NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
पर्यावरण
भारत
राजनीति
बिहार: नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘हर घर नल जल’ में भारी अनियमितताओं के आरोप
इस संबंध में 373 मुखियाओं के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों के सिलसिले में प्राथिमिकी दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त संबंधित अधिकारियों को 45 ठेकेदारों, 62 सुपरवाइजरों सहित 32 पंचायत सचिवों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मो. इमरान खान
15 Jan 2021
File Photo

  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘हर घर नल जल’ में व्याप्त भ्रष्टाचारों के आरोप बिहार में बढ़ते ही जा रहे हैं। एक बार फिर से विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया है और कुछ सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने भी सार्वजनिक तौर पर इस बारे में बयान दिए हैं।

ये आरोप सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कुछ नेताओं और उनके ‘चहेते ठेकेदारों’ के उपर ऊँगली उठाते हैं, जिन्होंने राज्य भर में पानी की आपूर्ति के लिए पानी की टंकियों के निर्माण कार्य और पाइपलाइन में घटिया माल का इस्तेमाल कर “नोट छापने” का काम किया है।

हर घर नल  योजना के तहत नवनिर्मित “जल-मीनार” (पानी की टंकी) की छत के ढहने का नवीनतम मामला पटना जिले के दुल्हिनबाजार ब्लाक के अंतर्गत काब पंचायत के वार्ड नंबर 5 में प्रकाश में आने से इनमें से कुछ आरोपों को बल मिला है।

उद्घाटन से पहले ही बुधवार के दिन एक पानी की टंकी की छत के ढह जाने से यहाँ के ग्रामीणों के बीच में निराशा देखने को मिली है, क्योंकि उनसे नलों के जरिये पानी की आपूर्ति का वादा किया गया था।

चूँकि यह दुर्घटना पटना के पास दुल्हिनबाजार इलाके में घटी थी, जिसे देखते हुए जिलाधिकारी चन्द्र शेखर सिंह ने इस निर्माण कार्य और प्रबंधन समिति में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दे दिए। इसके साथ ही सिंह ने 15 दिन के भीतर छत के पुनर्निर्माण के भी निर्देश दिए हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि नवनिर्मित पानी की टंकियों की छतों में आमतौर पर घटिया गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री को इस्तेमाल में लाये जाने और निर्माण कार्य में की जा रही अनियमितताओं के चलते ये ध्वस्त हो जा रही हैं।

लेकिन यह कोई अकेला मामला नहीं है। इसी प्रकार की घटनाएं कुछ अन्य जगहों से भी देखने में आई हैं। पिछले 14 दिनों में गोपालगंज के फुलवरिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले एक गाँव सहित नालंदा में सिलाव ब्लॉक, गया में गुरुआ ब्लॉक और दरभंगा के बहादुरपुर ब्लॉक में भी इसी प्रकार की घटनाएं प्रकाश में आई हैं, जब टंकी में पानी भरे जाने के बाद नवनिर्मित पानी की टंकियां भरभराकर ढह गई थीं।

योजना में कथित अनियमितताओं की ऐसी कई घटनाएं प्रकाश में आई हैं लेकिन शायद ही इनमें से किसी की रिपोर्ट की गई हो।

विपक्षी दलों के इस महत्वकांक्षी नल-जल योजना में फैले “व्यापक भ्रष्टाचार” के खिलाफ ‘हंगामा मचाने’ और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के रहस्योद्घाटन के बाद जाकर कहीं सरकार को मुखियाओं,  ठेकेदारों, सुपरवाइजरों और पंचायत सचिवों  के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पिछले हफ्ते ही नीतीश कुमार के सहयोगी दल और बथनाहा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अनिल कुमार ने हर घर जल योजना को लेकर सवाल खड़े किये थे। उनका कहना था कि नलों में जिस प्रकार की गुणवत्ता वाले जल की आपूर्ति की जा रही थी, उसका उपयोग गाय-भैंसों को नहलाने में किया जा रहा था, क्योंकि कोई भी इसका उपयोग पीने के पानी के तौर पर नहीं कर रहा है। सत्तारूढ़ दल के एक नेता द्वारा इसे सार्वजनिक तौर पर कहा गया था, जो कि मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी के तौर पर था। लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने इस बयान को नजरअंदाज कर दिया था।

