज़दूर किसी तरह से अपने गाँव लौट रहें हैं तो 72 हज़ार एलईडी स्क्रीन लेकर पहुँच गए!

यह भी अजीब मामला है कि मीडिया की ख़बरों में जहाँ पड़ोसी राज्य झारखण्ड में महामारी संक्रमण की बढ़ती संख्या को फ्रंट पेज और ब्रेकिंग न्यूज़ में काफी प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। वहाँ की गैर भाजपा सरकार को पूरी तरह से विफल बताते हुए एनडीए के केन्द्रीय व प्रदेश नेताओं के बयान लगातार दिए जा रहे हैं। वहीं, बिहार में महामारी के बढ़ते ग्राफ की ख़बर अन्दर के पन्ने में देते हुए रोज़ रोज़ महामारी की बढ़ती रफ़्तार की ख़बरों से ऊपर ठीक हो रहे चंद बीमारों की ख़बर को प्रमुखता से परोसा जा रहा है।

एक वायरल हुई ख़बर में राज्य पुलिस मुख्यालय कि और से एक आला उच्चाधिकारी द्वारा अपने विभागीय अफसरों को लिखे विशेष पत्र की चर्चा भी ज़ोरों पर है। जिसमें प्रवासी बिहारी मज़दूरों की आमद के कारण गंभीर विधि व्यवस्था की समस्या होने की आशंका जताया गया है। गंभीर आर्थिक चुनौतियों से उनके परेशान और तनावग्रस्त होने को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा गया है कि – सरकार की अथक कोशिशों के बावजूद राज्य में सभी को वांछित रोज़गार मिलने की संभावना कम है। इस कारण स्वयं व उनके परिवार के भरण–पोषण के उद्देश्य से अनैतिक व विधि विरुद्ध गतिविधियों में शामिल होने की स्थिति से निपटने की तैयारी के तहत विशेष कार्य योजना बनाने सम्बन्धी निर्देश दिया गया है।

उक्त सन्दर्भ विशेष पर संज्ञान अनिवार्य हो जाता है कि जब एक ओर महामारी संक्रमण कि बढ़ती रफ़्तार के बीच भी लोगों को भयमुक्त बनाने की बजाय खुद गृहमंत्री चुनावी अभियान की भव्य शुरुआत करते हैं। उनके साथ साथ प्रदेश गठबंधन सरकार के मंत्री–नेता बिहार के लोगों और विशेष रूप से प्रवासी मज़दूरों की भलाई और रोज़गार देने के कामों को गिनवाते हुए जनादेश मांगते हैं। तो दूसरी ओर, उन्हीं का प्रशासन कह रहा है कि सबों को रोज़गार नहीं मिलने वाला है इसलिए विधि–व्यवस्था चाक चौबंद रहे...। इसका क्या मतलब निकाला जाए? जिसपर एक टिपण्णी यह भी वायरल हो रही है – जनता तुम कोरोना से लड़ो, सरकार तो चली चुनाव लड़ने!

Bihar
Bihar Legislative Assembly
bihar election
Amit Shah
BJP
Coronavirus
Epidemic corona Virus
left parties
CPI
CPIM
CPIML
Congress
Virtual rally

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 


बाकी खबरें

  • loksabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद में चर्चा होना देशहित में- मोदी, लेकिन कृषि क़ानून निरस्त करने का बिल बिना चर्चा के ही पास!
    29 Nov 2021
    सरकार की कथनी-करनी का फ़र्क़ एक बार फिर तुरंत देश के सामने आ गया। आज सुबह संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि संसद में चर्चा होना देशहित में है और सरकार हर सवाल का जवाब…
  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License