NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
CAA-NRC: इलाहाबाद-कानपुर से लेकर कोलकाता तक बन गए हैं कई शाहीन बाग़
दिल्ली के शाहीन बाग़ के धरने को हटाने और बचाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब ये धरना रहे न रहे, इसने अपना काम कर दिया। शाहीन बाग़ की बदौलत देश में कई जगह शाहीन बाग़ जैसे मोर्चे खुल गए हैं।
सोनिया यादव
14 Jan 2020
इलाहाबाद
इलाहाबाद के रोशनबाग में धरना

देश भर में जारी तमाम विरोध प्रदर्शनों के बीच भले ही केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए 10 जनवरी से लागू कर दिया हो, लेकिन इसे लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमा नहीं है। दिन-प्रतिदिन प्रदर्शनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। छात्रों से लेकर नागरिक समाज के लोग और बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक इस आंदोलन में शिरकत कर रहे हैं तो वहीं इसकी खास बात ये है कि इसका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। वे आम महिलाएं जो घरों में अपने काम-काज निपटाने के बाद कड़कड़ाती सर्द रातों में संविधान बचाने की लड़ाई सड़कों पर लड़ रही हैं। दिल्ली के शाहीनबाग का संघर्ष अब देश के अन्य राज्यों तक भी पहुंच रहा है।

रविवार, 12 जनवरी को इलाहाबाद के रोशनबाग में भी सीएए के खिलाफ बगावत की आग नज़र आई। एक ओर संगम नगरी में माघ मेले की तैयारी चल रही है तो वहीं दूसरी ओर मंसूर अली पार्क में हजारों की संख्या में महिलाएं सीएए और एनारसी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। महिलाएं इस प्रदर्शन में अपने बच्चों के साथ रात भर ठंड़ में बैठी रहीं। महिलाओं ने इस दौरान देशभक्ति गीत गाए, इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए और सीएए के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

ald.jpg

इस प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि सीएए एक काला कानून है। केंद्र की बीजेपी सरकार एनआरसी के माध्यम से मुस्लिमों का उत्पीड़न करना चाहती है। देश के संविधान की जगह अपनी विचारधारा लोगों पर थोपना चाहती है। जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है, किसी में कोई भेदभाव नहीं करता तो सरकार धर्म के आधार पर कैसे लोगों को नागरिकता दे सकती है।

इस आंदोलन की शुरुआत करने वाली सारा अहमद ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘अब पानी सर से ऊपर जा चुका है, सरकार की जास्तियां आम लोगों के खिलाफ बढ़ती जा रही हैं, इसलिए हम आंदेलन करने पर मजबूर हैं। जब मर्द हक-हकूक की आवाज़ उठा रहे हैं तो पुलिस उन्हें जेलों में बंद कर दे रही है, उन पर जुल्म कर रही है, इसलिए अब हम औरतों को संविधान बचाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है। दिल्ली के शाहीनबाग, कानपुर समेत कई जगहों पर हमारी बहने लगातार संघर्ष कर रही हैं, इस ठंड में सरकार से लड़ रही हैं, ऐसे में भला इलाहाबाद में हम कैसे चैन से बैठ सकते हैं।'

इस संबंध में सारा के साथ प्रदर्शन में शामिल तरन्नुम खान ने बताया, 'ये लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं है, पूरे देश की है और इसलिए संविधान बचाने के लिए आज हमारे साथ 80 साल की बुजुर्ग महिलाओं से लेकर छोटे बच्चे भी प्रदर्शन में बैठे हैं। हमारा मकसद सबको ये बताना और समझाना है कि ये कानून कैसे एक समुदाय के साथ भेदभाव करता है, कैसे संविधान विरोधी है। हमने शुरुआत महज़ 40-45 महिलाओं से की थी, लेकिन रात होते-होेते संख्या हजार पार कर गई। हमारा प्रदर्शन अनिश्चितकालिन है और हम सरकार की मनमानी के आगे डटकर खड़े रहेंगे।' 

इस प्रदर्शन में खास बात ये नज़र आई कि महिलाओं के साथ इसमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए। 10 से 12 साल के कई बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर रात भर नारे लगाते रहे। इस दौरान 'बस यही एक नारा है, हिंदुस्तान हमारा है’ की आवाज़ गूंजी। धरना प्रदर्शन में कई ऐसी महिलाएं भी दिखाई दीं जिन्होंने अपनी गोद में दुधमुंहे बच्चों को लिया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि 'हिंदुस्तान को बांटने का विरोध इस वक्त नहीं किया गया तो आगे सबकुछ हाथ से निकल जाएगा।'

