NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
बिहार में न विकास है और न ही आपराधिक मामलों पर लगाम!
महिलाओं के साथ हो रही हिंसा के कई मामले सुर्खियों आए और चले गए। लेकिन जो इन सब के बीच रह गया, वो नीतीश सरकार और प्रशासन से सवाल है। सवाल महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का, जिसे शायद नीतीश बाबू ‘पुलिस को हतोत्साहित करने वाला’ बताकर अपनी जवाबदेही से भाग निकलें।
सोनिया यादव
27 May 2021
बिहार में न विकास है और न ही आपराधिक मामलों पर लगाम!

दो दिन पहले बिहार के समस्तीपुर में एक महिला से गैंगरेप की कोशिश हुई और उसे नग्न अवस्था में बिजली के खंभे से लटका कर छोड़ दिया गया। आज जब ये खबर लिखी जा रही है तब बिहार के बाकां से एक नाबालिग से रेप की खबर सामने आ रही है। बीते दो दिनों में राज्य में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा के कई मामले सुर्खियों आए और चले गए। लेकिन जो इन सब के बीच रह गया, वो नीतीश सरकार और प्रशासन से सवाल है। सवाल महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का, जिसे शायद नीतीश बाबू ‘पुलिस को हतोत्साहित करने वाला’ बताकर अपनी जवाबदेही से भाग निकलें।

आपको शायद इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार सिंह की हत्या का मामला याद हो। इस बाबत जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पत्रकारों ने सवाल किया तो सीएम साहब ने तल्ख लहजे में जवाब दिया था, “कृपया विकास और अपराध के मामलों को मत मिलाइए।” हालांकि कोरोनाकाल में न तो मुख्यमंत्री का विकास दिख रहा है और न ही अपराधों पर लगाम लगाता सुशासन। एक ओर लोग बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते मरने को मज़बूर हैं तो वहीं दूसरी ओर अपराध भी अपने चरम पर है।

नीतीश कुमार के दावों के इतर आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं!

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार ये दावा करते हैं कि लालू-राबड़ी के शासनकाल के मुक़ाबले उनकी सरकार में अपराध कम हुए हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के दावों के इतर बिहार पुलिस के आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं। बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर 2004 (लालू काल) से लेकर 2019 (नीतीश काल) तक के आपराधिक आंकड़े मौजूद हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक बिहार में लालू यादव की सरकार के आखिरी साल 2004 में अपराध के कुल 1,15,216 मामले दर्ज हुए थे, जबकि नीतीश कुमार की सरकार में 15 बाद 2019 में अपराध के आंकड़े घटने की बजाय (जैसा कि उनके द्वारा दावा किया जाता है) बढ़कर 2,69,096 हो गए, यानी इस दौरान दोगुने से भी ज्यादा मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है।

कुछ महीने पहले ही मीडिया के सवालों पर भड़के नीतीश कुमार ने दावा किया कि अपराध के मामलों में बिहार देश में 23वें नंबर पर आता है। लेकिन  एनसीआरबी का डेटा कहता है कि 2019 में देश भर में हुए अपराधों में से 5.2 फीसदी अपराध बिहार में दर्ज हुए। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के बाद बिहार का ही नंबर आता है। इस लिहाज़ से नीतीश कुमार का ये दावा भी हकीकत से कोसों दूर ही दिखाई पड़ता है।

शौच के लिए खेत में गई महिलाओं से हिंसा की खबरें

बहरहाल वापस लौटते हैं समस्तीपुर मामले पर। खबरों के मुताबिक महिला 25 मई की सुबह शौच के लिए निकली तो घात लगाए बैठे आरोपी उसे पकड़कर सुनसान जगह पर ले गए। वहां उसका रेप करने का प्रयास किया। जब महिला ने विरोध किया तो उसे मारा-पीटा। कहा कि चुप रहे, नहीं तो उसकी हत्या कर दी जाएगी।  पर महिला ने आरोपियों को समझाने का प्रयास किया कि हाल ही में उसका ऑपरेशन हुआ है जिसके बाद आरोपियों ने उसे छोड़ दिया, लेकिन जेवर लेकर फरार हो गए।

बिहार के गांवों से अक्सर शौच के लिए खेत में गई महिलाओं से हिंसा की खबरें सामने आती रहती हैं। जो 21वीं सदी में निश्चित तौर पर हमारे लिए शर्मनाक है। वैसे तो स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के आंकड़ों में पूरे भारत समेत बिहार को भी खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि यदि हम सत्यापित किए गए शौचालयों के आंकड़ों पर नजर डालते हैं, तो सरकार के इन दावों पर सवालिया निशान खड़े होते है।

