NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार चुनाव : क्या वामपंथ की ज़मीनी सक्रियता से परेशान है भाजपा!
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बयान कि राजद पर भाकपा माले ने कब्ज़ा जमा लिया है...इसी की तरफ़ संकेत करता है कि भाजपा में, महागठबंधन में वाम दलों के शामिल होने से काफ़ी बेचैनी है।  
अनिल अंशुमन
20 Oct 2020
 बिहार में पहले और दूसरे दौर के लिए चुनाव प्रचार  तेज़ हो गया है। दीघा विधानसभा में प्रचार करती महागठबंधन उम्मीदवार शशि यादव।
बिहार में पहले और दूसरे दौर के लिए चुनाव प्रचार  तेज़ हो गया है। दीघा विधानसभा में प्रचार करती महागठबंधन उम्मीदवार शशि यादव।

क्या अजीब संयोग है कि उधर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी संभावित हार को देखकर ट्रम्प महोदय अपने विरोधियों पर वामपंथी होने का आरोप लगा रहें हैं। तो इधर इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपनी सरकार व पार्टी की हार की आशंका से त्रस्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी प्रलाप रहें हैं कि राजद पर भाकपा माले ने कब्ज़ा जमा लिया है जिससे विध्वंसकारी ताकतों को बल मिलेगा। इसके पहले भी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र प्रदेश भाजपा के मुखर नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री महोदय सुशील मोदी भी आए दिन सभी मंचों से राजद पर चीन समर्थकों (वामपंथी दल) से हाथ मिलाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन दिख रहा है कि बिहार की व्यापक जनता इन बातों को कोई महत्व नहीं दे रही है। 

जाने क्यों इस बार के विधानसभा चुनाव में मीडिया के एक विशेष वर्ग को पूर्ववर्ती राजद शासन काल में हुए जनसंहारों के पीड़ितों के न्याय की चिंता अचानक से सताने लगी है। एक स्थापित मीडिया के एंकर महोदय माले महासचिव से इंटरव्यू के दौरान बार बार यही सवाल पूछते नज़र आए कि यदि महागठबंधन की सरकार बन गयी तो क्या माले जनसंहारों के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए सरकार पर दबाव डालेगा…इत्यादि।

सनद हो कि भाजपा–जदयू गठबंधन के नीतीश कुमार शासन काल में ही सभी जनसंहारों के आरोपियों को हाईकोर्ट द्वारा दोषमुक्त कर दिये जाने के खिलाफ एनडीए सरकार पूरी तरह से खामोश बनी रही। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़ित परिजनों ने ही अपील दायर कर रखी है। इस मामले को इस तथाकथित मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी पूरी तरह से दबाये रखा और एकबार भी भाजपा– जदयू सरकार की संदिग्ध भूमिका पर कोई सवाल नहीं उठाया।

मार्के की बात यह भी है कि कल तक जो मीडिया बिहार के चुनावों में जनता के ज़मीनी सवालों में हमेशा सक्रिय रहने के बावजूद चुनावी जीत के मामले में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के लिए वामपंथी दलों को काफी हास्यास्पद और कमजोर दिखाती थी। इस बार के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार की दुबारा जीतने के अनुकूल हालात नहीं देख और वामपंथी दलों के महागठबंधन में शामिल हो जाने से उनकी सरकार को मिल रही चुनौतियों से काफी बेचैन है। इसीलिए महागठबंधन में शामिल वामपंथी दलों से बार बार घूमा फिराकर बस यही पूछा जा रहा है वे क्यों इसमें शामिल हुए हैं (गोया कोई भारी अपराध हो गया हो) और यदि सरकार बन गयी तो उनकी क्या भूमिका रहेगी!

वामपंथी दलों के साथ साथ कई राजनीतिक–सामाजिक विश्लेषक मीडिया के बड़े हिस्से द्वारा बिहार के चुनाव को सिर्फ जाति– केन्द्रित और सोशल इंजीनियरिंग आधारित ही दिखाने–बताने पर गहरी आपत्ति रही है। इसे शासक राजनीति का ही एक सुनियोजित कुचक्र बताते हुए इनका आरोप है कि सत्ता प्रायोजित मीडिया और उसके विश्लेषक हमेशा से आंदोलनों की धरती बिहार की छवि सिर्फ जातीय राजनीति केन्द्रित बनाए हुए हैं। जिसे इस बार का चुनाव भी एक बार फिर से गलत साबित कर देगा कि बिहार की चुनावी राजनीति सिर्फ जातीय टकराव केन्द्रित नहीं है।

जानकारों कि नज़र में इस बार बिहार चुनाव में वामपंथी दलों का महागठबंधन में शामिल होना बहुतों को रास नहीं आ रहा है। युवा सामाजिक कार्यकर्ता अनीस अंकुर के अनुसार जब जब बिहार में वामपंथ और महागठबंधन साथ हुए हैं, राज्य में इनकी सरकार बनी है। इसीलिए सत्ता पोषित मीडिया में इसबार हुए गठबंधन से काफी बौखलाहट है जो इसके द्वारा उठाए जा रहे अनाप–शनाप सवालों से साफ परिलक्षित भी हो रहा है। वामपंथी दलों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले क्या बताएँगे कि ‘ बेटी बचाओ ’ का नारा लगानेवाले सत्ताधारी दल मुजफ्फरपुर बालिका शेल्टर होम की बच्चियों के साथ हुए घिनौने कारनामों की जवाबदेह मंत्री महोदया को फिर से जदयू का उम्मीदवार क्यों बनाया गया है ? 

