NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
BJP का जनजागरण: झूठ और भ्रम का महाजाल
CAA-NRC-NPR पर  जारी विरोध से लड़ने के लिए बीजेपी एक जनजागरण अभियान चला रही है। यह पूरी तरह आधे सच, झूठ और इतिहास की छेड़खानी पर आधारित है।
सुबोध वर्मा
19 Jan 2020
CAA
Image Courtesy: Deccan Herald

नागरिकता संशोधन अधिनियम पर विरोध की अभूतपूर्व लहर से सकते में आई बीजेपी अब खुद को संभालने में लगी है। दो जनवरी से पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है।  

नए कानून के आने के बाद से अबतक बीस दिन निकल चुके हैं। हर दिन जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं। बीजेपी ने अब जनजागरण अभियान शुरू किया है, इसमें पार्टी के बड़े नेता जनता से रूबरू होंगे। इससे पहले बीजेपी ने घर-घर जाकर लोगों से मिलने और फोटो खिंचवाने के कार्यक्रम की खानापूर्ति की थी।

 लेकिन बीजेपी के इस कैंपेन में एक अलग चीज है, वह यह कि बीजेपी के ऐसे नेता, जो संवैधानिक पदों पर बैठे हुए हैं, वे सीएए के पक्ष में माहौल बनाने के लिए झूठ और बनावटी तथ्यों को फैलाने में लगे हैं।

 बीजेपी के कैंपेन में उन तथ्यों पर चर्चा नहीं है, जिनके विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इस जवाबी कैंपेन से सिर्फ नफरती कानून और सिटीजनशिप सर्वे के खिलाफ ताकतवर विरोध प्रदर्शनों के असर को ही समझा जा सकता है। इसके बावजूद बीजेपी कैंपेन के झूठ का पर्दाफाश करना जरूरी है। 

CAA पर अधूरा सच

बीजेपी क्या कह रही है, इसका अंदाजा हम गृहमंत्री अमित शाह के बयानों से लगा सकते हैं। बिहार के वैशाली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने 16 जनवरी को कहा, ''CAA किसी की नागरिकता छीनने के बारे में नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए प्रताड़ित लोगों  को अधिकार देने के बारे में है।'' शाह ने विशेषतौर पर हिंदू, सिख, क्रिश्चियन, जैन, पारसी और बौद्ध लोगों का जिक्र किया। यह सही है। CAA इसी बारे में है।

लेकिन शाह ने यहां यह नहीं बताया कि सिर्फ एक समुदाय-मुस्लिमों को इससे बाहर रखा गया। 6 समुदायों से आने वाले अवैध प्रवासियों को भी नागरिकता मिलने में  तेजी आएगी, लेकिन मुस्लिमों को नहीं।

 बीजेपी अध्यक्ष ने प्रताड़ना को बढ़ाचढ़ाकर भी बताया, वो भी सिर्फ पड़ोसी देशों में हिंदुओं का। मानवाधिकार की बात करने वालों को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, ''हजारों  लड़कियों का रेप किया गया, दर्जनों मंदिर तोड़ दिए गए.....''                         

दरअसल शाह यह तस्वीर बनाना चाह रहे हैं कि बीजेपी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हमले का शिकार हिंदुओं के लिए सही काम कर रही है। इसका राजनीतिक संदेश पार्टी यह देना चाहती है कि विपक्षी पार्टियां बीजेपी को हिंदुओं का भला करने से रोक रही हैं, सिर्फ बीजेपी हिंदुओं के बारे में सोचती है।

बीजेपी की यह बात इसलिए छलावा है कि विरोध प्रदर्शन में कोई भी प्रताड़ित लोगों को आसरा दिए जाने का विरोध नहीं कर रहा है। दरअसल विरोध सिर्फ इस परोपकारी काम से एक समुदाय-मुस्लिम, को छोड़े जाने का है। इससे मुस्लिमों के खिलाफ भेदभाव का बीज बोया जा रहा है और ऐसा करना संविधान की मूल  आत्मा-शब्दों के खिलाफ है।