द वॉयर की रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं, जिनमें खुले में शौच से मुक्त किए जाने के दावे को चुनौती देते हुए शौचालयों की जर्जर स्थिति, सभी को शौचालय न मिल पाने, शौचालयों का आधा-अधूरा निर्माण, शौचालय का इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए किए जाने जैसे ढेरों प्रमाण पेश किए गए हैं। यह स्थिति नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा की भी है। हैरानी की बात ये है कि बिहार के किसी भी गांव में शौचालय निर्माण के कार्य का दूसरी बार सत्यापन नहीं हुआ है। जबकि केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के दिशानिर्देश के मुताबिक किसी भी गांव या ग्राम सभा को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) का दावा करने के लिए कम से कम दो बार इसका सत्यापन कराया जाना चाहिए।

महिला सुरक्षा में नीतीश सरकार फेल!

अब नज़र डालते हैं महिला सुरक्षा पर। साल 2019 में बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक बलात्कार के कुल 1,450 मामले सामने आए। साल 2020 में मार्च महीने में देशव्यापी लॉकडाउन लगा उसके बाद से लोगों का बाहर निकलना एक तरह से कम हुआ, लेकिन इस दौरान भी रेप के मामले सामने आते रहे। बिहार पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में 82, मई में 120, जून में 152, जुलाई में 149 और अगस्त 139 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन 4 से 5 मामले सामने आए। इस दौरान कई गैंगरेप का वीडियो भी वायरल हुआ। लॉकडाउन में बिहार में नौ फीसद महिलाएं घर में ही यौन उत्पीड़न का शिकार हुई। इस दौरान बिहार की 45 फीसद महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हुईं। साथ ही छह फीसद महिलाओं को अनियोजित गर्भधारण करना पड़ा।

गौरतलब है कि तमाम दावों और योजनाओं के बावजूद एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो बिहार में महिला हिंसा में पिछले कुछ सालों में इजाफा ही हुआ है। साल 2018 की तुलना अगर साल 2019 के आंकड़ों से करें तो महिलाओं के प्रति हिंसा में 9.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। साल 2018 में महिला हिंसा की 16920 घटनाएं हुई थीं जो साल 2019 में बढ़कर 18587 हो गईं। इस दौरान सरकार महिला सुरक्षा के तमाम दावे जरूर करती रही लेकिन उसे जमीन पर नहीं उतार सकी। नीतीश बाबू भले ही सुशासन का ढोल पीट कर राज्य में ‘सब ठीक है’ का दावा कर रहे हों लेकिन बिहार में एक के बाद एक हो रही हत्याओं और बलात्कार की घटनाओं ने इस महामारी में भी कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

Bihar
crimes in bihar
crimes against women
violence against women
Women Rights
sexual crimes
sexual violence
bihar samastipur
bihar police
Nitish Kumar

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!


बाकी खबरें

  • Uttarakhand elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखण्ड चुनाव: दस साल पहले प्रस्तावित सैनिक स्कूल का इंतज़ार जारी
    12 Feb 2022
    शुक्रवार 11 फरवरी को प्रधानमंत्री ने उत्तरखंड के अल्मोड़ा जिले में एक चुनावी रैली की जिसमे उन्होंने राज्य में नए सैनिक स्कूल बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा" हमारे देश में बहुत कम संख्या में सैनिक…
  • pension
    मनजीत सिंह पटेल
    एनपीएस की जगह, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग क्यों कर रहे हैं सरकारी कर्मचारी? 
    12 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों में भी, एनपीएस की चिंता प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक है, समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी…
  • Punjab
    भाषा
    पंजाब चुनाव में 25 फीसदी उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला : रिपोर्ट
    12 Feb 2022
    एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) से संबद्ध पंजाब इलेक्शन वाच (पीईडब्ल्यू) ने 20 फरवरी को होने वाले चुनाव में कुल 1,304 उम्मीदवारों में से 1,276 उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण…
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: न होता यूं तो क्या होता!
    12 Feb 2022
    अपने राज में जो हुआ है, उस पर सवालों के जवाब के देने के लिए, मोदी जी ने जब से यह सवाल उठाने का रास्ता अपनाया है कि विरोधी नहीं होते तो क्या-क्या होता, नहीं होता, तब से विश्व गुरु कुर्सी ने खुद दौड़कर…
  • Protest
    ऋषि राज आनंद
    बार-बार धरने-प्रदर्शन के बावजूद उपेक्षा का शिकार SSC GD के उम्मीदवार
    12 Feb 2022
    एसएससी जीडी के तहत 60,000 की संख्या में रिक्तियों की घोषणा के बावजूद 30% पद ख़ाली हैं। लेकिन सरकार उन्हें भरने के लिए कदम उठाती नज़र नहीं आ रही।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License