जाने माने वरिष्ठ आंदोलनकारी कवि आलोक धन्वा का तो यह भी कहना है कि यदि हिम्मत है तो नरेंद्र मोदी जी और उनके लोग, महज कुछ दिनों के लिए ही लालू प्रसाद जी को चुनावी प्रचार के लिए रिहा कर दें। फिर देखें कि जनादेश कैसा आता है!

वामपंथी दलों के खिलाफ भाजपा व उसके आला नेताओं द्वारा अनाप शनाप बोलने का जवाब देते हुए वाम दलों ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि – आम लोगों में सरकार के प्रति काफी आक्रोश और वोटरों में नाराजगी है, जिससे ध्यान हटाने के लिए ही लाल झंडे को निशाना बनाया जा रहा है।

अपने विभिन्न चुनावी अभियानों में भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा वामपंथ को विध्वंसकारी कहे जाने पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि एनडीए के लोग माले व सभी वामपंथी दलों पर अनाप शनाप बयानबाजी करके असली सवालों से भागना चाहते हैं। इन्होंने चुनाव के शुरुआत में ही यह बयान देकर अपनी हताशा जाहिर कर दी है। इनके नेताओं के बयानों में यह भी साफ दीख रहा है कि उन्होंने अपनी ज़मीन खो दी है।

cpim 2.jpg

14 अक्टूबर को सीपीआई के राज्य ने चुनाव घोषणा पत्र की जगह ‘ संकल्प बदलाव का ’ का जारी किया। 16 अक्तूबर को सीपीएम के पार्टी केंद्रीय कमेटी सदस्य अरुण मिश्रा व प्रदेश सचिव मण्डल सदस्य ने अपना मेनिफेस्टो जारी करते हुए वर्तमान सरकार द्वारा राज्य की जनता से विश्वासघात करने के खिलाफ इसे हटाने की अपील की है।

IMG-20201020-WA0000.jpg

17 अक्तूबर को भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन व राजराम सिंह तथा केंद्रीय कमेटी सदस्य के डी यादव ने पार्टी का चुनाव घोषणापत्र जारी करते हुए बिहार के मतदाताओं से – एनडीए हटाओ, बिहार बचाओ / जनता की दावेदारी आगे बढ़ाओ, महागठबंधन को विजयी बनाओ ! का आह्वान किया है।

mahagathbandhan.jpg

17 अक्टूबर की सुबह सभी वामदल प्रतिनिधियों के साथ मिलकर महागठबंधन नेता तेजस्वी यादव ने भी बिहार की जनता के नाम संयुक्त घोषणा पत्र जारी कर जनता से नया बिहार बनाने की अपील की है।

एक चर्चा ज़ोरों पर है कि जिस चुनाव आयोग ने अपने गाइड लाइन में चुनाव प्रचार के दौरान 200 से अधिक की संख्या की अनुमति नहीं दी थी, प्रधानमंत्री व अन्य भाजपा स्टार प्रचारकों की चुनावी सभाएं कराने के लिए ‘ सीमित संख्या ’वाली रोक हटा ली है।

फिलहाल चुनावी अभियान पूरे शबाब पर है और कल तक विपक्षी दलों के आयोजनों में इकट्ठे लोगों पर ‘ सोशल डिस्टेन्सिंग ’ नहीं होने का आरोप लगाने वाली मीडिया के लिए सत्ताधारी दल के कार्यक्रमों में जुटी भीड़ पर कोई सवाल नहीं है। गोया कोरोना संक्रमण का खतरा सिर्फ भाजपा विरोधी दलों के कार्यक्रम में ही तय है ....!

(अनिल अंशुमन स्वतंत्र लेखक और संस्कृतिकर्मी हैं।)

Bihar election 2020
BJP
jdu
left parties
JP Nadda
CPM
Coronavirus
CPIM
CPIML

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Kusmunda coal mine
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भू-विस्थापितों के आंदोलन से कुसमुंडा खदान बंद : लिखित आश्वासन, पर आंदोलन जारी
    01 Nov 2021
    कुसमुंडा में कोयला खनन के लिए 1978 से 2004 तक कई गांवों के हजारों किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन अधिग्रहण के 40 वर्ष बाद भी भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और एसईसीएल दफ्तरों…
  • Puducherry
    हर्षवर्धन
    विशेष : पांडिचेरी के आज़ादी आंदोलन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका
    01 Nov 2021
    आज एक नवंबर के दिन ही 1954 में पांडिचेरी फ्रांस से आज़ाद हुआ था। पांडिचेरी फ्रांस की गुलामी से आज़ाद कैसे हुआ और उसका भारत में विलय कैसे हुआ यह कहानी आम भारतीय जनमानस से कोसो-कोस दूर है। आइए जानते…
  • education
    प्रभात पटनायक
    विचार: एक समरूप शिक्षा प्रणाली हिंदुत्व के साथ अच्छी तरह मेल खाती है
    01 Nov 2021
    वैश्वीकृत पूंजी के लिए, अपने कर्मचारी भर्ती करने के लिए, ऐसे शिक्षित मध्यवर्ग की उपस्थिति आदर्श होगी, जो हर जगह जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, एक जैसा हो। शिक्षा का ऐसा एकरूपीकरण हिंदुत्व के जोर से…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यमन में एक बच्चा होना बुरे सपने जैसा है
    01 Nov 2021
    3 करोड़ की आबादी वाले यमन ने इस युद्ध में 2,50,000 से अधिक लोगों को खो दिया है, इनमें से आधे लोग युद्ध की हिंसा में मारे गए और बाक़ी आधे लोग भुखमरी और हैज़ा जैसी बीमारियों की वजह से।
  • Amit Shah
    सुबोध वर्मा
    लखनऊ में अमित शाह:  फिर किया पुराने जुमलों का रुख
    01 Nov 2021
    एक अहम स्वीकारोक्ति में शाह ने 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को 2024 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ जोड़ दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License