NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
CAA विरोधी आंंदोलन: कोर्ट का योगी सरकार को झटका, प्रदर्शनकारियों की ज़मानत रद्द करने से किया इंकार
यूपी सरकार ने ज़िला अदालत में अर्ज़ी देकर कहा था कि तीन प्रदर्शनकारियों (कांग्रेस नेता सदफ़ जाफ़र, रंगकर्मी दीपक मिश्रा “कबीर” और अधिवक्ता मोहम्मद शोएब ) द्वारा ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। इसलिए इनकी ज़मानत को रद्द करके इनको दोबारा जेल भेजा जाये।
असद रिज़वी
25 Sep 2021
CAA
मोहम्मद शोएब (बाएं), सदफ़ जाफ़र (बीच में), दीपक कबीर (दाएं)

लखनऊ की ज़िला अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को झटका देते हुए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरुद्ध आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों की ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया। कांग्रेस नेता सदफ़ जाफ़र, रंगकर्मी दीपक मिश्रा “कबीर” और अधिवक्ता मोहम्मद शोएब आदि पर ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार द्वारा उनकी ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी दाख़िल की गई थी।

महिला कांग्रेस की संयोजक सदफ़ जाफ़र, दीपक कबीर और रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद आदि ने 19 दिसंबर 2019 को सीएए के विरुद्ध हुए प्रदर्शन का समर्थन किया था। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन उग्र होने के कारण बड़ी संख्या में जान-माल (निजी-सार्वजनिक) का नुक़सान हुआ था।

ये भी पढ़ें: यूपी: ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर है योगी सरकार का  साढ़े 4 साल का रिपोर्ट कार्ड!
 
प्रदेश पुलिस ने प्रदर्शन में हिंसा भड़काने के आरोप में सदफ़, कबीर और शोएब समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर के जेल भेज दिया था। बता दें सदफ़ को प्रदर्शन स्थल “परिवर्तन चौक” और शोएब को अमीनाबाद स्थित उनके घर से गिरफ़्तार किया गया। दीपक की गिरफ़्तारी प्रदर्शन के दूसरे दिन 20 दिसम्बर को हुई थी। पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक होने व अभद्रता करने के आरोप भी लगे थे।

इन दोनों प्रदर्शनकारियों पर संगीन धाराओं 147 (उपद्रव करना), 148 (घातक हथियार से लैस दंगाई) 149 (यदि किसी गैरकानूनी सभा के किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है, तो ऐसी सभा का हर दूसरा सदस्य अपराध का दोषी होगा), 152 (दंगा आदि को दबाने पर लोक सेवक पर हमला या बाधा डालना), 307(हत्या का प्रयास), 323(जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग), 506(आपराधिक धमकी), 332(लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 353 (एक लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल का हमला या उपयोग), 188(लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) 435(सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा), 436(गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा), 120-बी(आपराधिक षड्यंत्र), 427 (कुचेष्टा जिससे पचास या उससे अधिक रुपए का नुकसान हो) और भारतीय दंड संख्या धारा 3 एवं 4 सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान निवारण अधिनियम के तहत हज़रतगंज थाने में मुक़दमा (600/2019) दर्ज हुआ।

लेकिन अदालत से प्रदर्शन में गिरफ़्तार सभी प्रदर्शनकारियों को एक-एक कर के ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था। सदफ़ को 04 जनवरी 2000, दीपक को 07 जनवरी 2020 और अधिवक्ता शोएब को 15 जनवरी को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।
 
ये भी पढ़ें: यूपी जल निगम: 4 महीने से सैलरी नहीं, डेढ़ साल से रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन नहीं, अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे कर्मचारी

लेकिन एक बार फ़िर प्रदेश सरकार ने ज़िला अदालत में अर्ज़ी देकर कहा था कि इन तीनों प्रदर्शनकारियों द्वारा ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। इसलिए इनकी ज़मानत को रद्द करके इनको दोबारा जेल भेजा जाये।

