NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सीएए विरोध: निःशुल्क वकील और क्राउडफ़ंडिंग यूपी हिंसा के पीड़ितों की मदद कर रहे हैं
पुलिस विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में सीएए के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए 5,558 लोगों को डीटेन और 1,240 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था।
सौरभ शर्मा
03 Feb 2020
Translated by महेश कुमार
CAA Protests

लखनऊ : 25 साल के मोहम्मद इम्तियाज़ को लखनऊ पुलिस ने 19 दिसंबर, 2019 को सीएए विरोध के मद्देनज़र हुई हिंसा में उनकी कथित भूमिका को लेकर गिरफ़्तार किया था। वह अभी भी जेल में बंद हैं क्योंकि उनका परिवार केस लड़ने के लिए वकील का इंतज़ाम नहीं कर सकता है।

इम्तियाज़ की बहन, आमना ख़ातून, जो ज़िंदा रहने के लिए इम्तियाज़ की कमाई पर निर्भर थीं, ने बताया कि वे आर्थिक दिक़्क़तों की वजह से किसी भी वकील का इंतज़ाम केस लड़ने के लिए नहीं कर सकते हैं, लेकिन शुक्र है कि कुछ वकील बिना पैसे लिए और क्राउडफ़ंड की सहायता से उनके परिवार का मुकदमा लड़ने को तैयार हैं।

आमना कहती हैं, “तीन दिनों तक घर में खाना नहीं था क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे। इम्तियाज़, परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और जब से पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया है, हमारे घर में खाने के लिए कुछ नहीं हैं। हम जब एक वक़्त के भोजन के लिए काफ़ी संघर्ष कर रहे थे तो हमारे पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने हमारी मदद की। अपने भाई के केस को लड़ने के लिए हमारे पास पैसा नहीं है।"

आमना को उनका केस लड़ने के लिए कई निशुल्क और समर्थक वकीलों ने, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यहां तक कि पत्रकारों ने भी संपर्क किया था, जो परिवार की मदद के लिए तैयार थे, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंक के डर से आमना ने सभी समर्थन की पेशकश को ठुकरा दिया था। उनके भाई के केस को हाल ही में एक नि:शुल्क वकील ने उठाया जो इस केस को क्राउडफ़ंड की मदद से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन्स एसोसिएशन की पदाधिकारी मधु गर्ग का कहना है कि हाल में घटी घटनाओं के कारण इम्तियाज़ का परिवार बहुत डरा हुआ है। वे उनसे केवल एक बार मिले हैं क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे। गर्ग ने न्यूज़क्लिक को बताया, "कुछ लोग उनकी आर्थिक मदद करने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था और अब एक नि:शुल्क वकील ने केस हाथ में ले लिया है और केस लड़ने के लिए इम्तियाज़ के दोस्तों की मदद ले रहे हैं।"

नि:शुल्क वकील 

पिछली 19 दिसंबर को समाज के विभिन्न समूहों द्वारा सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शनों में शामिल होने के गुनाह के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 5,558 लोगों को डीटेन किया गया था और 1,240 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था।

आधिकारिक स्रोतों से हासिल नए आंकड़ों के मुताबिक़ 42 लोगों को ज़मानत मिल गई है, जबकि 150 से अधिक अभी भी जेल में बंद हैं।

नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले वकील अली ज़ैदी ने जेल में बंद पीड़ितों की मदद करने के लिए कई केस अपने हाथ में लिए है। उन्होंने कहा, "पीड़ितों में से कई आर्थिक रूप से इतने कमज़ोर हैं कि वे जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने का ख़र्च भी नहीं उठा सकते हैं, और इन केसों के संवैधानिक समाधान का विकल्प भी नहीं चुन सकते हैं, क्योंकि वकीलों की फ़ीस काफ़ी महंगी हैं।"

अली ने न्यूज़क्लिक को बताया, “कई अन्य लोग भी पुलिस अत्याचार के शिकार लोगों की मदद कर रहे हैं। पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ भी लोगों की मदद कर रही है और दिल्ली, इलाहाबाद और लखनऊ के कई स्वतंत्र वकील इन केसों को उठाने के लिए आगे आए हैं। मैंने हाल ही में दो लोगों को जेल से बाहर निकाला और उसी आधार पर 48 से अधिक अन्य लोगों को बिजनौर की अदालत से ज़मानत मिल गई है क्योंकि पुलिस उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत पेश नहीं कर सकी।”

अश्मा इज़्ज़त, जो लखनऊ स्थित एक वकील हैं, और 'संविधान बचाओ देश बचाओ आंदोलन’ की क़ानूनी टीम की प्रमुख हैं, ने बताया, “हमने हाल ही में 18 लोगों को जेल से बाहर निकाला है और अभी भी 100 से अधिक लोग जेल में बंद हैं। हम नि:स्वार्थ भाव से वकीलों के रूप में काम कर रहे हैं क्योंकि ये सभी लोग बहुत ग़रीब पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके परिजन वकीलों की मोटी फ़ीस देने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। जो जेलों में बंद हैं उनमें से कुछ  वेटर हैं और सड़क के किनारे छोटी खाने की दुकानों पर काम करते हैं। जब वे काम कर रहे थे तो उन्हें पुलिस ने उठा लिया था।”

