NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
CAA विरोध : दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद हज़ारों नागरिकों ने किया प्रदर्शन
प्रदर्शन कर रही महिलाएँ, छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, हर उम्र के नागरिक पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बावजूद आगे बढ़ते रहे और जंतर मंतर पहुँच कर नागरिकता क़ानून का विरोध किया।
मुकुंद झा
19 Dec 2019
CAA protest

19 दिसंबर 1927 को, राम प्रसाद बिस्मिल, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय लोगों को उत्तेजित करने वाले देशभक्तिपूर्ण आह्वान का प्रतिपादन किया, उन्हें गोरखपुर जेल में फांसी दे दी गई थी। 

सह-अभियुक्त अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान को फ़ैज़ाबाद जेल में और दूसरे सह-अभियुक्त रोशन सिंह को नैनी जेल में फांसी दी गई थी। धार्मिक एकता को पछाड़ते हुए इस एकता ने भारत को अंग्रेज़ों से आज़ादी दिलाई थी। 

आज उनकी फांसी के 92 साल बाद 19 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, इसी कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली में भी ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ। दिल्ली में यह प्रदर्शन मुख्यत: दो स्थानों पर हुआ। एक प्रदर्शन दिल्ली के लाल क़िला और दूसरा जंतर मंतर पर। इस मार्च में शामिल होने के लिए राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से सभी छात्र, युवा और महिलाएं पहुँचे।

IMG-20191219-WA0014_0.jpg

दिल्ली में लाल क़िला क्षेत्र के आसपास लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए बृहस्पतिवार को हज़ारों लोगों ने नागरिकता संशोधित क़ानून (सीएए) के विरोध में मार्च निकालने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव, पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर ख़ालिद और जेएनयूएसयू पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी को भी हिरासत में लिया गया है।

मार्च निकालने की कोशिश कर रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बसों में भरकर ले जाया गया। हाथों में तख्तियाँ लिए हुए और नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने बसों में ले जाने का ज्यादा विरोध नहीं किया।

IMG-20191219-WA0021.jpg

इसी तरह से जो मार्च वामपंथी दलों द्वारा मंडी हाउस से शहीदी पार्क की तरफ़ जाना था वहां भी पुलिस ने उसे रोका। सैंकड़ों की संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। इसमें सीताराम येचुरी, डी राजा, नीलोत्पल बसु, ब्रिन्दा करात समेत कांग्रेस के अजय माकन और संदीप दीक्षित भी शामिल थे। हालांकि बाद में इन लोगो को रिहा कर दिया गया।

पुलिस की इन सभी कार्रवाई के बाद भी हज़ारों की संख्या में लोगों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।

यादव ने ट्वीट किया, ‘‘मुझे अभी-अभी लाल क़िला से हिरासत में लिया गया है। क़रीब एक हज़ार प्रदर्शनकारियों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है। हज़ारों प्रदर्शनकारी रास्ते में हैं। हमें बताया गया है कि हमें बवाना ले जाया जा रहा है।’’

दिल्ली पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल) मनदीप सिंह रंधावा ने कहा, ‘‘हम लोगों से अपील करते हैं कि वह अफ़वाहों पर ध्यान न दें। क्षेत्र में 144 पहले ही लगा दिया गया है।’’

IMG-20191219-WA0020.jpg

खालिद ने ट्वीट किया, ‘‘लाल क़िले से दिल्ली पुलिस ने हमें उठाया। हम यहां विभाजनकारी कैब-एनआरसी के ख़िलाफ़ अशफ़ाक़ और बिस्मिल की शहादत दिवस के दिन प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए थे। मैं सभी प्रदर्शनकारियों से अपील करता हूं कि वह शांतिपूर्ण तरीक़े से तब तक प्रदर्शन करते रहें जब तक कि कैब-एनआरसी को वापस नहीं ले लिया जाए। यह कुछ ऐसा है कि अशफ़ाक़ और बिस्मिल का क़र्ज़ है हम पर, जिसे हमें चुकाना है।’’

उमर ने हिरासत में लिए जाने से पहले न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा था कि वो आज देश और संविधान को बचाने के लिए सड़क पर उतरे हैं। इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़े तो कोई बात नहीं।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अजीत के.सिंगला ने लाल क़िले पर प्रदर्शनकारियों ने कहा, ‘‘अगर आपके पास मांगों का ज्ञापन है तो आप हमें दें। हमने धारा 144 लगा दी है। अगर असामाजिक तत्वों ने शांति भंग करने की कोशिश की तो आप लोग नियंत्रण नहीं रख पाएंगे।’’

