NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : बालू खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ पुलिस ने की बर्बरता, 13 साल की नाबालिग को भी भेजा जेल 
17 फ़रवरी की दोपहर बाद से ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई, जिसमें बिहार पुलिस, कुछ ग्रामीणों(महिलाओं और बच्चे भी) के हाथ बांध कर उनके साथ बर्बरता करती नज़र आ रही है। इसके विरोध में 19 फ़रवरी को ज़िलाव्यापी प्रतिवाद किया गया और 21 फ़रवरी को बेलागंज बंद की भी घोषणा की गयी है।
अनिल अंशुमन
19 Feb 2022
bihar

पूरी दुनिया में तालिबान अपनी कट्टरता और विरोधियों के साथ किए जाने वाले क्रूर व्यवहार के कारण ही दमन के एक प्रतीक के रूप में कुख्यात हो गया है। जिनकी कारगुजारियां आये दिन देखने को भी मिलती हैं कि कैसे उनके आदेशों को नहीं मानने वालों के दोनों हाथ पीछे बांध कर क्रूर अमानवीय सलूक किया जाता है।

कुछ वैसा ही नज़ारा 17 फ़रवरी की दोपहर बाद से ही सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में दिखाते हुए बिहार पुलिस के कृत्यों को ‘तालिबानी जुल्म’ की संज्ञा दी गयी।

वीडियो में साफ़ दिखता है कि किस तरह से बिहार पुलिस के हथियारबंद जवान निहत्थे ग्रामीणों के साथ तालिबान मार्का रवैया’ अपनाए हुए हैं। बमुश्किल 6 सेकंड की इस वीडियो में छोटी व नाबालिग बच्चियों समेत दर्जनों महिला व पुरुषों के दोनों हाथ पीछे से बांधकर खुले मैदान में पुलिस के पहरे में बैठे दिखाया गया है। हाथ बंधे सभी लोग काफी डरे हुए, अस्त व्यस्त, घायल और बदहवास दिखाई पड़ते हैं।

बाद में ये पता चलता है कि उक्त घटना 15 फ़रवरी की है। जब बिहार के गया जिला स्थित बेलागंज प्रखंड के आढ़तपुर गाँव के लोगों के साथ पुलिस ने यह जघन्य कारनामा अंजाम दिया है।

आढ़तपुर गाँव में 15 फरवरी को वास्तव में क्या हुआ था, इसका असली सच इतनी ज़ल्द शायद ही कभी उजागर हो पाता यदि 18 फ़रवरी को भाकपा माले विधायक महानंद प्रसाद के नेतृत्व में भाकपा माले की टीम आढ़तपुर नहीं पहुंची होती। क्योंकि स्थानीय बालू माफिया के साथ मिलकर पुलिस ने गाँव के लोगों को ही बालू माफिया का समर्थक होने का दुष्प्रचार फैला दिया। गोदी मीडिया ने भी पुलिस व बालू माफियाओं के बयान को घटना का सही सच बताकर प्रसारित कर दिया।

इस वीडियो को आप यहाँ भी देख सकते हैं:- 

बिहार के गया में कथित तौर पर बालू माफिया के समर्थक और पुलिस pic.twitter.com/EFGV73Newg

— Utkarsh Singh (@UtkarshSingh_) February 17, 2022

माले की जांच टीम ने गत 15 फ़रवरी को गाँव में वरीय पुलिस अफसरों के नेतृत्व में सभी पीड़ित ग्रामीणों से मुलाक़ात कर पूरी वास्तविकता को जाना समझा। बाद में वहाँ इकट्ठे हुए ग्रामीणों की आक्रोश सभा को भी माले विधायक महानंद जी के साथ साथ वहाँ पहुंचे बिहार जनाधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने संबोधित किया। उन्होंने पुलिस के अत्याचार और तालिबानी कृत्य के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक आवाज़ उठाने की बात कही।

19 फ़रवरी को ज़िलाव्यापी प्रतिवाद किया गया और 21 फ़रवरी को बेलागंज बंद की भी घोषणा की गयी है।   

माले विधायक महानंद ने नीतीश कुमार सरकार व प्रशासन पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि- आढ़तपुर की घटना नीतीश सरकार की अव्वल दर्जे की दमनकारी व गरीब विरोधी नीतियों और पुलिस प्रशासन की बर्बरता का चरम उदाहरण है। गाँव से सटे पास की नदी के बालू खनन हेतु घाट सीमाकंन और सरकारी टेंडर की आड़ में बालू माफिया और उसके सरगना दबंग आपराधियों को बालू लूट की खुली छूट देने के लिए ही इस ज्यादती कांड को अंजाम दिया है। जिसे जनता कत्तई बर्दाश्त नहीं करेगी।

