NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: नीतीश की अगुआई वाली कैबिनेट में कोई मुस्लिम नहीं, अल्पसंख्यक मतदाता चकित
243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या 24 से घटकर 19 रह गई है। सत्ताधारी जेडी (यू) से कोई भी इस बार नहीं जीता है हालांकि पार्टी ने 11 मुसलमानों को टिकट दिया था।
मोहम्मद इमरान खान
18 Nov 2020
Representational use only
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए

पटना: “इस बार नीतीश कुमार की नहीं बीजेपी की सरकार है बिहार में, इसीलिए एक भी मुसलमानों की मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। ये एक संदेश है (मुसलमानों के लिए)।” ये बात पटना के बाहरी इलाके में स्थित फुलवारीशरीफ के रहने वाले अब्दुल रहमान ने राज्य में नई सरकार के गठन पर टिप्पणी करते हुए कहा।

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में मुस्लिम मंत्री की अनुपस्थिति ने कई लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है क्योंकि यह स्वतंत्रता के बाद पहला मौका है जब बिहार के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। लगभग 12 करोड़ की राज्य की आबादी में मुस्लिम 16.5% हैं।

राजनीतिक विश्लेषक सुरूर अहमद ने बिना मुस्लिम वाले कैबिनेट के राजनीतिक नतीजों की ओर इशारा करते हुए कहा, "यह हालिया फैसला बिहार में मुसलमानों के राजनीतिक हाशिए पर होने का संकेत देता है, हालांकि हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीट जीतने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) दावा करती रही है कि उन्होंने इस समुदाय को राज्य में सशक्त बनाया है। यह उल्लेख करने की आवश्यकता है कि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या पहले के 24 सदस्य से घटकर 19 हो गई है। सत्तारूढ़ जद-यू से इस बार कोई नहीं जीता है हालांकि पार्टी ने 11 मुसलमानों को टिकट दिया था।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता तारकिशोर प्रसाद का उप मुख्यमंत्री के रूप में चयन भी बेहद प्रतीकात्मक है क्योंकि वह कटिहार से आते हैं जो सीमांचल क्षेत्र के अंतर्गत आता है और जहां भगवा पार्टी और आरएसएस पिछले दो दशकों से एक या अन्य मुद्दों के नाम पर पर सक्रिय रूप से मुसलमानों को निशाना बनाती रही है।

विशेष रूप से बीजेपी सहित एनडीए के तीन अन्य सहयोगी दल पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा और मुकेश साहनी के नेतृत्व वाली वीआईपी ने इस विधानसभा चुनावों में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं उतारा था। इस तरह सत्तारूढ़ एनडीए के पास 125 सीटों में से एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है।

इस बीच, नीतीश कुमार ने एक दलित नेता अशोक चौधरी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो कि किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसी तरह सीएम ने इन चुनावों में पराजित हुए विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। अहमद कहते हैं कि इसने सभी को चौंका दिया है।

दूसरी ओर, विपक्ष के महागठबंधन में 13 मुस्लिम विधायक हैं। राष्ट्रीय जनता दल के आठ, कांग्रेस के चार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के एक विधायक हैं।

सड़क किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले अब्दुर रहमान हालांकि पढ़े लिखे नहीं हैं लेकिन नए मंत्रिमंडल में किसी भी मुस्लिम नेता के न होने के चलते गंभीर स्थिति को समझते हैं और इस पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की हैं।

रहमान उन हज़ारों मुसलमानों में से एक हैं जो नीतीश के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार में इस समुदाय को दरकिनार करने के इस राजनीतिक फैसले के मतलब पर चर्चा करने में व्यस्त हैं। नीतीश कुमार बीजेपी की सहयोगी पार्टी जद-यू के अध्यक्ष हैं।

गया के निवासी डॉ. रूमी और दानिश खान ने कहा कि यह स्पष्ट है कि बीजेपी नीतीश पर हावी हो रही है जो उनके मंत्रिमंडल में एक भी मुस्लिम को शामिल करने में उनकी विफलता से दिखाई देती है।