एक प्रदर्शनकारी ने पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर क्या नुकसान पहुंच रहा है।

IMG-20191219-WA0018.jpg

29 वर्षीय शाकिब ने कहा, ‘‘जब कभी हम एनआरसी और कैब के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए जुटते हैं पुलिस कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लेती है ताकि हम उन्हें छुड़ाने पर ध्यान केंद्रित कर लें।’’

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-थलग किया। हज़ारों लोग दरियागंज, तुर्कमान गेट और जामा मस्जिद की तरफ़ से सुबह 10 बजे लाल क़िले की तरफ़ बढ़े। कुछ प्रदर्शनकारी जो चांदनी चौक पहुंचे थे पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया और उन्हें बसों में भरकर बवाना ले गए। हमें बीच-बीच में रोका गया और आगे बढ़ने की मंज़ूरी नहीं दी गई।’’

लोगो को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में कम से कम 19 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिये गये थे। वहीं दक्षिण, पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के बड़े हिस्से में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गये हैं। शहर में कई जगहों पर यातायात की भी समस्या आ रही है। इसके साथ ही दिल्ली के कई इलाक़ों में मोबाईल के नेटवर्क कमज़ोर किए गए हैं जिससे प्रदर्शनकारी अधिक संख्या में एकत्रित न हो सकें।

लाल क़िले पर प्रदर्शनकारी सुबह छह बजे से ही जुटने लगे थे, वो सभी शहीदी पार्क जाना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें दस बजे हिरासत में लिया। जबकि प्रदर्शन का समय सुबह 11 बजे रखा गया था।

IMG-20191219-WA0022.jpg

लाल क़िले पर लोग लगातार अलग-अलग दिशाओं से दस बीस की संख्या में आ रहे थे और ख़ुद ही गिरफ़्तारी दे रहे थे। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं थी। जितने भी प्रदर्शनकारी थे सभी शांतिपूर्ण तरीक़े से नारे लगते हुए पहुंच रहे थे। आज का पूरा विरोध मार्च शांति पूर्ण था।

इससे पहले उन्हें लाल क़िला और मंडी हाउस पर प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी गयी थी और वहाँ निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी थी। जंतर मंतर पर लोग क्रांतिकारी गीत गा रहे थे और सड़कों पर नारे और संदेश लिख रहे थे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में राजधानी के छात्र, शिक्षक और समाज के लोगों ने भी भागीदारी की थी।

IMG-20191219-WA0019.jpg

प्रदर्शनकारियों का कहना था, "आज आरएसएस-भाजपा द्वारा देश को तोड़ा जा रहा है। इसलिए इसका विरोध करना ज़रूरी है। हम इस विधेयक का पुरज़ोर विरोध करते हैं जो नागरिकता को एक व्यक्ति के धर्म के साथ जोड़ता है, यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरूद्ध है। इस विधेयक का उद्देश्य देश में सांप्रदायिक विभाजन और सामाजिक ध्रुवीकरण को और तेज़ करना है, जो हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए ख़तरनाक है। इस बिल के पारित होने के साथ-साथ इस मोदी-शाह भाजपा सरकार द्वारा पूरे देश में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के विस्तार करने की घोषणा की है, जिससे भारतीय गणतंत्र का चरित्र बदल जाएगा। यह हमें एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र से एक "हिंदुत्व राष्ट्र" की ओर ले जाएगा और यही आरएसएस की राजनीतिक योजना है।"

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "आज दिल्ली ने दिखा दिया कि सरकार की जेलों में उनके लिए जगह नहीं है, हम जेलों में जाने के लिए तैयार है। लेकिन देश का संविधान नहीं ख़त्म होने देंगे। हम तो शांति से एक मार्च करने चाह रहे थे लेकिन पुलिस ने इसे सैंकड़ों मार्च में बदल दिया है। पुलिस ने ख़ुद ही पूरी राजधानी को बंद कर दिया जबकि हम तो केवल कुछ किलोमीटर ही मार्च करना चाहते थे।"

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

CAA
NRC CAA protest
protest on jantar mantar
CAA Protest In all over India
protest on Red Fort
RSS
BJP
democracy
Secularism

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License