सरकार का तर्क था कि सदफ़ 17 व 24 जनवरी, 2020, दीपक और शोएब ने 30 जनवरी को लखनऊ के घंटाघर पर सीएए के विरुद्ध हो रहे प्रदर्शन में हिस्सा लिया। जबकि शहर में धारा 144 लागू थी। सरकार के अनुसार इन प्रदर्शनकारियों ने “अवैध विरोध प्रदर्शन” में भाग लिया और वहाँ मौजूद भीड़ को उकसाया। जिसके लिए इन लोगों पर ठाकुरगंज थाने में मुक़दमा भी दर्ज किया गया था।

अदालत से सरकार ने कहा कि यह लोग आपराधिक मामले में शामिल हुए जबकि, जनवरी 2020 में इनको इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह किसी भी आपराधिक अपराध में शामिल नहीं होंगे। इसलिए, इनकी ज़मानत को रद्द किया जाए।
 
ये भी पढ़ें: EXCLUSIVE :  यूपी में जानलेवा बुखार का वैरिएंट ही नहीं समझ पा रहे डॉक्टर, तीन दिन में हो रहे मल्टी आर्गन फेल्योर!

जबकि प्रदर्शनकारियों ने अपने बचाव में कहा है कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने  यह भी कहा कि भारत एक “लोकतांत्रिक” देश है, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का प्रत्येक नागरिक को “संवैधानिक” अधिकार है। 

प्रदर्शनकारियों द्वारा अदालत में यह तर्क भी पेश किया गया कि  केवल एक मामला दर्ज होने से यह नहीं कहा जा सकता है कि किसी व्यक्ति ने ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, विशेषकर कि जब मामले की जांच होनी भी अभी बाक़ी है।

दोनों पक्षों की बहस के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने प्रदर्शनकरियों को राहत देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर “ज़मानत रद्द” करने के आवेदन को ख़ारिज कर दिया। 

दीपक के वकील जलज गुप्ता ने बताया कि उन्होंने बहस के दौरान कहा कि किसी भी धरने-प्रदर्शन में शामिल होना और सरकार की नीतियों का विरोध करना “व्यक्तिगत स्वतंत्रता” का मसला है और यह प्रत्येक नागरिक का “लोकतांत्रिक अधिकार” है।

ये भी पढ़ें: बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में एमपी पहले और यूपी दूसरे स्थान परः एनसीआरबी

रिहाई मंच के अध्यक्ष शोएब का कहना है कि ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी देकर सरकार ने यह साबित कर दिया की वह अपने विरोधियों को हमेशा जेल में रखना चाहती है। ताकि वह “लोकतांत्रिक” ढंग से भी उसकी ग़लत नीतियों का विरोध न कर सकें। अधिवक्ता शोएब ने आगे कहा कि अदालत ने सरकार की अर्ज़ी ख़ारिज करके “लोकतंत्र” में नागरिकों का विश्वास बढ़ाया है।

कांग्रेसी नेता सदफ़ ने भी अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय संयोजक सदफ़ का कहना है कि ऐसे फ़ैसलों से आंदोलनों में भाग लेने वाले नागरिकों को शक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले के बाद उम्मीद की जाती है कि प्रदर्शनकारियों पर सरकार द्वारा हो रहा दमन ख़त्म होगा।

अधिवक्ता पीयूष मिश्रा ने बताया कि सरकार की प्रदर्शनकारियों ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय से ख़ारिज किया गया। सदफ़ का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता शीरन अल्वी, दीपक का पीयूष मिश्रा व जलज गुप्ता और शोएब का जमाल सईद सिद्दीक़ी ने किया।
 
ये भी पढ़ें: किसानों का मिशन यूपी तेज, चंपारण से वाराणसी तक 2 अक्टूबर को निकलेगी 'पदयात्रा'

UttarPradesh
CAA
NRC CAA protest
Sadaf Jafar
Deepak Mishra
Mohammad Shoaib
Yogi Adityanath
BJP
Kabir

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License