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पर्यावरण
भारत
बिहारः गर्मी बढ़ने के साथ गहराने लगा जल संकट, ग्राउंड वाटर लेवल में तेज़ी से गिरावट
राज्य के कई ज़िलों से शिकायत सामने आई है कि ट्यूबवेल का पानी छोड़ने लगा है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ पानी के स्तर को लेकर समस्या और बढ़ सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Apr 2022
water shortage
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बिहार में गर्मी बढ़ने के साथ ग्राउंड वाटर का स्तर नीचे खिसकने लगा है जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। राज्य में कई जगहों से पानी के भीषण संकट की खबर आई है। कई जिलों से शिकायत सामने आई है कि ट्यूबवेल का पानी छोड़ने लगा है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ पानी के स्तर को लेकर समस्या और बढ़ सकती है।

प्रभात खबर के मुताबिक पीएचईडी के कंट्रोल रूम में दरभंगा, गया, जहानाबाद, बक्सर, नालंदा सहित कई जिलों से शिकायत मिली है कि वहां के चापाकल ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। ऐसे में विभाग ने 49 जल शिकायत कोषांग का गठन कराया है, इसमें जल संबंधित शिकायतों को लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों तक शिकायतों को पहुंचाया जायेगा। इसके लिए राज्य मुख्यालय पर जल शिकायत का टॉल फ्री 18001231121 को जारी किया गया है, जो अब रविवार को काम करेगा।

विभाग ने सभी डीएम को दिया निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने सभी डीएम को दिशा-निर्देश दिया है कि गर्मी को देखते हुए जल कोषांग का गठन किया गया है जिसकी निगरानी बहुत जरूरी है। विभाग के सभी अधिकारी अपने नंबर को सार्वजनिक करें ताकि आम लोगों के पास नंबर पहुंच सकें। इसके लिए विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है।

जल स्तर की निगरानी बढ़ाने का दिया गया निर्देश

विभाग ने जिला प्रशासन को बढ़ती गर्मी को देखते हुए जल स्तर की निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके लिए जन प्रतिनिधियों का भी सहयोग लेने को कहा गया है। ऐसे में आम लोगों को भी पानी की बर्बादी कम करने के लिए गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा जिसकी शुरुआत आज से होगी।

इन जिलों में बढ़ायी गयी निगरानी

राज्य मुख्यालय में पानी के संबंध में शिकायत आने के बाद से पटना पश्चिम, जहानाबाद, गया, रोहतास, अरवल, कैमूर, लखीसराय, सीतामढ़ी, मुंगेर, बेगूसराय, बांका, दरभंगा, औरंगाबाद, जमुई, भोजपुर, बक्सर, सारण, सीवान, गोपालगंज, मधुबनी, सहरसा में निगरानी बढ़ाई गई है। 

पीएचईडी ने की व्यवस्था 

गर्मी के चलते घटते जलस्तर को देखते हुई पीएचईडी ने कई तरह की व्यवस्था की है। जलापूर्ति योजनाओं में मरम्मती के लिए 4095 पंचायतों में टीम तैनात किए गए हैं। पेयजल की समस्या होने पर 484 जल टैंकर और 15 मूवेबल टैंकर से लोगों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। गर्मी में जानवरों को पानी मिले इसके लिए 20 जिलों में 261 कैटल टर्फ़ की व्यवस्था है। जिलों में शिकायत कोषांग काम करने लगा है, जहां से हर दिन जलापूर्ति संबंधित शिकायतों का निबटारा होता है। जल स्तर की निगरानी के लिए अधिकारियों की विशेष निगरानी शुरू की गयी है।

दरभंगा में ग्राउंड वाटर तेजी से नीचे खिसका 

उधर राज्य के दरभंगा जिले की बात करें तो दरभंगा में जहां गर्मी के कहर से लोग परेशान हैं, वहीं जिला में तेजी से ग्राउंड वाटर के स्तर में गिरावट आ रही है। विभाग के पास आठ हजार लीटर वाला 25 मूवेल टैंकर है, लेकिन इनमें से पांच ही नगर निगम को उपलब्ध कराया गया है।

