NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
अभी तक जनता वार्ड पार्षद को ही चुनती थी और चुने हुए वार्ड पार्षद अपने बीच से मुख्य पार्षद से लेकर मेयर तक चुनते थे लेकिन अब जनता सीधे मेयर-डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Mar 2022
बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
TOI

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने नगर विकास एवं आवास विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें नगर निकायों में मेयर, डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का चुनाव सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाना है। उन्हें पद से हटाने के भी प्रावधान को मंजूरी दी गयी है। कैबिनेट से नियमावली में संशोधन की मंजूरी मिलने के बाद अब इससे संबंधित विधेयक विधानमंडल से पास कराया जाएगा।

दरअसल बिहार सरकार 15 वर्षों के बाद बिहार नगर पालिका कानून 2007 में संशोधन कर रही है। अभी तक जनता वार्ड पार्षद को ही चुनती थी और चुने हुए वार्ड पार्षद अपने बीच से मुख्य पार्षद से लेकर मेयर तक चुनते थे। पहले कई जगहों से शिकायत आती रही है कि इन पदों के लिए हॉर्स ट्रेडिंग का खेल चलता था। इस संशोधन के बाद वार्ड पार्षदों की मुख्य पार्षद से लेकर मेयर तक के चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग पर रोक लग सकेगी।

राज्य में 19 नगर निगम व 263 नगर निकाय

इसके पहले सरकार ने मेयर, डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद के सीधे चुनाव को लेकर राज्यपाल ने जनवरी में बिहार नगरपालिका संशोधन अध्यादेश-2022 जारी किया था। बिहार नगरपालिका कानून में 15 वर्षों के बाद इस संशोधन का असर राज्य के 19 नगर निगम समेत सभी 263 नगर निकायों पर पड़ेगा। इस साल मई महीने में नगर निकायों का चुनाव होने की संभावना है। अब तक नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर और नगर पर्षद व नगर पंचायतों में मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का चुनाव वार्ड पार्षदों द्वारा होता था।

अविश्वास प्रस्ताव का प्रावधान समाप्त

पहले मेयर और डिप्टी मेयर के खिलाफ एक तिहाई पार्षदों द्वारा अविश्वास लाने का प्रावधान था लेकिन, अब नए प्रास्ताव से यह प्रावधान समाप्त हो गया है। अब मेयर-डिप्टी मेयर सीधे सरकार को इस्तीफा देंगे। यदि वे सात दिनों तक अपना त्यागपत्र वापस नहीं लेते हैं तो वह प्रभावी हो जायेगा। संशोधित प्रारूप में यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकार को धारा-44 के अधीन लोक प्रहरी को नियुक्त करना होगा। लोक प्रहरी की अनुशंसा के आधार पर ही सरकार मेयर, डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद अथवा उप मुख्य पार्षद को उसके पद से हटा पाएगी।

तीन लगातार बैठकों में अनुपस्थित रहने पर हटाने का प्रावधान

बिना समुचित कारण तीन लगातार बैठकों में अनुपस्थित रहने पर सरकार उन्हें हटा भी सकेगी। कर्तव्यों व कृत्यों से इंकार या उपेक्षा करने, दुराचार का दोषी पाये जाने, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होने या किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त होने पर छह माह से अधिक समय तक फरार होने पर भी हटाया जा सकेगा।

हटाए जाने पर दोबारा नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

पद से हटाए जाने वाले मेयर-डिप्टी मेयर, नगर पंचायत और नगर पर्षद के मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

शेष कार्यकाल के लिए होगा चुनाव

मेयर या डिप्टी मेयर की बर्खास्तगी, पद त्याग, मृत्यु या अन्य कारणों से पद रिक्त होने पर फिर से चुनाव होगा। जनता के मतदान के पश्चात ही इन जनप्रतिनिधियों को चुना जाएगा। इन प्रतिनिधियों का चुनाव पूर्ववर्ती मेयर-डिप्टी मेयर के शेष कार्यकाल तक के लिए ही होगा। अगर सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के पद में आकस्मिक रिक्ति होती है, तो मुख्य पार्षद या मेयर निर्वाचित पार्षदों में से किसी एक को नामित करेंगे। त्यागपत्र देने की स्थिति में वह सात दिनों के बाद प्रभावी हो जाएगा।

