NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बोलिवियाई सोशल मूवमेंट और ट्रेड यूनियनों ने लड़ाई को मज़बूत किया
उन्होंने मांग की है कि आम चुनाव 6 सितंबर को हों और तख़्तापलट करने वाले राष्ट्रपति जीनिन एनेज तुरंत इस्तीफ़ा दें।
पीपल्स डिस्पैच
10 Aug 2020
बोलिवियाई सोशल मूवमेंट

आम चुनावों को स्थगित करने के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय हड़ताल और देशव्यापी सड़क ब्लॉक करने की घटना बोलीविया में तेज़ हो गई है। इसका आह्वान बोलिविया वर्कर्स सेंटर (सीओबी) द्वारा किया गया था। चुनाव में देरी करने के सरकार के फैसले को पलटने के लिए तख़्तापलट सरकार पर दबाव डालने के लिए नागरिकों द्वारा इंटरडिपार्टमेंटल और इंटरप्रोविंसिअल राजमार्गों और बड़े शहरों की सड़कों और भीतरी सड़कों को ब्लॉक किया गया जो एक सप्ताह के भीतर 24 से बढ़कर 140 तक पहुंच गया।

सोशल मूवमेंट, ट्रेड यूनियनों, स्थानीय और किसान संगठनों ने पिछले सोमवार यानी 3 अगस्त को लोकतंत्र की बहाली और मूल रूप से सहमति के बाद तय तारीख 6 सितंबर को चुनाव कराने के फैसले का पालन करने की मांग करने के लिए विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की। एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगें भी तेज़ हो गई। लोकतांत्रिक चुनावों के अलावा प्रदर्शनकारी डी-फैक्टो प्रेसिडेंट जीनिन एनेज के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं।

बढ़ते विरोध को देखते हुए 8 अगस्त को एनेज ने 9 अगस्त को "चुनावी तारीख़ तय करने और ब्लॉक को समाप्त करने" के लिए एक राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का आह्वान किया था। उन्होंने सुप्रीम इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई), सीओबी, राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति पद के सभी उम्मीदवारों, सीनेट और चैंबर ऑफ डेप्युटीज़ के के अध्यक्षों के साथ-साथ कैथोलिक चर्च के प्रतिनिधियों को ऑबजर्वर के तौर पर बैठक में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया था।

हालांकि, ये बैठक असफल रही क्योंकि मुख्य राजनीतिक और सामाजिक नेता इसमें शामिल नहीं हुए। सीओबी के नेता, चैंबर ऑफ डेप्युटीज़ और सीनेट के अध्यक्षों और चुनाव में भाग लेने वाले आठ राजनीतिक दलों में से पांच के उम्मीदवारों और मूवमेंट टुवार्ड सोशलिज्म (एमएएस) पार्टी इस बैठक में शामिल नहीं हुए।

9 अगस्त के शुरुआती समय में सीओबी नेता, जुआन कार्लोस हुआराची ने घोषणा की कि सीओबी एनेज द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होगा। 8 अगस्त की रात को टीएसई के साथ एक बैठक के बाद उन्होंने इस बात से इनकार किया कि टीएसई बातचीत नहीं करना चाहता था और उसने चुनावों के लिए तारीख़ थोपने की कोशिश की।

इस बीच, 8 अगस्त की दोपहर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमएएस के राष्ट्रपति उम्मीदवार लुइस एर्से और इनके साथी डेविड चोकुएहुआंसा ने कहा कि अगर चुनाव की तारीख़ को संवैधानिक रूप से मंज़ूरी मिल जाती है और गारंटी देता है कि यह निश्चित, अंतिम और न बदलने वाला है तो वे इस चुनाव की तारीख़ को स्वीकार करेंगे।

23 जुलाई को तख्तापलट सरकार के सीधे नियंत्रण में आए टीएसई ने इस साल तीसरी बार COVID-19 महामारी के कारण सेहत के ख़तरे का हवाला देते हुए एकतरफा तरीके से 18 अक्टूबर को देश के राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों कराने की तारीख़ तय कर दी। एमएएस पार्टी ने इस निर्णय की निंदा की और याद दिलाया कि केवल बोलिविया की संसद प्लुरिनेशनल लेजिस्लेटिव एसेंबली को चुनाव की तारीख़ में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी देने का अधिकार है।

bolivia
Bolivian Social Movement
trade unions
Jeanine Enez

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

केंद्रीय बजट-2022: मजदूर संगठनों ने कहा- ये कॉर्पोरेटों के लिए तोहफ़ा है

पत्रकारिता एवं जन-आंदोलनों के पक्ष में विकीलीक्स का अतुलनीय योगदान 

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

निर्माण मज़दूरों की 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल,यूनियन ने कहा- करोड़ों मज़दूर होंगे शामिल

दिल्ली में मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के ख़िलाफ़ हड़ताल की

ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’

वेतन संशोधन समझौते: तमिलनाडु के मज़दूरों ने जीतीं अहम लड़ाइयां 


बाकी खबरें

  • तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : मथुरा की जनता ने कहा मंदिर के नाम पर भंग हो रही सांप्रदायिक शांति
    19 Jan 2022
    कई स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई मुद्दा नहीं है, हम इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देंगे।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2.82 लाख से ज़्यादा नए मामले, 441 मरीज़ों की मौत
    19 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4.83 फ़ीसदी यानी 18 लाख 31 हज़ार हो गयी है।
  • यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    एम.ओबैद
    यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    19 Jan 2022
    प्रदेश में काम न मिलने के अलावा मनरेगा से जुड़े मज़दूरों को समय पर भुगतान में देरी का मामला अक्सर सामने आता रहता है। बागपत में इस योजना के तहत काम कर चुके मज़दूर पिछले दो महीने से मज़दूरी के लिए तरस…
  •  Memorial
    विक्रम सिंह
    1982 की गौरवशाली संयुक्त हड़ताल के 40 वर्ष: वर्तमान में मेहनतकश वर्ग की एकता का महत्व
    19 Jan 2022
    19 जनवरी, 1982 के दिन आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार ऐसी संयुक्त हड़ताल का आयोजन किया गया था जो न केवल पूरी तरह से सफल रही बल्कि इसकी सफलता ने भविष्य में मजदूरों और किसानों की एकता कायम करते…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर ; कश्मीर से UP: सियासत की बिछी बिसात, फ़रेब का खेल
    18 Jan 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर प्रेस क्लब को साजिशाना ढंग से बंद करने और उत्तर प्रदेश में बिछी सियासत की बिसात पर की चर्चा। कार्यक्रम में उन्होंने कश्मीर के पत्रकार अनीस ज़रगर और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License