NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: "ज़हरीली शराब का तांडव जारी, सरकार कर रही केवल बयानबाजी"
माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड के श्रीसिया व बरियारपुर गांव में जहरीली शराब से कल अबतक 6 लोगों की मौत के साथ यह आंकड़ा 62 पहुंच गया है। हकीकत में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Nov 2021
poisonous liquor
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बिहार में जहरीली शराब पीकर लोगों की मौत का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में त्योहार और पंचायत चुनाव के बीच इस तरह की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में 10 नवंबर को मुजफ्फरपुर के कांटी थाना क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर ही छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि अभी भी आधा दर्जन लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इस दौरान हालांकि एक बार फिर कार्रवाई के नाम पर थाना प्रभारी और चौकीदार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस का दावा है कि शराब के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।  

हालाँकि विपक्ष इसको लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। एक तरफ जहाँ मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने प्रभावित जिलों में जिलावार जाँच दल बनाया है। वहीं वामपंथी दल भाकपा माले ने मुजफ्फरपुर में हुई मौतों पर एक जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक की है।

माले ने अपनी विज्ञप्ति कहा कि बिहार में जहरीली शराब से हो रही मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है, दूसरी ओर सरकार केवल बयानबाजी कर रही है। माले राज्य सचिव कुणाल ने सरकार के इस रूख पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कहा कि मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड के श्रीसिया व बरियारपुर गांव में जहरीली शराब से कल अबतक 6 लोगों की मौत के साथ यह आंकड़ा 62 पहुंच गया है। हकीकत में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक है।
 
उन्होंने कहा, यह समझ में नहीं आता कि जब आज पूरा बिहार कह रहा है कि जहरीली शराब के तंत्र के पीछे राजनेताओं-प्रशासन व शराब माफिया का गठजोड़ काम कर रहा है, तब नीतीश कुमार को इसकी जांच कराने में क्या दिक्कत है? यदि पूरे मामले की जांच हो तो यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि दरअसल भाजपा-जदयू के ही लोग इसके पीछे हैं। नीतीश कुमार एक तरफ शराबबंदी पर अपनी पीठ थपथपाते हैं तो दूसरी ओर जहर परोसकर लोगों की जिंदगी से खिलावड़ कर रहे हैं। जहरीली शराब से गरीब लोग ही मारे जा रहे हैं, और गरीबों को ही जेल में ठूंस दिया जा रहा है। शराबबंदी वाले बिहार में शराबमाफियाओं व पुलिस की चांदी है। क्या नीतीश कुमार को यह सब नहीं दिखता?

उन्होंने एक बार फिर मद्य निषेध मंत्री की बर्खास्तगी और जहरीली शराब से मारे गए सभी लोगों के परिजनों के लिए 20 लाख का मुआवजा व वैकल्पिक रोजगार की तत्काल व्यवस्था की मांग की। कहा कि शराब के अवैध कारोबार पर अविलंब रोक लगाने के लिए राज्य से प्रखंड स्तर पर समावेशी निगरानी तंत्र का गठन किया जाए, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाए। लेकिन नीतीश कुमार पर इन आग्रहों का कोई असर नहीं पड़ रहा है।

मुजफ्फरपुर जहरीली शराब कांड पर माले की जांच रिपोर्ट

जांच टीम में माले राज्य कमिटी सदस्य शत्रुघ्न सहनी, इंक़लाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय परिषद आफताब आलम, इंसाफ मंच बिहार के राज्य प्रवक्ता असलम रहमानी, इंसाफ मंच बिहार के उपाध्यक्ष जफर आजम, इंसाफ मंच मुजफ्फरपुर के जिलाध्यक्ष फहद जमां, रेयाज खान, मोहम्मद एजाज, आइसा नेता मयंक कुमार शामिल थे। जांच टीम ने मृतक अशोक राय, दिलीप कुमार, सुमित कुमार राय, राम सिकील, अशोक राय और शाहजाद अली के परिवार तथा बीमार लालु दास व शयाम किशोर दास से मुलाकात की।

