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बिहार: अस्पतालों में भी नहीं सुरक्षित हैं महिलाएं, पीएमसीएच में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप
पीएमसीएच में भर्ती 15 साल की नाबालिग लड़की ने अस्पताल के ही आइसोलेशन वार्ड में तैनात सुरक्षा गार्ड पर बलात्कार का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद बिहार में एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले भी बिहार के गया जिले में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज से ऐसी ही शर्मनाक घटना सामने आई थी।
सोनिया यादव
16 Jul 2020
अस्पतालों में भी नहीं सुरक्षित हैं महिलाएं
Image Credit: Aasawari Kulkarni/Feminism In India

बिहार में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। ‘सुशासन राज’ में आए दिन कानून व्यवस्था चरमराती हुई नज़र आ रही है। ताज़ा मामला राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) से सामने आया है। यहां आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक 15 साल की नाबालिग लड़की ने अस्पताल के ही सुरक्षा गार्ड पर बलात्कार का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है तो वहीं राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म की घटना 8 जुलाई की है। 15 साल की पीड़ित नाबालिग लड़की को इसी दिन इलाज के लिए पटना के चाइल्ड होम से पीएमसीएच लाया गया था। यहां उसे आइसोलेशन वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जिसके बाद रात करीब दो बजे अस्पताल के वॉर्ड में ही तैनात एक गार्ड ने बाथरूम में नाबालिक लड़की से कथित तौर पर रेप किया।

आरोप ये भी है कि इस घटना के बाद भी आरोपी लगातार नाबालिग से छेड़छाड़ करता रहा। घटना का खुलासा तब हुआ, जब चाइल्ड वेलफेयर की महिलाकर्मी बुधवार, 15 जुलाई को लड़की का हाल जानने के लिए आइसोलेशन सेंटर पहुंची। यहां लड़की ने उन्हें रोते हुए अपनी आप बीती सुनाई।

मालूम हो कि आरोपी गार्ड का नाम महेश प्रसाद है। वो रिटायर आर्मी मैन है और अब निजी सुरक्षा गार्ड कंपनी के तहत पीएमसीएच में तैनात था। इस मामले के संबंध में चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा महिला थाने में रेप, छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है।

क्या कहना है पुलिस का?

पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी कि 8 जुलाई को पीड़िता को बाढ़ रेलवे स्टेशन पर भटकते हुए देखा गया था। जिसके बाद रेलवे पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया था। चाइल्ड हेल्पलाइन ने 15 वर्षीय किशोरी को कोरोना जांच के लिए पीएमसीएच भेज दिया था।

पटना महिला थाना की प्रभारी आरती जायसवाल ने कहा कि पीड़िता के बयान पर इस मामले की प्राथमिकी महिला थाना में दर्ज कर ली गई है तथा आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

आरती जायसवाल के मुताबिक पीएमसीएच में ही पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई गई है। जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार, 16 जुलाई को पीड़िता का 164 के तहत कोर्ट में बयान कराया जाएगा।

अस्पताल प्रशासन ने क्या किया?

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पीएमसीएच प्रशासन ने घटना के बाद सिक्योरिटी एजेंसी के अधिकारियों को अस्पताल बुलाया और भविष्य के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने अपनी तरफ से भी एहतियात के तौर पर कई कदम उठाने की बात कही है। फिलहाल पीएमसीएच में सुरक्षा की जिम्मेदारी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के पास है।
 
महिला आयोग ने लिया संज्ञान

राज्य महिला आयोग ने नाबालिग लड़की के साथ हुई दुष्कर्म की घटना को गंभीरता से लेते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। आयोग द्वारा इस मामले में प्रशासन से बात कर विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है।

आयोग की अध्यक्ष दिलमणी मिश्रा का कहना है कि की वो खुद पूरे मामले की मॉनिटरिंग करेंगी ताकि पीड़िता को इंसाफ मिल सके। उनके अनुसार, इस मामले के संबंध में उनकी महिला थाना प्रभारी से बात हो चकी है और इस पूरी घटना पर उनकी लगातार नज़र बनी हुई है।

अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

बता दें कि इस घटना के बाद बिहार में एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले भी बिहार के गया जिले में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज से ऐसी ही शर्मनाक घटना सामने आई थी। जहां अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक महिला से कथित तौर पर यौन हिंसा (कई जगह बलात्कार की बातें भी कही जा रही थी) का आरोप लगा था। इस मामले में वारदात के कुछ दिन बाद ही पीड़िता की मौत हो गई थी, जिसके बाद आरोपी स्वास्थ्यकर्मी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

सीपीएम केंद्रीय कमेटी के सदस्य कॉमरेड अरुण कुमार मिश्रा ने बिहार के सबसे बड़े और पुराने अस्पताल पीएमसीएच की इस घटना को अत्यंत उद्वेलित करने वाली बताया है। एक बयान जारी कर उन्होंने निजी कम्पनियों के हाथों सुरक्षा व्यवस्था सौंपे जाने पर सवाल भी खड़ा किया है।

उन्होंने कहा, “एक किशोरी, बाढ़ स्टेशन पर अकेली थी और पुलिस उसको लेकर पीएमसीएच आई। संभवतया उसे ईलाज की जरूरत होगी। उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था और वहां पर कार्यरत सुरक्षा गार्ड ने उसके साथ दुष्कर्म किया। अच्छी बात है कि दुष्कर्मी पकड़ा गया है और किशोरी का बयान भी दर्ज हुआ है। रक्षक के भक्षक होने की यह सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के अन्दर की घटना है। जिस तरह से निजी कम्पनियों के हाथों सुरक्षा व्यवस्था सौंपी गई, यह घटना उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।”

इसे भी पढ़ें: ‘ये कैसा सुशासन है जहां महिलाएं अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं!’

गौरतलब है कि बिहार में नीतीश सरकार भले ही सुशासन का दावा कर रही हो लेकिन आए दिन महिलाओं के खिलाफ हो रही अपराध की वारदातें राज्य में कानून व्यवस्था की पोल खोल देती हैं। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस साल अप्रैल महीने तक दुष्कर्म की 404 घटनाएं घट चुकी हैं। यानी हर महीने 101 बलात्कार हो रहे हैं। इसके साथ ही इस दौरान 874 हत्याएँ हुई हैं।

2019 के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में पिछले साल हत्या के कुल 3138 मामले दर्ज किए गए थे तो वहीं बलात्कार के 1450 मामले दर्ज हुए थे। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी रिपोर्ट में साल 2018 में देश भर के 19 मेट्रोपॉलिटन शहरों में होने वाली हत्याओं में पटना को पहले स्थान पर बताया है, तो वहीं अपराध के मामले में बिहार पांचवे स्थान पर रहा। महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि दहेज के कारण होने वाली हत्या में भी पटना पहले स्थान पर था। जबकि उत्तर प्रदेश का कानपुर दूसरे स्थान पर था।

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Nitish Kumar

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