NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
मोहन भागवत समेत कई आरएसएस पदाधिकारियों के ट्विटर अकाउंट से हटा ब्लू टिक
सवाल ये नहीं है कि ट्विटर ने इन अकाउंट से ब्लू टिक क्यों हटाया बल्कि सवाल ये है कि निष्क्रिय होने के बावजूद इन अकाउंट को ब्लू टिक क्यों दिया?
राज कुमार
05 Jun 2021
मोहन भागवत समेत कई आरएसएस पदाधिकारियों के ट्विटर अकाउंट से हटा ब्लू टिक

सोशल/डीजिटल मीडिया गाइडलाइन आने के बाद सरकार और ट्विटर के बीच तनातनी चल रही है। इसी बीच एक और नया विवाद सामने आ गया है। ट्विटर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कई राष्ट्रीय पदाधिकारियों के ट्विटर अकाउंट से ब्लू टिक यानी वेरिफाइड बैज़ हटा लिया है। इनमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का अकाउंट भी शामिल है।

मोहन भागवत के अलावा सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, सरकार्यवाह सुरेश जोशी, सह सरकार्यवाह अरूण कुमार के अकाउंट से भी ब्लू टिक हटा लिया गया है। इसके बाद से ही ट्विटर पर आरएसएस समर्थकों और दक्षिणपंथी ट्विटर यूजर्स में खलबली मची हुई है। #मोहनभागवत #राष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघ #ब्लूटिक #बैनट्विटरइंडिया ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

क्या है मामला?

आरएसएस समर्थक और दक्षिणपंथियों का मानना है कि ट्विटर ने ऐसा बदले की भावना के तहत किया है। क्या सचमुच ऐसा है? असल में ये कार्यवाही ट्विटर पर निष्क्रियता के चलते की गई है। जिन अकाउंट से ब्लू टिक हटाई गई है अगर आप उन अकाउंट पर जाकर देखेंगे तो मामला समझ आ जाएगा। असल में इन ट्विटर अकाउंट पर सालों से कोई गतिविधि नहीं है। आइये एक-एक करके इन अकाउंट की स्थिति देखते हैं।

मोहन भागवत (सरसंघचालक, आरएसएस)

मोहन भागवत ने मई 2019 में ट्विटर पर अपना अकाउंट बनाया। उनके 2 लाख 11 हज़ार से ज्यादा फोलोवर्स हैं। मोहन भागवत के अकाउंट पर एक भी ट्वीट नहीं है यानी उन्होंने जबसे अकाउंट बनाया है एक भी ट्वीट नहीं किया है। कोई रिट्वीट और रिप्लाई नहीं किया है। ना ही कोई फोटो/वीडियो ट्वीट किया है। यहां तक कि आज तक किसी भी ट्वीट को लाइक तक नहीं किया है।

कृष्ण गोपाल (सह सरकार्यवाह आरएसएस)

कृष्ण गोपाल ने जून 2019 में ट्विटर अकाउंट बनाया। इनके 40 हज़ार से ज्यादा फोलोवर्स हैं। जून 2019 से लेकर आज तक इन्होंने बस आरएसएस के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट के तीन ट्वीट को ही रिट्वीट किया है। पांच ट्वीट को लाइक किया है और आज तक कोई वीडियो/फोटो ट्वीट नहीं किया है।

सुरेश जोशी (सरकार्यवाह, आरएसएस)

सुरेश जोशी ने मई 2019 में ट्विटर पर अकाउंट बनाया। इनके 50 हज़ार से ज्यादा फोलोवर्स हैं। मई 2109 से अब तक इनके अकाउंट पर एक भी ट्वीट नहीं है यानी दो साल से एक भी ट्वीट नहीं किया है। इन्होंने ना ही कोई रिट्वीट किया है और ना ही कोई रिप्लाई। इन्होंने मई 2019 से लेकर अब तक ना ही कोई फोटो/वीडियो अपलोड किया है और नाही किसी ट्वीट को लाइक किया है।

अरुण कुमार (सह सरकार्यवाह, आरएसएस)

अरुण कुमार ने जून 2019 में ट्विटर पर अकाउंट बनाया। इनके 36 हज़ार से ज्यादा फोलोवर्स हैं। अरुण कुमार ने जून 2019 से लेकर अब तक सिर्फ आरएसएस के ऑफिशियल ट्विर अकाउंट के दो ट्वीट को रिट्वीट किया है। अरुण कुमार ने आज तक कोई फोटो/वीडियो अपलोड नहीं किया है। जून 2019 से लेकर अब तक आरएसएस की मात्र पांच ट्वीट को लाइक किया है।

