NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार में 1573 करोड़ रुपये का धान घोटाला, जिसके पास मिल नहीं उसे भी दिया धान
बिहार में हुए 1573 करोड़ रुपये के धान घोटाले की सीआईडी जांच में अब नए खुलासे हुए हैं। जिले के बोचहां थाने में दर्ज इस मामले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Apr 2022
rice

बिहार में हुए 1573 करोड़ रुपये के धान घोटाले की सीआईडी जांच में अब नए खुलासे हुए हैं। जिले के बोचहां थाने में दर्ज इस मामले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले में सामने आया है कि सैंकड़ों टन धान स्कूटर, ऑटो और कार से राइस मिल तक पहुँचाया गया। इतना ही नहीं जहां राइस मिल नहीं थीं वहां भी धान पहुंचा दिए गया। यहां तीन राइस मिल मालिकों पर 11 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला दर्ज है।

1400 से अधिक राइस मिल मालिकों के ख़िलाफ़ जांच जारी

ज्ञात हो कि ऐसा मामला सबसे पहले साल 2012-13 में सामने आया था। साल 2012 से अगले तीन वर्षों के दौरान चावल मिल मालिकों ने 1573 करोड़ रुपये के 74 लाख टन से अधिक के धान के बदले चावल नहीं दिया। हालांकि नीलाम वाद के बाद 349 करोड़ रुपए की वसूली हुई है। सीआईडी राज्य के 1400 से अधिक राइस मिल मालिकों के खिलाफ जांच कर रही है। अब तक 280 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता की जांच का आदेश दिया था। इसके बाद सीआईडी के एडीजी ने अधिकारियों को भी आरोपित करने का निर्देश दिया। इस पर अमल करते हुए बीएसएफसी के तत्कालीन जिला प्रबंधक संजय प्रियदर्शी की प्रोन्नति रोक दी गई। प्रियदर्शी पर आरोप है कि 2012-13 में राइस मिलों को धान देकर सरकार को 30.69 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया। वहीं, बंदरा, कटरा व साहेबगंज के सीआई पर भी राशि गबन करने की पुष्टि हुई है। इसके बाद अब तीनों सीआई की ओर से किए गए गबन की वसूली का आदेश दिया गया है।

घोटाले के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए

नियम था कि मिल मालिकों को उतना ही धान देना हैं जितनी संपत्ति उनके पास है। साथ ही राइस मिल मालिकों ने सीओ से संपत्ति का फर्जी ब्योरा तैयार करा लिया। इतना ही नहीं अधिकारियों ने मिल का स्थल सत्यापन किए बिना ही धान का आवंटन किया। किसानों से कम दाम पर खरीद कर कई पैक्स अध्यक्षों ने अपना बताया। वहीं एलपीसी बनाने वाले अंचलों के सीओ ने भी फर्जीवाड़ा किया।

बाइक व स्कूटी पर की गई धान की ढ़ुलाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फरपुर के राइस मिल में जिन वाहनों से धान पहुंचाए गए उसमें 21 वाहनों के नंबर अवैध हैं। इसमें 10 नंबर बाइक व स्कूटर, 4 ऑटो, 4 बस तथा बगैर ट्रैक्टर के तीन ट्रेलर के नंबर हैं। परिवहन कार्यालय से प्राप्त ब्यौरा के अनुसार, धान ढुलाई में प्रयोग किए गए यूपी-64 सी 4832 नंबर की गाड़ी यूपी के सोनभद्र की दयवंती देवी के नाम से रजिस्टर्ड महिंद्रा कार है। जेएच-05 एम 2549 नंबर की गाड़ी जांच में जमशेदपुर के मनीष की बजाज पल्सर बाइक निकली। यूपी-16 एबी 6109 नंबर, नोएडा के प्रेमचंद की होंडा एक्टिवा है।