सीएए के खिलाफ जारी इस प्रदर्शन में कई सियासी दलों के लोग भी पहुचें। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ तमाम संगठनों ने भी इसमें हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में सीएए और एनआरसी को संविधान विरोधी और जनविरोधी करार दिया साथ ही सरकार से वापस लेने की अपील की।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया, 'इस बार सरकार का मुकाबला हिंदू-मुसलमान से नहीं बल्कि देश की महिलाओं से है। हमें ये समझने की जरूरत है कि सीएए और एनआरसी का मसला सिर्फ धर्म विशेष का नहीं है, ये संविधान विरोधी कानून है। हमारा संविधान बराबरी और धर्मनिर्पेक्षता की बात करता है, संविधान इस बात की कतई इजाजत नहीं देता कि किसी को भी धर्म के आधार पर बांटा जा सके या इस आधार पर उसकी नागरिकता तय हो। नागरिकता संशोधन एक्ट सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। एक ऐसा देश जहां वोटर आईडी से लेकर आधार कार्ड तक पर कई लोगों के नाम और पते गलत लिखे मिल जाते हैं वहां आप लोगों से किन सही दस्तावेजों की उम्मीद कर रहे हैं। जहां लोगों के पास खाने को खाना नहीं है, वहां आप लोगों से कागज़ मांग रहे हैं।'

ऋचा सिंह ने आगे कहा कि जब सरकार को बेरोजगारी, महंगाई, अर्थव्यवस्था और महिला सुरक्षा पर बात करनी चाहिए तब सरकार इससे ध्यान भटकाने के लिए सीएए और एनआरसी में आम जनमानस को उलझाने का प्रयास कर रही है। देश के विश्वविद्यालयों के अंदर घुसकर छात्रों को पीटा जा रहा है, यह शर्मनाक है लेकिन सरकार इस पर मौन है। 

इस संबंध में सिटी के एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि प्रदर्शनकारियों से लगातार अपील की जा रही है कि वह धरना खत्म करें। फिलहाल यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है, एहतियातन पार्क में पुलिस के साथ ही पीएसी भी तैनात कर दी गई है। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि महिलाएं धरना खत्म कर घरों को लौट जाएं। 

knp.jpg

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध का असर कानपुर में भी नज़र आया। यहां लगभग हफ्तेभर से महिलाएंं चमनगंज के मोहम्मद अली पार्क में धरना-प्रदर्शन कर रही हैं। 'लोकतंत्र बचाओ' आंदोलन के बैनर तले शुरू हुए इस प्रदर्शन में मुस्लिमों के साथ-साथ तमाम हिंदू भी शामिल हो रहे हैं। इसका नेतृत्व भी पर्दानशीं महिलाएं और छात्राएं ही कर रही हैं। घर के कामकाज निपटाकर यहां पहुंची महिलाएं माइक पर इस कानून के विरोध में ना सिर्फ बोलती हैं बल्कि इंकलाब जिंदाबाद के नारे, क्रांतिकारी नज्में, देशभक्ति गीत के राष्ट्रगान भी गाती हैं।

गौरतलब है कि यूपी के इलाहाबाद, कानपुर के अलावा बिहार के गया और कोलकाता के पार्क सर्कस में भी शाहीन बाग की झलक देखने को मिल रही है। गया के शांति बाग़ में 29 दिसंबर से तो वहीं पार्क सर्कस में 7 जनवरी से विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और छात्र शामिल हैं। यहां इंक़लाब जिंदाबाद, लड़ेंगे जीतेंगे, हिंदुस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगातार लगाए जाते हैं। प्रदर्शनकारी रंगीन तख्तियाँ, पोस्टर और बैनर लेकर रात भर प्रदर्शन कर रहे हैं।
 

CAA Protest In all over India
CAA
NPR
NRC
Shaheen Bagh
Protest in Shaheen bagh
Modi Govt

Related Stories

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

किसानों की ऐतिहासिक जीत के मायने


बाकी खबरें

  • UP
    सतीश भारतीय, परंजॉय गुहा ठाकुरता, शेखर
    विश्लेषण: विपक्षी दलों के वोटों में बिखराव से उत्तर प्रदेश में जीती भाजपा
    29 Mar 2022
    आज ज़रूरत इस बात की है कि जिन राज्यों में भी भाजपा को जीत हासिल हो रही है, उन राज्यों के चुनाव परिणामों का विश्लेषण बारीकी से किया जाए और यह समझा जाए कि अगर विपक्ष एकजुट रहा होता तो क्या परिणाम…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !
    29 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की। उन्होंने नज़र डाला है दिल्ली-एनसीआर और देश में हड़ताल के व्यापक असर पर।
  • sanjay singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    विपक्ष के मोर्चे से भाजपा को फायदा: संजय सिंह
    29 Mar 2022
    इस ख़ास अंक में नीलू व्यास ने बात की आप के सांसद संजय सिंह से और जानना चाहा Aam Aadmi Party के आगे की योजनाओं के बारे में। साथ ही उन्होंने बात की BJP और देश की राजनीति पर.
  • Labour Code
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल : दिल्ली एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में दिखा हड़ताल का असर
    28 Mar 2022
    केंद्रीय मज़दूर संगठनों ने सरकार की कामगार, किसान और जन विरोधी नीतियों के विरोध में 28 और 29 मार्च दो दिन की देशव्यापी हड़ताल की शुरआत आज तड़के सुबह से ही कर दी है । हमने दिल्ली एनसीआर के साहिबाद…
  • skm
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन
    28 Mar 2022
    मज़दूरों की आम हड़ताल को किसानों का समर्थन मिला है. न्यूज़क्लिक से बातचीत में ऑल इंडिया किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा कि सरकार मजदूरों के साथ साथ किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. खाद, बीज…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License