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राजनीति
बिहार चुनाव: वाम दलों ने की अपने उम्मीदवारों की घोषणा
गठबंधन के प्रमुख सहयोगी तीनों वाम दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। वाम दलों के उम्मीदवारों की सूची को देखे तो साफ़ दीखता है कि उन्होंने अपने ज़मीन से जुड़े किसान और मज़दूर नेताओ को मैदान में उतरा है। उम्मीद की जा रही है की जल्द ही बाकी सहयोगी कांग्रेस और राजद भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Oct 2020
बिहार चुनाव

बिहार चुनाव को लेकर विपक्षी गठबंधन की तस्वीर अब साफ हो गई, जबकि सत्तधारी गठबंधन आज भी गठबंधन के घटक और सीटों की तालमेल उलझा हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में कांग्रेस और तीन वाल दलों का महगठबंधन हुआ है। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा भी शामिल है। हालांकि विकसशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने फिलहाल खुद को महगठबंधन से बाहर कर लिया है। अब इस गठबंधन के प्रमुख सहयोगी तीनों वाम दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। उम्मीद की जा रही है की जल्द ही बाकी सहयोगी कांग्रेस और राजद भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देगा।

महागठबंधन की तस्वीर हुई साफ़

बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष के नेताओं ने तीन अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की तरफ से प्रेस वार्ता की थी। जिस दौरान आरजेडी, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टी और वीआईपी पार्टी के नेता मंच पर मौजूद रहे। महागठबंधन में सबसे ज्यादा 144 सीटें आरजेडी के हिस्से आई हैं। जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस 70 सीटें पाने में कामयाब रही, वहीं वाल्मीकि नगर में लोकसभा उपचुनाव की सीट भी कांग्रेस को मिली है। इसके बाद वाम मोर्चे में माले यानी सीपीआई-एमएल को सबसे ज्यादा 19 सीटे मिली हैं। जबकि सीपीआई को 6 औऱ सीपीआई-एम को 4 सीट मिली। वहीं आरजेडी के हिस्से से ही वीआईपी और जेएमएम को सीटें देने का भी ऐलान किया। इसके बाद ही प्रेस वार्ता के बीच ही वीआईपी के नेता मुकेश साहनी ने सीट बंटवारे में धोखे की बात करते हुए खुद को गठबंधन से बाहर करने का ऐलान कर दिया।

कांग्रेस के नेता अविनाश पांडे ने सभी दलों के साथ आने की तारीफ़ की और इसे मज़बूत गठबंधन बतया। अविनाश पाण्डेय ने घोषणा की कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महगठबंधन चुनाव लड़ेगी।" मतलब तेजस्वी बिहार में महागठबंधन से सीएम पद के उम्मीदवार होंगे।

इसके बाद तेजस्वी ने ताल ठोकी और कहा कि  “मैं गठबंधन के सभी साथियों का धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे नेतृत्व के लिए चुना। हम ठेठ बिहारी है और हमारा डीएनए भी शुद्ध है, बिहार की जनता बदलाव चाहती है। बिहारी जान चुके हैं और उन्होंने ठान लिया है कि जिन्होंने 15 साल तक राज्य की ये हालत बना दी, कुर्सी के प्यार में स्टेबल गवर्नमेंट को अनस्टेबल कर दिया। बिहार काम पर विश्वास करता है। बिहार के गौरव के लिए, बिहार को तरक्की के रास्ते पर लाने के लिए हम बिहार की जनता से मांग करते हैं कि हम लोगों को एक मौका दीजिए हम वो पूरा करेंगे। हम 10 लाख नौकरियां देंगे, ये सरकारी नौकरियां हैं।”

वाम दलों की ओर से कौन और कहां से है उम्मीदवार

तीनो वाम दलों ने अपने अपने कोटे की सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर दी। सीपीआई और सीआईपी-एम ने अपने सीटों को बढ़ाने की मांग की परन्तु दोनों दल इस संख्या के साथ भी गठबंधन के साथ मज़बूती से चुनाव लड़ने का दावा किया है। आइए एकबार नज़र डालते हैं तीनों दलों के उम्मीदवारों पर

सीपीआई की सूची

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा यानी सीपीआई) ने अपने उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रिमोट कंट्रोल द्वारा संचालित भाजपा के वर्चस्व वाली एनडीए सरकारों से देश और प्रदेश को मुक्त करने की अपनी घोषित राष्ट्रीय नीति के तहत बिहार विधानसभा के चुनावों में महागठबंधन के साथ वामदलों को एकजुट कर मैदान में उतरने का फैसला किया है ताकि धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक व प्रगतिशील शक्तियों के वोटों का बिखराव न होने पाये।