इज़्ज़त ने कहा कि वे ऐसे लोगों का डाटा इकट्ठा करने के लिए भी काम कर रही हैं जो लोग पीड़ितों की मदद करने में सक्षम हों।

क्राउडफ़ंडिंग (जन सहयोगी फ़ंड)

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हुए प्रदर्शन के दौरान 25 से अधिक लोगों को कथित रूप से हुई हिंसा के दौरान मार दिया गया था, जो हिंसा सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। उनमें से, कई अपने परिवारों के लिए एकमात्र कमाई का साधन थे। इसलिए, कुछ लोग ऐसे ग़रीब परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से बड़ी राशि एकत्र की गई है।

क्राउडफ़ंड की वेबसाइट OurDemocracy.in पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार- सामाजिक और राजनीतिक कारणों से भड़की हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए - 5,093,000 रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की गई है।

एकत्रित फंड का विवरण:

1) कानपुर पीड़ितों के लिए 7.36 लाख फ़ेसबुक पेज के ज़रिये एकत्रित किए गए।

-इसमें से 3 लाख रुपए आफ़ताब आलम के परिवार को दिए गए। 

-इसमें से 3 लाख रुपए मौहम्मद रईस के परिवार को दिए गए। 

-इसमें से 1.36 रुपए लाख मौहम्मद सैफ़ के परिवार को दिए गए। 

2) इमराना के लिए भी धन जुटाया गया। जो मेरठ में मारे गए आसिफ़ की पत्नी हैं। (जो टायर मैकेनिक और अनाथ थे)

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/SupportImrana

10.5 लाख रुपए जुटाए गए जिसमें से 10.14 लाख रुपए जल्द ही दिए जाएंगे।

3) मेरठ में मारे गए अलीम अंसारी के भाई सलाउद्दीन के लिए फ़ंड जुटाया गया।

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/AleemAnsari

इसमें 8 लाख रुपए जुटाए गए। .

4) ज़हीर के लिए फ़ंड जुटाया गया है। 

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/SupportfamilyofZaheer

अब तक 90,000 रुपये जुटाए गए हैं। अभियान अभी भी जारी है।

5) पटना में मारे गए अमीर हंजला के लिए तारिक़ अनवर ने फंड इकट्ठा किया। 

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/JusticeForAmir

इसमें 10.26 लाख रुपए जुटाए गए 

6) सुलेमान जो बिजनौर में मारा गया। अंशुलिका दुबे ने उनके लिए फ़ंड जुटाया।

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/justiceforsuleman

इसमें 3.29 लाख रुपये जुटाए गए। यह अभियान अब रुक गया है।

7) बिजनौर में मारे गए अनस के लिए दीपक गुप्ता ने फंड जुटाया 

https://www.ourdemocracy.in/Campaign/JusticeForAnas

इसमें 10.62 लाख रुपए जुटाए गए।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

CAA Protests: How Pro Bono Lawyers and Crowdfunding Are Helping UP Violence Victims

Uttar pradesh
BJP
UP Police Violence
Yogi Adityanath
CAA
NRC
NPR
Anti-CAA Protests
Lucknow

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • इमाद उल हसन
    नफ़रती सिनेमाई इतिहास की याद दिलाती कश्मीर फ़ाइल्स
    24 Mar 2022
    यह फ़िल्म मुसलमानों के ख़िलाफ़ मौजूदा रूढ़ धारणाओं को मज़बूती देने के लिए फिल्मों का इस्तेमाल करते हुए एक हालिया घटना को बड़ा बनाकर पेश करती है और और इसका इस्तेमाल देश को ज़्यादा सांप्रदायिक बनाने के…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार: "मुख्यमंत्री के गृह जिले में दलित-अतिपिछड़ों पर पुलिस-सामंती अपराधियों का बर्बर हमला शर्मनाक"
    24 Mar 2022
    भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा के हिलसा में अतिपिछड़ी जाति से आने वाले विरेश चंद्रवंशी की बर्बर किस्म से की गई हत्या, उसके बाद अतिपिछड़े व दलित समुदाय पर ही…
  • आमिर मलिक
    भगत सिंह झुग्गियाँ- वह स्वतंत्रता सेनानी जो सदा लड़ते रहे
    24 Mar 2022
    ब्रितानिया सल्तनत के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने वाले, भगत सिंह झुग्गियाँ सदा लोगों के हक़ में आवाज़ उठाते रहे। इसी महीने आठ तारीख़ को उन्होंने अंतिम साँस ली। लेखक उनकी ज़िंदगी की कुछ झलकियाँ दिखा रहे हैं...
  • सबरंग इंडिया
    मौन कोई विकल्प नहीं है: पत्रकारों ने भारत के संवैधानिक संस्थानों की चुप्पी पर सवाल उठाया
    24 Mar 2022
    वरिष्ठ पत्रकारों ने हेट स्पीच और नरसंहार के खुले आह्वान के खिलाफ कार्रवाई की अपील की
  • प्रभात पटनायक
    वैश्वीकरण और पूंजी तथा श्रम का स्थान परिवर्तन
    24 Mar 2022
    वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में, उत्तर के उन्नत पूंजीवादी देशों से, दक्षिण के कम मजदूरी वाले देशों की ओर, पूंजी के स्थानांतरण पर तो काफ़ी चर्चा हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License