NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: पांच साल बैठी रही जेडीयू-बीजेपी सरकार, टर्म पूरा होने पर चुनावी जुमलों की बारिश
पिछले 15 दिनों से राज्य और केंद्र सरकार लगातार बिहार में नयी योजनाओं की घोषणा और शुरुआत कर रही है। चुनाव सर पर हैं, हर कोई इस बात को समझ रहा है कि मतदाताओं को लुभाने के लिए ये घोषणाएं लगातार हो रही हैं। तब तक होती रहेंगी, जब तक आदर्श आचार संहिता लागू न हो जाये।
पुष्यमित्र
19 Sep 2020
बिहार: पांच साल बैठी रही जेडीयू-बीजेपी सरकार, टर्म पूरा होने पर चुनावी जुमलों की बारिश
फाइल फोटो : साभार प्रभात खबर

शुक्रवार 18 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन किया तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाटलीपुत्र अंतरराज्यीय बस अड्डे का। इसी दिन बिहार सरकार की कैबिनेट ने आंगनबाड़ी सेविकाओं समेत कई संविदा कर्मियों का मानदेन बढ़ाया और स्वास्थ्य विभाग के 1429 नये पदों के सृजन की मंजूरी दी। अगले दिन शनिवार को बिहार के दो शहरों में ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और पटना के गांधी मैदान में मेगास्क्रीन की शुरुआत होने जा रही है। इससे पहले 15 सिंतबर को खुद पीएम मोदी ने सीवर संयंत्रों का शिलान्यास और उद्धाटन किया था। 13 सितंबर को उन्होंने ही तेल और गैस से जुड़ी तीन योजनाओं की शुरुआत की थी। 10 सितंबर को मोदी ने खुद कृषि और पशुपालन विभाग से जुड़े कई संस्थानों का उद्घाटन किया। 

इस बीच यह घोषणा हो चुकी है कि दरभंगा शहर में एम्स बनेगा। दरभंगा में ही अक्तूबर महीने के आखिर से एयरपोर्ट शुरू होने की घोषणा हुई है। 8 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग के 2669 खाली पदों पर बहाली की घोषणा हो चुकी है। इसी दौरान 2014 वाली एसएससी के मुख्य परीक्षा की अनुमानित तिथि भी बतायी जा चुकी है। कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हर घर नल का जल योजना की शुरुआत की है।

पिछले 15 दिनों से राज्य और केंद्र सरकार लगातार बिहार में नयी योजनाओं की घोषणा और शुरुआत कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि ये घोषणाएं उस वक्त हो रही हैं, जब बिहार में एनडीए सरकार का कार्यकाल खत्म होने वाला है। चुनाव सर पर हैं, हर कोई इस बात को समझ रहा है कि मतदाताओं को लुभाने के लिए ये घोषणाएं लगातार हो रही हैं। तब तक होती रहेंगी, जब तक आदर्श आचार संहिता लागू न हो जाये। मगर इस बात को कोई भी दावे के साथ नहीं कह सकता कि ऐन चुनाव के वक्त शुरू हुई ये योजनाएं आगे पूरी होंगी, या चलती रहेंगी। इनमें से कई योजनाओं का तो काम अभी अधूरा है, जैसे हर घर नल का जल योजना और पाटलीपुत्र बस अड्डा, कई सिर्फ घोषणाएं हैं। खास कर नौकरियों से जुड़ी घोषणाएं। क्योंकि बिहार में 2014 में जिस नौकरी की वेकेंसी निकली थी, उसमें 2020 पूरा होने के बावजूद अभी तक बहाली की संभावना नहीं है।

11 सितंबर को यह सूचना आयी थी कि पीएम नरेंद्र मोदी अगले 10 दिनों में बिहार से जुड़ी 16 हजार करोड़ की योजनाओं की घोषणा करेंगे। और उनका यह सिलसिला जारी है। दिलचस्प है कि रेलवे वालों ने इस बीच पीएम मोदी से मुजफ्फरपुर जंक्शन पर बने एक नवनिर्मित दिव्यांग शौचालय का भी उद्घाटन करवा लिया है। यह तो संयोग रहा कि किशनगंज के एक नवनिर्मित पुल का उद्घाटन पीएम के हाथों नहीं कराया गया, जो उद्घाटन से पहले ही ध्वस्त हो गया है।

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी ताबड़तोड़ घोषणाएं कर रहे हैं। उचित तो यह था कि ये घोषणाएं सरकार बनने के वक्त होतीं, और अगले पांच साल में इन्हें पूरा किया जाता। मगर विडंबना यह है कि जब सरकार का टर्म पूरा हो रहा है, तब राज्य पिछले पांच साल से बाढ़ और दूसरी आपदाओं से जूझ रहे बिहार के निवासियों पर घोषणाओं की बरसात हो रही है।

हालांकि इस बार तो कम है। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्य के लिए 1,25,000 करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी। अगर उस पैकेज का ठीक से अध्ययन किया जाये तो पता चलता है कि उनमें से एक चौथाई योजनाएं भी पूरी नहीं हो पायी हैं। 

यह इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक दलों ने वोटरों की नस को पकड़ लिया है। वे ऐन चुनाव के वक्त घोषणा करते हैं ताकि वोटर उनके झांसे में आ जाये। फिर भूल जाते हैं, लोग भी इस बात पर निगाह नहीं रखते कि जो वादे किये थे, वे पूरे हुए या नहीं। मगर क्या लगातार परिपक्व हो रहे भारतीय लोकतंत्र के लिए इस तरह की प्रक्रियाएं ठीक हैं, क्या चुनाव आयोग को इस पर भी लगाम नहीं लगाना चाहिए?