उपरोक्त आधार पर स्पष्ट है कि ये तमाम अकाउंट तकरीबन दो साल या कहें कि जब से बनें हैं तब से निष्क्रिय पड़े हैं। इसी के तहत ट्विटर ने अपनी पॉलिसी के अनुसार इन अकाउंट से ब्लू टिक हटाया है। दक्षिणपंथी ट्विटर पर हल्ला कर रहे हैं कि ट्विटर ने इन अकाउंट से ब्लू टिक क्यों हटा लिया? जबकि सवाल ये नहीं है कि ट्विटर ने इन अकाउंट से ब्लू टिक क्यों हटाया बल्कि सवाल ये है कि निष्क्रिय होने के बावजूद इन अकाउंट को ब्लू टिक क्यों दिया? क्या ये ट्विटर की पॉलिसी का उल्लंघन नहीं था? गौरतलब है कि ट्विटर कि ब्लू टिक लगातार विवादों का शिकार रही है और ब्लू टिक बैज़ देने में भेदभाव के आरोप लगेत रहे हैं।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

twitter
RSS
Mohan Bhagwat
Krishna Gopal
Suresh Joshi
Arun Kumar

Related Stories

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

वे कौन लोग हैं जो गोडसे की ज़िंदाबाद करते हैं?

कांग्रेस, राहुल, अन्य नेताओं के ट्विटर अकाउंट बहाल, राहुल बोले “सत्यमेव जयते”

ट्विटर बताए कि आईटी नियमों के अनुरूप शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति कब तक होगी : अदालत

संसदीय समिति ने ट्विटर से कहा: देश का कानून सर्वोपरि, आपकी नीति नहीं

विश्लेषण : मोदी सरकार और सोशल मीडिया कॉरपोरेट्स के बीच ‘जंग’ के मायने

नए आईटी कानून: सरकार की नीयत और नीति में फ़र्क़ क्यों लगता है?

जिसे कांग्रेस की ‘COVID टूलकिट’ बताया जा रहा है, वो जाली लेटरहेड पर बनाया गया डॉक्युमेंट है

ट्विटर ने कंगना का अकाउंट स्थायी रूप से बंद किया


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर हत्याकांड: देशभर में मनाया गया शहीद किसान दिवस, तिकोनिया में हुई ‘अंतिम अरदास’
    12 Oct 2021
    तिकोनिया में शहीद किसानों को याद में ‘अंतिम अरदास’ कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें किसान नेताओं के साथ विभिन्न राज्यों के किसान और भारी संख्या में अन्य आम लोग यहां पहुंचे।
  • covid
    भाषा
    विशेषज्ञ पैनल ने दो साल तक के बच्चों के लिए कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की
    12 Oct 2021
    हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने दो से 18 साल तक के बच्चों एवं किशोरों में इस्तेमाल के लिए कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन के 2/3 चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है।
  • Will Damodar River Again be Bengal’s ‘Sorrow
    रबींद्र नाथ सिन्हा
    क्या दामोदर नदी फिर से बंगाल का 'शोक' बनेगी?
    12 Oct 2021
    5 अक्टूबर को ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को ख़त लिखते हुए बाढ़ की स्थितियों में आपात हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने दामोदर घाटी निगम के अनियोजित और अनियंत्रित पानी छोड़ने की गतिविधि को दक्षिण बंगाल…
  • taliban
    न्यूज़क्लिक टीम
    तालिबान पर अमेरिकी दांव, EU-नेटो-चीन के बीच कूटनीति
    12 Oct 2021
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने तालिबान से अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत के कूटनीतिक मायनों पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। साथ ही जर्मनी में सत्ता…
  • Nobel in Economics
    अजय कुमार
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ने से रोजगार कम नहीं होता : जानिए इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल की कहानी
    12 Oct 2021
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने पर रोजगार बढ़ेगा या घटेगा? ऐसे सवालों का जवाब देना बहुत कठिन काम है। इस कठिन काम को जिन अर्थशास्त्रियों ने सुलझाया है। उन्हें ही इस बार का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License