NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : नीतीश के बयान के बाद भी सवाल बने हुए हैं
बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के इस ऐलान के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि उनका नागरिकता संशोधन क़ानून पर क्या रुख है।
अनिल अंशुमन
27 Feb 2020
Bihar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 25 फरवरी को ऐलान किया कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा और एनपीआर 2010 की तर्ज पर ही किया जाएगा। लेकिन बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले नितीश कुमार के इस ऐलान के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि उनका नागरिकता संशोधन क़ानून पर क्या रुख है।

25 फरवरी को इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने कई बार हंगामे और अशोभनीय हरकतें कर सदन का वातावरण बेहद तनावपूर्ण बना दिया। लेकिन अंततोगत्वा सदन ने सर्वसम्मति से तय किया कि बिहार में एनआरसी नहीं लागू होगा। अलबत्ता एनपीआर को लेकर नितीश कुमार ने चिरपरिचित अंदाज़ में ढुलमुल रवैया अपनाते हुए कहा कि बिहार में 2010 की तर्ज़ पर इसे लागू किया जाएगा।

बिहार में एनआरसी नहीं लागू होने के फैसले के संदर्भ में विधान सभा प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, " 'एक इंच भी नहीं हिलनेवालों’ को आज विधान सभा में हुए सर्वसम्मत निर्णय ने हज़ार किमी तक हिला दिया। वे नहीं जानते हैं कि बिहार की धरती कितनी आंदोलनकारी रही है।"            एनआरसी – सीएए – एनपीआर थोपे जाने का मुखर विरोध कर रहे भाकपा माले और इंसाफ मंच के तत्वाधान में पिछले एक माह से गाँव गाँव अभियान जा रहा था। जिसका एक चरण सम्पन्न हुआ 25 फरवरी को आहूत विधान सभा मार्च से।

मौसम के बदलते मिजाज का सामना करते मूसलाधार बारिश के बीच भी प्रदेश के कोने कोने से आए हजारों मजदूर-किसानों ने मार्च निकाला। “नितीश सरकार होश में आओ, एनपीआर पर रोक लगाओ तथा जल–जीवन–हरियाली योजना के नाम पर गरीबों को उजाड़ना बंद करो!’ के नारे लगाता हुआ यह मार्च नितीश शासन द्वारा गांधी मैदान के आबंटन को अचानक से रद्द कर देने के कारण चितकोहड़ा से निकाला गया। जिसे विधान सभा के सामने गर्दनीबाग एक नंबर गुमटी से पहले ही पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर रोके जाने के बाद मार्च वहीं एक प्रतिवाद सभा में तब्दील हो गया।

सभा को संबोधित करते हुए माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मूसलाधार बारिश का सामना करते हुए विधान सभा मार्च सफल बनाने के लिए अभिनंदन किया। इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "आज जिस समय सड़कों पर आप हजारों की संख्या में बिहार में एनपीआर–एनआरसी–सीएए नहीं लागू करने की मांग पर इकट्ठे हुए हैं और उसी समय माले के विधायकों के ही कार्यस्थगन प्रस्ताव पर बिहार विधान सभा सर्वसम्मति से उक्त काले क़ानूनों को बिहार में नहीं लागू करने का फैसला लेती है। यह जनता के आंदोलन की ही जीत है।

लेकिन सदन में मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा एनपीआर नहीं लागू करने की घोषणा करने की बजाय इसे 2010 की तर्ज़ पर लागू करने का बयान आधा अधूरा फैसला है। यदि नितीश सरकार जल्द से जल्द इसे पूरी तरह से खारिज नहीं करती है तो प्रदेश की जनता को गाँव गाँव में ग्राम सभा बुलाकर इसे निरस्त्र करना होगा।"

नीतीश सरकार द्वारा जल–जीवन–हरियाली योजना को गरीब विरोधी करार देते हुए इसके नाम पर पूरे प्रदेश में गरीबों को उजाड़े जाने को बिहार के गरीबों से विश्वासघात बताते हुए अविलंब रोक लगाने की मांग की।

