NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
CITU, AIKS, AIAWU का जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए संयुक्त अभियान शुरू
सीआईटीयू के महासचिव तपन सेन ने कहा कि ये संयुक्त आंदोलन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के 'सभी लोगों के लिए नौकरी' स्कीम की मांग करता है।
पृथ्वीराज रूपावत
13 Jun 2020
CITU, AIKS, AIAWU का जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए संयुक्त अभियान शुरू

COVID-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई कॉरपोरेट-समर्थक और किसान-विरोधी, श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस), सेंटर ऑफ ऑल इंडिया ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) ऑल इंडिया एग्रिकल्चरल वर्कर्स यूनियन (एआईएडब्ल्यूयू) ने संयुक्त रूप से 23 जुलाई और 9 अगस्त (भारत छोड़ो दिवस) के मौके पर बड़े आंदोलन के लिए देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है।

शुक्रवार 12 जून को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एआईकेएस के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि 10 जून को देश भर के लाखों किसानों ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों की प्रतियां जला दीं। मोल्लाह ने कहा ये अध्यादेश - किसानों के उत्पादन का व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020, क़ीमत का आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन “के परिणामस्वरूप किसानों पर आधारित कृषि का अंत होगा और देश में कॉरपोरेट नियंत्रित कृषि पनपेगा।”

लॉकडाउन के दौरान किसानों को फसल कटाई, फसल उपज को ले जाने के लिए परिवहन, फसल के नुकसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित कई समस्याओं का ज़िक्र करते हुए मोल्लाह ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार की नई कृषि संबंधी नीतियों से किसानों की रीढ़ टूट जाएगी।

सीआईटीयू, एआईकेएस और एआईएडब्ल्यूयू यूनियनों ने कहा कि उनके सदस्य 23 जुलाई को सभी राज्यों में संयुक्त रूप से ग्रामीण स्तर और सब डिविजनल स्तर पर विरोध सभाओं के लिए प्रचार करेंगे। इन यूनियनों ने 9 अगस्त या भारत छोड़ो दिवस के मौके पर एक बड़े आंदोलन में अपने आंदोलन को विकसित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।

सीआईटीयू के महासचिव तपन सेन ने कहा, “श्रमिक, किसान और कृषि श्रमिक देश में धन के वास्तविक उत्पादक हैं। चूंकि इन वर्गों के लोगों को सरकार के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है ऐसे में यूनियन कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों का विरोध, प्रतिरोध, लोगों को एकजुट करने और मुकाबला करने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का आत्म निर्भर भारत पैकेज कॉरपोरेट के लिए है जो भविष्य में अर्थव्यवस्था को केवल तबाह करेगा।

सेन ने कहा कि संयुक्त आंदोलन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के 'सभी लोगों के लिए' नौकरियों की मांग करता है।

एआईएडब्ल्यूयू के महासचिव बी. वेंकट ने कहा कि कृषि श्रमिकों के बीच वर्तमान संकट कार्य, भोजन, प्रवास और जातिगत भेदभाव से संबंधित है। वेंकट ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों का शहर से ग्रामीण क्षेत्र की तरफ पलायन करने से अब लगभग पांच करोड़ अधिक श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम तलाश रहे हैं जिससे कृषि श्रमिकों की कुल संख्या बढ़कर 19 करोड़ हो गई है। इनमें से लगभग 90% अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। ग्रामीण भारत में प्रवासी श्रमिकों के जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के उदाहरण हैं जो ज़मींदारों द्वारा कमज़ोर समुदायों के शोषण का संकेत देते हैं।” कृषि श्रमिकों की बढ़ती संख्या को काम देने के लिए उन्होंने मांग की है कि सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के लिए अतिरिक्त 1 लाख करोड़ रुपये की मंज़ूरी देनी चाहिए।

यूनियनें यह भी मांग कर रही हैं कि सरकार को सभी लोगों के लिए निशुल्क COVID-19 जांच और इलाज उपलब्ध कराना चाहिए।

कृषि संकट को लेकर चर्चा करते हुए मोल्लाह ने कहा कि ऋणों के अधिक बोझ और फसल के नुकसान के कारण लॉकडाउन की अवधि में 250 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।

CITU
AIAWU
AIKS
Agriculture Ordinances
Essential Services Act
Corporate Agriculture
Jobs for ALL
COVID-19
Workers
Atma Nirbhar Bharat

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License