NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिरसा मुंडा का उलगुलान : सामाजिक जागरण का अभियान
बिरसा मुंडा द्वारा छेड़ा गया उलगुलान (विद्रोह) अंग्रेजी हुकूमत और स्थानीय शोषकों के खिलाफ महज एक तात्कालिक आदिवासी विद्रोह मात्र नहीं था। बल्कि यह पूरा आन्दोलन उस समय के आदिवासी और व्यापक समाज के पुनर्गठन का लोकप्रिय जन अभियान बन गया गया था। 9 जून, महानायक बिरसा मुंडा शहादत दिवस पर विशेष

अनिल अंशुमन
09 Jun 2021
बिरसा मुंडा का उलगुलान : सामाजिक जागरण का अभियान

जाने माने समाजशास्त्री और मानव विज्ञानी डा. कुमार सुरेश सिंह ने अपनी चर्चित पुस्तक ‘ बिरसा मुंडा और उनका आन्दोलन’ की भूमिका में एक कटु सत्य दर्ज किया है कि हमारे देश के इतिहास की मुख्य व प्रचलित धारा में अंग्रेजों के विरुद्ध होनेवाला आदिवासियों और जनजातियों का संग्राम हमेशा हाशिये पर रखा जाता है । हालाँकि तब से लेकर आज की स्थितियों में थोड़ा बहुत बदलाव ज़रूर आया है लेकिन आदिवासी समुदाय जैसे हाशिये पर धकेल दिए गए समूहों के प्रति उपेक्षा और उन्हें कमतर समझने के नज़रिए में मुक़म्मल तब्दीली का आना अभी भी बाकी है। देश के आदिवासी समुदायों के आदर्श नायक माने जाने वाले बिरसा मुंडा सरीखे ख्यात आदिवासीजन नायकों के व्यक्तित्व कृतित्व का सही मूल्यांकन का नहीं होना, इसी की सनद कराता है।

गौर तलब है कि बिरसामुंडा ऐसे पहले आदिवासी नायक हैं जिनकी आदमकद मूर्ति देश की सर्वोच्च संस्था संसद भवन के परिसर में स्थापित की गयी है। 28 अगस्त 1998 को तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन ने मूर्ति अनावरण करते हुए अपने संबोधन में बिरसा मुंडा को आदिवासी अधिकारों के आरंभिक प्रवर्तक संरक्षक और विदेशी सत्ता के आगे कभी न झुकने वाले योद्धा के रूप में याद करते हुए उन्हें असाधारण लोक नायक की संज्ञा दी थी। इसके पूर्व 16 अक्टूबर 1989 में इसी संसद भवन के केन्द्रीय हॉल में बिरसा मुंडा की भव्य तस्वीर को स्थापित कर राष्ट्रिय नेताओं की प्रथम श्रेणी में स्थान दिया गया गया था। बावजूद इसके आज तक बिरसा मुंडा को लेकर जो कुछ भी लिखा पढ़ा-गया है उसमें आमतौर से उनकी वही छवि परोसी गयी है जिसे अंग्रेजों ने हमेशा आदिवासियों को हिंसक और लड़ाका के रूप में चित्रित किया है।

डा. कुमार सुरेश सिंह , वरिष्ठ लेखिका महाश्वेता देवी व डा. रामदयाल मुंडा के अनुसार बिरसा मुंडा द्वारा छेड़ा गया उलगुलान (विद्रोह) अंग्रेजी हुकूमत और स्थानीय शोषकों के खिलाफ महज एक तात्कालिक आदिवासी विद्रोह मात्र नहीं था। बल्कि राजनीति, समाज और संस्कृति के सभी सूत्र आपस में इस क़दर जुड़े हुए थे कि यह पूरा आन्दोलन उस समय के आदिवासी और व्यापक समाज के पुनर्गठन का लोकप्रिय जन अभियान बन गया गया था।

कुमार सुरेश सिंह लिखित शोधपरक इतिहास ‘ बिरसा मुंडा और उनका आन्दोलन’  में कई ज़मीनी तथ्यों के माध्यम से इस पहलू को विशेष रूप से उद्घाटित किया गया है कि किस तरह से बिरसा मुंडा महज उलगुलान के विद्रोही नायक ही नहीं थे। अपितु उस समय पुरे इलाके में बार बार कहर ढहाने वाली अकाल और प्लेग महामारी की विपदा से घिरे अपने लोगों के जीवन रक्षक बनकर ‘ धरती आबा’  भी कहलाये। सन् 1894 – 97 काल में जब पूरे छोटानागपुर इलाके में अकाल और प्लेग महामारी का भीषण प्रकोप पड़ा था और इससे संक्रमित होकर अनेकों गांव के लोग अकाल मौत का शिकार हो रहे थे। ऐसी विकट स्थिति में बिरसा मुंडा अपने युवा साथियों के साथ लोगों की तीमारदारी में जुट गए। प्लेग संक्रमितों की दिनरात सेवा कर कईयों की जान बचाने के साथ साथ सभी लोगों को स्वच्छ पानी पीने और साफ सफाई से रहने का भी अभ्यास कराया। आदिवासी समाज के लोगों के शारीरिकव मानसिक स्वास्थ्य को खोखला बनाने वाली अंधविश्वास– जादू टोना जैसी सामाजिक कुरीतियों और खासकर नशा पान जैसी बुराइयों के खिलाफ सामाजिक जन जागरण को अपने आंदोलनात्मक गोलबंदियों का अहम हिस्सा बनाया। गाँव गाँव में ‘ बिरसाईत धर्म’ पंथ स्थापना का चलाया गया सामाजिक जन अभियान इसी की एक कड़ी कही जा सकती है। जिसके अनुयायियों द्वारा रचे और गाये गए गीतों से उस दौर के आदिवासियों के जीवनवृत को भली भांति समझा जा सकता है।