(1) जांच टीम को मृतक सुमित राय के पिता लक्ष्मण राय, माता आशा देवी, चाचा नरेंद्र राय आदि ने बताया कि सोमवार 8 नवंबर को शाम में सुमित राय की तबीयत खराब हुई। उसके बाद हम लोग उसे कांटी पीएचसी लेकर गए। वहां डाक्टर ने तीन इंजेक्शन दिया। जिसके बाद हालत और भी ख़राब हो गई। बाद में हॉस्पीटल के ही एम्बुलेंस से सुमित को मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेडिकल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, वहां सीटीस्कैन हुआ और उसके बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। यहां तक कि शव को घर तक लाने के लिए ऐंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं की गई। हम लोग दो हजार में निजी एम्बुलेंस के माध्यम से शव को घर लेकर लौटे। मृतक की माता ने यह भी बताया कि सुमित की उम्र 28 वर्ष थी। उसकी पत्नी और छोटे-छोटे चार बच्चे हैं, जिन्हें देखने वाला अब कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को किसी ने जहरीली शराब पिलाया था। उसी कारण उसकी मौत हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन शराब माफियाओं को ही बचाने में लगा हुआ है।

(2) जहरीली शराब के शिकार बरियारपुर गांव के मृतक दिलीप राय 50 वर्ष, पिता स्वर्गीय रामानंद राय, के भाई संजीव कुमार ने जांच टीम को बताया कि 8 नवंबर को 6 बजे दिलीप राय को उल्टी शुरू हुई। उसी समय उसे प्रशांत हॉस्पीटल जुरन छपरा में भर्ती कराया गया। हॉस्पीटल में 24 घंटे रहने के बाद 9 नवंबर को हॉस्पीटल में ही उसकी मौत हो गई, फिर उनका पोस्टमार्टम श्रीकृष्ण मेडिकल हॉस्पीटल में हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। संजीव कुमार ने साफ-साफ कहा कि दिलीप कुमार को जहरीली शराब पिलाकर मारा गया है। हामरी सरकार से मांग है कि शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा मृतक के परिवार की सहायता की जाए।

(3) बरियारपुर के ही तीसरे मृतक अशोक राय 55 वर्ष के पुत्र राहुल कुमार ने बताया कि 8 नवंबर को एक बजे रात में पिता जी को बैचैनी शुरू हुई, हम लोग उन्हें लेकर मेडिकल हॉस्पीटल गए। वहां इसीजी हुआ। उसके बाद डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनका पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया। मृतक के भाई विनय कुमार का मानना है कि अशोक की मौत जहरीली शराब से हुई है। उन्होंने कहा कि अगर हम लोग शराब कारोबारी के खिलाफ कोई आवाज उठाते हैं तो पुलिस द्वारा हम लोगों का चलना-फिरना और जीना मुश्किल कर दिया जाएगा।

(4) बरियारपुर के मृतक रामबाबू राय के पुत्र चुनचुन राय ने भी यही बताया कि 9 नवंबर की शाम में पिता जी दवा लेकर दिए। लेकिन कुछ देर के बाद बेचैनी और ज्यादा बढ गई। पसीना चलने लगा। इसी बीच आँख की रौशनी भी चली गई और फिर मौत हो गई। पोस्टमार्टम हुआ है लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है।

वहीं शराब पीने के कारण आँख की रौशनी गवाने वाले बरियारपुर के निवासी श्याम किशोर राम ने बताया कि सिरसियां चौक पर गुड्डू की दुकान पर एक ग्लास दारू पिए थे। उसके बाद मेरी आंख की रौशनी चली गई। इसी तरह लालू दास ने भी बताया कि सिरसिया चौक पर शराब पीने के बाद तबीयत खराब हुई।

स्थानीय लोगों के अनुसार तारकेश्वर पटेल, किशोर राम, लालबाबू दास, मनोज सिंह व हरि सिंह अस्पताल में भर्ती हैं।

Bihar
Poisonous liquor
Death by poisonous liquor
Bihar government
Nitish Kumar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • भाषा
    'आप’ से राज्यसभा सीट के लिए नामांकित राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से दिया इस्तीफा
    24 Mar 2022
    चड्ढा ‘आप’ द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकित पांच प्रत्याशियों में से एक हैं । राज्यसभा चुनाव के लिए 31 मार्च को मतदान होगा। अगर चड्ढा निर्वाचित हो जाते हैं तो 33 साल की उम्र में वह संसद के उच्च सदन…
  • सोनिया यादव
    पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
    24 Mar 2022
    कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
  • एजाज़ अशरफ़
    2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन
    24 Mar 2022
    बीजेपी की जीत प्रभावित करने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामाजिक धुरी बदल रही है, जिससे चुनावी लाभ पहुंचाने में सक्षम राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
  • forest
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद
    24 Mar 2022
    शोधकर्ताओं का तर्क है कि वनीकरण परियोजनाओं को शुरू करते समय नीति निर्माताओं को लकड़ी के उत्पादन और पर्यावरणीय लाभों के चुनाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • रवि कौशल
    नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 
    24 Mar 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि गरीब छात्र कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पास करने के लिए कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाएंगे। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License