NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
CAA-NRC: दिल्ली में ज़ाफ़राबाद, खुरेजी, तुर्कमान गेट और मुस्तफ़ाबाद में भी 24*7 धरना
देश के अन्य हिस्सों के अलावा धीरे-धीरे पूरा दिल्ली ही 'शाहीन बाग़' में तब्दील हो रहा है। शाहीन बाग़ के अलावा यहां कम से कम चार जगह और दिन-रात का आंदोलन शुरू हो चुका है।
मुकुंद झा
18 Jan 2020
CAA Protest
ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर में सैकड़ों महिलाएं सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन धरना दे रही हैं।

पूरे देश में विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम और संभावित एनआरसी के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस कड़ी में दिल्ली का शाहीन बाग़ कई आंदोलनों के लिए प्रेरणा बना है। देश में कई शहरों में शाहीन बाग़ बन गए है, या कहें कि शहर शहर शाहीन बाग़ बन रहे हैं। सिर्फ़ दिल्ली की बात करें तो कई जगह पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। शाहीन बाग़ के बाद खुरेजी, जाफ़राबाद, तुर्कमान गेट और अब उत्तर पूर्व दिल्ली के मुस्तफ़ाबाद में भी महिलाओं ने 24*7 धरना शुरू कर दिया हैं। इसके आलावा कई जगह छोटे-बड़े प्रदर्शन चल रहे है।

जाफ़राबाद के आंदोलन की बात करें तो यह वो इलाका है जहाँ CAA , NRC के खिलाफ और जामिया में पुलिसिया दमन के बाद बहुत बड़ा विरोध मार्च हुआ था लेकिन वो बाद में हिंसक हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने वहाँ भारी बल का प्रयोग किया था। इसके बाद वहाँ की महिलाओं ने इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया जिसके बाद वहां कई छोटे बड़ी रैलियां हो रही थी। लेकिन अब यहाँ का आंदोलन भी शाहीन बाग़ की तर्ज पर बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। बुधवार की रात से महिलाओं के साथ ही बच्चे और बुजुर्ग के साथ ज़ाफ़राबाद पुलिया के पास पुराने बस स्टैंड के पास सड़क किनारे बैठ कर सभी ने नारेबाजी की। कुछ युवकों ने कैंडल जलाकर विरोध किया। उस दिन से ही लोग उसी जगह पर बैठ गए और 24*7 धरना शुरू हो गया हैं।

शुक्रवार की सुबह तक यहां हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पहुंच गए और प्रदर्शन करने लगे। बच्चों ने भी हाथों में अलग-अलग स्लोगन वाले बैनर ले रखे थे। यह अंदोलन शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद और व्यापक हो गया। जिस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या होती थी वो शुक्रवार को हज़ारों में पहुँच गई। बारिश और ठंड से बचने के लिए यहां भी टेंट लगा दिया गया है। प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि यह तंबू तभी उखड़ेगा जब CAA कानून को ख़त्म किया जाएगा। जैसा की आजकल आम बात है किसी भी अंदोलन के पास बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती होती, वो यहाँ भी देखा जा सकता हैं। इस प्रदर्शन की भी यह खासियत है कि इस आंदोलन का भी नेतृत्व महिलाएं ही कर रहीं हैं।

यहां आंदोलन का मैनजेमेंट बहुत ही अनुशासित है। वहां युवकों का एक बड़ा समूह है, वो इस बात का पूरा ख्याल रखता है कि इस अंदोलन से किसी भी व्यक्ति को कोई समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए वो लोग ट्रैफिक को मैनेज कर रहे हैं। वहां किसी भी तरह का कोई ट्रैफिक जाम नहीं होता। न ही जब हम वहां गए तो कोई ट्रैफिक पुलिस भी नहीं थी। इसके लिए लगभग सैकड़ों लोगों की टीम लगी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वो नहीं चाहते कि उनके अंदोलन से किसी भी व्यक्ति को कोई दिक्क्त न हो, इसके साथ ही यह आंदोलन मुख्यतः महिलाओं का ही है। नौजवान और पुरुष केवल उनके सहयोगी की भूमिका में हैं। आंदोलन की मुख्य जगह जो है वहां सिर्फ़ महिलाएं ही होती हैं। पुरुषों का दल सड़कों पर ट्रैफिक मैनेज करता है और शुक्रवार को बड़ी संख्या में मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध जताता रहा था।

महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा, " अगर शाहीन बाग की महिलाएं कर सकती हैं, तो हम क्यों नहीं।" तेज़ ठंड के बावजूद, महिलांए वहां डटी हुई हैं। उनकी सीधी मांग है कि CAA-NPR-NRC को पूरी तरह निरस्त किया जाये।

1_14.JPG

103 वर्षीय फ़िरोज़न एक भारतीय झंडे के साथ ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर की प्रदर्शन में शामिल हैं।

शुक्रवार शाम प्रदर्शनकारियों के बीच, 103 वर्षीय बुजुर्ग महिला फ़िरोज़न भी मौजूद थीं, जिन्होंने अपने डर को साझा करते हुए, कहा कि “हम इसी देश में पैदा हुए है, मैं यहाँ मर जाऊँगी। और में अपने पोते के लिए भी यही चाहती हूँ। इसलिए हम इस कानून के वापस होने तक एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।" इसके बाद वह जल्द ही "आज़ादी, आज़ादी" के नारे लगाने वाले समूह में पूरे जोश के साथ शामिल हो गई।

ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर का यह आंदोलन कई मिथकों को तोड़ता हैं। छात्रों से लेकर गृहणियों तक ये सभी लोग सड़कों पर आ रहे हैं और अपनी आवाज़ उठा रहे हैं।

3_9.JPG

भीषण ठंड के बावजूद, विरोध में स्थानीय लोगों की भागीदारी शुक्रवार की शाम दो हजार तक पहुँच गई थी।

25 वर्षीय यास्मीन,जो एक गृहणी हैं वो बुधवार रात से खुले में ही रह रही हैं। अपने दो साल के बच्चे को और अपने पांच साल के बच्चे का हाथ पकड़कर, वह बताती हैं कि वह विरोध क्यों कर रहीं है। “हम अपने संविधान को बचाने के लिए यहाँ हैं। हम अपने राष्ट्र को बचाने के लिए यहां हैं।”

यास्मीन की तरह कई गृहणियां, हाथों में एंटी CAA-NRC प्लेकार्ड्स के साथ, चौबीसों घंटे प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाएं शाम को 'आज़ादी' और 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा' नारों और गीतों को गाती हैं।

2_14.JPG

 शुक्रवार को ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर के युवाओं ने मोमबत्ती लेकर मानव श्रृंखला बनाई थी।

ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर इलाके का ये नज़ारा महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल दिसंबर में यहाँ एक प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जिसमें 21 लोग घायल हो गए थे।

21 साल की छात्रा रोम्शा रहमान ने न्यूज़क्लिक को बताया, "जल्द ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच दिसंबर में झड़प के बाद स्थानीय महिलाओं ने अपने इलाकों में मार्च करना शुरू कर दिया।" उन्होंने कहा, “मार्च में केवल 20 महिलाएं शामिल हुईं, जो जल्द ही सैकड़ों में पहुंच गईं। हमने दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया के छात्रों को भी आते देखा और उन्होंने ने भी मार्च में भाग लिया।”

मार्च ने नियमितता और संख्या बढ़ने के साथ, इसने ज़ाफ़राबाद और सीलमपुर के युवाओं का भी ध्यान आकर्षित किया, जो महिलाओं के नेतृत्व में शांतिपूर्ण और संगठित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

25 साल के लॉ स्टूडेंट शेख फ़ैज़ान ख़ान ने कहा, "हम जामिया और एएमयू के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की निंदा करते हैं।"

शांतिपूर्ण दैनिक मार्च हालांकि मीडिया का आकर्षण अपनी और खींचने में अभी तक असफल रहा।

इसको लेकर शेख फ़ैज़ान ख़ान ने कहा "मीडिया ने दो दिनों के लिए हिंसा की 30 सेकंड की क्लिप दिखाई, हालांकि हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को शून्य कवरेज दिया।" ख़ान ने कहा कि पत्थरबाजी करने वाले युवा ज़ाफ़राबाद-सीलमपुर के नहीं थे।