 बीजेपी हिंदुओं को बचाने का काम कर रही है और विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में हैं, यह झूठ (या आधा सच) लगातार दोहराया जा रहा है। इसका संदेश साफ है: हिंदुओं को जीतने की कोशिश की जाए।

शायद CAA लाने के पीछे की मंशा भी यही थी।

NRC-NPR पर चुप्पी

नागरिकता कानून से एक और मुद्दा जुड़ा हुआ है। शाह लगातार बोलते रहे हैं कि   CAA के बाद नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) बनाया जाएगा। इसका मक़सद अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना है। भारत के पड़ोसियों के परिप्रेक्ष्य में, और अब CAA द्वारा मुस्लिमों को छोड़कर सभी को नागरिकता देने के  प्रावधान से तार्किक नतीजा यही मिलता है कि NRC के ज़रिए सिर्फ मुस्लिमों को निशाना बनाया जाएगा। केवल अवैध प्रवासी ही नहीं, बल्कि किसी को भी जो अपने माता-पिता के जन्म समेत मांगे गए दूसरे सबूत पेश नहीं कर पाएगा।

 विरोध प्रदर्शन की पूरी लहर ही CAA और NRC दोनों के ही खिलाफ है। लोगों को शांत करने के लिए सरकार ने कहा कि सिर्फ पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) बनाया जाएगा। लेकिन इसका भी विरोध हुआ, क्योंकि इसमें माता-पिता के जन्म की जानकारी मांगी जा रही है, जो ''संशयपूर्ण नागरिकता'' की घोषणा की तरफ पहला कदम है।

 अमित शाह अपने भाषणों में NPR-NRC पर  कोई भी बात करने से बच रहे हैं। वह कुछ भी साफ नहीं करते। वो किसी को शिक्षित भी नहीं करते। उन्होंने पहले यह बताने का प्रयास किया कि NPR में दस्तावेज़ जांच नहीं होगी। वहीं पीएम मोदी ने कहा कि NRC की तो कोई चर्चा ही नहीं हुई। लेकिन यह दोनों नेता, जगह के मुताबिक अपनी बात बदल लेते हैं।

संसद में अमित शाह द्वारा दो बार NRC करवाए जाने की बात के बावजूद, 22 दिसंबर को मोदी ने खुलकर कहा कि NRC पर कोई चर्चा ही नहीं है।  फिर अब जो अभियान चालू हो रहा है, उसमें NPR और NRC पर इन दोनों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।

यह न केवल हंसने वाली बात है, बल्कि साफ झूठ भी है। शाह को पता होना चाहिए था कि प्रदर्शनकारी NRC-NPR के भी उतने ही खिलाफ हैं, जितने  CAA के। उन्हें इस मुद्दे पर बात साफ करनी चाहिए थी।

 शायद चुप रहकर भी एक मुद्दे का हल किया जा सकता है।

 BJP का अभियान और इसकी सामग्री हमें खतरनाक मोड़ की तरफ ले जा रही  है। नागरिकता संशोधन कानून पर समर्थन हासिल करने के लिए पार्टी इस मुद्दे को हिंदुओं से जुड़ा मुद्दा बताने की कोशिश कर रही है। वे पूरे देश को सांप्रदायिक तौर पर बांट देना चाहते हैं। इस बात की कल्पना करना भी कंपा देने वाला है। पर हो सकता है, इसका उद्देश्य ही यही है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

BJP’s Jan-Jagran: The Calculus of Lies

CAA-NPR-NRC
BJP Campaign
BJP Jan Jagran Abhiyan
BJP Half-Truths
Communalism
Muslim Exclusion
Modi-Shah Lies

Related Stories

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

पूजा स्थल कानून होने के बावजूद भी ज्ञानवापी विवाद कैसे?

'उपासना स्थल क़ानून 1991' के प्रावधान

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License