बिरसा मुंडा ज़ल्द ही ये समझ गए थे कि आदिवासी सामाजिक व्यवस्था में ऐसी कई कमियाँ हैं जो उनके आतंरिक व बाहरी कष्टों और शोषण के लिए ज़िम्मेवार हैं। जिनके रहते अंग्रेजी हुकुमत और देसी शोषकों से संघर्ष के मुकाबले में लम्बे समय तक नहीं टिके रहा जा सकता है। बड़े ही सुनियोजित ढंग से महिलाओं और युवाओं को विशेष तौर से प्रशिक्षित कर उनकी अगुवा भूमिका को स्थापित किया। इन्ही अर्थों में उलगुलान एक संगठित प्रतिरोध आन्दोलन के  साथ साथ तत्कालीन समाज सुधार का अभियान भी बन गया।

कहा जाय तो बिरसा मुंडा ही अपने दौर के ऐसे आदिवासीजन नायक कहे जा सकते हैं जिन्होंने विदेशी-देसी शोषण के खिलाफ एक नए राज समाज की स्थापना हेतु शुरू किये गए उलगुलान को एक नया धर्म,  जीवन दर्शन और सामाजिक आचार संहिता आधारित व्यापक सामाजिक पुनर्रगठन अभियान में बदल डाला। जिसके सन्देश को दूर दूर तक फैलाने के लिए उनके अनुयायियों द्वारा रचे व गाये गए मुंडारी लोक गीतों ने काफी लोकप्रियता हासिल की। यही वजह बनी कि पहली बार आदिवासी समाज के लोग ये समझ पाए कि वे अपनी सभी आर्थिक व सामाजिक उत्पीड़न की अंतहीन सी समस्याओं का सही समाधान तभी निकाल सकते हैं जब उन्हें राजनीतिक स्वतन्त्रता– स्वायत्तता प्राप्त हो।

जानकारों के अनुसार बिरसा मुंडा के उलगुलान का एक व्यापक सामाजिक जागरण अभियान में बदल जाने की स्थिति ने ही तत्कालीन अँगरेज़ शासकों और देसी ज़मींदारों– सूदखोर– महाजनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। शायद यही वजह बनी कि उलगुलान को सैन्य शक्ति और भीषण दमन से दबाने के साथ साथ भेदियों का सहारा लेकर आदिवासी समाज को अन्दर से तोड़ने की साजिशें भी खूब रचीं गयीं। जो उस दिन सफल हो गयी जब बिरसा मुंडा को धोखे से घेरकर उनके कई साथियों की हत्या करके धोखे से गिरफ्तार कर लिया गया।

9 जून, बिरसा मुंडा शहादत दिवस का दिन सिर्फ झारखण्ड ही नहीं बल्कि देश के अधिकांश हिस्सों के आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुबह से ही पारम्परिक विधि विधान और परिधान के साथ वे बिरसा मुंडा की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर गीत नृत्य के साथ उनको नमन करते हैं। बिरसा मुंडा के गाँव उलीहातू में तो साल एक दिन पहले से ही दिन मेले जैसा दृश्य बन जाता है। दूर दूर से जत्थों में सपरिवार पहुंचे लोग अपने महानायक के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर देर रात तक वहां जमे रहते हैं।

युवा आदिवासी जन संस्कृतिकर्मी गौतम मुंडा का मानना है कि वर्तमान के कोरोना महामारी संक्रमण की आपद स्थिति में तो बिरसा मुंडा के उलगुलान के संदेशों के साथ साथ उनके द्वारा चलाये गए स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश आज बेहद प्रासंगिक हो गया है, जिसमें अपने लोगों को महामारी से बचाने और उनकी जीवन रक्षा का चुनौतीपूर्ण कार्यभार लेने के लिए हमें भी तत्पर होना होगा।

बिरसाइत गीत (मुंडारी से अनूदित) :

ओ स्वर्ग की पिता, धरती की आवाज़ सुनो / हम सब मिलकर दुश्मनों को घेर लेंगे / हम अपनी ज़मीन से गोरों को भगा देंगे / ओ गोरे आदमियों, भागो तुरंत भागो / तुम्हारा घर पश्चिम में है, तुम चले ही जाओ / ओ गोरो, अपनी ज़हरीली हवा को अपने देश ले जाओ/  तुम ज़रूर चले जाओ ....

birsa munda
Jharkhand
jharkhand tribals
Ulgulan

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License