NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बुमला : हिमाचल के ऊंचे इलाकों में भारत-चीन आमने-सामने
भारत और चीन के बीच बर्फ से ढकी सीमा, दो विशाल एशियाई पड़ोसियों के बीच बेहद कम प्रचलित सीमाओं में से एक, बुमला दर्रा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है।
भाषा
18 Dec 2021
army
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बुमला (अरुणाचल प्रदेश):भारत और चीन के बीच बर्फ से ढकी सीमा, दो विशाल एशियाई पड़ोसियों के बीच बेहद कम प्रचलित सीमाओं में से एक, बुमला दर्रा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है।

भारत की सीमा चौकी को चिह्नित करने वाली झोपड़ियां चीनी चौकियों से कुछ ही मिनटों की पैदल दूरी पर हैं, जहां चीन की जनमुक्ति सेना (पीएलए) के सैनिक बर्फ से ढके हुए क्षेत्र को पूरी मेहनत से नियंत्रित कर रहे हैं।

सीमा पार को चिह्नित करने वाले अवरोधक तक पैदल चलकर जाने की महज कुछ आगंतुकों को अनुमति है। हालांकि, किसी को भी एक तरफ से दूसरी तरफ जाने की इजाजत नहीं है न ही सामानों का व्यापार हो सकता है जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार मौजूदा वित्त वर्ष में 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

ऊंची चोटियों के कारण ऊंचाई पर बने इस दर्रे पर ध्यान नहीं दिया जाता और न ही चीन द्वारा बनाए एक अवलोकन चौकी पर, जिसे भारतीय सेना एक सुनने वाले केंद्र के तौर पर देखती है।

बुमला दर्रे के उत्तर में सिर्फ 43 किमी दूर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के शन्नान प्रान्त में त्सोना ज़ोंग है। चीनियों ने शन्नान से बुमला तक एक उच्च गुणवत्ता वाली मोटर वाहन आने-जाने योग्य सड़क एस202 का निर्माण किया है।

लेफ्टिनेंट जनरल उत्पल भट्टाचार्य (सेवानिवृत्त), इंजीनियरिंग सेवा के पूर्व महानिदेशक और भारत-चीन सीमा पर एक विशेषज्ञ, ने पीटीआई-बाषा को बताया, “चीनी हमारे साथ ‘सलामी-स्लाइसिंग’ का खेल खेल रहे हैं – लद्दाख में घुसपैठ, अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास किलबंद गांव और सीमा तक नई सड़कें।"

सलामी स्लाइसिंग उन छोटे उकसावों के इस्तेमाल को कहा जाता है, जिनमें से कोई भी अपने आप में युद्ध को भड़काने वाली गतिविधि नहीं होती है। लेकिन कुल मिलाकर चीन के पक्ष में एक बहुत बड़ी कार्रवाई या परिणाम उत्पन्न करती है जिसे एक ही बार में अंजाम दे पाना मुश्किल या गैरकानूनी होगा।

तवांग सेक्टर में एलएसी पर अभी तक कोई गांव नहीं बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कहीं और गांव बनाए जाने की खबरें हैं।
दो भारी किलेबंद पीएलए शिविर, बुमला के पास उन्नत लैंडिंग ग्राउंड के साथ स्थित हैं, और उनमें से एक को भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मिसाइल स्थल मानते हैं।

एस202 का एक पश्चिमी छोर नमका चू की ओर जाता है, जहां दोनों देशों के बीच 1962 के सीमा युद्ध में पहली लड़ाई हुई थी। इस क्षेत्र में थगला चोटी पर भारतीय चौकियों की ओर मुख किए हुए दो और प्रमुख पीएलए शिविर हैं, जहां चीनी सैनिकों द्वारा हाल ही में घुसपैठ की गई थी।
इस साल की शुरुआत में, चीनियों ने न्यांगची शहर को मेडोग से जोड़ने वाली सांगपो नदी घाटी के माध्यम से एक और प्रमुख सड़क का निर्माण किया, जो बुमला के पूर्व में अरुणाचल प्रदेश की सीमा का सबसे छोटा मार्ग है। चीन के साथ ल्हासा को जोड़ने वाले मार्ग के बाद एक दूसरा रेलवे मार्ग से जल्द ही निंगची के सिचुआन से जोड़े जाने की उम्मीद है।

जनरल भट्टाचार्य ने कहा, " इन सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बावजूद, हमारे साथ पीएलए का आमना-सामना एक तार्किक चुनौती बना रहेगा क्योंकि उन्हें अब भी तिब्बत के बाहर से पुरुषों, सामग्री और खाद्य भंडार को स्थानांतरित करना होगा, क्योंकि बंजर पठार वहां बड़ी सेनाओं की आपूर्ति या समर्थन नहीं कर सकता है।”

अधिकतर रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण दिखाई दे सकती है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि खतरनाक हो।

india-china
Himachal Pradesh

Related Stories

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन, घेराव और हड़ताल पर लगाई रोक, विपक्ष ने बताया तानाशाही फ़ैसला

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

हिमाचल प्रदेश: फैक्ट्री में ब्लास्ट से 6 महिला मज़दूरों की मौत, दोषियों पर हत्या का मुक़दमा दर्ज करने की मांग

हिमाचल: जलशक्ति विभाग के मज़दूरों ने किया प्रदर्शन, कहा अगर मांगे नहीं मानी तो करेंगे आंदोलन तेज़

हिमाचल: सेब के उचित दाम न मिलने से गुस्साए किसानों का प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

हिमाचल: आईजीएमसी वर्कर्स यूनियन का आउटसोर्स व ठेका मज़दूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन  

सवर्ण आयोग: शोषणकारी व्यवस्था को ठोस रूप से संस्थागत बनाने का नया शिगूफ़ा

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भूस्खलन स्थल से छह और शव बरामद, मृतक संख्या बढ़कर 23 हुई


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    भारत को अब क्वाड छोड़ देना चाहिए! 
    15 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन के बयान में अमेरिका के बढ़ते खतरे का भारत की रक्षा क्षमताओं और उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर महत्त्वपूर्ण असर पड़ेगा। 
  • Kashmir press club
    राज कुमार
    जम्मू-कश्मीर में मीडिया का गला घोंट रही सरकार : प्रेस काउंसिल
    15 Mar 2022
    ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने सितंबर 2021 में प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को एक पत्र लिखा था और मांग की थी कि काउंसिल एक फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम भेजकर जम्मू-कश्मीर में…
  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: हेमंत सरकार ने आदिवासी समूहों की मानी मांग, केंद्र के ‘ड्रोन सर्वे’ कार्यक्रम पर लगाईं रोक
    15 Mar 2022
    ‘ड्रोन सर्वे’ और ‘ज़मीन की डिजिटल मैपिंग’ कार्यक्रम के खिलाफ आवाज़ उठा रहे सभी आदिवासी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
  • अजय कुमार
    रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
    15 Mar 2022
    आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार चाहे तो कच्चे तेल की वजह से बढ़े हुए ख़र्च का भार ख़ुद सहन कर सकती है।
  • रौनक छाबड़ा
    ईपीएफओ ब्याज दर 4-दशक के सबसे निचले स्तर पर, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आम हड़ताल से पहले खोला मोर्चा 
    15 Mar 2022
    ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने शनिवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी मौजूदा ब्याज दर को 8.5% से घटाकर 8.1% करने की सिफारिश की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License