NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार का कोटा प्रकरण: मुलाजिम सस्पैंड, विधायक जी पर कोई सवाल नहीं
विशेष इजाजत लेकर अपनी बेटी को कोटा से लाने वाले बिहार के भाजपा विधायक की वजह से अब तक एक अधिकारी और तीन कर्मी सस्पैंड हो चुके हैं। मगर मामले के असली दोषी विधायक जी पर न उनकी पार्टी कोई कार्रवाई कर रही है, न बिहार सरकार।
पुष्यमित्र
24 Apr 2020
Bihar

कोटा में कोचिंग करने के लिए रह रहे दूसरे कई राज्यों के बच्चों को तो वहां की सरकारें वापस लाने के उपक्रम में जुटी हैं, मगर बिहार में यह प्रसंग काफी विवादित हो गया है। राज्य के 6500 के करीब बच्चे इस वक्त कोटा में हैं, सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करके साफ-साफ कह दिया है कि इस लॉकडाउन के दौरान बिहार के 17 लाख से अधिक लोग राज्य के बाहर फंसे हैं, सबको वापस लाना सरकार के लिए मुमकिन नहीं।

इस बीच विशेष इजाजत लेकर अपनी बेटी को कोटा से लाने वाले बिहार के भाजपा विधायक की वजह से अब तक यहां एक अधिकारी और तीन कर्मी सस्पैंड हो चुके हैं। मगर मामले के असली दोषी विधायक जी पर न उनकी पार्टी कोई कार्रवाई कर रही है, न बिहार सरकार।

हाईकोर्ट में बिहार सरकार द्वारा दिये गये तर्क से लोग संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि प्रभावशाली लोग स्पेशल पास बनवाकर अपने बच्चों को कोटा से ला रहे हैं। आम लोगों के बच्चे वहां फंसे हैं। इस बीच मुजफ्फरपुर के एक पूर्व पार्षद द्वारा भी स्पेशल पास बनवाकर अपनी दो बच्चियों को कोटा से वापस लेकर आने की खबर मीडिया में है।

नवादा जिले के हिसुआ के भाजपा विधायक अनिल सिंह द्वारा स्पेशल पास बनवाकर कोटा से अपनी बेटी को लाने के मामले में हुई छानबीन के बाद हिसुआ के एसडीएम, उनके ड्राइवर जो विधानसभा के कर्मी हैं और उनके दो अंगरक्षकों को सरकार ने निलंबित कर दिया है। नवादा सदर एसडीएम अनु कुमार पर गलत तरीके से पास जारी करने का आरोप है। हालांकि कहा जा रहा है कि एसडीएम ने नवादा डीएम की सहमति से ही यह पास जारी किया था, मगर अब डीएम कह रहे हैं कि एसडीएम को मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करके ही पास जारी करना चाहिए था।

ड्राइवर शिवमंगल चौधरी पर आरोप है कि वह विधानसभा अध्यक्ष की इजाजत के बिना राज्य से बाहर चला गया। विधायक अनिल सिंह विधानसभा में सचेतक भी हैं, इस वजह से उन्हें विधानसभा से गाड़ी और ड्राइवर मिले हुए थे। उसी गाड़ी के साथ वे कोटा गये थे। उसी तरह उनके दो अंगरक्षकों शशि कुमार और राजेश कुमार पर भी अपने पदाधिकारियों की अनुमति के बगैर राज्य के बाहर जाने का आरोप है। नियमानुसार उन्हें भी सक्षम पदाधिकारी की इजाजत के बिना राज्य से बाहर नहीं जाना है।

कानूनन तो ये कार्रवाइयां सही लगती हैं, मगर चूंकि इस पूरे प्रसंग की असली जिम्मेदारी जिस विधायक पर बनती है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न होना, उससे सरकार या पार्टी द्वारा कोई सवाल न किया जाना, लोगों के बीच गुस्से का विषय बना हुआ है। क्योंकि विधायक अनिल सिंह के पद औऱ प्रभाव की वजह से अनुमंडल पदाधिकारी और अन्य तीन कर्मियों को कानून के खिलाफ जाना पड़ा।

बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी में इस मसले पर ट्विटर पर कड़ी टिप्पणी की है। भोजपुरी भाषा में टिप्पणी करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘का नीतीश जी! इ कहां के इंसाफ बा, छलनी के दोष सूप के दियाई। एमएलए गइलन आपन लईका के लियाए कोटा। पास देहलन कलक्टर के आदेश पर एसडीओ। आ जब पोल खुलल त गाज गिरल ड्राइवर पर। इ खेला सभे बुझता। बा करेजा त एमएलए और कलक्टर के साजा। सब चलती कमजोर ए लोगन पड़।'

यानी, यह कैसी बात हुई नीतीश जी। यह कहां का इंसाफ है। चलनी की गलती पर सूप को सजा देना ठीक नहीं। विधायक अपने बच्चे के लिए कोटा गये। डीएम के आदेश पर एसडीओ ने पास जारी किया। और जब पोल खुली तो ड्राइवर पर गाज गिरी। यह खेल अब सभी लोग समझने लगे हैं। अगर हिम्मत है तो विधायक और डीएम पर भी कार्रवाई कीजिये। सारी शक्ति कमजोर लोगों पर ही मत आजमाइये।

