NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
सीएए विरोध : दिल्ली में दिख रही है विश्वविद्यालयों प्रशासनों की 'हिपोक्रिसी'
“यह कैंपस स्पेस के भीतर असंतोष को रोकने का एक प्रयास है। विश्वविद्यालय, भाजपा सरकार के तहत, केवल उन विचारों के प्रचार- प्रसार की अनुमति देते हैं जो उनके कथन के अनुकूल हों"।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Jan 2020
Ambedkar University

विश्वविद्यालय विचारों के आदान-प्रदान का केंद्र होते  हैं। मोदी सरकार के नए भारत में लगत है यह विचार की जगह नहीं है , खासकर अगर यह विचार उनकी सरकार के कामों या उनके नीति के खिलाफ हो।  

इसे दिल्ली के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों - दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (एसआरसीसी) और अंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) के प्रशासन के बाद एक मानक के रूप में देखा जा सकता है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए),एनआरसी  और एनपीआर को लेकर एक चर्चा होनी थी। जिसे प्रशासन ने नहीं होने दिया।

पहले, SRCC के प्रिंसिपल ने 23 जनवरी को " असम क्यों विरोध कर रहा है?"इस  पर एक चर्चा रद्द कर दी , वो भी कार्यक्रम से केवल एक घंटे पहले ऐसा किया। इस कर्यक्रम का आयोजन उत्तरपूर्व के छात्रों संगठन ने किया था। उन्होंने  एक बयान में आरोप लगाया कि उन्हें "कैंपस में हिंसा होने की संभावना के कारण उन्हें कार्यक्रम नहीं करने दिया गया।इसी के कारण चर्चा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई"।

“हमें यह भी बताया गया कि हमारे पैनल में कोई संतुलन नहीं था और हमारे सभी वक्ताओं एक ही विचार के समर्थक थे।  उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस कार्यक्रम को बाद में आयोजित किया जाए और कहा कि इस तरह के वातावरण में ये कार्यक्रम करना नासमझी है।

इस घटना को लेकर शुक्रवार को छात्रों ने  SRCC के बहार प्रदर्शन किया। इसमें अन्य कॉलेज के छात्रों ने भी भागीदारी की सभी ने प्रशासन के इस कदम की निंदा की।

इससे पहले, एक अन्य विश्वविद्यालय के प्रशासन, एयूडी ने विवादास्पद अधिनियम पर एक पैनल चर्चा के लिए कश्मीरी गेट कैंपस में सीपीएम नेता प्रकाश करात को प्रवेश देने से इनकार कर दिया । विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय राजधानी में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लागू आदर्श आचार संहिता का हवाला दिया। परिणामस्वरूप, करात ने परिसर के गेट के बाहर से सभा को संबोधित किया।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), कार्यक्रम के आयोजकों ने एक बयान में कहा ," हकीकत में घटना किसी भी संहिता का उल्लंघन नहीं किया गया था   हमारे वक्ताओं में से कोई भी मंत्री या आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार नहीं थे,। छात्रसंघ ने भी AUD प्रशासन के नियमों को "अलोकतांत्रिक" और "मनमाना" कहा।

हालाँकि, ऐसा नहीं था कि 'सभी कैंपस इतने 'अलोकतांत्रिक' हैं. दक्षिणी दिल्ली के राम लाल आनंद कॉलेज का प्रशासन ने  इस तरह की चर्चा की अनुमति दी। शायद इन्हे अभी देश के वतावरण की जानकारी नहीं लगती क्योंकि इन्होंने 17 जनवरी को कॉलेज के छात्रसंघ द्वारा "सीएए-एनआरसी: मिथकों और तथ्यों" नामक एक चर्चा का आयोजन होने दिया था।  जिसमें संसद के पूर्व सदस्य और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता बलबीर पुंज ने छात्रों को संबोधित किया।

यदि यह पर्याप्त नहीं है, तो अब प्रयागराज में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू) द्वारा सीएए को लकेर बने असमंजस को खत्म करने के लिए सीएए टू 'फॉग क्लियर के नाम से तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है।

आउटलुक ने विश्वविद्यालय के कुलपति कामेश्वर नाथ सिंह के हवाले से कहा कि यह नागरिकता देने के लिए एक अधिनियम हैन की लेने वाला।  आगे वो कहते है कि “ हम चाहते हैं कि सरकार और संसद की मंशा लोगों तक विश्वसनीय और विश्वसनीय तरीके से पहुंचे। इसके अलावा, हम भ्रांतियों और उसके आस-पास के दोषों को ख़त्म करना चाहते हैं।  

आचार संहिता के बावजूद दिल्ली के आरएलए  में कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन छात्रों ने ठीक नहीं किया। जिन्होंने पुंज द्वारा कही गई बातों  में कुछ गलतियां और 'सांप्रदायिक रूप से की गई टिप्पणी की थी।

छात्रों द्वारा जारी बयान को पढ़ें, "हम RLAC के छात्र 17 जनवरी को आयोजित सेमिनार के दौरान स्पीकर द्वारा दिए गए बयानों की निंदा करते हैं ... उन्होंने जो बयान दिए वे असंवेदनशील, इस्लामोफोबिक थे, और छात्र समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाते हैं।"

आरएलए के छात्रों ने कहा कि उन्हें हाल ही में कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से  धमकी मिल रही है।

छात्रों ने रामलाल आनंद, अंबेडकर विश्वविद्यालय और एसआरसीसी के प्रशासनों द्वारा दिए गए इन दोहरे निर्देशों को प्रशासन की 'हिपोक्रिसी' क़रार दिया है। 

इन सभी घटनाओं पर एसएफआई के दिल्ली अध्यक्ष सुमित कटारिया ने इसे " विश्वविद्यालय के विचार पर हमला कहा, जहां विचारों का खुला आदान-प्रदान सुरक्षित और संवृद्ध होना चाहिए।"

कटारिया ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, “यह कैंपस स्पेस के भीतर असंतोष को रोकने का एक प्रयास है। विश्वविद्यालय, भाजपा सरकार के तहत, केवल उन विचारों के प्रचार-प्रसार की अनुमति देते हैं जो उनके कथन के अनुकूल हों। इस पूरे घटनाक्रम में यही दिख रहा है कि छात्रों को सीएए, एनआरसी, एनपीआर पर बोलने से रोका जा रहा है।"

विवादास्पद अधिनियम के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे है। इसमें लोगों की भारी  भागीदारी देखी जा रही हैं। विशेषकर महिलाओं की भागीदारी सराहनीय हैं। अधिनियम को "असंवैधानिक" कहते हुए, प्रदर्शनकारियों ने सीएए को ख़त्म करने और एनआरसी के लागू होने की आशंका को भी ख़त्म करने के मांग की है।

CAA
NRC
Protest against CAA
Protest against NRC
Hipocrisy
University
Delhi University
JNU
Jamia Milia Islamia
ambedkar university

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

बिहारः विश्वविद्यालयों-कॉलेजों के 25 हज़ार कर्मियों को चार माह से नहीं मिला वेतन, करेंगे आंदोलन

डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License