NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : नीतीश कुमार की ‘हर घर नल जल’ योजना में भ्रष्टाचार, अधूरा काम
हाल ही में सरकार द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पता चला है कि राज्य में हर घर में जल नल योजना ग़ैर-कार्यात्मक और अधूरी है।
सौरव कुमार
23 Dec 2020
Translated by महेश कुमार
बिहार

नीतीश कुमार की पालतू परियोजना 'हर घर नल जल' भ्रष्टाचार के घेरे में आ गई है और उसके करीब-करीब सभी काम अधूरे होने की शिकायतों के अंबार लगे हुए है। मुख्यमंत्री की आधारशिला योजना ‘सात निश्चय योजना’ का हिस्सा होने के नाते, नल जल परियोजना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में से एक बन गई थी खासकर जब से वे सत्ता में आए है। लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि पूरे राज्य में यह योजना वित्तीय अनियमितताओं के चलते पूरी नहीं हो पाई है और परियोजना गैर-कार्यात्मक स्थिति में हैं।

विधायकों के साथ एक शुरुआती बैठक में, सीएम नीतीश ने महत्वाकांक्षी नल-जल योजना से संबंधित लोगों की शिकायतों को हल करने के आदेश दिए हैं और अधिकारियों को जिला स्तरों पर शिकायतों के निवारण के निर्देश भी दिए हैं। सरकार ने अगले साल फरवरी तक नल जल परियोजना के सभी लाभार्थियों को आधार कार्ड से जोड़ने की घोषणा की है।

राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग (PHED) द्वारा हाल ही में किए गए सर्वेक्षण से परिवारों तक इस योजना की पहुंच का पता चलता है। 28 जिलों के जिलाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों के अनुसार, जांच की गई 2,954 परियोजनाओं में से 186 अभी भी पूरी नहीं हुई हैं जबकि जांच के दौरान 279 परियोजनाएँ गैर-कार्यात्मक पाई गईं। बिना किसी शिकायत के सिर्फ 1,952 परियोजनाएं चल रही हैं, जबकि विभिन्न पैमानों पर बनी 562 परियोजनाओं में मामूली समस्याएं थीं और 189 प्रमुख समस्याओं से पीड़ित थीं।

जिलेवार जमा रिपोर्ट में खगड़िया में सबसे अधिक ऐसी परियोजनाएं (231 में से 49) पाई गई जो पूरी नहीं है। जबकि पूर्णिया में 144 परियोजना और किशनगंज में 82 में सबसे अधिक छोटी और बड़ी शिकायतें मिली हैं।

अक्टूबर के महीने में एक अन्य सरकारी रिपोर्ट में यह पाया गया था कि ग्रामीण इलाकों में  परियोजनाएं या तो धीरे चल रही है और या पूरी तरह आत्मसात दिखाई नहीं देती है। कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, खगड़िया, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा जैसे जिलों में इसका कोई काम नहीं देखा गया। डेटा नल-जल पर सरकार के बड़े दावों की पोल खोलता है क्योंकि परियोजना में बड़े पैमाने का जमीनी स्तर का भ्रष्टाचार है।

नल जल योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अधूरे काम के बारे में शिकायतों के अंबार लगे है, इसलिए पीएचईडी विभाग योजना ने योजना को आधार कार्ड से जोड़कर शिकायतों को दूर करने का नया वादा किया है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेटों को आदेश दिया गया है कि वे योजना की कार्यक्षमता की जाँच और सत्यापन के लिए निरंतर क्षेत्र का दौरा करें।

परियोजना के लिए भूमिगत पाइप लाइन अनुपयोगी पाए गई (पूर्वी चंपारण)

सरकार द्वारा परियोजना को पूरा करने के लंबे दावों के बावजूद बिहार में अपूर्ण नल-जल परियोजनाओं की कोई कमी नहीं है। कई जिलों के कई ब्लॉकों और पंचायतों में, पानी की पाइप लाइन बेकार बिछी हुई हैं और सभी घरों को पानी की टंकी से कनेक्शन का इंतज़ार है। पूर्वी चंपारण में चकिया और सुगौली ब्लॉक की उपरोक्त तस्वीरें परियोजना की गंभीर स्थिति पर सवाल उठाती हैं।