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1. बखरी - सूर्यकांत पासवान

2. तेघड़ा - राम रतन सिंह

3. बछवाड़ा - अवधेश कुमार राय

4. हरलाखी - रामनरेश पाण्डेय

5. झंझारपुर - रामनारायण यादव

6. रूपौली - विकास चन्द्र मंडल

सीपीआई-एम उम्मीदवारों की सूची

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा यानी सीपीआई-एम) ने भी अपने सभी उम्मीदवारों घोषणा के साथ अपने बयान में कहा कि उन्होंने धर्मनिरपेक्ष, जनतांत्रिक एवं वामपंथी दलों के मतों में बिखराव रोकने एवं भाजपा-जद (यू) के साम्प्रदायिक जनविरोधी, जनतंत्र विरोधी गठबंधन को पूरी तरह से पराजित करने के लिये, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ सीटों के तालमेल के आधार पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। महागठबंधन के साथ बातचीत के आधार पर तय सी.पी.आई.(एम.) चार विधानसभा क्षेत्रों से अपना उम्मीदवार घोषित करती है। ये विधानसभा क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

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1. विभूतिपुर (समस्तीपुर) - अजय कुमार

2. मांझी (सारण) - सत्येन्द्र यादव

3. मटिहानी (बेगूसराय) - राजेन्द्र प्रसाद सिंह

4. पीपरा (पूर्वी चम्पारण) - राजमंगल प्रसाद

भाकपा-माले ने उम्मीदवारों की जारी कर दी लिस्ट

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले यानी सीपीआई-एमएल) ने तीनों निवर्तमान विधायकों समेत खेत मजदूरों, किसानों, स्कीम वर्कर्स व मजदूरों के संघर्ष व शिक्षा अधिकार, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन की अगुआई करनेवाले चर्चित नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही सूची में कई युवा प्रत्याशी-नए चेहरे भी शामिल किए हैं। ऐसा ही एक नाम है आइसा के राष्ट्रीय महासचिव व जेएनयूएसयू के पूर्व महासचिव संदीप सौरभ पालीगंज से उम्मीदवार होंगे और दीघा से स्कीम वर्कर्स की जुझारू नेता शशि यादव चुनाव लड़ेंगी।

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पूरी सूची तीनों चरण के साथ निम्नलिखित है -

पहला चरण

1.      पालीगंज- संदीप सौरभ

2.      आरा- कयामुद्दीन अंसारी

3.      अंगिआव- मनोज मंजिल

4.      तरारी- सुदामा प्रसाद

5.      डुमरांव- अजित कुमार सिंह

6.      काराकाट-अरुण सिंह

7.      अरवल- महानंद प्रसाद

8.      घोषी- रामबली सिंह यादव

दूसरा चरण

9.      भोरे- जितेंद्र पासवान

10.  जीरादेई- अमरजीत कुशवाहा

11.  दरौली- सत्यदेव राम

12.  दरौंदा- अमरनाथ यादव

13.  दीघा- शशि यादव

14.  फुलवारी- गोपाल रविदास

तीसरा चरण

15.  सिकटा- वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता

16.  औराई- आफताब आलम

17.  बलरामपुर- महबूब आलम

18.  कल्याणपुर- रंजीत राम

19.  वारिसनगर - फूलबाबू सिंह

तीनों वाम दलों के उम्मीदवारों की सूची को देखे तो साफ़ दीखता है उन्होंने अपने ज़मीन से जुड़े किसान और मज़दूर नेताओ को मैदान में उतरा है। उनका पूरा ज़ोर भी इसबार चुनाव में किसान और मज़दूरों की मांग को उठाना है।

माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि भाजपा-जदयू के खिलाफ जनता का आक्रोश आज चरम पर है। विगत 15 वर्षों का गुस्सा संचित है जिसकी अभिव्यक्ति चुनाव में होगी। भाजपा-जदयू की सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और आज बिहार बेरोजगारी में नंबर एक पर पहुंच गया है। शिक्षा, रोजगार के साथ-साथ मुकम्मल भूमि सुधार लागू करना, खेती की नीलामी व कॉरपोरेटों की गुलामी करने वाले हाल-फिलहाल में पारित किए गए तीनों कानूनों की वापसी, स्कीम वर्करों यथा आंगनबाड़ी-रसोइया-जीविका-आशा कार्यकर्ताओं के प्रति किए गए विश्वासघात, मनरेगा में 200 दिन काम व 500 रु. न्यूनतम मजदूरी, निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक, आरक्षण को खत्म करने की साजिशों पर रोक आदि मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

Bihar Elections 2020
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CPI
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