जहां सड़क के एक किनारे पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा है, वहीं दूसरी तरफ़ तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को देखा। उनके सामने आँखों में आँखे डालें प्रदर्शनकारियों ने एक मानव श्रृंखला बनाई। उनके हाथों में बाबा अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें के पोस्टर और मोमबत्तियां थे।

इसी तरह का ही अंदोलन हम खुरेजी में भी देख रहे हैं। वहां भी महिलाएं आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। अन्य लोग उनके सहयोगी के भूमिका में हैं। वहां भी लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्क्त न हो इसकी पूरी जिम्मेदारी आंदोलनकारियों ने अपने कंधो पर उठा रखी हैं। आंदोलन के पांचवें दिन इलाके की लगभग सैकड़ों महिलाओं ने रोज़ा रखा और इस कानून को खत्म करने की दुआ मांगी।

IMG-20200118-WA0015.jpg

मुस्तफ़ाबाद में भी धरने पर डटीं महिलाएं

इसके साथ ही बात करें तो आंदोलनों का दायरा लगातर बढ़ रहा है। इस कड़ी में उत्तर- पूर्व दिल्ली के मुस्तफ़ाबाद के ब्रजपुरी में भी सीएए और एनआरसी के विरोध में महिलाएं जुमे की नमाज के बाद धरने पर बैठ गईं हैं। शुक्रवार की दोपहर तक वहां लोगो की संख्या उतनी ही थे लेकिन शाम होते वहां भी लोगों का हुजूम आ गया। इसमें महिलाएं और पुरुष दोनों ही शामिल थे। शुक्रवार को रात तक महिलाएं खुले आसमान में बैठी रहीं, शनिवार सुबह कुछ स्थानीय लोगो ने वहां टैंट लगा दिया गया हैं।

(सभी तस्वीरें : रौनक छाबड़ा)

CAA
NRC
Anti CAA Protest
Anti-NRC protest
Jafrabad
Turkman Gate
Shaheen Bagh
KhurejiProtest
Mustfabad protest
BJP
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • bjp -sp
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: मौसम ठंडा, राजनीति गर्म, भाजपा-सपा ने पूर्वांचल पर लगाया ज़ोर
    10 Nov 2021
    403 सीटों वाली प्रदेश की विधानसभा में क़रीब 164 सीटें पूर्वांचल के 28 ज़िलों में हैं। माना जाता है जिसका पूर्वांचल पर क़ब्ज़ा होता है, वही प्रदेश पर राज करता है।
  • lal
    लाल बहादुर सिंह
    ‘डबल इंजन’ सरकार का हाल: पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स में इस साल भी यूपी सबसे नीचे
    10 Nov 2021
    यह कोई चुनाव पूर्व माहौल बनाने के लिए होने वाला प्रायोजित सर्वे नहीं है, अपितु ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में काम कर रहे थिंक-टैंक की रिपोर्ट है, जो शासन की गुणवत्ता के आधार…
  • minimum wage
    रौनक छाबड़ा
    ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’
    10 Nov 2021
    ट्रेड यूनियनों की ओर से मांग की जा रही है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ा कर 26,000 रूपये करने के साथ-साथ असंगठित श्रमशक्ति को 7,500 रूपये का मासिक नकद समर्थन दिया जाए। इन्हीं मांगों पर दबाव बनाने के लिए उनकी…
  • climate
    अजय कुमार
    क्लाइमेट फाइनेंस: कहीं खोखला ना रह जाए जलवायु सम्मेलन का सारा तामझाम!
    10 Nov 2021
    जलवायु सम्मेलन में क्लाइमेट फाइनेंस का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। अगर क्लाइमेट फाइनेंस पर सहमति नहीं बनी तो क्लाइमेट जस्टिस नहीं हो पाएगा। नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन से जुड़े सारे वादे खोखले रह जाएंगे। 
  • corna
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,466 नए मामले, 460 मरीज़ों की मौत
    10 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 43 लाख 88 हज़ार 579 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License