राजद ने इससे पहले भी मुजफ्फरपुर के डीएम को सजा देने की मांग की थी। क्योंकि वहां के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने भी एक प्रभावशाली पार्षद को कोटा जाने का पास जारी किया था। वे पार्षद भी अपनी दो बेटियों को लेकर वापस आ गये हैं। हालांकि इस सवाल पर वहां के डीएम ने कहा कि यह मामला लॉक डाउन के पहले चरण का था, तब कोटा में संक्रमण कम था। इसलिए नियम इतने कड़े नहीं थे।

बहरहाल इन चार सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई होने और भाजपा विधायक, मुजफ्फरपुर के पार्षद और वहां के डीएम पर कार्रवाई न होने के मामले को लेकर बिहार में सोशल मीडिया पर खूब बहसें हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि सरकार रसूखदार लोगों पर कार्रवाई करने से बच रही है। यह भी कहा जा रहा है कि चूंकि विधायक भाजपा का है, इसलिए नीतीश कुमार चाह कर भी उन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे।

इस बारे में जब बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने पूरी बातचीत सुनने के बाद कहा कि अभी वे एक वीसी में हैं। शाम छह बजे फ्री होंगे तभी कोई जवाब दे पायेंगे। बातचीत से ऐसा लगा कि वे सवाल को टाल रहे हैं।

इस बीच पटना हाईकोर्ट में भी कोटा से बच्चों को लाने के सवाल पर सुनवाई चल रही है। गुरुवार, 23 अप्रैल को इस सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट सौंपते हुए जानकारी दी कि राज्य के 17 लाख से अधिक लोग दूसरे प्रदेशों में फंसे हैं। हालांकि एक जगह बिहार सरकार ने यह जानकारी भी दी है कि राज्य के 21 लाख से अधिक लोगों ने जो राज्य से बाहर फंसे हैं, सरकारी मदद के लिए ऑनलाइन एप पर आवेदन किया है।

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव अमृत प्रत्यय ने कहा कि बिहार सरकार लॉक डाउन कानून और केंद्र सरकार के गाइडलाइन का पालन कर रही है। इसके तहत दूसरे राज्यों में फंसे किसी नागरिक को वापस नहीं लाया जा सकता। कोटा के छात्रों के लिए सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर 0612-2294600 जारी किया है। इस नंबर पर छात्र अपनी समस्या बतायेंगे तो सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी।

हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार स्पेशल बसें चलाकर वहां से अपने राज्य के छात्रों को वापस ला चुकी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम की सरकारें भी अपने छात्रों को वापस लाने के लिए सहमत हैं और वे राजस्थान के मुख्य.़मंत्री अशोक गहलौत से संपर्क कर चुकी हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अपने राज्य के बच्चों को वापस लाना चाह रहे हैं, मगर उनका आरोप है कि केंद्र सरकार उन्हें इजाजत नहीं दे रही।

Bihar
kota
Kota Case
BJP
Nitish Kumar
nitish sarkar
Patna High Court
NSA
Lockdown

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट
    सत्यम् तिवारी
    तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट
    27 Apr 2022
    डाडा जलालपुर में महापंचायत/धर्म संसद नहीं हुई, एक तरफ़ वह हिन्दू हैं जो प्रशासन पर हिन्दू विरोधी होने का इल्ज़ाम लगा रहे हैं, दूसरी तरफ़ वह मुसलमान हैं जो सोचते हैं कि यह तेज़ी प्रशासन ने 10 दिन पहले…
  • Taliban
    स्टीफन नेस्टलर
    तालिबान: महिला खिलाड़ियों के लिए जेल जैसे हालात, एथलीटों को मिल रहीं धमकियाँ
    27 Apr 2022
    तालिबान को अफ़गानिस्तान पर नियंत्रण किए हुए आठ महीने बीत चुके हैं और इतने समय में ही ये देश समाचारों से बाहर हो गया है। ओलिंपिक में भाग लेने वाली पहली अफ़गान महिला फ्रिबा रेज़ाई बड़े दुख के साथ कहती हैं…
  • modi
    न्यूज़क्लिक टीम
    100 राजनयिकों की अपील: "खामोशी से बात नहीं बनेगी मोदी जी!"
    27 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार डिप्लोमैट्स द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गयी चिट्ठी पर बात कर रहे हैं।
  • Stan swamy
    अनिल अंशुमन
    ‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण
    27 Apr 2022
    ‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’ पुस्तक इस लिहाज से बेहद प्रासंगिक है क्योंकि इसमें फ़ादर स्टैन स्वामी द्वारा सरकारों की जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ लिखे गए चर्चित निबंधों का महत्वपूर्ण संग्रह किया गया है…
  • SHOOTING RANGE
    रवि शंकर दुबे
    लखनऊ: अतंर्राष्ट्रीय शूटिंग रेंज बना आवारा कुत्तों की नसबंदी का अड्डा
    27 Apr 2022
    राजधानी लखनऊ में बने अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग रेंज को इन दिनों आवारा कुत्तों की नसबंदी का केंद्र बना दिया गया है, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License