पूर्णिया में नल-जल पानी की टंकी के लिए नींव का काम 

इसी तरह, पूर्णिया जिले में ताराबादी पंचायत, जिसमें आठ वार्डों में अनुमानित 1,400 घर हैं, आज तक नल-जल की टंकी नहीं लगी है। पंचायत सचिव महरुफ़ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीएचईडी की निगरानी के तहत सिर्फ दो वार्डों में भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही हैं। पिछले चार वर्षों के बाद और राज्य के चुनाव समाप्त होने के बाद नल-जल पानी की टंकी की नींव का काम शुरू हुआ है। आसपास की पंचायतें भी नल का पानी न मिलने की शिकायत कर रही हैं। यह ध्यान दिए जाने की बात है कि पीएचईडी के सर्वेक्षणों में राज्य के सीमांचल क्षेत्र में का या तो अधूरा है या फिर वह गैर-कार्यात्मक है, जिसमें पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया शामिल भी हैं।

सरकार की शर्मिंदगी तब सामने नज़र आई जब परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान पटना जिले में अनियमितताएं पाई गईं। पालीगंज, मसौढ़ी, पंडारक, अथमलगोला, घोसबारी और दानापुर सहित एक दर्जन से अधिक पंचायतों में भ्रष्टाचार की सूचना मिली है। जिला प्रशासन सभी 12 पंचायत प्रमुखों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है।

पिछले हफ्ते, पालीगंज में चिक्की पंचायत में स्थानीय लोगों ने सार्वजनिक फंड से 36 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत की जिससे सरकार सकते में आ गई है। 

विपक्ष के मुताबिक ‘नल जल योजना’ उन सभी नीतियों में सबसे अधिक विवादास्पद है जिनकी जड़ों में भ्रष्टाचार व्याप्त हैं। पालीगंज से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के विधायक, संदीप सौरव ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि, “नीतीश कुमार के हर घर में नल-जल को लेकर बिहार में विकेन्द्रीकृत भ्रष्टाचार है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में, लोगों ने अधूरे प्रोजेक्ट के खिलाफ शिकायत की है। जो भी संरचना बनी वह या तो अपूर्ण या गैर-कार्यात्मक  है। मैंने खंड विकास अधिकारी से चार साल पहले शुरू की गई योजना की धीमी गति पर सवाल उठाया था। आने वाले समय में, हम सुशासन बाबू के विकेंद्रीकृत भ्रष्ट मॉडल का खुलासा करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की योजना बना रहे हैं।”

महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) घटकों के अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के प्रमुख चिराग पासवान ने चुनावी रैलियों के दौरान सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि नल-जल योजना एक बड़ा घोटाला है।

मुज़फ़्फ़रपुर में निर्माणाधीन नल-जल

बेगूसराय के मंसूरचक ब्लॉक में, योजना के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद नल के पानी के लिए बनी संरचना दुर्बल हो गई थी। एमडी इज़हार के अनुसार, भंडारण और आपूर्ति के लिए टंकी में  पानी भर जाने के बाद ओवरहेड टैंक गिर गया। इसी तरह, समस्तीपुर जिले के रोसरा के शिवाजी नगर ब्लॉक में एक पानी की टंकी गिर गई। साहेबगंज ब्लॉक, मुज़फ़्फ़रपुर में बंगरा निज़ामत पंचायत से भी शिकायतें इसी तरह की दर्ज की गईं, जहाँ ग्रामीणों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर नल जल परियोजना के कार्यान्वयन में पंचायत अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार की उचित जाँच करने की माँग की है। मोतीपुर ब्लॉक के अंतर्गत नारियार पंचायत में ग्रामीणों की पीड़ा इस बात को लेकर है कि पानी की टंकी के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं है। रामेश्वर राय के अनुसार, नल-जल पानी की टंकी को पिछले साल इस वादे के साथ बनाया गया था कि दिन में तीन बार पानी दिया जाएगा, लेकिन गांव के किसी भी घर में पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके अलावा, कोई भी स्थायी पंचायत अधिकारी सेट अप को संचालित करने के लिए नामित नहीं है। पीएचईडी के सर्वेक्षण के अनुसार, नारियार में अकुशल नल-जल पाइप कनेक्टिविटी या रिसाव की छोटी समस्या मिली है।