पीएचईडी विभाग के पास इस समस्या से निबटने के लिए उपलब्ध संसाधन जनसंख्या के हिसाब से नाकाफी है।

पीएचइडी की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च तक अधिकतर क्षेत्र में पानी का लेवल 2021 की तुलना में घट गया है। कई ऊपरी सतह वाले क्षेत्र में एक फुट तक पानी का स्तर नीचे चला गया है। दूसरी ओर कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पानी का स्तर 2021 की तुलना में कुछ ही इंच कम हुआ है।

ज्ञात हो कि वर्ष 2021 में इस महीने पानी का स्तर 14 फ़ीट तीन इंच था। वहीं, चालू साल के इस महीने में ही पानी का स्तर 13 फ़ीट दो इंच तक पहुंच गया है, जबकि सामान्यता भू-जल का स्तर 18 फ़ीट पर होना चाहिए।

ग्राउंड वाटर के स्तर में गिरावट की रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पानी की दिक्कत आने से पहले ही तैयारी पूरी कर लें। उन इलाकों की निगरानी बढ़ा दें, जहां पानी का स्तर मार्च में ही गिर गया है। विभाग का मानना है कि अगर इसी तरह गर्मी रही, तो अप्रैल अंत तक जलस्तर में और जगहों पर भी गिरावट आ सकती है। पीएचईडी द्वारा पांच मूवेबल पेयजल टैंकर नगर निगम को उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से संकटग्रस्त इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्र के 322 वार्ड में हर घर नल का जल पहुंचाने की जिम्मेवारी पीएचईडी की है। अब तक 318 वार्ड में नल का जल घर तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, अधिकांश वार्ड में स्थिति खराब है। कहीं पाइप लीकेज है तो कहीं अधूरे काम की वजह से जलापूर्ति समुचित तरीके से नहीं हो पा रही है।

बहरहाल ग्राउंडवाटर के नीचे खिसकने की शिकायत मिलने के बाद पीएचईडी कार्यालय एवं समाहरणालय परिसर स्थित आपदा प्रबंधन कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यहां जलापूर्ति संबंधित शिकायत की जा सकती है और इसका निबटारा किया जा रहा है।

ग्रामीणों को नहीं मिल रहा नल जल योजना का लाभ

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के रोहतासगढ़ तथा पिपरडीह दोनों पंचायत में पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। अधिकांश चापाकल खराब हैं तो कुछ का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण पानी देना बंद कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना के तहत नल जल योजना का लाभ भी रोहतासगढ़ व पिपरडीह पंचायत के ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।

हालांकि कई गांव में भी नल जल योजना की टंकी बैठाई गई है, लेकिन कुछ गांव में आधा घंटा से अधिक समय तक कभी नहीं चलता है। अधिकांश योजना कागज पर ही चालू है। बाध्य होकर गांव के लोग चुआड़ी व कुआं से किसी तरह प्यास बुझाने के लिए पानी का व्यवस्था करते हैं। पत्थरों के चट्टानों को काट कर पहाड़ी गांवो में बनाया गया कुआं में भी पत्थर से पानी बंद बूँद कर जमा होता है। तब तक लोग अपनी अपनी बारी आने का इंतज़ार करते हैं जिसके कारण कुएँ पर पानी लेने वाले लोगों की भीड़ लगी रहती है। पिपरडीह व रोहतासगढ़ पंचायत में रेहल तथा एक दो गांवों को छोड़ कर हर गांव में पानी का संकट है।

इस क्षेत्र का भूगर्भीय जल स्तर 40 से 50 फुट नीचे चला गया है। हाल के वर्षों में कैमूर पहाड़ी में जंगलों एवं गांवों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हुई है। बदलती जलवायु के चलते वर्षा अनियमित हो गया है जिसका असर भूमिगत जल स्तर पर तेजी से पड़ने लगा है। इस क्षेत्र में शीघ्र जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो यह और नीचे चला जाएगा।

ये भी पढ़ें: ग्राउंड रिपोर्ट: राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित बिहार की धनौती नदी के अस्तित्व पर संकट !

Bihar
Water crisis
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