सभा को माले विधायक दल के नेता महबूब आलम , विधायक सत्यदेव राम व सुदामा प्रसाद ने संबोधित करते हुए कतिपय विपक्षी पार्टियों – नेताओं द्वारा सदन में मजबूती से नहीं खड़ा होने की जानकारी दी। ऐपवा राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि आज शाहीन बाग़ आंदोलन पूरे देश में एक नयी मिसाल बन गया है। जिसमें महिलाओं की अगुवा भागीदारी और सक्रिय भूमिका एक नयी परिघटना है। क्योंकि अबतक मानुवादी विचारधारा ने उन्हें बंद घेरे में सीमित कर रखा था। सभा को इंसाफ़ मंच के नेताओं ने भी संबोधित किया।

तमाम वक्ताओं ने कहा, "जो ये दुष्प्रचारित करते हैं कि एनआरसी–सीएए–एनपीआर का विरोध सिर्फ एक क़ौम के लोग ही कर रहें हैं, वे आज यहाँ आकर देख लें कि किस तरह से गंगा–जमुनी साझी तहज़ीब को मानने वाले लोग हजारों हज़ार की तादाद में यहाँ इकट्ठे होकर विरोध कर रहे हैं। दिल्ली से उठी शाहीन बाग़ प्रतिवाद की चिंगारी आज पूरे देश में हजारों शाहीन बाग की मशाल बन चुकी है। जिसमें सभी समुदायों–संप्रदायों के लोग शामिल हो रहें हैं।"

आनेवाला समय इस बिहार के विधानसभा चुनाव का भी है। पूरे राज्य में एनआरसी–सीएए-एनपीआर समेत कई अन्य ज्वलंत जन मुद्दों पर जारी आंदोलनों का सिलसिला भी कोई न कोई राजनीतिक स्वरूप लेगा। जो संभवतः इस जटिलतम दौर में पूरे देश के लिए फिर से एक नया संदेश बने!

Bihar
Nitish Kumar
BJP
CAA
NRC
NPR
hindu-muslim
Religion Politics
CPM
CPI
CPIML

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Bharat Bandh
    विजय विनीत
    यूपी में पश्चिम से पूरब तक रही भारत बंद की धमक, नज़रबंद किए गए किसान नेता
    27 Sep 2021
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल में किसानों का आंदोलन-प्रदर्शन और चक्काजाम सुर्खियों में है। राज्य के कई इलाकों में बंद का खासा असर नज़र आया। सड़कों पर सन्नाटे के बीच किसानों का गुस्सा दिखा।…
  • modi in america
    अनिल सिन्हा
    विश्लेषण: मोदी की बेचारगी से भरी अमेरिका यात्रा
    27 Sep 2021
    भारत की कूटनीति की ऐसी पराजय पहली बार हुई है कि दुनिया के किसी देश की नज़र इस ओर नहीं है कि उसकी क्या राय है।
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन : 10 महीने बाद
    27 Sep 2021
    किसान संगठनों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिल कर 27 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। इसके मद्देनज़र, न्यूज़क्लिक की इस वीडियो में हम बता रहे हैं कि पिछले साल 3 विवादित कृषि क़ानूनों के लागू…
  • Save Tree
    सत्यम कुमार
    'विनाशकारी विकास' के ख़िलाफ़ खड़ा हो रहा है देहरादून, पेड़ों के बचाने के लिए सड़क पर उतरे लोग
    27 Sep 2021
    हरिद्वार रोड स्थित जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक, मसूरी जाने वाले पर्यटकों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है। इस काम के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े 30 साल से भी अधिक पुराने 2200 पेड़ों को…
  • ILO
    दित्सा भट्टाचार्य
    आईएलओ: दुनिया के सिर्फ आधे कर्मियों के पास ही उनकी शिक्षा के मुताबिक नौकरियां उपलब्ध 
    27 Sep 2021
    उच्च एवं उच्च-मध्यम-आय वाले देशों में सभी रोजगारशुदा लोगों में से करीब 20% लोग उद्योग की जरूरत से कहीं ज्यादा शिक्षित हैं। निम्न-मध्यम-आय के देशों के लिए इस अनुपात में हिस्सेदारी करीब 12.5% है, जबकि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License