इस बीच, मुजफ्फरपुर प्रशासन विभिन्न ब्लॉकों में अनियमितताओं की जांच के लिए बैक-टू-बैक समितियों का गठन कर रहा है। पारो और साहेबगंज से भ्रष्टाचार की मिली अधिकतर रिपोर्ट ने डीएम डॉ॰ चंद्रशेखर सिंह को लापरवाही के खिलाफ जांच के आदेश देने पर मजबूर कर दिया है। पीएचईडी विभाग में एक सूत्र ने नाम न छापने के हवाले से बताया कि नल-जल के बारे में लगातार शिकायतों से सरकार अब बैकफुट पर चली गई है, इसलिए सभी डीएम को निर्देश दिया गए है कि वे परियोजनाओं के निष्पादन पर कड़ी नजर रखें और भ्रष्टाचारियों और शरारती तत्वों के खिलाफ मजबूती से कार्रवाई करें।

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज़ करने के बाद, नीतीश कुमार ने ‘सात निश्चय योजना’ के निश्चय-2 की घोषणा की है, जिसमें युवा-महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण सड़क संपर्क, हर खेत तक पानी, ठोस-कचरा प्रबंधन शामिल हैं। गांवों में स्ट्रीट सोलर लाइट और हर दरवाजे पर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना है। लेकिन विडंबना यह है कि सात निश्चय कार्यक्रम की पहले भाग की नल-जल योजना अपने आप में समस्याग्रस्त हो गई है।

Nitish Kumar
Bihar Water Supply
Bihar Nal Jal Scheme
NDA Bihar
Corruption in Bihar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर

बिहारः मुज़फ़्फ़रपुर में अब डायरिया से 300 से अधिक बच्चे बीमार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती

कहीं 'खुल' तो नहीं गया बिहार का डबल इंजन...

बिहार: नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध

बिहार में 1573 करोड़ रुपये का धान घोटाला, जिसके पास मिल नहीं उसे भी दिया धान


बाकी खबरें

  • Banaras
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : बनारस में कौन हैं मोदी को चुनौती देने वाले महंत?
    28 Feb 2022
    बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र बीएचयू IIT के सीनियर प्रोफेसर और गंगा निर्मलीकरण के सबसे पुराने योद्धा हैं। प्रो. मिश्र उस मंदिर के महंत हैं जिसकी स्थापना खुद तुलसीदास ने…
  • Abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    दबंग राजा भैया के खिलाफ FIR ! सपा कार्यकर्ताओं के तेवर सख्त !
    28 Feb 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma Ukraine में फसे '15,000 भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लाने की सियासत में जुटे प्रधानमंत्री' के विषय पर चर्चा कर रहे है। उसके साथ ही वह…
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी वोटिंग पैटर्न: ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा और शहरों में कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में अब तक के वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझा कर रख दिया है, शहरों में कम तो ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग ने पेच फंसा दिया है, जबकि पिछले दो चुनावों का वोटिंग ट्रेंड एक…
  • banaras
    सतीश भारतीय
    यूपी चुनाव: कैसा है बनारस का माहौल?
    28 Feb 2022
    बनारस का रुझान कमल खिलाने की तरफ है या साइकिल की रफ्तार तेज करने की तरफ?
  • एस एन साहू 
    उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 
    28 Feb 2022
    क्या भाजपा को देर से इस बात का अहसास हो रहा है कि उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक पिछड़े वर्ग के समर्थन की जरूरत है, जिन्होंने अपनी जातिगत पहचान का दांव खेला था?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License