इस कांड में शामिल स्थानीय बालू माफिया गिरोह के सरगना जो कभी कुख्यात रणवीर सेना के कारिंदे रहें हैं, सबों के खिलाफ कई बार स्थानीय पुलिस के पास शिकायत की गयी है। लेकिन इनसे मिलीभगत होने के कारण पुलिस ने कभी भी संज्ञान नहीं लिया।

जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार आढ़तपुर के लोग वर्षों से अवैध बालू खनन से त्रस्त हैं। नदी के कटाव से अपने गाँव तथा खेती व आजीविका को बचाने के लिए बालू माफियाओं से निरंतर संघर्ष करते रहें हैं। इस बार भी जब प्रशासन बालू घाट के सीमांकन के लिए सैकड़ों हथियारबंद पुलिस के साथ पहुंचा तो गाँव के लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे। बातचीत के जरिये मामले का समाधान निकाला जा सकता था। लेकिन बालू माफियाओं के दबाव में पुलिस ने गाँव वालों को ही बालू माफिया का समर्थक बता कर हमला बोल दिया। जिससे चारो तरफ चीख पुकार और भगदड़ मच गयी। 

आक्रोशित ग्रामीणों ने भी जब प्रतिवाद करना चाहा तो दर्जनों राउंड आसूँ गैस के गोले दागे गए। लाठी चार्ज में घायल हुए लोगों का प्राथमिक इलाज़ कराने की बजाय नाबालिग बच्चियों समेत दर्जनों महिला पुरुषों को लाइन में बिठाकर, सब लोगों के हाथ पीछे से बांधकर मैदान में बिठा दिया गया। बाद में सबों को जेल भेज दिया गया। जिसमें एक लड़की की ज़ल्द ही शादी होने वाली है। 

पुलिस प्रशासन द्वारा तथाकथित बालू माफिया समर्थक दुष्प्रचारित गए आढ़तपुर गाँव की दर्जनों महिलाओं ने रोते हुए जांच टीम के सदस्यों के पुलिस लाठी चार्ज से हुए ज़ख्मों के निशान दिखाए। जवान से लेकर बुजुर्ग महिलाओं ने यह भी बताया कि पुरुष पुलिस वालों ने बर्बर सलूक करते हुए उनके निजी अंगों पर भी प्रहार किया। लाठी चार्ज से बचने के लिए अपने घरों में छुपी महिलाओं को खींच खींच कर पिटा गया। घरों में रखे सामानों को तहस नहस कर रूपये गहने भी लूट लिए गए। अबोध बच्ची प्रियांशु को ज़मीन पर पटक दिया तथा विकलांग महिला शिवपति को उसी की बैसाखी से ही खूब पिटाई कि गयी।

जांच टीम के सदस्यों ने भी देखा कि कई घरों के खिड़की दरवाज़े क्षतिग्रस्त थे और घरों के अन्दर बिछावन, कपड़े व बक्से तहस नहस हाल में थे। 

गाँव के लोगों ने बालू खनन और उठाव नहीं किए जाने सम्बन्धी जिला प्रशासन व खनन विभाग को 2015 से ही बार-बार दिए गए ज्ञापनों और मांग पत्रों की प्राप्ति रसीद भी दिखाई। 

जिन पर कोई संज्ञान लिये जाने की बजाय उलटे गाँव वालों पर ही विभाग और प्रशासन ने कई बार अवैध बालू खनन का फर्जी मुक़दमा कर दिया। गाँव वालों का यह भी आरोप है कि 15 फ़रवरी के पुलिसिया हमले में नामज़द बालू माफिया के कई लठैत अपराधी पुलिस कि वर्दी में लाठी चला रहे थे।

फिलहाल 15 फ़रवरी कि घटना में 7 महिलाओं और 2 पुरुषों समेत एक नाबालिग लड़की को जेल में डाल दिया गया है।

पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक भूमिका गोदी मीडिया कि सामने आई है। जिसने खबर प्रकाशित करने में ज़मीनी सच्चाई को दबाकर ग्रामीणों को ही बालू माफिया समर्थक करार दे दिया है। 

एक स्थानीय चैनल के पत्रकार के अनुसार अधिकांश मीडियाकर्मी बालू माफियाओं के पक्ष में खड़े रहते हैं।

ये भी पढ़ें: बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

Bihar
bihar police
Police brutality
Nitish Kumar
Nitish Kumar Government
sand mafia
sand mining

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License