मुजफ्फरपुर में ही 31 मिल मालिकों ने 35009 टन चावल का गबन किया 

रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरपुर में ही 31 मिल को दिए गए धान के बदले बिहार राज्य खाद्य निगम को 35009 टन चावल नहीं मिल पाया। अब 67.35 करोड़ की वसूली का नीलामी वाद चला रहा है। उधर, किसानों से कम दाम में धान खरीद कर कई पैक्स अध्यक्षों ने अपने खेत में हुई इसकी पैदावार (सैकड़ों क्विंटल) दिखा दी। जमीन की फर्जी एलपीसी भी बनवा ली।

मिल मालिकों से गलत अनुबंध कर दूसरे राज्यों में भी धान की आपूर्ति

अधिकारियों ने दूसरे जिले व राज्य के मिल मालिकों के साथ गलत अनुबंध कर धान दिया। स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक ने पूर्वी चंपारण के 3 राइस मिलों, शेखपुरा व बेगूसराय के एक-एक राइस मिल को धान दिया। पश्चिम बंगाल के चार मिल मालिकों को भी धान उपलब्ध कराया लेकिन बदले में चावल नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अफसरों पर हुई थी कार्रवाई 

10 साल से इस मामले की जांच चल रही है और 280 कर्मियों पर भी कार्रवाई हुई है। 1573 करोड़ रुपये के धान की राज्यभर में 2012-13 हुई हेराफेरी थी, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। इस घोटाले में 74 लाख टन धान का फर्जीवाड़ा कर्मियों-अफसरों की मिलीभगत से हुई। जांच टीम 400 वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर से ब्योरा जुटा रही है। इस बड़े मामले में राज्य में केस की सुनवाई के लिए 5 जगह विशेष कोर्ट बनाए गए हैं। 

इस मामले में राज्य पुलिस के प्रवक्ता व एडीजी (मुख्यालय) जीतेन्द्र सिंह गंगवार ने बताया कि सीआईडी के अधीन इस मामले की एसआईटी बनाकर जांच की जा रही है। कुछ मामलों में आर्थिक अपराध इकाई ने भी पूर्व में जांच की थी। कई लोगों पर सर्टिफिकेट केस भी किए गए हैं।

2014 में खरीदी गयी गाड़ी से 2013 में हुई धान की ढुलाई!

सीआईडी एसपी ने रायगंज फूडग्रेन प्रोडक्ट्स में वर्ष 2012-13 में 55 हजार 383 क्विंटल धान ढुलाई करने वाली गाड़ियों की जांच के निर्देश दिए थे। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक बिता साल आए जांच के रिपोर्ट में आईओ ने पाया था कि पश्चिम बंगाल के इस मिल में वर्ष 2013 की अलग-अलग तिथियों पर 211 वाहनों से 55 हजार 383 क्विंटल धान भेजी गई। धान का उठाव जिले के अलग-अलग क्रय केंद्रों से इन वाहनों से किया गया था। इसमें बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय से निबंधित वाहन नंबर बीआर-09 पी 6139 नंबर पर भी धान भेजे जाने का जिक्र है। इसकी जांच में सामने आया था कि यह गाड़ी बेगूसराय के कैलाश पासवान के नाम से निबंधित है। गाड़ी का प्रकार मोटरसाइकिल/स्कूटर बताया गया है। इसका निबंधन 28 मई 2014 को हुआ था। इस तरह, निबंधन से एक साल पहले ही इस बाइक या स्कूटर से 169 क्विंटल धान पश्चिम बंगाल के मिल मालिकों को पहुंचाना दिखाकर गड़बड़ी की गई थी।

घोटाले की शुरुआत वर्ष 2011 में मुजफ्फरपुर से हुई

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में वर्ष 2011 से 2014 के बीच करीब 1,500 करोड़ रुपये का धान घोटाला हुआ था। यह जानकारी सरकार ने वर्ष 2017 में बिहार विधानसभा में दी थी। बताया जाता है कि इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2011 में मुजफ्फरपुर में हुई थी।