एक तिहाई संख्या से हटाने का था प्रावधान

इससे पहले नगर निकायों के वार्डों के निर्वाचित मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद, मेयर और डिप्टी मेयर का चयन करते थे। अनुच्छेद-25 के तहत, नगर निकाय के कुल पार्षदों की एक तिहाई संख्या वाला कोई भी ग्रुप निकाय प्रमुख को हटाने के लिए मनमाने ढंग से नोटिस दे सकता था या फिर हटाने की प्रक्रिया शुरू करा सकता था लेकिन अब बदले हुए नियम की स्थिति में एक भी वार्ड पार्षद या उनका कोई भी ग्रुप अपनी मर्जी से संबंधित निकाय प्रमुख या मेयर को हटा नहीं पाएगा।

अपग्रेड किए गए थे कई नगर निकाय

नीतीश सरकार द्वारा पिछले साल दिसंबर महीने में कैबिनेट की बैठक में 103 नए नगर पंचायत के निर्माण, 8 नए नगर परिषद के निर्माण तथा 32 नगर पंचायत का नगर परिषद में अपग्रेडेशन को मंजूरी दी गई थी। इसके साथ ही 12 नगर निकायों के विस्तारीकरण तथा 5 नगर परिषद को नगर निगम के रुप में अपग्रेड करने को भी कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी। सासाराम, मोतिहारी, बेतिया, मधुबनी और समस्तीपुर को नगर परिषद से नगर निगम बनाने की कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी।

कई राज्यों में है प्रत्यक्ष चुनाव का प्रावधान

मौजूदा समय में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी जनता सीधे मेयर, डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद तथा उप मुख्य पार्षद का चुनाव करती है। इस प्रकार का प्रावधान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी लागू है। इन राज्यों में भी मेयर, डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है। 

 

ये भी पढ़ें: बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 

Bihar
Municipal Corporation
Mayor
Deputy Mayor
election
Nitish Caninet

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे
    01 Jan 2022
    कारपोरेट-फासीवादी आक्रामकता के कैसे ख़ौफ़नाक दौर में हम  फंसे हैं, यह किसान-आंदोलन के स्थगन के 15 दिन के अंदर के घटनाक्रम से ही साफ हो गया है।
  • 2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल
    सुबोध वर्मा
    2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल
    01 Jan 2022
    पूरे साल के दौरान, औद्योगिक श्रमिकों, कर्मचारियों, किसानों, स्वरोज़गार श्रमिकों, बेरोज़गारों, पुरुष-महिलाओं, युवा-बूढ़ों – यानी कामकाजी लोगों के सभी तबक़ों ने साथ मिलकर अपनी आजीविका पर लगातार हो रहे…
  • Missionaries of Charity's
    कुमुदिनी पति
    मिश्नरीज़ ऑफ चैरिटी के FCRA रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का आवेदन क्यों ख़ारिज हुआ?
    01 Jan 2022
    मिशनरीज ऑफ चैरिटी क्या है? यह क्या काम करता है कि इसका एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का आवेदन ख़ारिज किया गया। 
  • calendar of IIT Kharagpur
    सोनिया यादव
    क्या हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए आईआईटी खड़गपुर का कैलेंडर तैयार किया गया है?
    01 Jan 2022
    कैलेंडर विवाद में जहां संस्थान और इस कैलेंडर को तैयार करने वाले इसमें कुछ भी गलत नहीं होने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई शिक्षाविद् और संस्थान के पूर्व छात्र इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: खूंटी के आदिवासी गांवों में ‘ड्रोन सर्वे’ को लेकर विरोध, प्रशासन के रवैये से तनाव
    31 Dec 2021
    एआईपीएफ़ की फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम ने झारखंड ग्रामीण विकास मंत्री को वस्तुस्थिति की रिपोर्ट सौंपी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License