गया के राजनीतिक पर्यवेक्षक दानिश ने न्यूज़क्लिक को बताया कि नीतीश कुमार ने मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में चुनाव प्रचार के अपने अंतिम चरण के दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के साथ पड़ोसी देश में बाहरी लोगों को वापस भेजने के दावे को खारिज कर दिया था। उन्होंने मुसलमानों को पर्याप्त सुरक्षा देने के बारे में भी आश्वासन दिया था और कहा था कि इस देश में मुसलमानों की नागरिकता से वंचित करने की शक्ति किसी में नहीं है। हालांकि, दानिश ने कहा जब सरकार बनाने की बात आई तो मुसलमानों को नीतीश की योजनाओं से हटा दिया गया है।

पटना में साहुलर माइक्रो फाइनेंस के उपाध्यक्ष अरशद अजमल जो 90 के दशक के मध्य में समता पार्टी के दिनों से नीतीश को जानते हैं उन्होंने कहा, “मुझे नीतीश के इस चेहरे के बारे में पता नहीं था। मैं एक अलग प्रकार के नीतीश को जानता था, जो दावा करते थे कि वह सांप्रदायिक शक्तियों और भ्रष्टाचार के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।”

राज्य के एक नागरिक संगठन जन पहल के प्रमुख सत्यनारायण मदान ने कहा कि नीतीश का गैर-धर्मनिरपेक्ष चेहरा उजागर हो गया है और समाजवादी राजनीति के प्रति उनकी वास्तविक प्रतिबद्धता का भी खुलासा हो गया है।

उन्होंने आगे कहा, "नीतीश अब कमज़ोर स्थिति में हैं, सबसे बेहतर वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एक सहायक इंजीनियर हैं, जो विकास योजनाओं को लागू करने के लिए काम कर सकते हैं, लेकिन राजनीति और शासन पूरी तरह से बीजेपी के नियंत्रण में हैं। वह आरएसएस के एजेंडे को लागू करने तक उनका उपयोग करेगा और उस पल उन्हें इस उच्च पद से हटा देगा जब वे खुद अपना स्टैंड लेंगे।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल ख़बर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

Bihar: Nitish Kumar-led Cabinet Minus Muslims Surprises Minority Voters Among Others

Bihar government
Bihar Elections 2020
NDA Govt
Nitish Kumar
minorities
Muslims

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम


बाकी खबरें

  • Internet Shutdowns
    इशिता चिगिल्ली पल्ली
    क्यों भारतीय राज्य इंटरनेट शटडाउन पर अपनी निर्भरता बढ़ाता जा रहा है?
    21 Sep 2021
    एक बार फिर भारतीय राज्य ने इंटरनेट शटडाउन का विकल्प अपनाया है, इस बार हरियाणा में यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि क़ानून-व्यवस्था पर नियंत्रण किया जा सके। 
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    चरणजीत सिंह चन्नी बने पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री, यूपी में जानलेवा बुखार और अन्य खबरें
    20 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र होगी पंजाब के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के शपथग्रहण समारोह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री को जानलेवा धमकी देने वाला हिन्दू महासभा नेता की…
  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    जम्मू के व्यापारियों ने लगाया भेदभाव का आरोप, 22 सितंबर को बंद का ऐलान
    20 Sep 2021
    सरकार द्वारा लिए गए रिलायंस के 100 रिटेल स्टोर खोलने के फ़ैसले का विरोध करते हुए व्यापारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।
  • Yogi
    सोनिया यादव
    यूपी: ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर है योगी सरकार का  साढ़े 4 साल का रिपोर्ट कार्ड!
    20 Sep 2021
    कोरोना संकट की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों के बाहर बेड के इंतजार में तड़पते लोगों की तस्वीरें हों या युवाओं का सड़क पर रोज़गार को लेकर धरना, अखबारों में हाथरस, उन्नाव जैसे आए दिन छपते मामले हों, या…
  • crime
    एम.ओबैद
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में एमपी पहले और यूपी दूसरे स्थान परः एनसीआरबी
    20 Sep 2021
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। वहीं भ्रूण हत्या के मामले में गुजरात पहले स्थान पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License