यहां के अधिकारियों ने प्रदेश सरकार को यह सूचना दी थी कि लगातार हो रही बारिश के चलते धान पूरी तरह बर्बादी के कगार पर है। साथ ही अधिकारियों ने यह भी सूचना दी कि ऐसे धान से चावल निकालना बिहार के राइस मिल के लिए काफी कठिन काम है इसलिए इसे पश्चिम बंगाल भेजा जाए। 

पश्चिम बंगाल भेजने से इसी धान को ब्वायल कर चावल बनाया जा सकता है। सरकार को यह प्रस्ताव उस समय बेहतर लगा और उसने इसकी इजाजत दे दी। धान को पश्चिम बंगाल भेजने के लिए सरकार ने अनुमति प्रदान कर दिया और पत्र भी जारी कर दिए। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 10जिलों से कथित रूप से भीगे हुए कुल 17 लाख मीट्रिक टन धान से चावल निकालने के लिए बंगाल भेजा गया जो असल में कभी भेजे ही नहीं गए। इस क्रम में धान ढुलाई के नाम पर करोड़ों रुपए भाड़े के रूप में वाहन मालिकों को भुगतान किए गए। 

बिहार में करीब तीन हजार राइस मिल थे। घोटाला सामने आने के बाद हुई कार्रवाई में दो हजार मिल्स बंद हो गए। जब राइस मिल घोटाले का खुलासा हुआ तब प्रदेश सरकार ने लगभग 2,000 चावल मिलों को डिलॉल्टर घोषित कर दिया। 

ये भी पढ़ें: बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

Bihar
Paddy scam
Rice mills scam
Nitish Kumar
Corruption
CID
Supreme Court

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 


बाकी खबरें

  • Udupi Ground Report
    शिवम चतुर्वेदी
    उडुपी ग्राउंड रिपोर्ट : हिजाब के समर्थन में हैं कॉलेज की हिंदू लड़कियां, पर उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं
    18 Feb 2022
    कुसुम ने कहा, "हिंदू लड़के कभी भी भगवा गमछा पहन कर पहले नहीं आया करते थे शायद वह किसी के उकसावे में आकर भगवा गमछा पहन कर आ रहे हैं।"
  • narendra modi
    पार्थ एस घोष
    क्या यह मोदी लहर के ख़ात्मे की शुरूआत है?
    18 Feb 2022
    अब राजनीतिक प्रतिद्वंदी बीजेपी से खौफ़ नहीं खाते हैं, ना ही वह धारणा रही है कि बीजेपी को हराया नहीं जा सकता। अब बीजेपी को समझ आ रहा है कि लोग अच्छे प्रशासन की अपेक्षा रखते हैं।
  • Modi channi kejriwal
    रवीश कुमार
    चन्नी का बयान ग़लत है लेकिन निंदा करने वाले उससे भी ज़्यादा ग़लत हैं
    18 Feb 2022
    प्रधानमंत्री मोदी बताएं कि तालाबंदी के समय यूपी और बिहार के मज़दूर जब दर-दर भटक रहे थे तब वे क्या कर रहे थे? पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह ने तो बयान दिया है लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार ने तो…
  • yogi
    भाषा
    सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध जारी 274 भरपाई नोटिस वापस लिए गए: उप्र सरकार
    18 Feb 2022
    न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकान्त की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार करोड़ों रुपये की पूरी राशि वापस करेगी जो 2019 शुरू की गई कार्रवाई के तहत कथित प्रदर्शनकारियों से वसूली गई थी।
  • Budget 2022
    भरत डोगरा
    जलवायु बजट में उतार-चढ़ाव बना रहता है, फिर भी हमेशा कम पड़ता है 
    18 Feb 2022
    2022-23 के केंद्रीय बजट में जलवायु परिवर्तन, उर्जा नवीनीकरण एवं पर्यावरणीय संरक्षण के लिए जिस मात्रा में समर्थन किये जाने की आवश्यकता है, वैसा कर पाने में यह विफल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License