पिछले महीने तक सत्तारूढ़ एनडीए नेताओं द्वारा विपक्ष द्वारा बार-बार इस मुद्दे पर सवाल खड़े किये जाने के बावजूद, नल जल परियोजना में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितताओं के आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया जा रहा था। लेकिन सूचना के अधिकार के तहत आधिकारिक आंकड़े हासिल किये जाने के बाद जब अनियमितताओं की पोल खुली तो सरकार को इसे स्वीकार करना पड़ा है और कार्रवाई शुरू करनी पड़ी है।

मुख्य सचिव कार्यालय में मौजूद आधिकारिक स्रोतों के अनुसार इस योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं के आरोप में 373 मुखियाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है। इसके अतिरिक्त संबंधित अधिकारियों को 45 ठेकेदारों, 62 सुपरवाइजरों सहित 32 पंचायत सचिवों  के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी निर्देश दे दिये गए हैं।

इसके साथ ही सरकार ने 13 खंड विकास अधिकारियों और 10 पंचायती राज अधिकारियों से भी इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान लापरवाही बरते जाने के आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण माँगा है।

पिछले वर्ष राज्य सरकार के खुद के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं इंजीनियरिंग विभाग (पीएचईडी) की रिपोर्ट ने इस योजना के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों को उजागर करने का काम किया था। इस रिपोर्ट को, जिसे 28 जिलाधिकारियों ने प्रस्तुत किया था में पाया गया था कि जिन 2,954 परियोजनाओं की जांच की गई थी, उनमें से 186 अधूरी थीं, जबकि 279 परियोजनाओं पर काम नहीं चल रहा था। इनमें से 1,952 परियोजनाओं का काम सुचारू रूप से चल रहा था। लेकिन विभिन्न पैमाने पर चल रहे 562 परियोजनाओं में मामूली खामियां देखने को मिली थीं, जबकि 189 परियोजनाएं गंभीर खामियों से जूझ रही थीं।

अक्टूबर 2020 में एक अन्य सरकारी रिपोर्ट में परियोजना के “बेहद धीमी रफ्तार” से प्रगति को प्रकाश में लाया गया था, जिसमें ग्रामीण इलाकों में इसके बेहद धीमी गति से प्रवेश की रिपोर्ट की गई थी।

वहीं अक्टूबर 2020 में आयकर विभाग द्वारा छह ठेकेदारों के घरों पर छापा मारा गया था, और जिन दो घरों से 2.28 करोड़ रूपये जब्त किये गए थे उनका संबंध नल-जल योजना से पाया गया था। 


बाकी खबरें

  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन के 11 महीने पूरे, एसकेएम ने कहा- जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, किसान घर नहीं लौटेंगे
    27 Oct 2021
    “दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए, गंभीर कठिनाइयों से जूझते हुए, इस मांग के साथ कि उनकी आजीविका को अनियमित बाजारों में कॉर्पोरेट लूट से बचाया जाए, ग्यारह महीने पूरे…
  • सौजन्य: NDTV
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 13,451 नए मामले, 585 मरीज़ों की मौत
    27 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.48 फ़ीसदी यानी 1 लाख 62 हज़ार 661 हो गयी है।
  • श्रुति एमडी
    वेलफेयर बोर्ड के पास जमा ₹4,000 करोड़, मगर निर्माण मज़दूरों को नहीं मिल रहा लाभ
    27 Oct 2021
    इस क्षेत्र की अनौपचारिक प्रकृति के कारण कंस्ट्रक्शन के काम से जुड़े मज़दूरों में वित्तीय सुरक्षा का अभाव है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सूडान : 10 लाख से ज़्यादा नागरिक तख़्तापलट के विरोध में सड़कों पर आए
    27 Oct 2021
    सेना की तरफ़ से हो रहे हमलों में सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, मगर प्रदर्शनकारी अभी भी डटे हुए हैं।
  • ndps
    अजय कुमार
    NDPS कानून और आर्यन खान: क्या सच? क्या झूठ?
    27 Oct 2021
    अगर कोई केवल नशे का आदी है तो NDPS कानून जेल नहीं बल्कि रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजने की बात करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License