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सीएए प्रदर्शन: हिंसा न होने के बावजूद यूपी पुलिस ने लोनी में लगाए प्रदर्शनकारियों के पोस्टर
गाजियाबाद के लोनी में पिछले शुक्रवार को एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ था। हालांकि पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के पोस्टर चौराहों पर लगा दिए गए हैं।
मुकुंद झा
23 Dec 2019
Ghaziabad police
Image courtesy: Twitter

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर हो रहे प्रदर्शनों को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में है। इसका ताजा उदाहरण दिल्ली से सटे जनपद गाज़ियाबाद के लोनी इलाके का है। यहां शुक्रवार 20 दिंसबर को नमाज़ के बाद एक शंतिपूर्ण विरोध मार्च हुआ। इस प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की हिंसा भी नहीं हुई लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस एफआईआर को देखें तो 153 लोग नामज़द है और 1500 अज्ञात हैं। इन सभी पर लोनी में दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं जैसा की हमने देखा है संगीन आरोप में शामिल लोगों के बारे में इश्तहार दिया जाता है वैसे ही प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों की रैली की फोटो के पोस्टर बनाकर चौराहों पर लगाए गए हैं। यह कदम मामले में आरोपी का नाम बदनाम और शर्म करने के लिए लगाया गया है। पोस्टरों में लगभग 150 लोगों के चित्र हैं। आगे कहा गया है कि 1,500 लोगों में से जिनके खिलाफ हिंसक घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी, 152 की पहचान की गई है।

पुलिस ने बताया कि इस मामले अब तक 40 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। जिले के मुख्य मार्गों के किनारे लम्बे चौड़े पोस्टर लगे हैं। पुलिस ने पोस्टरों के माध्यम से जनता को यह भी आश्वासन दिया है कि इनके बारे में जानकारी देने वाले मुखबिर की पहचान छुपा दी जाएगी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार डीएम-एसएसपी ने शनिवार सुबह विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रणनीति बनाने के लिए अधीनस्थों के साथ बैठक की। प्रशासन ने इस मामले में किसी भी तरह की नरमी न बरतने के आदेश दिए हैं।

इस पूरे मामले पर न्यूज़क्लिक ने लोनी थाने के एसएचओ वीरेंद्र सिंह भड़ाना से फोन पर बात की उन्होंने भी कहा कि वहां किसी भी तरह की न कोई हिंसा हुई और न ही कोई तोड़फोड़ हुई हैं।
 
लकिन इसके बाद जब हमने उनसे पूछा, फिर इतनी कड़ी करवाई क्यों की जा रही है? तो इस सवाल सुनते ही उनका रवैया बहुत ही उखड़ा सा लगा। इससे पहले वो आराम से बात कर रहे थे लेकिन इसके बाद उन्होंने अचानक झल्लाते हुए कहा उनके पास इस सवाल का जबाब देने के लिए समय नहीं है। वो अभी मीटिंग में हैं।  

न्यूज़क्लिक ने इसके बाद उस इलाके के सर्किल ऑफिसर राजकुमार पांडे से भी फोन पर बात की। उनका भी कुछ इसी तरह का व्यवहार था। जब उनसे भी इस तरह के होर्डिंग को लेकर सवाल किया तो फोन कट कर दिया।

ऐसे ही पोस्टर में आए एक युवक से न्यूज़क्लिक ने बताया कि वो शुक्रवार की नमाज में गए थे। कुछ समय तक विरोध का हिस्सा रहे, फिर घर चले गए। अगले दिन उनके एक दोस्त ने व्हाट्सएप पर फोटो भेजी कि उनकी तस्वीर सड़क किनारे लगी है और पुलिस उन्हें खोज रही है। पहले तो उसे मजाक लगा लेकिन बाद में कई जानने वालों ने यह तस्वीर भेजी। इसके बाद से उनका पूरा परिवार डरा हुआ है।

उस युवक ने न्यूज़क्लिक से बताया कि वो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं होते हैं। वो सिर्फ उस दिन नमाज के लिए गए थे। प्रदर्शन करना उनका मकसद भी नहीं था।

वहीं, ज्यादातर स्थानीय लोगों का कहना कि यह विरोध प्रदर्शन बिलकुल शंतिपूर्ण रहा। बस कुछ देर सड़क जरूर बंद रही जोकि किसी भी प्रदर्शन में सामान्य बात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह चौराहों पर हमारे बच्चों के पोस्टर लगाए जा रहे हैं जैसे वो कोई आतंकवादी हैं। ये गलत है। साथ ही जिस तरह कई लोगों को अचानक जिम, बाजार या अन्य जगहों से उठाया जा रहा है। इससे डर का माहौल है। इसी डर के चलते जिन लोगों की तश्वीर पोस्टर में है। उन्होंने इलाका छोड़ दिया है।

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