इस सवाल पर जब हमने एनएपीएम से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आशीष रंजन से बात की तो उन्होंने कहा कि पहली बात तो ये अनियोजित घोषणाएं हैं। इसके पीछे कोई प्लानिंग नहीं है, बस एक खास इलाके को प्रभावित करने के लिए घोषणाएं कर दी गयी हैं। जो लोकतन्त्र के लिहाज से कहीं से उचित नहीं है।

दूसरी बात पिछ्ले अनुभव ऐसे रहे हैं कि ऐसी चुनावी घोषणाएं अक्सर धरातल पर सही से उतर नहीं पातीं, ये बस मीडिया में बने रहने का मसला बन कर रह जाती हैं। 2015 में जो मोदी जी ने बिहार के लिए 1.25 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी, उसकी बात किसको याद है। कोई पड़ताल भी नहीं करता कि इनमें से कितनी योजनायें पूरी हुईं। 

वे कहते हैं, आश्चर्य की बात तो यह है कि इस वक़्त मेदान्ता द्वारा एक सरकारी अस्पताल को खरीद कर प्राइवेट अस्पताल खोलने के मामले का क्रेडिट भी हमारे मुख्यमंत्री खुद ले रहे हैं। इसमें उनका योगदान क्या है, इतना ही न कि वे एक सरकारी अस्पताल को बिकने से बचा नहीं सके।

पटना स्थित एएन सिन्हा संस्थान के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर कहते हैं कि पिछ्ले दस दिनों से जिस तरह घोषणाओं की बारिश हो रही है, उससे लगता है कि सरकार आज से पहले हाथ पर हाथ रख कर बैठी रही, अब जाकर उसने काम करना शुरू किया है। हालांकि यह काम भी बहुत सन्तोषजनक नहीं है, बस जुमलेबाजी प्रतीत हो रही है। जैसे आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय अप्रैल, 2021 से बढ़ाया जा रहा है। जबकि इस सरकार का कार्यकाल नवम्बर, 2020 में ही खत्म हो रहा है। कई ऐसी योजनाओं का भी उद्घाटन कर दिया गया है, जो अभी अधूरी ही हैं। देखना यह भी होगा कि क्या इन योजनाओं के लिए वित्त विभाग से इजाजत भी ली गयी है या नहीं।

वे कहते हैं, अगर केन्द्र सरकार सचमुच बिहार पर मेहरबान है तो उसे बिहार का वाजिब वित्तीय हक देना चाहिये। जीएसटी का बकाया देना चाहिये, बाढ़ से हुए नुकसान का पैकेज देना चाहिये, इसके बदले सरकार उन योजनाओं की घोषणा कर रही हैं जिनका कोई भरोसा नहीं।

(पुष्यमित्र स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
Bihar Elections
Nitish Kumar
bjp-jdu
BJP
Narendra modi

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर


बाकी खबरें

  • यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    पीपल्स डिस्पैच
    यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    30 Mar 2022
    यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला युद्ध अब आधिकारिक तौर पर आठवें साल में पहुंच चुका है। सऊदी नेतृत्व वाले हमले को विफल करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए हज़ारों यमन लोगों ने 26 मार्
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में संकटग्रस्त प्रधानमंत्री इमरान ने कैबिनेट का विशेष सत्र बुलाया
    30 Mar 2022
    यह सत्र इस तरह की रिपोर्ट मिलने के बीच बुलाया गया कि सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य दल एमक्यूएम-पी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। 
  • national tribunal
    राज वाल्मीकि
    न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा
    30 Mar 2022
    “नेशनल ट्रिब्यूनल ऑन कास्ट एंड जेंडर बेस्ड वायोंलेंस अगेंस्ट दलित वीमेन एंड माइनर गर्ल्स” जनसुनवाई के दौरान यौन हिंसा व बर्बर हिंसा के शिकार 6 राज्यों के 17 परिवारों ने साझा किया अपना दर्द व संघर्ष।
  • fracked gas
    स्टुअर्ट ब्राउन
    अमेरिकी फ्रैक्ड ‘फ्रीडम गैस’ की वास्तविक लागत
    30 Mar 2022
    यूरोप के अधिकांश हिस्सों में हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग का कार्य प्रतिबंधित है, लेकिन जैसा कि अब यूरोपीय संघ ने वैकल्पिक गैस की आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर रुख कर लिया है, ऐसे में पिछले दरवाजे से कितनी…
  • lakhimpur kheri
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब
    30 Mar 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘ एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को जांच की निगरानी कर रहे न्यायाधीश के दो पत्र भेजे हैं, जिन्होंने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के वास्ते राज्य…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License